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पाकिस्तान की संसद में हुई मारपीट के पीछे की असली कहानी क्या है?

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में हुई मारपीट के पीछे की वजह जान लीजिए.

सबसे पहले ये वीडियो देखिए.

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एक बड़ा सा सजावटी हॉल है. हॉल के बीचोंबीच बड़ी संख्या में लोग जमा हैं. सजे-धजे. चमचमाते कुर्ते लगाए हुए. कुछ वर्दीधारी पुलिसवाले भी खड़े हैं. मगर मूकदर्शक. जो लोग कपड़ों से सभ्य दिख रहे हैं, उनके बीच जमकर हाथापाई हो रही है. फिर उनमें से कुछ हॉल की कुर्सियों पर चढ़ जाते हैं. मोटी-मोटी किताबों को निशाना बनाकर हमला करने लगते हैं. जिसके हाथ जो लगा, वो पूरी ताक़त से दूसरी तरफ फेंक देता है.

किनारे से दबी-सहमी आवाज़ आती है, लानत है, तुमलोगों पर लानत है.

ये वीडियो देखने और ब्यौरा सुनने के बाद आपके मन में कई तरह के ख़याल आ सकते हैं. मसलन, किसी बाज़ार में सौदे को लेकर झगड़ा हुआ होगा और फिर लड़ाई छिड़ गई होगी. या, किसी शादी में मनचाहा पकवान न मिला और तकरार शुरू हो गई होगी.

अगर हम कहें कि ये न तो किसी बाज़ार का और न ही किसी शादी का सीन है, तो. थोड़ी-सी हैरानी होगी. होनी भी चाहिए. अगले क्षण अगर ये बताएं कि ये सीन एक देश की संसद का है. तब तो बहुतै अधिक चौंक जाएंगे.

जी हां, जो क्लिप आपने शुरुआत में देखी, वो पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 15 जून को हुआ. पाकिस्तान में दो सदनों वाली व्यवस्था है. निचले सदन का नाम नेशनल असेंबली है. उच्च सदन को सेनेट के नाम से जाना जाता है.

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में मचे हंगामे के पीछे की कहानी क्या है?

ये समझने के लिए चार दिन पीछे लौटना होगा. 11 जून 2021 को पाकिस्तान के वित्तमंत्री शौकत तरीन ने आम बजट पेश किया. इस दौरान विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया. वे नारे लिखी तख़्तियां लेकर सदन में आए थे. पूरे बजट भाषण के दौरान विपक्षी सांसद नारे लगाते रहे. कैसे नारे?

‘लाठी-गोली की सरकार नहीं चलेगी, गो नियाज़ी गो’

‘डंकी राजा की सरकार नहीं चलेगी, नहीं चलेगी’. डंकी माने खच्चर. और, राजा माने इमरान ख़ान. विपक्ष का इशारा था कि इमरान ख़ान खच्चरों के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं.

उन्होंने प्रधानमंत्री को ‘आटा चोर, चीनी चोर’ भी कहा.

एक और नारा लगाया गया था,

‘गली गली में शोर है, अलीमा बाजी चोर है’

अलीमा ख़ानम, इमरान ख़ान की बहन का नाम है. विपक्ष का आरोप है कि उन्होंने अपनी चल-अचल संपत्ति की सही जानकारी साझा नहीं की है.

11 जून को पाकिस्तान की संसद में आम बजट पेश हुआ था.

उस दिन तो वित्तमंत्री ने शोर-शराबे के बीच में भाषण पूरा कर दिया. लेकिन उनकी पार्टी इस अपमान को भूली नहीं. फवाद चौधरी पाकिस्तान के सूचना मंत्री हैं. उन्होंने कहा कि इसका बदला लिया जाएगा. विपक्षी नेताओं को लिखित में एक वादा करना होगा, वर्ना उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाएगा. कैसा वादा? यही कि जब प्रधानमंत्री इमरान ख़ान भाषण देने आएं तो कोई उन्हें डिस्टर्ब नहीं करेगा.

विपक्ष ने ये मांग पूरी नहीं की. फिर आ गई 15 जून की तारीख़. सदन में विपक्ष के नेता हैं शहबाज़ शरीफ़. पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के मुखिया. जैसे ही उनके बोलने की बारी आई, उन्होंने बजट की आलोचना शुरू कर दी. सत्तापक्ष इस मौके के इंतज़ार में बैठा था. उन्होंने डेस्क पीटना शुरू कर दिया. साथ ही, वे शरीफ़ को चोर, चोर कहकर चिढ़ाने लगे. इसके बावजूद शरीफ़ ने बोलना जारी रखा. इस बीच विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी, शहबाज़ शरीफ़ की तरफ बढ़ने लगे. झगड़ा बढ़ता देख सदन को 20 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया.

इसके बाद स्पीकर असर क़ैसर के दफ़्तर में दोनों तरफ़ के नेताओं की बैठक हुई. वादा किया गया कि किसी को परेशान नहीं किया जाएगा. समझौते पर पहुंचने में तीन घंटे लग गए. जब दोबारा बैठक हुई तो वादे की धज्जियां उड़ गई. अबकी बार मामला शोर-शराबे से बढ़कर हाथापाई तक पहुंच गया.

नेशनल असेंबली के स्पीकर असद क़ैसर.

विपक्षी सांसद शरीफ़ को घेरकर खड़े हो गए. ताकि वो अपना भाषण पूरा कर सकें. इस बीच सत्ताधारी सांसद कुर्सी पर चढ़कर बजट वाली किताब से हमला करने लगे. विपक्ष भी कम नहीं रहा. उसने भी जवाबी हमला शुरू किया. दोनों तरफ से भद्दी-भद्दी गालियों की बरसात होने लगी. मार्शल्स को हंगामा रोकने के लिए बुलाया गया. लेकिन वे एक तरफ बढ़ते तो दूसरी तरफ से हमला होने लगता था. उनके आने का कोई असर नहीं हुआ. स्पीकर ने नेताओं को बार-बार अपनी सीट पर लौटने की अपील की. लेकिन कोई उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं था. 15 जून को कुल तीन बार बैठक स्थगित की गई. थक-हारकर स्थगन 16 जून को दोपहर दो बजे तक के लिए बढ़ा दिया. शहबाज़ शरीफ़ अभी तक अपना भाषण पूरा नहीं कर पाए हैं. 16 जून को वो दोबारा से भाषण देेंगे. हालांकि, वो इस बार अपना भाषण पूरा कर पाएंगे, इसपर संशय बना हुआ है. 

विपक्ष की तरफ से मारपीट या शोर-शराबे की घटनाएं अक्सर सुनने को मिल जातीं है. लेकिन सत्ताधारी पार्टी ऐसा करे, इसका उदाहरण शायद ही कहीं मिलेगा. नेशनल असेंबली में हो रही मारपीट के दौरान कई कैबिनेट मिनिस्टर भी मौज़ूद थे. उन्होंने हंगामा रोकने की कोई कोशिश नहीं की. विपक्ष का कहना है कि ये पूरा सीन पहले से तय था. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की इसमें पूरी सहमति थी.

विपक्ष ने साफ़ कहा है कि हम एक गाल के बदले दूसरा गाल बढ़ाने वाले लोग नहीं हैं. अगर हमें एक थप्पड़ लगा तो हम पलटकर दो थप्पड़ ज़रूर मारेंगे. मतलब ये रार अभी और बढ़ने वाली है.

ये तो हुई पाकिस्तान की बात. अब दुनिया के कुछ और देशों की संसद में हुए अभूतपूर्व हंगामे की कहानी जानते हैं-

सबसे पहले चलते हैं जॉर्जिया. 26 दिसंबर 2014. अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में जॉर्जिया के डेलीगेशन की नियुक्ति कैसे हो? संसद में इस मुद्दे पर बहस चल रही थी. विपक्षी नेता अकाकी बोबोखिज़े ने बोलते-बोलते सामने वाली पार्टी को गाली दे दी. इसपर ऐतराज़ जताया गया तो कुछ और गालियां दी गईं. फिर क्या था, सांसदों ने अपनी सीट छोड़ी और लड़ाई के मैदान में कूद गए. लात-घूंसे और माइक से अटैक होने लगा. जब झगड़ा शांत हुआ, तब तक तीन नेता बुरी तरह घायल हो चुके थे. फिर डॉक्टर्स को बुलाकर उनका इलाज कराया गया.

जॉर्जिया की संसद में हुई मारपीट का दृश्य.

अब साउथ अफ़्रीका की कहानी सुन लीजिए. फ़रवरी 2015 की बात है. उस समय के राष्ट्रपति जैकब ज़ुमा संसद में राष्ट्र के नाम संबोधन दे रहे थे. तभी इकोनॉमिक फ़्रीडम फ़ाइटर्स पार्टी के सांसदों ने शोर मचाना शुरू किया. स्पीकर ने कहा कि चुप बैठिए. वे नहीं माने. फिर उन्हें बाहर निकलने का आदेश दिया गया. इस आदेश को भी उन्होंने अनसुना कर दिया. तब उन्हें निकालने के लिए पुलिस बुलाई गई. EFF के सांसदों ने पुलिस के साथ भी जमकर मारपीट की. बहुत देर तक चले हंगामे के बाद उन्हें बाहर निकाला जा सका.

साउथ अफ़्रीका में सांसद सुरक्षाकर्मियों से ही उलझ गए थे.

साउथ अफ़्रीका का हाल सुना, अब चलते हैं रूस के पड़ोसी देश यूक्रेन. तारीख़ थी 11 दिसंबर 2015 की. जगह राजधानी किएव स्थित यूक्रेन की संसद. प्रधानमंत्री अर्सेनी यात्सेन्युक पोडियम पर खडे़ भाषण दे रहे थे. बीच में ही एक विपक्षी सांसद उठकर मंच के पास आ गए. उनके हाथ में गुलाब के फूलों वाला बढ़िया सा बुके थे. प्रधानमंत्री बुके लेकर मुस्कुराए. तभी सांसद महोदय ने उन्हें गोद में उठा लिया और ज़बरदस्ती मंच से उतारने लगे. इसके बाद वही हुआ, जो होता आया था. 

यूक्रेन की संसद में मारपीट की घटनाएं बेहद आम है.

यूक्रेन की संसद में मारपीट की घटनाएं इतनी आम हैं कि वहां एक मज़ाक ख़ूब प्रचलित है-

‘अगर आपको यूक्रेन में सांसद बनना है तो आपके पास दो साल WWE में लड़ने का अनुभव ज़रूर होना चाहिए.’

वीडियो: दुनियादारी: पाकिस्तान में पोलियो वैक्सीनेशन सफ़ल क्यों नहीं हुआ, कोरोना का क्या होगा?

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