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अजित डोभाल ने हाफिज सईद को मरवाने का प्लान तैयार करवाया था?

कहने को हाफ़िज़ सईद पाकिस्तान में क़ैद काट रहा है, लेकिन असल में वो ISI के संरक्षण में एक आलीशान मकान में रहता है और वहीं से अपनी आतंकी गतिविधियां चलता है.

कुछ रोज़ पहले पाकिस्तान में एक ब्लास्ट हुआ. ये धमाका आतंकवादी हाफ़िज सईद के घर के नज़दीक हुआ था. अब पाकिस्तान ने इस धमाके का इल्ज़ाम भारत पर लगाया है. उसका दावा है कि इस ब्लास्ट का मास्टरमाइंड एक भारतीय है. उसका कनेक्शन भारतीय ख़ुफिया एजेंसी रॉ के साथ है. 

पूरा मामला, विस्तार से

ये बात है 23 जून, 2021 की. जगह, पाकिस्तान का लाहौर शहर. यहांजोहर टाउननाम का एक इलाका है. इसमें एक कॉलोनी हैबोर्ड ऑफ़ रेवेन्यू हाउसिंग सोसायटी. उस रोज़ सुबह के तकरीबन सवा 11 बजे थे, जब यहां एक घर के पास ज़ोरदार धमाका हुआ. ब्लास्ट का फ़ोर्स इतना तेज़ था कि सड़क पर चार फुट गहरा और आठ फुट चौड़ा गड्ढा बन गया. इस ब्लास्ट की चपेट में आकर तीन लोगों की मौत हुई. इनमें छह साल का एक बच्चा अब्दुल हक़ भी शामिल था. 

ब्लास्ट के कुछ देर बाद पाकिस्तान स्थित पंजाब प्रांत के IG इनाम ग़नी घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने बताया कि ये धमाका एक हाईवैल्यू टारगेट के घर के नज़दीक हुआ. कौन था ये टारगेट? इस टारगेट का नाम हैहाफ़िज सईद. हाफ़िजजमातउददावाका मुखिया है. ये संगठन आतंकवादी ग्रुपलश्करतैयबाका पैरंट ऑर्गनाइज़ेशन है. इस संगठन ने भारत में कई आतंकी हमले करवाए हैं. 

कौन था इस ब्लास्ट के पीछे?

तो उस दिन, यानी 23 जून को किसी ने हाफ़िज की ही मांद में घुसकर उससे उसकी भाषा में बात की थी. शुरुआत में पुलिस के पास इससे जुड़ी कोई ठोस जानकारी नहीं थी. वो ये भी पक्के से नहीं जानते थे कि ये बम ब्लास्ट है या आत्मघाती हमला? पाकिस्तानी अथॉरिटीज़ के पास तथ्य भले न हों, लेकिन उनके पास बोलने के लिए मुंह तो था ही. सो IG इनाम ग़नी ने बिना किसी सबूत के दुश्मन देश का हाथ होने की रटीरटाई पंक्ति दोहरा दी. 23 जून ब्लास्ट के कुछ ही देर बाद मीडिया से बात करते हुए इनाम ग़नी ने कहा

ऐसे हमले आमतौर पर हमारे दुश्मन देश करवाते हैं. वो ऐसे हमलों के द्वारा पाकिस्तान और इसकी तरक्की को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. 

इनाम ग़नी ने नाम भले न लिया हो, मगर ये स्पष्ट था कि उनका इशारा भारत की ओर है. इस संकेत में कुछ सप्राइज़िंग नहीं था. पाकिस्तान में जब भी ऐसी कोई घटना होती है, वो आदतन भारत पर उंगली उठाता है. ये भारत द्वारा उसपर लगाए जाने वाले आतंकवाद संबंधी आरोपों की काउंटर स्ट्रैटज़ी भी है. कुछ इस शैली में कि तुमने हमपर आरोप लगाया, लो हम भी तुम पर इल्ज़ाम लगाते हैं. 

23 जून को लाहौर में हाफ़िज़ सईद के घर के पास हुए कार बम धमाके में 3 लोगों की मौत हो गई और 24 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.

ख़ैर, अब फिर लौटते हैं लाहौर ब्लास्ट पर. पाकिस्तान ने इस धमाके की जांच का जिम्मा सौंपा, CTD, यानी काउंटर टेररिज़म डिपार्टमेंट को. शुरुआती जांच के बाद CTD ने बताया कि ब्लास्ट हाफ़िज के घर के पास खड़ी एक कार में हुआ. इस कार का रजिस्ट्रेशन नंबर था– LEB 9928. इसमें करीब 15 किलो विस्फ़ोटक प्लांट किए गए थे. और इसे रिमोट कंट्रोल से ट्रिगर किया गया था. 

किसकी कार थी ये?

 इसके मालिक का नाम है, शकील अहमद. पाकिस्तानी पंजाब में हफ़िज़ाबाद नाम का एक शहर है. यहीं के रहने वाले हैं शकील. 29 नवंबर, 2010 को गुजरांवाला इलाके में कुछ अपराधियों ने उनकी ये कार लूट ली थी. करीब एक साल बाद लाहौर के ऐंटीविहिकल लिफ़्टिंग स्क्वैड ने चोरी की ये कार खानेवाल ज़िले में बरामद की. उन्होंने कार वापस शकील को लौटा दी. कुछ दिनों बाद शकील ने ये कार सेकेंडहैंड में किसी को बेच दी. तब से इस कार को कई बार खरीदाबेचा जा चुका था. कार का आख़िरी ख़रीदार कौन था, इसका रेकॉर्ड पुलिस के पास नहीं था. 

कार के इस आख़िरी ख़रीदार की जानकारी मिली 25 जून को. इस रोज़ एक नाम सामने आयापीटर पॉल डेविड. कौन है ये आदमी? पीटर एक कारोबारी है. वो बहरीन में स्क्रैप और होटेल का बिज़नस चलाता है. करीब 11 साल पहले पीटर अपने परिवार के साथ कराची में बस गया. वो कराची, लाहौर और दुबई आताजाता रहता था. पिछले कुछ समय से वो पाकिस्तान के बाहर ही रह रहा था. लगभग डेढ़ महीने पहले ही वो वापस पाकिस्तान लौटा था.  

जांच एजेंसियों के मुताबिक, ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई कार का आख़िरी मालिक पीटर ही था. 25 जून को लाहौर एयरपोर्ट से पीटर की गिरफ़्तारी हुई. उस समय पीटर लाहौर से कराची जा रहे एक विमान में बैठा था. ब्लास्ट में मिलीभगत के आरोपों पर पीटर ने क्या कहा? उसने ख़ुद को निर्दोष बताया. उसका दावा था कि ब्लास्ट के समय कार उसके पास थी ही नहीं. पीटर के मुताबिक, कुछ दिन पहले वो दुबई गया था. यहां उसके एक दोस्त ने कहा कि गुजरांवाला में रहने वाले उसके एक दोस्त को कुछ दिनों के लिए कार चाहिए. 

पीटर पॉल डेविड. पीटर को लाहौर से कराची जा रही उड़ान से गिरफ़्तार किया गया.

पीटर का दावा है कि पाकिस्तान लौटने के बाद, दोस्त के कहे मुताबिक, उसने एक आदमी को अपनी कार दी थी. एजेंसियों ने पीटर से उस आदमी का हुलिया पूछा. इसपर पीटर ने कहा कि कार लेने आए शख़्स ने मास्क पहना हुआ था. इसीलिए वो उसका चेहरा नहीं देख पाया. 

पीटर की पूरी कहानी 

क्या पीटर को अरेस्ट किए जाने की वजह इतनी ही थी? यहां ब्लास्ट में उसकी कोई सीधी भूमिका थी? इन सवालों पर पाकिस्तान से अगला बड़ा अपडेट आया 26 जून को. इस दिन पाकिस्तानी जांच एजेंसियों ने बताया कि उन्होंने कराची स्थित पीटर के घर की तलाशी ली. इस दौरान उन्हें पीटर से जुड़े कई डॉक्यूमेंट्स मिले. मसलन, उसका पाकिस्तानी पासपोर्ट. पाकिस्तानी अप्रवासियों को मिलने वाला नैशनल आइडेंटिटी कार्ड फॉर ओवरसीज़ पाकिस्तानी. और, कुछ ऐसे कथित काग़ज़ात जिनसे पता चलता है कि पीटर के पास किसी और देश की नागरिकता थी. 

इसी दिन पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स ने सूत्रों के हवाले सेफ़ॉरेन हैंडसे जुड़े कुछ और दावे पेश किए. मसलन, पाकिस्तान का एक अख़बार हैडॉन. उसने जांच टीम में शामिल एक अधिकारी के हवाले से ख़बर छापी. इसके मुताबिक, विदेश यात्राओं के दौरान पीटर कुछ विदेशी हैंडलर्स से मिलता था. ये विदेशी हैंडलर्स शायद पाकिस्तान के एक पड़ोसी देश से ऑपरेट करते हैं. इन्होंने ही कुछ दिन पहले एक अरब मुल्क में पीटर के साथ मीटिंग की. और, उसे ब्लास्ट करने का निर्देश दिया. 

इस अपुष्ट ख़बर पर जल्द ही आधिकारिक मुहर भी लग गई. पाकिस्तान ने ये तो नहीं बताया कि वो कथित फॉरेन हैंडलर्स किस देश के हैं. हां, इतना ज़रूर बताया गया कि हालिया मिले नए साक्ष्यों के मद्देनज़र इन्वेस्टिगेशन का दायरा बढ़ा दिया गया है. अब इस कथित आतंकी हमले के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने की जांच की जा रही है. 

नए अपडेट 

अब इसी जांच पर पाकिस्तान से एक और बड़ा अपडेट आया है. पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान इशारों में जो कह रहा था, उसने अब इसे शब्द दे दिए हैं. उसने ब्लास्ट का आरोप सीधे भारत पर लगाया है. क्या कहा है पाकिस्तान ने? 

पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं, डॉक्टर मोइद यूसुफ. बीते रोज़ यानी 4 जुलाई, 2021 को NSA यूसुफ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई. इसमें उनके साथ पंजाब के पुलिस चीफ़ इनाम ग़नी और सूचना मंत्री फ़वाद चौधरी भी थे. यहां NSA यूसुफ ने दावा किया कि लाहौर ब्लास्ट का मास्टरमाइंड एक भारतीय नागरिक है. वो भारतीय ख़ुफिया एजेंसी रॉ के लिए काम करता है. NSA बोले

IG इनाम ग़नी ने बताया कि हमारे पास इस घटना से जुड़ी ख़ुफ़िया रिपोर्ट्स हैं. इनमें विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसियों की संलिप्तता से जुड़े सबूत मिले हैं. मैं बिना किसी शुबहे के आपको बताना चाहता हूं कि इस ब्लास्ट से जुड़े सारे ब्योरे भारत द्वारा प्रायोजित आतंकवाद की ओर ले जाते हैं. 

हाल ही में पाकिस्तान के NSA नियुक्त किए गए मोइद यूसुफ प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी रहे हैं.

ये पूछे जाने पर कि क्या इस ब्लास्ट में इंडियन स्टेट का हाथ था, पाकिस्तानी NSA बोले

जिस दिन धमाका हुआ, उस दिन हमारे इन्फॉर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हज़ारों साइबर अटैक्स हुए. इन साइबर अटैक्स की मंशा थी, हमारी जांच प्रक्रिया को नाकाम करना. दोषी जांच की दिशा भटकाना चाहते थे. ताकि उनके नेटवर्क को भागने का समय मिल सके. हमें पूरा यक़ीन है कि जोहर टाउन ब्लास्ट और इन साइबर अटैक्स का आपस में ताल्लुक है. इन साइबर अटैक्स का बड़ा स्केल देखकर पक्का हो जाता है कि इसके पीछे हमारे पड़ोसी सरकार शामिल थी. 

मान ना मान, मैं तेरा मेहमान  

क्या पाकिस्तान ने भारत पर लगाए आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत भी दिया? जवाब है, नहीं. यहां तक कि कथित मास्टरमाइंड का नाम तक नहीं बताया गया. ये मास्टरमाइंड पीटर ही है या कोई और, अभी नहीं मालूम. पाकिस्तानी NSA ने बिना कोई साक्ष्य दिए कहा

इस ब्लास्ट में इस्तेमाल हुए पैसे भारत से फ़ाइनैंस हुए थे. ये पैसा किन्हीं और देशों के मार्फ़त रीरूट करके भेजा गया था. भारत दुनिया से कहता है कि वो रिश्ते सुधारना चाहता है. लेकिन असलियत में वो हमारे नागरिकों को शहीद करने की योजनाएं बनाता है. मैं सुनिश्चित करूंगा कि हम अपनी आवाज़ दुनिया तक पहुंचाएं. हमारे पास ठोस सबूत हैं कि इस ब्लास्ट में शामिल आतंकियों को भारत ने ही स्पॉन्सर किया. 

इस ब्लास्ट में भारत का नाम घसीटने के साथ ही पाकिस्तान ने अफ़गानी शरणार्थियों पर भी उंगली उठाई. कहा

हमले को अंजाम देने वाले मुख्य संदिग्धों में एक नाम ईद गुल का भी है. वो मूल रूप से अफ़गानिस्तान का निवासी है. हम बारबार कहते आए हैं कि अफ़गान शरणार्थी हमारे भाईबहन हैं. मगर अब समय आ गया है कि वो सम्मानजनक रूप से अपने मुल्क लौट जाएं. अफ़गानी शरणार्थियों की बड़ी संख्या शांति से रहती है. मगर उनमें से ही कुछ लोग बुरे काम करके सारे शरणार्थियों का नाम ख़राब करते हैं. पाकिस्तान इस इंटरनैशनल टेरर नेटवर्क को दुनिया के आगे लाएगा. हम भारत की असलियत का पर्दाफ़ाश कर देंगे. 

तालिबानी आतंक से डरकर अफ़गानिस्तान के लाखों लोगों ने पाकिस्तान समेत अन्य पड़ोसी मुल्कों में शरण ली है.

पाकिस्तानी NSA के इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद 4 जुलाई की ही शाम प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के भी दो ट्वीट आए. इमरान ने लिखा

हमने आतंकियों और उनके अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पहचान कर ली है. इस घिनौनी आतंकी घटना की प्लानिंग और फाइनैंसिंग का ताल्लुक भारत द्वारा स्पॉन्सर किए जा रहे आतंकवाद से है. ग्लोबल एजेंसियों को इसके खिलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए. 

पाकिस्तान के लगाए इन आरोपों पर भारत ने क्या कहा? भारत ने आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. मगर भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स ने सरकार में अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पाकिस्तान के लगाए इल्ज़ाम बेबुनियाद हैं. 

एक बड़ा सवाल

पाकिस्तान ने भारत पर ये आरोप क्यों लगाए? क्या इन आरोपों की टाइमिंग में कुछ ख़ास है? जवाब है, हां. हमने आपको 4 जुलाई को आयोजित पाकिस्तानी NSA के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बारे में बताया था. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSA यूसुफ ने भारत पर इल्ज़ाम लगाने के बाद ज़िक्र किया, जम्मूकश्मीर में हुई एक हालिया घटना का. 

27 जून को जम्मू स्थित भारतीय वायुसेना बेस पर हुए ड्रोन अटैक के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं.

कौन सी घटना? ये बात है 27 जून की. इस रोज़ सुबह के वक़्त जम्मू स्थित एयर फ़ोर्स बेस पर दो धमाके हुए. इसमें भारतीय वायुसेना के दो कर्मी घायल भी हुए. शुरुआती जांच के मुताबिक, ये दोनों धमाके ड्रोन्स के द्वारा करवाए गए. इसके बाद आशंका उठी कि कहीं ये 2016 में हुए पठानकोट अटैक जैसी वारदात की कोशिश तो नहीं थी? इन शंकाओं के मद्देनज़र पाकिस्तान और वहां सक्रिय आतंकी गुटों का ज़िक्र आना स्वाभाविक था. शायद यही वजह थी कि 4 जुलाई की प्रेस कॉन्फ्रेंस के आख़िर में पाकिस्तानी NSA ने इस ड्रोन प्रकरण का ज़िक्र किया. वो इसे खारिज़ करने के अंदाज़ में बोले

साइबर अटैक्स के अलावा एक और ड्रामा चल रहा है. कश्मीर में कुछ रहस्यमय ड्रोन्स के उड़ने की बात कही जा रही है. इस ड्रामे का लॉज़िक स्पष्ट है. ऐसा करके भारत लाहौर ब्लास्ट से ध्यान भटकाना चाहता है. 

पाकिस्तानी NSA के इस बयान पर ग़ौर कीजिए. 27 जून को जम्मू स्थित भारतीय वायुसेना बेस पर धमाके हुए. ये सत्य है. पठानकोट में आतंकी हमला हुआ था और उसका संबंध पाकिस्तान से था, ये भी सत्य है. यानी जम्मू में हुई घटना को लेकर भारत का चिंतित होना वाज़िब है. भारत इस मामले की जांच कर रहा है. हो सकता है कि इस हालिया घटना में भी पाकिस्तान की भूमिका मिले. तो क्या इसी को काउंटर करने के लिए पाकिस्तान ने लाहौर ब्लास्ट का ठीकरा भारत पर मढ़ा है? 

पाकिस्तान की करतूतें 

ऐसा नहीं कि पाकिस्तान ने पहली दफ़ा भारत पर आतंकवाद का आरोप लगाया हो. इससे पहले भी कई मौकों पर वो रॉ और भारत सरकार पर उंगली उठाता रहा है. मसलन, पाकिस्ताaन दावा करता है कि रॉ बलोचिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश करता है. पाकिस्तान दशकों से बलोचिस्तान का दमन करता आ रहा है. पाकिस्तानी सेना और ISI के नेक्सस ने बलोचिस्तान में हज़ारों बेग़ुनाहों की हत्या करवाईं. बलोचों के मूलभूत मानवाधिकार छीन लिए. 

इन क्रूरताओं की पुष्टि इंटरनैशनल संगठन और मीडिया भी करते हैं. मगर पाकिस्तान इसे नहीं मानता. वो बलोचों द्वारा की जाने वाली प्रतिक्रियावादी हिंसा को आतंकवाद कहता है. पाकिस्तान अपनी करनी नहीं देखता. उल्टा वो बलोचिस्तान में होने वाली हिंसा का ठीकरा भारत पर फोड़ता है. 

आपको कुलभूषण जाधव का प्रकरण याद है? पाकिस्तान उन्हें भी रॉ का एजेंट का बताता है. उसका कहना है कि रॉ ने बलोचिस्तान को अस्थिर करने के लिए जाधव को वहां भेजा था. जबकि भारत कहता है कि कुलभूषण जाधव बिज़नस के काम से ईरान गए थे. वहीं से पाकिस्तानी एजेंट्स ने उन्हें किडनैप कर लिया. 

पाकिस्तान का दावा है कि कुलभूषण RAW के एजेंट हैं.

पाकिस्तान दशकों से भारत को निशाना बनाने वाले आतंकवादी संगठनों को सपोर्ट देता आ रहा है. इन आतंकवादियों को नायक का दर्जा मिलता है वहां. हाफ़िज़ सईद से लेकर सैयद सलाउद्दीन तक, कितने ही भारतविरोधी आतंकी ख़ुलेआम पाकिस्तान से ऑपरेट करते हैं. पाकिस्तानी सेना और ISI उन्हें सुरक्षा मुहैया कराती है. 

23 जून को हुए लाहौर ब्लास्ट की ही मिसाल ले लीजिए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धमाके के समय हाफ़िज़ अपने घर में ही था. और घर के बाहर उसकी सुरक्षा में तैनात थी पाकिस्तानी पुलिस. हाफ़िज़ जैसे आतंकी को जेल में होना चाहिए था. उसे सख़्तसेसख़्त सज़ा दी जानी चाहिए थी. लेकिन सज़ा देने की जगह पाकिस्तानी स्टेट उसे प्रॉटेक्शन देता है. भारत बरसों से अपील करता आ रहा है कि मुंबई टेरर अटैक के मामले में पाकिस्तान हाफ़िज़ को उसके हवाले करे. ताकि उसपर भारत में केस चलाया जा सके. मगर पाकिस्तान ने ये अपीलें नहीं मानीं. 

पाकिस्तान टेरर स्टेट है, ये आरोप हवाहवाई नहीं हैं. इसे साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य हैं. दुनिया जानती है कि पाकिस्तानी स्टेट भारत और अफ़गानिस्तान में आतंकवाद को स्पॉन्सर करता है. इसके चलते अमेरिका ने पाकिस्तान पर सेंक्शन्स भी लगाए. इसके बावजूद पाकिस्तान ने ख़ुद को करेक्ट करने का कोई जतन नहीं किया. वो उल्टा भारत पर आतंकवाद को प्रश्रय देने के आरोप लगाता है. 

मसलन, नवंबर 2020 की एक घटना सुनिए. इस महीने पाकिस्तान ने एक डॉज़ियर जारी किया. क्या था इसमें? पाकिस्तान के मुताबिक, ये कागज़ात भारत द्वारा स्पॉन्सर किए जा रहे आतंकवाद के प्रमाण थे. पाकिस्तान ने ये डॉज़ियर पब्लिक करते हुए दुनिया से भारत पर कार्रवाई करने की अपील की. उसने ये कथित सबूत UN और सुरक्षा परिषद के साथ भी साझा किए. मगर किसी ने भी पाकिस्तान के आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया. 

विडंबना देखिए कि इस डॉजियर को पेश करने वालों में पाकिस्तानी आर्मी के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ़्तिकार भी शामिल थे. पाकिस्तानी सेना ख़ुद आतंकवाद की सबसे बड़ी पोषक है. उसके प्रतिनिधि द्वारा किसी और को आतंकी स्टेट कहा जाना कितनी भीषण आयरनी है. 

इसी तरह मई 2015 में भी तत्कालीन पाकिस्तानी सेना के कमांडरों ने एक बयान जारी किया. इसमें इल्ज़ाम लगाया गया कि भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ा रही है. इस बयान के दो दिन पहले कराची पुलिस ने MQM, यानी मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट के दो कार्यकर्ताओं को अरेस्ट किया था. इनपर रॉ के इशारे पर हिंसा भड़काने का आरोप था. 

अब यहां एक दिलचस्प चीज देखिए. MQM पाकिस्तान की राजनैतिक पार्टी थी. ये सिंध प्रांत में रहने वाले मुहाजिरों की पॉलिटिक्स करती थी. मुहाजिर माने, बंटवारे के बाद भारत से पाकिस्तान गए मुसलमान. आपको आमिर ख़ान की सरफ़रोश याद है? उसमें नसीरुद्दीन शाह का किरदार गुलफ़ाम हसन भी मुहाज़िर होता है. पाकिस्तान इन मुहाज़िरों के साथ लंबे समय से भेदभाव करता आया है. इन्हीं मुहाज़िरों को अपना वोट बैंक बनाया MQM ने. इसी पॉलिटिक्स के बूते वो केंद्र की सरकारों में गठबंधन पार्टनर भी रहा. ऐसी पार्टी हिंसा करती है और इल्ज़ाम लगाया जाता है भारत पर. वो भी बिना कोई सबूत सामने रखे. 

मोरल ऑफ़ दी स्टोरी ये है कि भारत द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में उल्टा भारत पर ही आरोप मढ़ देना पाकिस्तान की प्रवृत्ति रही है. ऐसा करके वो दुनिया के आगे ख़ुद को निर्दोष दिखाने का जतन करता है. दिखाता है कि वो तो ख़ुद ही आतंकवाद का भुक्तभोगी है. पाकिस्तान चाहता है कि आतंकवाद के मसले पर भारत को जिस तरह इंटरनैशनल सपोर्ट मिलता है, वही सपोर्ट उसे भी मिले. दुनिया जैसे भारत के साथ सहानुभूति रखती है, वैसे ही पाकिस्तान के साथ भी रखे. उल्टा ये नरेशन प्रचलित हो जाए कि भारत विक्टिम नहीं, कल्प्रिट है. लेकिन अब तक उसकी ये कोशिशें कामयाब नहीं हो पाई हैं. 

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