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PoK में बन रहे दियामेर भाषा डैम की पूरी कहानी, जिसका भारत विरोध कर रहा है

पाकिस्तान सरकार ने सिंधु नदी पर दियामेर भाषा बांध (Diamer Bhasha Dam) के निर्माण के लिए चीन की एक सरकारी कंपनी और अपनी सेना के वाणिज्यिक अंग के साथ 442 अरब रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में सिंधु नदी पर बनने वाले इस डैम का भारत कई बरस से विरोध कर रहा है. एक बार फिर भारत ने इस पर एतराज जताया है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्त ने कहा,

‘हमारा रुख सतत और स्पष्ट रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों का पूरा क्षेत्र भारत का अविभाज्य अंग रहा है, है और रहेगा. हमने पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र में सभी ऐसी परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान और चीन के सामने लगातार अपना विरोध जताया है और चिंता रखी है.

दियामेर भाषा बांध परियोजना है क्या? भारत क्यों इसका विरोध करता रहा है. पाकिस्तान क्यों लगातार इस डैम को बनाने की कोशिश में लगा है. पाकिस्तान को इस बांध से क्या हासिल होगा. इन्ही सब मुद्दों पर एक-एक कर बात करेंगे.

चीन की सरकारी कंपनी को ठेका

अगर यह बांध बनता है, तो इसकी ऊंचाई 272 मीटर यानी 892 फीट होगी. यह दुनिया का छठा सबसे ऊंचा बांध होगा. पाकिस्तानी अखबार डॉन की खबर के मुताबिक, दियामेर भाषा बांध चीन की सरकारी कंपनी चाइना पावर और पाकिस्तान की सेना की यूनिट फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन मिलकर बना रहे हैं. इसमें चाइना पावर की हिस्सेदारी 70 फीसदी, जबकि फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है. साइन किए गए कॉन्ट्रैक्ट के तहत डायवर्जन प्रणाली, मुख्य बांध, पहुंच बांध और 21 मेगावाट जल बिजली परियोजना का निर्माण किया जाएगा.

Dam
इस डैम को बनाने का विचार 2000 के दशक में आया था, लेकिन फंडिग की वजह से लटकता चला गया. (प्रतीकात्मक फोटो)

272 मीटर ऊंचाई वाला आठ मिलियन एकड़ फुट (एमएएफ) जलाशय का निर्माण किया जाएगा, जो कि दुनिया का सबसे ऊंचा रोलर कॉम्पैक्ट कंक्रीट (आरसीसी) बांध होगा. इसमें एक स्पिलवे, 14 गेट और गाद को बाहर निकालने के लिए पांच आउटलेट होंगे. डायवर्जन प्रणाली में दो सुरंगें और एक डायवर्जन नहर शामिल होगी. पुल का निर्माण बांध ढांचे के नीचे के प्रवाह की ओर होगा. वहीं 21 मेगावाट ऊर्जा संयंत्र का निर्माण, निर्माण के दौरान परियोजना की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा.

2028 में पूरी होगी परियोजना

बांध का निर्माण कार्य कुछ सप्ताह में शुरू होगा. परियोजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमीर बशीर चौधरी और चाइना पावर के अधिकृत प्रतिनिधि यांग जियांदू ने जल एवं विद्युत विकास प्राधिकरण (वाप्दा) और संयुक्त उद्यम की ओर से समझौते पर हस्ताक्षर किए. वाप्दा के अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि देश की बढ़ती पानी और बिजली की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बांध का निर्माण समय-सीमा के अनुसार पूरा किया जाएगा. उन्होंने कहा कि लगभग 1,406.5 अरब रुपये खर्च होगा. बांध परियोजना 2028 में पूरी होगी.

पाकिस्तान को क्या फायदा होगा?

सूचना और प्रसारण मामले में प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सलाहकार रिटायर्ड जनरल असीम सलीम बाजवा ने ट्वीट किया. लिखा कि दियामेर भाषा डैम का कंस्ट्रक्शन शुरू होने की खबर पाकिस्तान की हर पीढ़ी के लिए ऐतिहासिक खबर है. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम है. इस बांध के निर्माण से 16,500 नौकरियां पैदा होंगी. 4500 मेगावॉट बिजली बनेगी. 1.2 मिलियन यानी 12 लाख एकड़ कृषि भूमि को सिंचित करेगी. और तर्बेला डैम की उम्र 35 साल बढ़ जाएगी.

परियोजना नई नहीं

हालांकि डैम बनाने की परियोजना नई नहीं है. 2000 के दशक की शुरुआत में एक विचार के रूप में पेश किया गया था. बांध को बनाने के लिए पाकिस्तान एक दशक से ज्यादा समय से कोशिश कर रहा है. काउंसिल ऑफ कॉमन इंटरेस्ट्स (CCI) ने 2010 में निर्माण के लिए परियोजना को मंजूरी दे दी थी. जमीन अधिग्रहण और अन्य मदों में पाकिस्तान पहले ही इस परियोजना पर 170 बिलियन पाकिस्तानी रुपया खर्च कर चुका है.

सबसे बड़ी दिक्कत फंड को लेकर हुई. पीओके में डैम बनाने का भारत ने भी लगातार विरोध किया. इससे काम आगे नहीं बढ़ पाया. एक समय पाकिस्तान कर्ज लेकर इस डैम को बनाना चाहता था. लेकिन 2014 में विश्व बैंक ने पाकिस्तान को मदद देने से मना कर दिया, क्योंकि भारत ने आपत्ति जताई थी. इस डैम का निर्माण गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में होना था. भारत इस इलाके को जम्मू-कश्मीर का हिस्सा मानता है. इसके बाद 2016 में एशियाई विकास बैंक ने भी पाकिस्तान को 14 अरब डॉलर का कर्ज देने से इनकार कर दिया. इसके बावजूद दिसंबर 2016 में पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ ने सैद्धांतिक तौर पर इस परियोजा को मंजूरी दी, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी.

चीन की मदद पाकिस्तान ने ठुकरा दी

इसके बाद चीन ने इस डैम को बनाने की पेशकश पाकिस्तान के सामने की थी. चीन इस डैम को China–Pakistan Economic Corridor – CPEC प्रॉजेक्ट के तहत बनाना चाहता था, लेकिन पाकिस्तान ने इस प्रोजेक्ट से डैम प्रॉजेक्ट को बाहर रखने के लिए कहा. नवंबर 2017 में पाकिस्तान के वॉटर ऐंड पावर डिवेलपमेंट अथॉरिटी के सदर मुजम्मिल हुसैन ने कहा था कि डैम के लिए आर्थिक मदद देने की चीन की शर्तें मानने योग्य नहीं थीं. और यह पाकिस्तान के हितों के खिलाफ थीं.

सुप्रीम कोर्ट के जज ने फंड जुटाने का आदेश दिया

जुलाई 2018 में पाकिस्तान के तत्कालीन चीफ जस्टिस साकिब निसार ने इस डैम प्रोजेक्ट के लिए पब्लिक फंड गठित करने का आदेश दिया था. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 तक पाकिस्तान में पानी की कमी पर एक रिपोर्ट के बाद उन्होंने पब्लिक फंड गठिन करने का आदेश दिया था. चीफ जस्टिस ने खुद 10 लाख पाकिस्तानी रुपये दान किए थे. सेना के साथ कई लोग इसके लिए आगे आए थे.

भारत का कहना है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र में सभी ऐसी परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान और चीन के सामने लगातार अपना विरोध जताया है और चिंता रखी है. (फाइल फोटो)
भारत का कहना है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र में सभी ऐसी परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान और चीन के सामने लगातार अपना विरोध जताया है और चिंता रखी है. (फाइल फोटो)

पाकिस्तान का पीएम बनने के बाद इमरान ख़ान ने राष्ट्र के नाम दूसरे संबोधन में बांध के लिए सुप्रीम कोर्ट की पहल पर जुटाए जा रहे फंड का भी ज़िक्र किया था. इमरान ख़ान ने विदेशों में बसे पाकिस्तानियों से इस बांध के निर्माण में आर्थिक मदद देने की अपील की थी. हालांकि लोगों के चंदे के पैसे से बांध बनाने की कोशिश की अलग-अलग स्तरों पर आलोचना हुई. कहा गया कि इतने बड़े प्रोजेक्ट का निर्माण इस तरह के चंदे से नहीं किया जा सकता है. हालांकि ऐसी आलोचनाओं को जस्टिस निसार ने सिरे से ख़ारिज कर दिया था. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि जो भी इस कोशिश का विरोध कर रहा है, वो देशद्रोही हैं.

अब इस बांध को बनाने के लिए पाकिस्तान ने कॉन्ट्रैक्ट पर साइन कर दिए हैं.


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