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माइक्रोमैक्स के नए फ़ोन को देशभक्ति बेचेगी या बढ़िया स्पेक्स? सारी डिटेल्स आ गई हैं

एंटी-चाइना सेंटीमेंट पर सवार, माइक्रोमैक्स (Micromax) अगले महीने इंडिया में वापसी कर रहा है. 3 नवम्बर को कंपनी “इन” (In) ब्रांड के अंदर फ़ोन लॉन्च करेगी. सारी डिटेल्स धीरे-धीरे आ रही हैं. कंपनी ने अपने आने वाले फोन्स का ब्रांड नेम, प्राइस रेंज और प्रोसेसर के बारे में तो बता ही दिया था, अब फ़ोन के बैक का भी हल्का-सा लुक दे दिया है.

हम एक नज़र माइक्रोमैक्स के आने वाले फ़ोन पर तो डाल ही रहे हैं, मगर साथ ही साथ कंपनी की “देशभक्ति” से सराबोर दूसरी इनिंग पर भी टिप्पणी करेंगे. पहले माइक्रोमैक्स के “इन” ब्रांडेड फ़ोन को देख लेते हैं.

माइक्रोमैक्स “इन” ब्रांडेड फ़ोन (Micromax IN phones)

प्रोसेसर 

माइक्रोमैक्स ने एक ट्वीट किया है, जिसमें ये प्रोसेसर टीज़ कर रहे हैं. इन्होंने एक gif इमेज अपलोड की, जिसमें G85 और G35 बदलता हुआ दिख रहा है. ट्वीट में लिखा है-

“इंडिया अल्टिमेट परफॉरमेंस के साथ गेम खेलने के लिए तैयार हो रहा है. और हमारे पास ऐसा करने के लिए परफेक्ट प्रोसेसर है. स्क्रीनशॉट लीजिए और और बताइए कि आपके हिसाब से कौन सा [प्रोसेसर] है. #INMobiles 3 नवम्बर को दोपहर 12 बजे अनवील होगा.”

इस ट्वीट से साफ़ पता चलता है कि माइक्रोमैक्स के “इन” ब्रांडेड स्मार्टफ़ोन में मीडियाटेक हीलियो G85 और G35 प्रोसेसर लगे हुए होंगे. ये बात पहले एक रिपोर्ट में भी सामने आ चुकी है. मीडियाटेक के बाक़ी प्रोसेसर भले ही कमज़ोर समझे जाते हों, मगर G-सीरीज़ के प्रोसेसर की मार्केट में काफ़ी इज़्ज़त है. ये गेमिंग लाइनअप है. और राहुल शर्मा ने कई इंटरव्यू में बता रखा है कि नए माइक्रोमैक्स फ़ोन गेमिंग सेंट्रिक होंगे.

G85 इसी साल मई में लॉन्च हुआ था. ये रेडमी नोट 9 और रियलमी नारज़ो 20 में पड़ा हुआ आता है. दोनों ही फ़ोन की शुरुआत 12,000 रुपए के अंदर होती है. G35 इसी साल जून में लॉन्च हुआ था. रेडमी 9, पोको C3, और रियलमी C11 इसी पर चलते हैं. ये तीनों फ़ोन 7000 रुपए से 9000 रुपए की रेंज में पड़ते हैं.

सॉफ़्टवेयर/ ऑपरेटिंग सिस्टम 

राहुल शर्मा ने कन्फर्म कर दिया है कि “इन” सीरीज़ के फ़ोन गूगल के एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलेंगे. मगर इसके ऊपर कोई मीयूआई (MIUI) या कलर ओएस (ColorOS) जैसी कस्टम स्किन नहीं होगी. शर्मा ने बताया कि माइक्रोमैक्स के फ़ोन स्टॉक एक्सपीरियंस से लैंस होंगे और इनमें न किसी भी तरह के ब्लोटवेयर होंगे, न ही ऐड्स.

Lt Android
माइक्रोमैक्स इन फ़ोन स्टॉक एंड्रॉयड पर चलेंगे.

ब्लोटवेयर उन ऐप्स को कहते हैं, जो फ़ोन में पहले से इंस्टॉल होकर आते हैं और अनइंस्टॉल भी नहीं किए जा सकते हैं. ऐसे ऐप्स आपने रियलमी, शाओमी, ऑप्पो और वीवो के फ़ोन में खूब देखे होंगे. तो फ़िलहाल माइक्रोमैक्स सॉफ्टवेयर एंड पर तो सही फ़ील हो रहा है.

बाक़ी के स्पेक्स 

माइक्रोमैक्स के अनाउंसमेंट के कुछ दिन बाद ही “इन” लाइनअप के दोनों फ़ोन की डीटेल लीक हो गई थीं. ‘द मोबाइल इंडियन’ की ख़बर के मुताबिक़, नई “इन” सीरीज़ का पहला फ़ोन मीडियाटेक हीलियो G35 पर चलेगा. इसमें 3GB रैम और 32GB इंटरनल स्टोरेज होगी. बैक पर ड्यूअल कैमरा सेटअप होगा और 5000mAh की बैटरी होगी. ख़बर के मुताबिक, सीरीज़ का दूसरा फ़ोन मीडियाटेक हीलियो G85 प्रोसेसर पर चलेगा और इसकी बैक पर दो की बजाय तीन कैमरा होंगे.

“इन” ब्रांडेड फ़ोन की क़ीमत

माइक्रोमैक्स को-फाउन्डर राहुल शर्मा ने इस बात को कई बार दोहराया है कि नई “इन” सीरीज़ के फ़ोन 7000 रुपए से लेकर 25,000 रुपए के बीच में होंगे. शर्मा ने साफ कर दिया है कि माइक्रोमैक्स 7000 रुपए से नीचे की कीमत वाले फ़ोन नहीं बनाएगा, क्योंकि इसके नीचे अच्छे स्पेक्स देना पॉसिबल नहीं है.

प्रोसेसर के हिसाब से हम फ़ोन की क़ीमत का अंदाज़ा लगा सकते हैं. “इन” ब्रांडेड फ़ोन का G35 मॉडल शायद 7000-8000 रुपए से लेकर 10,000 रुपए तक की क़ीमत का होगा और G85 प्रोसेसर वाला डिवाइस शायद 15,000 रुपए के आस पास हो.

अबकी एंटी-चाइना सेंटीमेंट का तड़का क्यों है

ये तो फ़ोन की बात हो गई. अब जरा माइक्रोमैक्स की वापसी पर गौर करते हैं. इस महीने की 16 तारीख को माइक्रोमैक्स को-फाउन्डर राहुल शर्मा ने कंपनी की इंडियन स्मार्टफ़ोन मार्केट में वापसी का ऐलान किया. मगर ये ऐलान काफ़ी अलग था.

आम तौर पर जब कोई कंपनी वापसी करती है, तो शुरुआत अपने नए प्रॉडक्ट की पेशकश से करती है. मगर शर्मा ने 2 मिनट के वीडियो में नए फ़ोन का सिर्फ़ ब्रांड नेम बताया और बाक़ी के टाइम में अपनी कहानी और माइक्रोमैक्स की सफलता और विफलता की बात की. मगर इस पूरे अनाउंसमेंट में एंटी-चाइना सेंटीमेंट को भुनाया गया और “देशभक्ति” को बेचा गया.

इंडिया-चाइना के बॉर्डर स्ट्रगल के बाद से देश में एंटी-चाइना सेंटीमेंट पसरे हुए हैं. आए दिन चाइनीज प्रोडक्ट के बॉयकॉट की बात उठती है. प्रधानमंत्री ने भी आत्मनिर्भर भारत की गुहार लगाई है. ऐसे में माइक्रोमैक्स ने इसे ही अपनी वापसी का पेग बना लिया है. यहां तक कि शर्मा ने माइक्रोमैक्स की वापसी को इंडिया-चाइना के बॉर्डर स्ट्रगल से जोड़ दिया. ऊपर लगे हुए वीडियो में आप इन्हें खुद सुन लीजिए.

माइक्रोमैक्स ने अपने ट्विटर हैन्डल पर “आओ करें चीनी कम” के साथ प्रोमो वीडियो डाला, जो चाइनीज स्मार्टफ़ोन के ऊपर तंज है. इस व्यंग्य को लोगों ने अलग-अलग तरीके से लिया. किसी ने तालियां बजाईं, तो किसी ने रेसिस्ट बोला. “इन” स्मार्टफ़ोन लॉन्च के मीडिया इनवाइट पर यही क्वोट लिखा हुआ मिला, जहां माइक्रोमैक्स चाइनीज फ़ोन कम करके इंडियन फ़ोन बढ़ाने की बात कर रहा है.

मगर माइक्रोमैक्स की स्ट्रैटिजी हमें दो वजह से से अटपटी लग रही है. पहला रीज़न है माइक्रोमैक्स की चाइनीज फ़ोन वाली हिस्ट्री. अपनी पहली पारी में माइक्रोमैक्स और इसके सब-ब्रांड “यू” (YU) ने कई सारे चाइनीज फ़ोन रीब्रांड करके इंडिया में चिपकाए थे.

चाइनीज फ़ोन पर अपनी मुहर लगाकर बेचना बहुत ही आसान था. बस काम इतना सा करना होता था कि अपने ब्रांड नेम के साथ फ़ोन का ऑर्डर देना होता था. टेक जर्नलिस्ट्स ने कई बार माइक्रोमैक्स को QiKu, ZTE, CoolPad, Wiko वग़ैरह के फ़ोन रीब्रांड करते हुए टोका भी, पर मामला चलता रहा. चाइनीज कंपनियों के इंडिया आने के बाद माइक्रोमैक्स की दुकान बंद होने का एक रीज़न कंपनी की इस स्ट्रैटिजी को भी बताया जाता है.

Micromax Qiku
लेफ्ट- Micromax Dual 5 | राइट- Qiku 360 Q5 (क्रेडिट: MenXP)

अब दूसरी बात पर आते हैं. वो ये है कि क्या एंटी-चाइना सेंटीमेंट ही फ़ोन बेचने के लिए काफ़ी होंगे? बेशक़ अभी इंडियन स्मार्टफ़ोन मार्केट में साउथ कोरिया की सैमसंग और LG, अमेरिका की ऐपल, और फ़िनलैंड की नोकिया के अलावा सारे नाम चाइनीज हैं. मगर एंटी-चाइना सेंटीमेंट के बावजूद चाइनीज स्मार्टफ़ोन का दबदबा इंडिया में बढ़ा ही है.

‘कनालीस’ की रिपोर्ट के मुताबिक़, पिछले साल की तिमाही में जहां चाइनीज कंपनियों के पास इंडिया के मार्केट का 74% शेयर था, वो इस साल की तिमाही में बढ़कर 76% हो गया है. इसके साथ ही इंडिया की टॉप पांच स्मार्टफ़ोन कंपनियों में से चार चाइनीज हैं. इनका क्रम कुछ ऐसा है– शाओमी, सैमसंग, वीवो, रियलमी, ऑप्पो.

Market Share 700
मार्केट शेयर इंडिया Q3 2020: क्रेडिट: Canalys

इंडियन स्मार्टफ़ोन मार्केट का सीधा सा रूल है. जो सबसे बढ़िया स्पेक्स सबसे कम क़ीमत पर देगा, वो चलेगा. इसी स्ट्रैटिजी को पकड़कर आज के टाइम पर शाओमी और रियलमी जैसे चाइनीज ब्रांड आगे बढ़ रहे हैं. सैमसंग ने भी ये बात जान ली है और इसीलिए इसने M-सीरीज़ और A-सीरीज़ में बजट और मिड-रेंज स्मार्टफ़ोन देना शुरू किया है. इनफ़िनिक्स भी इसी स्ट्रैटिजी के सहारे टियर 2 और टियर 3 शहरों में पॉपुलर हो रहा है. मगर ये स्ट्रैटिजी इन सब से पहले खुद माइक्रोमैक्स ने आज़माई थी.

यही वो कंपनी है, जिसने बढ़िया स्पेक्स वाले फ़ोन बहुत ही कम दामों पर लाकर दिखाए थे. ये दुनिया की टॉप 10 स्मार्टफ़ोन कंपनियों में से एक बन गई थी. इसका जलवा इतना तगड़ा था कि ये आईफोन की तफ़री ले रहा था और अपनी कैनवस सीरीज़ के फ़ोन का ऐड हॉलीवुड स्टार ह्यू जैकमन से करवा रहा था.

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ह्यू जैकमन X-Men मूवीज में Wolverine का किरदार अदा करने के लिए जाने जाते हैं.

मगर इस वक़्त का माइक्रोमैक्स काफ़ी अलग लग रहा है. इसकी “चीनी कम” और “इन फ़ॉर इंडिया” पिच अपने फ़ोन बेचने की कम और चाइनीज फ़ोन को रोकने का एफर्ट ज्यादा लग रही है. और इन प्रोमो को देखकर ऐसा लगता है कि माइक्रोमैक्स को खुद अपने डिवाइस पर भरोसा नहीं है. ऐसा फ़ील हो रहा है, जैसे ये फ़ोन नहीं, देशभक्ति बेचने आए हों.

अगर माइक्रोमैक्स के पास बेचने के लिए सिर्फ़ एंटी-चाइना सेंटीमेंट हैं, तो शायद इसके लिए आगे मुश्किल ही मुश्किल है. लेकिन अगर सच में ये वाजिब प्राइस पर अच्छे स्पेक्स वाले फ़ोन लॉन्च करता है, तो मार्केट आने वाले दिनों में काफ़ी इंटरेस्टिंग होने वाला है.


वीडियो: एंटी-चाइना सेंटीमेंट के बावजूद स्मार्टफ़ोन मार्केट में चाइनीज कंपनियों का जलवा बरक़रार

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