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दिल्ली पुलिस जिस 'पिंजरा तोड़' को दंगे का ज़िम्मेदार बता रही है, उसकी कहानी क्या है?

दक्षिणी-पूर्वी दिल्ली के इलाक़ों में CAA और NRC को लेकर हुए प्रदर्शनों और दंगों के बाद एक नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. पिंजरा तोड़. दिल्ली पुलिस का आरोप है कि पिंज़रा तोड़ ने दिल्ली दंगों में सुनियोजित तरीक़े से हिंसा को भड़काया है. इस संबंध में दिल्ली पुलिस ने पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ताओं- नताशा नरवल और देवांगना कलिता को 24 मई को गिरफ़्तार भी किया था. 

और अब पिंजरा तोड़ की इन कार्यकर्ताओं ने जब कोर्ट में अर्ज़ी लगाई कि दिल्ली दंगों की पूरी जांच कोर्ट की देख-रेख में हो, तो पटियाला हाउस कोर्ट ने अर्ज़ी ख़ारिज कर दी. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक़, देवांगना और नताशा के वकीलों- अदित पुजारी और तुषारिका मट्टू ने कोर्ट में इस मामले में अर्ज़ी लगाई थी. कोर्ट की निगरानी में जांच का कारण पिंजरातोड़ ने अर्ज़ी में गिनाया. कहा,

“दिल्ली पुलिस द्वारा की जा रही जांच फ़ेयर नहीं है. ऐसा संभव है कि दंगा भड़काने वाले लोग जांच एजेंसी के साथ मिले हुए हों.”

ये भी कहा कि दंगों के दौरान जांच एजेंसी और पत्रकारों ने जाफ़राबाद के प्रोटेस्ट साइट के बहुत सारे वीडियो बनाए थे. लेकिन पुलिस जान-बूझकर इन महत्त्वपूर्ण सबूतों को छिपा रही है. इसके आगे कहा,

“22 फ़रवरी से लेकर 26 फ़रवरी के बीच CAA के समर्थकों और कई नेताओं द्वारा नए कानून के समर्थन में रैलियां की गईं और भड़काऊ भाषण दिए गए, लेकिन लगता है कि पुलिस ने जान-बूझकर इन चीज़ों की जांच करने में असफलता दिखाई है.”

पिंजरा तोड़ ने कोर्ट से ये भी कहा कि CrPC के सेक्शन 91 का उपयोग करते हुए अदालत CAA का समर्थन करने वाले नेताओं के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, उनके whatsapp चैट के रिकॉर्ड और ट्रकों की आवाजाही की वीडियोग्राफ़ी का साक्ष्य भी पुलिस से मांग सकती है.

लेकिन इन बातों पर कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने इनकार कर दिया. एडिशनल सेशंस जज धर्मेंदर राणा ने कहा,

“ये आदेश देने के पहले हमें ये मानना होगा कि CAA का समर्थन करने वाले नेता भी हैं. फिर कोर्ट को उन नेताओं के नाम का अनुमान लगाना होगा. उनके फ़ोन नम्बर और दूसरी सूचनाओं का पता करना होगा. और फिर इस सारे अनुमान के आधार पर जांच एजेंसी को कहना होगा कि वो इतनी बड़ी संख्या में जुटाए गए आंकड़े इकट्ठा करे, और फिर उनकी पड़ताल करे.”

इसके अलावा कोर्ट ने अपनी निगरानी में जांच के सवाल पर कहा,

“जांच एजेंसी पर पहले से ही बहुत भार है. और जांच की निगरानी करने के नाम पर उन पर और भार दे दें, तो इसका कोई आधार नहीं मिलता है.”

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी अपना काम कर रही हैं. जांच अधिकारी पत्रकारों और दूसरे लोगों से वीडियो फ़ुटेज जुटा रहे हैं. कोर्ट ने कहा कि किसी घटना की जांच करना बहुत जटिल काम होता है. ये ऐसा है कि आप सीप के अंदर मोती ढूंढने हर बार समुद्र में कूदें. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा,

“मेरे ख़याल से न तो कोर्ट और न ही आरोपी, जांच एजेंसी या जांच अधिकारी को जांच करने का तरीक़ा बता सकते हैं.”

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपी पक्ष को जांच एजेंसी द्वारा की जा रही केस की जांच पर कोई संदेह है, तो उन्हें कोर्ट में अपना संदेह स्पष्ट करने के लिए उन्हें सबूत मुहैया कराने होंगे. उन्होंने ऐसा नहीं किया. 

क्या दिल्ली पुलिस ने निजता का उल्लंघन किया?

पिंजरा तोड़ एक्टिविस्ट देवांगना कलिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले में याचिका दायर की. याचिका में देवांगना का कहना था कि उन पर लगाए जा रहे आरोपों को दिल्ली पुलिस और बाक़ी जांच एजेंसियां जनता के सामने न रखें. इस पर दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में 15 जुलाई को अपना जवाब दाख़िल किया. कहा कि आरोपी देवांगना पहले से सोशल मीडिया पर ख़ुद के लिए सहानुभूति बटोर रही हैं और मीडिया ट्रायल कर रही हैं. दिल्ली पुलिस के इस स्टैंड पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नाराज़गी ज़ाहिर की. दिल्ली पुलिस से कहा कि आपका स्टैंड अस्वीकार्य है. लेकिन ये भी कहा कि प्रेस रिलीज़ जारी करने से कोई भी किसी को रोक नहीं सकता है. इस मामले में कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा है. 

क्या है मामला?

लोकसभा और राज्यसभा में नागरिकता संशोधन क़ानून यानी CAA को पास किए जाने के बाद दिल्ली के कई इलाक़ों में प्रदर्शन हुए, तो दिल्ली के ही जाफ़राबाद इलाक़े में भी प्रदर्शन हो रहे थे. 23 फ़रवरी का दिन. भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने मौजपुर चौक के पास एक भाषण दिया. भाषण के पहले बाक़ायदा ट्विटर पर लिखकर कपिल मिश्रा ने लोगों को जुटाया था.

Jafrabad Kapil Mishra Violence
दिल्ली के जाफराबाद इलाके में हुई हिंसा. और दाहिनी ओर मौजपुर में अपनी बात रखते कपिल मिश्रा.

इस भाषण के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारी कपिल मिश्रा के बग़ल में खड़े थे. कपिल मिश्रा ने खुले शब्दों में प्रोटेस्ट ख़त्म करने के लिए कहा. पुलिस अधिकारियों से कहा कि अगर प्रदर्शनकारी नहीं हटते हैं, तो हम आपकी भी नहीं सुनेंगे. दी. इस घटना के कुछ देर बाद ही हिंसा शुरू हो गयी. दो समुदायों के बीच, जो दिल्ली के आसपास के कई मोहल्लों तक पहुंच गयी. 

पूरी कहानी और FIR

नताशा नरवल और देवांगना कलिता ने साल 2015 में साथ पिंजरा तोड़ की नींव रखी. मक़सद था दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के गर्ल्स हॉस्टलों में कर्फ़्यू की टाइमिंग को लेकर. कैसा कर्फ़्यू? कहा जाता था कि लड़कों के हॉस्टलों में नियम बहुत सहज हैं. वे देर रात को कभी भी हॉस्टल में आ या बाहर जा सकते हैं. लेकिन लड़कियों के हॉस्टलों में कर्फ़्यू जैसी स्थिति है. उनके हॉस्टल में आने और बाहर निकलने के समय तय हैं. इन हॉस्टलों की पिंजरों से तुलना की गयी. और आंदोलन बना ‘पिंजरा तोड़’.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से पढ़ी देवांगना फ़िलहाल जेएनयू के सेंटर फ़ॉर विमन स्टडीज़ से एम.फ़िल. कर रही हैं. और हिंदू कॉलेज से पढ़ी नताशा जेएनयू के ही सेंटर फ़ॉर हिस्टॉरिकल स्टडीज़ से पीएचडी कर रही हैं.

दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर इलाकों में दंगाइयों ने काफी आगजनी और पथराव किया था. (PTI)
दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर इलाकों में दंगाइयों ने काफी आगजनी और पथराव किया था. (PTI)

जाफ़राबाद-मौजपुर में हुई हिंसा के भी काफ़ी पहले 20 दिसम्बर को दिल्ली गेट पर भी हिंसा हुई थी. इसके अगले दिन यानी 21 दिसम्बर को दरियागंज थाने में FIR (सं : 250/19) दर्ज कराई गयी. IPC की धारा 147, 148, 149, 153A(2), 436, 427, 323, 325, 332, 186 और 120(B) के तहत. देवांगना कलिता इस FIR में नामज़द थीं.

23-24 फ़रवरी से शुरू हुई हिंसा के बाद एक FIR (सं 48/20) जाफ़राबाद थाने में 24 फ़रवरी को दर्ज कराई गयी. IPC की धाराएं 186, 188, 353, 283, 341, 109, 147 और 34 लगायी गयीं. इसमें नताशा और देवांगना दोनों का ही नाम था. फ़रवरी में ही जाफ़राबाद में एक और FIR दर्ज की गयी. इसम FIR में भी देवांगना कलिता का नाम आया.

इसके बाद 6 मार्च को क्राइम ब्रांच द्वारा FIR (सं. 59/20) IPC की धारा 120B, 124A, 302, 307, 353, 186, 212, 395, 487, 435, 436, 452, 109, 114, 147, 148, 124A, 153A और 34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 26 के तहत दर्ज की गयी.

फिर हुई गिरफ़्तारी

लॉकडाउन के दौरान इस मामले की जांच करते हुए दिल्ली पुलिस ने 24 मई को पिंजरा तोड़ के सदस्यों- नताशा और देवांगना को गिरफ़्तार किया. FIR दर्ज हुई. IPC की धारा 186 (यानी सरकारी काम में बाधा पहुंचाने) और धारा 353 (पब्लिक सरवेंट को काम करने से रोकने के लिए क्रिमिनल फ़ोर्स का इस्तेमाल करना या हमला करना) लगाई गयी. 

मामले के अगले दिन दिल्ली कोर्ट ने उन्हें ज़मानत दे दी. ज़मानत देते हुए कोर्ट ने साफ़ कहा कि पिंजरा तोड़ की एक्टिविस्टों के खिलाफ़ लगाई गयी धारा 353 बहुत दिन चल नहीं सकती. क्योंकि देवांगना और नताशा केवल NRC और CAA के विरोध में धरना दे रही थीं. कोर्ट ने कहा कि वो पढ़ी-लिखी हैं और समाज में उनकी जड़ें गहरी हैं. वो पुलिस की जांच में सहयोग करेंगी.

दिल्ली हाईकोर्ट में आरोप जनता के सामने न खोलने की याचिका देवांगना कलिता की ओर से दायर की गयी थी.
दिल्ली हाईकोर्ट में आरोप जनता के सामने न खोलने की याचिका देवांगना कलिता की ओर से दायर की गयी थी.

लेकिन 25 मई को की जा रही इस सुनवाई के समय दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी कुलदीप सिंह ने कोर्ट से पूछताछ करने के लिए 14 दिन की रिमांड मांगी. कोर्ट ने दो दिन की रिमांड दी. 

रिमांड पूरी हुई. पुलिस ने और वक़्त मांगा. ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने 11 जून तक की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. और इसके साथ ही मामले की तफ़तीश स्पेशल सेल के हाथ में आयी. ख़बरों के मुताबिक़, स्पेशल सेल ने देवांगना और नताशा पर UAPA का चार्ज भी लगा दिया. और तब से ही नताशा और देवांगना जेल में हैं.

पुलिस ने कहा, ‘प्रोटेस्ट ने ही भड़काया’

पिंजरा तोड़ की सदस्यों को हिरासत में लेने के बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अपनी चार्जशीट दाख़िल करना शुरू किया. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की ख़बर की मानें, तो दिल्ली पुलिस ने 3 जून को दायर की गयी अपनी चार्जशीट में कहा कि जाफ़राबाद मेट्रो के नीचे हुए एंटी-CAA प्रोटेस्ट में देशविरोधी भावनाओं को भड़काने का आरोप नताशा नरवल और देवांगना कलिता समेत 12 लोगों पर लगाया. पुलिस ने कहा कि नारे लगाए जा रहे थे, देशविरोधी भाषण दिए जा रहे थे. उन्होंने लोगों को भड़काया. लोगों में देशविरोधी भावना फैला रहे थे. और क्या कहा,

“जाफ़राबाद में CAA और NRC के खिलाफ़ दिए गए धरने की वजह से ही हिंसा फैली. जाफ़राबाद मेट्रो स्टेशन के पास भीड़ जमा थी. उन्होंने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के भारत दौरे के समय देश की छवि बिगाड़ने और CAA को एक अन्तर्राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की नीयत से प्रोटेस्ट शुरू किया. विरोध प्रदर्शन पर बैठे लोगों की मंशा थी कि दो समुदाय एक दूसरे के सामने आयें, और ऐसा ही हुआ. दो समुदायों के बीच एक दूसरे के लिए ज़हर फैल चुका था.”

यानी पुलिस की चार्जशीट में CAA और NRC का विरोध करना एक रणनीति की तरह देखा गया. सम्प्रदायों के बीच संघर्ष कराने की रणनीति के तहत.

इसके अलावा न्यूज़ वेबसाइट ‘न्यूज़क्लिक’ पर कोर्टरूम में हुई बहस का भी ब्योरा उपलब्ध है. शाहदरा कोर्ट में 14 जुलाई को पिंजरा तोड़ की सदस्यों की ज़मानत की अर्ज़ी पर सुनवाई हो रही थी. सरकारी वक़ील ने कहा कि इस मामले में गिरफ़्तार किए गए एक आरोपी ने पूछताछ में कहा था कि उसे नरवल और कलिता ने हिंसा में शामिल होने के लिए भड़काया था. इस पर पिंजरा तोड़ की सदस्यों के वक़ील अदित पुजारी ने आपत्ति दर्ज की. कहा कि ये आरोप बेबुनियाद हैं. पुलिस अपनी जांच पूरी कर चुकी है. चार्जशीट दाख़िल की जा चुकी है. ऐसे में देवांगना और नताशा को ज़मानत दे दी जाए. लेकिन कोर्ट ने ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी.


लल्लनटॉप वीडियो : कपिल मिश्रा ने दिल्ली दंगे के मामले में अरेस्ट हुए खालिद सैफ़ी के साथ फोटो डाली, लोगों ने लपेट दिया

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