Submit your post

Follow Us

क्या है जादुई इलाज 'प्लाज़्मा', जो 3-4 दिन में कोरोना के मरीज़ को ठीक कर देगा?

कोरोना के संक्रमण से बचाव की जुगत चल रही है. तो एकतरफ इलाज की भी. ऐसे में अब कोरोना मरीज़ों का इलाज करने की नयी टेकनीक सामने आयी है. प्लाज़्मा ट्रीटमेंट. ICMR ने परमिशन भी दे दी है. कहा है कि जो कोरोना के मरीज़ हैं, उनका इलाज किया जा सकता है. शुरुआती ख़बरों की मानिए तो 3-4 दिन में मरीज़ फ़िट. 

तो क्या है ये प्लाज़्मा ट्रीटमेंट का हिसाब-किताब? हम बतायेंगे आपको. 

सबसे बेसिक सवाल : प्लाज़्मा क्या है?

कभी कोई चोट चपेट खरोंच आयी होगी. या कोई घाव होगा. तो अगर आपने ध्यान से देखा हो तो जब ख़ून बहना रुक जाता है, तो उसके बाद थोड़ा पीला-सा पानी निकलता है. उसे ही प्लाज़्मा कहते हैं. प्लाज़्मा हमारे शरीर के ख़ून का ज़रूरी हिस्सा होता है, जो पूरे शरीर में पोषक चीज़ें और तमाम हार्मोन वग़ैरह ले जाता है. जब किसी आदमी को इंफ़ेक्शन होता है, तो उसके शरीर में इंफ़ेक्शन फैलाने वाले वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ़ एंटीबॉडी बनने लगती है. जो ये एंटीबॉडी उस इंफ़ेक्शन से लड़ती हैं, और शरीर को रोगमुक्त बनाती हैं. इम्यूनिटी बढ़ती है. इसीलिए ब्लड बैंकों में जैसे ख़ून का दान किया जाता है, वैसे प्लाज़्मा का भी दान किया जाता है. एक स्वस्थ आदमी के शरीर से आधे लीटर से 1 लीटर तक प्लाज़्मा लिया जा सकता है. ये अमाउंट व्यक्ति की उम्र और उसके वज़न जैसे फ़ैक्टरों पर निर्भर करता है. 

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपने लपेटे में ले लिया है. फोटो- AP
कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपने लपेटे में ले लिया है. फोटो- AP

प्लाज़्मा ट्रीटमेंट या प्लाज़्मा थेरपी क्या है?

कोरोनावायरस से संक्रमित जो लोग ठीक हो रहे हैं, उनके शरीर के प्लाज़्मा में कोरोनावायरस के खिलाफ़ एंटीबॉडी बन रही है. और ठीक हो जा रहे हैं, मतलब उनके शरीर में वायरस भी मौजूद नहीं है. थ्योरी है कि जो संक्रमण से बरी हो चुके हैं, वे प्लाज़्मा डोनेट कर सकते हैं. इन स्वस्थ हो चुके लोगों के प्लाज़्मा में कोरोनावायरस के खिलाफ़ बनी एंटीबॉडी मौजूद होंगी. अब इस प्लाज़्मा को कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति को ट्रान्स्फ़र किया जाएगा. ट्रान्स्फ़र के बाद ये प्लाज़्मा उनके शरीर में वायरस से लड़ेगा और उन्हें रोगमुक्त करेगा. इस टेकनीक को passive immunisation कहते हैं. 

कितने लोगों का इलाज हो सकता है?

एक व्यक्ति से मिले प्लाज़्मा से कम से कम 2 और अधिक से अधिक 5 लोगों का इलाज किया जा सकता है. एक व्यक्ति के इलाज में 200-250 ml प्लाज़्मा लग सकता है. अंदेशा जताया जा रहा है कि ऐसे केसों में तेज़ी से व्यक्ति रीकवर कर सकता है. कुछ शोध दावा करते हैं कि 3 से 7 दिनों के भीतर संक्रमित व्यक्ति पूरी तरह से ठीक हो सकता है.

दुनिया भर में कोरोना से अब तक 10 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. फोटो: PTI
दुनिया भर में कोरोना से अब तक 10 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. फोटो: PTI

रीसर्च क्या कहती है?

दो देशों के रीसर्च हैं. अमरीका और चीन. दोनों ही देशों ने कुछ मरीज़ों को प्लाज़्मा ट्रीटमेंट दिया. 1-3 दिनों के भीतर ही उनकी हालत में बिलकुल सुधार हो गए. लेकिन ये रीसर्च के स्तर पर ही था. बड़े लेवल पर इसे इलाज के रूप में इन देशों में शामिल नहीं किया गया. लेकिन इन मरीज़ों की हालत प्लाज़्मा ट्रीटमेंट दिए जाने के पहले तक बेहद ख़राब थी. कुछ तो वेंटिलेटर पर थे. लेकिन प्लाज़्मा दिए जाने के कुछ ही समय के भीतर उनकी हालत में सुधार होने लगा. सबसे ज़रूरी बात. इन मरीज़ों में प्लाज़्मा ट्रीटमेंट का कोई साइडइफ़ेक्ट भी नहीं देखा गया.

क्या पहले कभी प्लाज़्मा ट्रीटमेंट को इस्तेमाल में लाया गया है?

सुधिजनों को याद होगा कि कुछेक सालों पहले ईबोला नाम का वायरस धरती के कई हिस्सों में फैला था. ये भी वायरस से फैलने वाली बीमारी थी, जिसका कोई इलाज नहीं निकाला जा सका. लेकिन WHO ने कहा कि मरीज़ों को प्लाज़्मा ट्रीटमेंट दिया जा सकता है. यही तरीक़ा इस्तेमाल में लाया गया. एक हद तक सफलता मिली. लेकिन कुल मिलाकर तीर-तुक्का वाला मामला है. जल्दी इलाज नहीं मिलता, तो ये ट्रीटमेंट इस्तेमाल में लाए जाने की बात होती है. 

अपने यहां क्या सीन है?

ICMR ने कहा है कि प्लाज़्मा ट्रीटमेंट शुरू कर सकते हैं. मतलब अप्रूवल दे दिया. AIIMS के निदेशक ने भी कहा है कि प्लाज़्मा ट्रीटमेंट दिया जा सकता है.

चिकित्सा संस्थानों से कहा है कि प्लाज़्मा ट्रीटमेंट में ट्रायल के लिए Drug Controller of India में रजिस्ट्रेशन करायें. Clinical Trial Ethics Committee में भी रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. जब यहां से प्रोटोकॉल पास हो जायेंगे, तो बड़े स्केल पर किया जा सकेगा. सबसे पहले बारी आएगी गम्भीर रूप से बीमार लोगों की.

पेच क्या है?

जो लोग कभी ब्लड बैंक या अस्पताल में खून डोनेट करने गए होंगे, तो उन्हें पता होगा कि बहुत सारे सवाल पूछे जाते हैं. पूछा जाता है कि बीते कुछेक महीने में कहीं आप गम्भीर रूप से बीमार तो नहीं पड़े हैं. या आपको किसी रोग की दवा रोज़ाना तो नहीं चल रही है. ऐसे सवाल इसलिए क्योंकि ऐसी हालत में ब्लड या प्लाज़्मा डोनेट करने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य और जिसको डोनेट किया जा रहा हो, उस व्यक्ति के भी स्वास्थ्य पर उलटा असर पड़ सकता है. लेने के देने पड़ सकते हैं. ऐसे में कोरोनावायरस से हाल-फ़िलहाल फ़ारिग़ हुए व्यक्ति से यदि प्लाज़्मा लिया जाता है, तो ये ख़तरा है कि डोनर को दिक़्क़त हो सकती है. और रिसीवर वाली रीसर्च तो हमने आपको बता ही दी. 

कुल मिलाकर मामला बस थोड़े से रीसर्च के साथ है. जल्द से जल्द ठीक करने की जुगत है. ताकि और ज़रूरतमंद लोगों के लिए अस्पतालों के बिस्तर ख़ाली मिल सकें. 

 

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

मधुबाला को खटका लगा हुआ था इस हीरोइन को दिलीप कुमार के साथ देखकर

एक्ट्रेस निम्मी के गुज़र जाने पर उनको याद करते हुए उनकी ज़िंदगी के कुछ किस्से

90000 डॉलर का कर्ज़ा उतारकर प्राइवेट जेट खरीद लिया था इस 'गैंबलर' ने

उस अमेरिकी सिंगर की अजीब दास्तां, जो बात करने के बजाए गाने में ज़्यादा कंफर्टेबल महसूस करता था

YES Bank शुरू करने वाले राणा कपूर कौन हैं, जिन्होंने नोटबंदी को 'मास्टरस्ट्रोक' बताया था

यस बैंक डूब रहा है.

सात साल पहले केजरीवाल ने वो बात कही थी जो आज वो ख़ुद नहीं सुनना चाहते

बरसों पुरानी इस बात की वजह से सोशल मीडिया पर घेर लिए गए हैं.

क्या भारत सरकार से पूछे बिना पाकिस्तान चली गई इंडियन कबड्डी टीम?

अब ढेरों खेल-तमाशा हो रहा है.

बजट का कितना ज्ञान है, ये क्विज़ खेलकर चेक कर लो!

कितना नंबर पाया, बताते हुए जाना. #Budget2020

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.