Submit your post

Follow Us

दिल्ली दंगों में जिस PFI का नाम लिया जा रहा है, उसकी पूरी कहानी देख लीजिए

एक हफ़्ते से भी ज़्यादा वक़्त बीत चुका है, जब देश के कई हिस्सों में नए नागरिकता क़ानून को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं. पूरे देश में 25 मौतों का आंकड़ा बन रहा है. यूपी का रुख करें. अकेले यूपी में 19 लोगों की मौत हो चुकी है. सबकुछ नागरिकता संशोधन क़ानून सामने आने के बाद.

अब जब यूपी में क़ानून-व्यवस्था को चाक-चौबंद करने की बात चल रही है, इसी समय प्रदेश के प्रशासन ने यूपी में तमाम हिंसा के लिए पॉपुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) नाम के संगठन को ज़िम्मेदार ठहराया. कहा कि PFI आतंकी गतिविधियों में लिप्त संगठन है. और कई अख़बारों में PFI से जुड़ी ख़बरें चलीं कि बीते 6 महीनों से संगठन ने यूपी में आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए बाक़ायदा ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया.

पुलिस ने PFI के उत्तर प्रदेश प्रमुख वसीम के साथ-साथ संगठन के 25 लोगों को गिरफ़्तार किया. यूपी में ही नहीं. पुलिस ने असम के प्रमुखों अमीनुल हक़ और मोहम्मद मुज़म्मिल हक़ को गिरफ़्तार किया. इसके बाद PFI ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया. इसमें PFI ने बताया कि पुलिस इन प्रदर्शनों को किसी षड्यंत्र का हिस्सा बताकर बदनाम कर रही है, साथ ही पुलिस PFI को भी बदनाम कर रही है.

यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने प्रेस में बयान दे दिया कि यूपी पुलिस के पास पर्याप्त सबूत हैं कि PFI एक आतंकी संगठन है. यूपी सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से मांग की है कि PFI पर बैन लगाया जाए.

इस सबके बीच बहुत सारे लोग ये जानना चाह रहे हैं कि PFI क्या है? क्या काम है इस संगठन का? क्यों इस संगठन का नाम बतौर एक आतंकी संगठन लिया जाने लगा है? और उन घटनाओं में PFI की असल जिम्मेदारी कितनी है?

कहां से हुई शुरुआत?

PFI का मूल कार्यक्षेत्र केरल रहा है. 1992 में अयोध्या में कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को ढहा दिया. इसके बाद 1993 में नेशनल डेवलपमेंट फ़्रंट (NDF) का गठन हुआ. NDF का भी कार्यक्षेत्र मूलरूप से केरल रहा. और काम क्या? अल्पसंख्यकों, ख़ासकर केरल के मुस्लिमों के सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित काम.

Freedom Parade
PFI में तब्दील हुए NDF ने लम्बे समय तक 15 अगस्त के दिन फ्रीडम परेड का आयोजन किया. तिरुवनंतपुरम में 2007 में आयोजित फ्रीडम परेड का एक दृश्य

ख़बरों के मुताबिक़ NDF ने सामाजिक और आर्थिक मुद्दों का दायरा बढ़ाकर मिशनरी के कामों तक ला दिया. मतलब, दूसरे धर्मों के बीच इस्लाम के संदेश को पहुंचाना. इसे ईसाई संगठनों के मिशनरी कार्य की तरह देखा गया. कहा गया कि NDF उग्र तरीक़े से धर्मांतरण को बढ़ावा दे रहा है. कुछ राजनीतिक संगठन NPF का नाम एक सांप्रदायिक संगठन की तरह लेने लगे.

साल 2002. केरल में कोझिकोड के मराड तट पर मुस्लिमों की भीड़ द्वारा 8 हिंदुओं की हत्या का मामला सामने आया. इस हिंसा की जांच के लिए तब की केरल सरकार ने एक कमिटी बनाई. जस्टिस टॉमस पी जोसेफ़ कमिटी ने अपनी इंक्वरी रिपोर्ट में लिखा कि केरल में काम कर रहे कई मुस्लिम संगठनों को इस घटना की पहले से जानकारी थी. इसमें NDF का भी नाम था. गिरफ़्तारी हुई. NDF ने कहा कि गिरफ़्तार हुए लोग उसके संगठन के सदस्य नहीं हैं. घटना की CBI जांच की मांग उठी, तो NDF ने कहा कि CBI जांच का स्वागत है.

Pfi Against Killing Of Rohingya Muslims In Burma
जब म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों की प्रताड़ना और हत्या का मामला सामने आया था, उस समय PFI ने केरल में एक विशाल रैली का आयोजन किया था. उसी रैली की एक तस्वीर

इस समय बीजेपी ने NDF पर पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI से जुड़े होने के आरोप लगाए. फ़ॉरेन से पैसे लेने के भी आरोप लगे. समय-समय पर NDF ने इन आरोपों को नकारा.

साल 2004 में साउथ इंडिया काउंसिल का गठन हुआ. इस काउंसिल में केरल के नेशनल डेवलपमेंट फ़्रंट, कर्नाटक के फ़ोरम फ़ॉर डिग्निटी और तमिलनाडु के मनिथ नीति पासरई ने भाग लिया. फ़ोकस मुस्लिम समुदाय के विकास और आरक्षण पर.

साल आया 2006. और लाइट में आया PFI. इन तीन बड़े संगठनों के विलय से मिलकर तैयार हुआ एक फ़ेडरेशन. साल 2009 में आंध्र प्रदेश, गोवा, राजस्थान, मणिपुर और पश्चिम बंगाल के एक-एक संगठनों का भी विलय PFI में किया गया. धीरे-धीरे संगठन बड़ा होता रहा. PFI के राष्ट्रीय सचिव अनीस के मुताबिक़, इस वक्त संगठन के 8 लाख से ज़्यादा सदस्य देश के कई राज्यों में हैं.

PFI के विकिपीडिया पेज पर जाने पर लिखा मिलता है कि ये एक चरमपंथी और इस्लामिक उग्रवादी संगठन है. इसके बारे में अनीस ने बताया कि विकिपीडिया पेज पर संगठन पर लगाए गए बहुत सारे आरोप तथ्यों की तरह लिख दिए गए हैं, जबकि उनका सच्चाई से दूर-दूर तक लेना-देना नहीं है.

संगठन से जुड़े लोग बताते हैं कि PFI का काम मुस्लिम समुदाय के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए काम करना है. इसके लिए PFI समय-समय पर वर्कशॉप और हेल्प प्रोग्राम आयोजित करवाता रहता है. इसके साथ ही बिहार समेत कई राज्यों में बाढ़ के दौरान PFI ने राहत कार्य को अंजाम दिया है.

ये तो सामाजिक काम हो गया. राजनीति में भी PFI का दख़ल है. Social Democratic Party of India (SDPI) एक राजनीतिक पार्टी है, जो PFI से जुड़ा हुआ है. इसके साथ ही SDPI Social Democratic Trade Union, PFI का एक मज़दूर संगठन है.

फिर क्यों हंगामा? फिर क्यों आरोप?

लम्बे समय से PFI पर प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (SIMI) का नया और बदला हुआ रूप होने के आरोप लगते रहे हैं. SIMI की शुरुआत 1977 में अलीगढ़ में हुई. नारा “भारत की आज़ादी”. कई छिटपुट घटनाओं में कई लोगों को जांच एजेंसियों ने गिरफ्तार किया. गिरफ्त में लिए गए लोग SIMI के सदस्य निकले.

साल 2001. अमेरिका में 11 सितंबर को हमले हुए. इस समय तक भारत में SIMI की बतौर आतंकी संगठन पहचान हो चुकी थी. अमेरिका में हुए हमलों के बाद भारत सरकार ने SIMI पर प्रतिबंध लगा दिया.

Pfi Popular Front Of India Flag
PFI का झंडा और निशान

2006 में PFI बना. SIMI पर बैन लगने के बाद इससे जुड़े कई कार्यकर्ता PFI में शामिल हो गए. PFI के नेशनल चेयरमैन अब्दुल रहमान एक समय SIMI के राष्ट्रीय सचिव रह चुके थे. साथ ही PFI की केरल यूनिट के कई कार्यकर्ता और सदस्य लम्बे समय SIMI के लिए काम करते रहे थे. इसे देखते हुए ये राय बनाना आसान हो गया कि PFI दरअसल SIMI का बदला हुआ रूप है. PFI ने लम्बे समय तक इन आरोपों को नकारा है.

गठन से लेकर अब तक PFI पर हथियार रखने, हत्या, अपहरण, हेट स्पीच देने, ज़बरन धर्म परिवर्तन कराने, आतंकी ट्रेनिंग कैम्प चलाने, देशविरोधी ताक़तों से चंदा लेने जैसे कई संगीन आरोप हैं. कहा गया कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई से भी PFI के लिंक हैं. PFI पर ये भी आरोप लगे कि केरल से जो युवा ISIS में शामिल होने देश से बाहर गए, उन्हें ग्रूम करने, मतलब तैयार करने का काम PFI ने किया, जिसके बाद वे लड़के आगे का रास्ता तय कर सके.

आरोपों की फ़ेहरिस्त देखिए. 2013 में केरल पुलिस ने दावा किया कि कन्नूर के नरथ में PFI हथियार बनाने का कैम्प चला रही थी. कैम्प से पुलिस ने PFI के 21 सदस्यों को गिरफ़्तार किया. कहा कि दो हाथ से बनाए हुए बम, बम बनाने के लिए कच्चा माल, तलवार और PFI के कुछ पैम्फ़्लेट मिले. पुलिस ने ये भी कहा कि मौक़े से एक डॉक्युमेंट भी मिले, जिसमें कई हस्तियों के नाम थे. पुलिस ने इसे एक “हिट लिस्ट” की तरह देखा.

लेकिन PFI ने इस मामले में सफ़ाई भी दी. गिरफ़्तार हुए लोगों के साथ-साथ PFI के नेताओं ने बयान दिया कि ये एक योग का ट्रेनिंग कैम्प था, जो PFI के हर सदस्य के व्यक्तित्व विकास के लिए ज़रूरी है. लेकिन पुलिस ने कहा कि जब गिरफ़्तार हुए लोगों से योग के बारे में पूछा गया, तो वे इस बारे में कुछ भी नहीं जानते थे.

NewMan college के प्रोफेसर टीजे जोसेफ़ ने एक बार अपने छात्रों से परीक्षा में मुहम्मद को लेकर सवाल पूछे, जिसका कई संगठनों ने विरोध किया. टीजे जोसेफ़ पर मुक़दमा दर्ज हुआ. वे जेल चले गए. ज़मानत पर बाहर आए. और बाहर आने के बाद टीजे जोसेफ़ पर हमला हुआ. हमले में उनका एक हाथ काटकर अलग कर दिया गया. 15 घंटे की सर्जरी हुई, जिसके बाद उनका हाथ उनके शरीर से दोबारा जोड़ा जा सका.

इस हमले के पीछे भी PFI का नाम सामने आया. PFI से जुड़े 37 लोग गिरफ़्तार किए गए. PFI ने हिंसा में हाथ होने से इनकार किया है, इस मामले की जांच अब भी जारी है. लेकिन टीजे जोसेफ को धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपों से बरी किया गया.

प्रोफ़ेसर टीजे जोसेफ, जिनका एक हाथ काट दिया गया. आरोपी के तौर पर PFI का नाम आया.

2011 में PFI में शामिल हुए कर्नाटक फ़ोरम फ़ॉर डिग्निटी पर भी अपहरण और किडनैपिंग के आरोप लगे. कहा गया कि संगठन से जुड़े लोगों ने PFI को चंदा देने के लिए 5 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी. इसके लिए एक बच्चे का अपहरण किया गया. बाद में बच्चे की हत्या कर दी गयी. इस मामले में पकड़े गए सारे आरोपी कर्नाटक फ़ोरम फ़ॉर डिग्निटी से ताल्लुक़ रखते थे, जो 2006 में PFI में शामिल हो गया था.

साल 2012. PFI के मुखपत्र ‘तेजस’ ने केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर की कि केरल राज्य सरकार उन्हें सरकारी विज्ञापन नहीं दे रही है. इस पर केरल हाई कोर्ट ने सरकार का पक्ष जानना चाहा, तो सरकार ने कोर्ट में जवाब दिया कि PFI पर हत्या के 27 मुक़दमे दर्ज हैं. ये सारी हत्याएं सम्प्रदाय विशेष को चोट पहुंचाने की नीयत से की गई हैं. और इन हत्याओं में मारे गए लोग लेफ़्ट पार्टियों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं. PFI ने सरकार के इन दावों को नकारा और सरकार के स्टैंड की आलोचना की.

इस सबके साथ ही कई मौक़ों पर केरल और आसपास के दक्षिण भारतीय राज्यों की कई हिंसक घटनाओं में PFI का नाम आता रहा है. 2012 में ही जब उत्तर-पूर्व राज्यों के छात्रों और उत्तर व दक्षिण भारत के राज्यों के छात्रों के बीच टकराव शुरू हुए थे, उस समय PFI का नाम सामने आया था. कहा गया कि PFI के लोगों ने एक दिन के भीतर 6 करोड़ से ज़्यादा एसएमएस पूर्वोत्तर के राज्यों से आने वाले छात्रों को भेजे, जिसके बाद भारी संख्या में छात्र राज्य छोड़कर जाते दिखे.

आरोपों से घिरी PFI ने अपनी छवि सुधारने का बीड़ा उठाया. 2012 में संगठन ने ‘PFI ही क्यों’ नाम से कैम्पेन शुरू किया. आरोप ये कि सरकारें जान-बूझकर अपनी कमी छिपाने के लिए PFI को निशाना बना रही हैं. संगठन ने Press Council of India में हिंदी और अंग्रेज़ी के दस अख़बारों के खिलाफ़ कम्प्लेन दर्ज कराई. कहा कि ये PFI की छवि को ग़लत रिपोर्टिंग के ज़रिए नुक़सान पहुंचा रहे हैं.

2013 में एक न्यूज़ पोर्टल ने ख़बर छापी कि NIA और IB ने PFI के आतंकी संगठनों से संबंध पर कोई जानकारी अख़बारों से साझा नहीं की थी. समय-समय पर PFI अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन करती रही है.

PFI पर प्रतिबंध लगाने की मांग लंबे समय से उठती रही है. केरल और कर्नाटक की सरकारें केंद्र सरकार से समय-समय पर ये मांग करती रही हैं कि वे PFI पर प्रतिबंध लगाएं. ताज़ा मामला यूपी का है. योगी सरकार ने भी गृह मंत्रालय को लेटर लिखा है. कहा है कि PFI के आतंकी संगठन SIMI से जुड़े होने के पुख़्ता सबूत हैं. इसलिए इस संगठन को को बैन किया जाए.

अक्टूबर 2017 में भी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कई मीटिंग की थीं, PFI पर प्रतिबंध लगाने को लेकर. PFI के राजनीतिक संगठन SDPI पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग उठती रही है. 2019 में झारखंड की तत्कालीन रघुबर दास सरकार ने PFI पर प्रतिबंध लगा ही दिया था.

लेकिन प्रतिबंध क्यों नहीं लग पा रहा?

क्योंकि जानकारों का मानना है कि SIMI के आतंकी संगठन होने के पुख्ता सबूत थे. PFI के बारे में कही जा रही बातें अक्सर आरोप की ही शक्ल में सामने आती रही हैं. PFI पर ISIS के लिए भर्ती करवाने का आरोप लगा. PFI ने कहा कि केरल से जो लड़के ISIS में भर्ती होने गए, वे एक वक्त PFI के सदस्य तो थे, लेकिन PFI ने उनकी भर्ती के लिए कोई रास्ता नहीं खोला, न ही कोई मदद की. बतौर संगठन, किसी भी जांच में PFI का गुनाह सामने नहीं आ सका है.

जानकार मानते हैं कि PFI समाजसेवा के काम भी करता है. और PFI का दावा भी है कि वह अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकार और विकास के लिए खड़ा है. ऐसे कई कार्यक्रम और कई वर्कशॉप PFI ने आयोजित किए हैं. ऐसे में जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि PFI पर लगे आरोपों के मद्देनज़र साक्ष्य जुटाना, जिसमें अभी तक पुख़्ता कामयाबी नहीं ही मिल सकी है.


लल्लनटॉप वीडियो : CAA प्रोटेस्ट: मुजफ्फरनगर हिंसा में यूपी पुलिस ने 4 को रिहा किया, कहा कि ‘गलती से’ गिरफ्तार कर लिया

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

YES Bank शुरू करने वाले राणा कपूर कौन हैं, जिन्होंने नोटबंदी को 'मास्टरस्ट्रोक' बताया था

यस बैंक डूब रहा है.

सात साल पहले केजरीवाल ने वो बात कही थी जो आज वो ख़ुद नहीं सुनना चाहते

बरसों पुरानी इस बात की वजह से सोशल मीडिया पर घेर लिए गए हैं.

क्या भारत सरकार से पूछे बिना पाकिस्तान चली गई इंडियन कबड्डी टीम?

अब ढेरों खेल-तमाशा हो रहा है.

बजट का कितना ज्ञान है, ये क्विज़ खेलकर चेक कर लो!

कितना नंबर पाया, बताते हुए जाना. #Budget2020

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.

QUIZ: देश के सबसे महान स्पोर्टसमैन को कितना जानते हैं आप?

आज इस जादूगर की बरसी है.

चाचा शरद पवार ने ये बातें समझी होती तो शायद भतीजे अजित पवार धोखा नहीं देते

शुरुआत 2004 से हुई थी, 2019 आते-आते बात यहां तक पहुंच गई.

रिव्यू पिटीशन क्या होता है? कौन, क्यों, कब दाखिल कर सकता है?

अयोध्या पर फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड रिव्यू पिटीशन दायर करने जा रहा है.