Submit your post

Follow Us

इस ड्रग्स बेचने वाले शातिर को पकड़ने में 7 साल क्यों लग गए?

आपने पाब्लो एस्कोबार का नाम सुना है! दक्षिण अमेरिका के उत्तर में एक देश है कोलंबिया. एस्कोबार वहां के ड्रग बिजनेस का राजा था. उसके बारे में बहुत सारे मिथ चलते हैं. मसलन, ये कि उसने अपनी बेटी को सर्दी से बचाने के लिए 13 करोड़ रुपये के नोट्स जला दिए थे.

मसलन, एक समय अमेरिका में जाने वाली 80 फीसदी कोकीन एस्कोबार के यहां से जाती थी. वो सरकारी अफ़सरों से पूछता था – पैसे या गोली? जो अफ़सर हाथ मिला लेता, उसे मालामाल कर दिया जाता. जो आनाकानी करता, उसकी हत्या कर दी जाती थी.

फिर, एक दिन स्पेशल फ़ोर्सेज़ ने एस्कोबार को मार गिराया. चर्चा चली कि कोलंबिया का ड्रग्स बिजनेस खत्म हो गया है. अब कोई ऐसा काम करने की हिम्मत नहीं करेगा. लेकिन ये दावे ग़लत साबित हुए. एक गुरिल्ला लड़ाका उसकी विरासत को संभालने के लिए तैयार था.

जिसने हैवानियत के मामले में एस्कोबार को भी बौना कर दिया. जिसे तीन मुल्कों की पुलिस ने मिलकर तलाशा. करोड़ों का ईनाम भी घोषित किया. लेकिन पकड़ने में सात बरस लग गए. जब वो पकड़ा गया तो राष्ट्रपति को ख़ुद सामने आकर ऐलान करना पड़ा.

आज हम कोलंबिया के ड्रग तस्कर डेरो अन्टोनियो उसुगा डेविड उर्फ़ ‘ओतोनिएल’ की कहानी जानेंगे. ये भी बताएंगे कि ओतोनिएल आज के दिन चर्चा में क्यों है?

पहले इतिहास की बात.

साल 1971. तारीख़ 15 सितंबर. उत्तरी कोलंबिया के एक ग़रीब किसान परिवार में ओतोनिएल का जन्म हुआ. जब वो बड़ा हो रहा था, उसके आस-पास लेफ़्ट-विंग के कई गुरिल्ला संगठन तैयार हो रहे थे. इनमें से एक थी, पॉपुलर लिबरेशन आर्मी (EPL). जब वो 18 बरस का हुआ तो उसने EPL की मेंबरशिप ले ली.

एक कहावत है ना कि एक जंगल में दो शेर नहीं रह सकते. अगर किसी ने एक-दूसरे की सीमा लांघी तो ख़ून-ख़राबा होगा. उत्तरी कोलंबिया के उस इलाके में तो कई शेर थे. टकराव होना लाज़िमी था. हुआ भी. EPL को एक दूसरे गुरिल्ला संगठन ने पीछे छोड़ दिया. उस गुट का नाम था, रेवॉल्युशनरी ऑर्म्ड फ़ोर्सेज़ ऑफ़ कोलंबिया (FARC). 1991 आते-आते EPL के सदस्य अलग-थलग पड़ने लगे. जो बच गए, FARC ने उनको मारना शुरू कर दिया.

ओतोनिएल चालाक था. उसने नियति को भांप लिया था. इसलिए, उसने अपने भाई के साथ साइड बदल ली. लेकिन FARC के साथ भी उसका रिश्ता लंबे समय तक नहीं चला. 1995 में कोलंबिया की सेना ने राइट-विंग के लड़ाकों की मदद से FARC को मिटाने का अभियान चलाया. ओतोनिएल ने फिर साइड बदल ली.

अब वो यूनाइटेड सेल्फ़-डिफ़ेंसस फ़ोर्सेज़ ऑफ़ कोलंबिया (AUC) का मेंबर बन गया. AUC का दावा था कि उसके लड़ाकों ने आत्म-रक्षा में हथियार उठाए हैं. लेकिन असल में ये गैंग ड्रग्स की तस्करी करता था. इस गैंग के लोग मंत्रियों और ज़मींदारों के इशारे पर लोगों की हत्या और किडनैपिंग किया करते थे. AUC में पैसे का लेन-देन देखने वाला आदमी था, डॉन मारियो. ओतोनिएल और उसका भाई उसी के अंडर काम करने लगे.

फिर आया साल 2003 का. AUC ने सरकार के साथ शांति समझौता किया. उसके लड़ाकों ने हथियार डाल दिए. सरकार ने वादा किया कि ग्रुप के लोगों को कम सज़ा दी जाएगी. उन्हें अमेरिका प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा. लेकिन 2006 में सरकार वादे से मुकर गई. उसने AUC के टॉप लीडर्स को अरेस्ट करने का आदेश जारी कर दिया. इससे ग्रुप के लोग नाराज़ हो गए. उन्होंने फिर से हथियार उठा लिया.

उन्होंने मिलकर नया गुट बनाया. इसे नाम दिया गया, उराबेनोज़. इसी को गल्फ़ कार्टेल के नाम से जाना जाता है. डॉन मारियो इसका सरगना था. ओतोनिएल और उसका भाई जियोवानी गैंग में दूसरे नंबर पर थे. 2009 में डॉन मारियो गिरफ़्तार हो गया. उसके बाद गल्फ़ कार्टेल की पूरी ज़िम्मेदारी दोनों भाईयों पर आ गई.

कुछ सालों तक तो सब सामान्य रहा. फिर एक घटना हो गई. साल था 2012 का. जियोवानी के महल में न्यू ईयर पार्टी चल रही थी. इसकी जानकारी पुलिस को मिल गई. पुलिस ने पूरी ताक़त से धावा बोला. हेलिकॉप्टर्स की मदद भी ली गई. पुलिस जियोवानी और ओतोनिएल को गिरफ़्तार करने आई थी. लेकिन उन्होंने पुलिस पर गोली चला दी. मज़बूरन पुलिस को जवाब देना पड़ा. इसमें जियोवानी मारा गया. मगर ओतोनिएल का कोई अता-पता नहीं था. वो वहां से गायब हो चुका था.

वो कुछ दिनों तक छिपा रहा. फिर उसने असली खेल शुरू किया. भाई की मौत का बदला लेने के लिए उसने पूरे इलाके में हिंसा की. पुलिसवालों और आम लोगों की बेरहमी से हत्या की गई. ओतोनिएल अपनी बादशाहत साबित करना चाहता था.

जब हिंसा बहुत बढ़ गई तो सरकार ने ऑपरेशन अगामेडॉन लॉन्च किया. ये कोलंबिया के इतिहास का सबसे बड़ा मैनहंट माना जाता है. पाब्लो एस्कोबार को पकड़ने के लिए पांच सौ पुलिसवाले लगाए गए थे. जबकि ओतोनिएल के लिए 12 सौ लोगों की पुलिस फ़ोर्स लगाई गई. उनके साथ मिलिटरी भी थी.

तमाम कोशिशों के बावजूद ओतोनिएल को नहीं पकड़ा जा सका. उसके छिपने का तरीका बिल्कुल अलग था. वो कभी अपने घर में नहीं सोता था. जिस इलाके में वो रहता था, वहां हर एक किसान परिवार को ओतोनिएल के लिए अलग से एक कमरा बनवाना होता था. वो किसी इलेक्ट्रॉनिक गैज़ेट का इस्तेमाल नहीं करता था. उसने पूरे इलाके में प्रशिक्षित कुत्ते छोड़े हुए थे.

इन वजहों से ऑपरेशन अगामेडॉन बुरी तरह फ़ेल हो गया. इससे सरकार की बड़ी बदनामी हुई. मार्च 2015 में ओतोनिएल को पकड़ने का मिशन दोबारा शुरू किया गया. सरकार ने ईनामी राशि दोगुनी कर दी. अमेरिका ने पहले से ही उसके ऊपर 37 करोड़ रुपये का ईनाम घोषित किया हुआ था.

कोलंबिया के तत्कालीन राष्ट्रपति मैनुएल सैंटोस ने साफ़ लहजे में आदेश दिया, जब तक ओतोनिएल पकड़ा नहीं जाता, तब तक वापस मत आना.

सात सालों तक दर-दर भटकने के बाद कोलंबिया पुलिस कामयाब हो गई. 23 अक्टूबर 2021 को ओतोनिएल को गिरफ़्तार कर लिया गया. इस ऑपरेशन में अमेरिका और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों ने भी मदद की. तब जाकर उसे लोकेट किया जा सका.

जब वो पकड़ा गया, तब कोलंबिया के राष्ट्रपति ने ख़ुद प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. उन्होंने कहा,

ये ऐतिहासिक है. इस गिरफ़्तारी की तुलना सिर्फ़ ऑपरेशन पाब्लो एस्कोबार से की जा सकती है.

आज हम ओतोनिएल की कहानी क्यों सुना रहे हैं?

दरअसल, अमेरिका ने ओतोनिएल को अपने यहां लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. उसने कोलंबिया सरकार के पास अर्ज़ी दाखिल कर दी है. अब प्रत्यर्पण का मामला सुप्रीम कोर्ट जाएगा. वहां से मंज़ूरी मिलते ही उसे अमेरिका भेज दिया जाएगा.

उस पर अमेरिका में सैकड़ों टन कोकीन की तस्करी करने, पुलिसवालों की हत्या और बच्चों को अपराध में शामिल करने का आरोप है. उसे फिलहाल राजधानी बोगोटा के एक मिलिटरी बेस पर रखा गया है. उसे किसी से मिलने-जुलने की इजाजत नहीं है.

कुछ लोगों की मांग है कि ओतोनिएल पर कोलंबिया में ही मुकदमा चले. वहां उस पर हत्या, बलात्कार, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी और ज़मीन हथियाने का आरोप है.

ओतोनिएल जिन किसान परिवारों के घरों में रुकता था, वो वहां छोटी-छोटी बच्चियों का बलात्कार भी करता था. रिपोर्ट्स के अनुसार, उसके ऊपर कम-से-कम पांच सौ बच्चियों और महिलाओं के यौन शोषण का आरोप है.

फिलहाल, ये तो नहीं पता कि ओतोनिएल को उसके गुनाहों की उचित सज़ा मिलेगी या नहीं. लेकिन इतना ज़रूर है कि वो अब कभी जेल से बाहर नहीं आ पाएगा. क्या ओतोनिएल का अंत कोलंबिया में ड्रग्स के व्यापार को बंद करा देगा, ये कहना दिवास्वप्न के जैसा ही होगा.

ओतोनिएल के चैप्टर को यहीं पर विराम देते हैं. अब चलते हैं अमेरिका की तरफ़.

अमेरिका में नवंबर के चौथे गुरुवार को एक ख़ास त्यौहार मनाया जाता है. थैंक्सगिविंग. इस दिन लोग दूर-दूर से यात्रा करके अपने परिजनों से मिलने आते हैं.

बढ़िया किस्म का भोज करते हैं. जुलूस-वुलूस भी निकलता है. अमेरिका के राष्ट्रपति भी इन कार्यक्रमों में शामिल होते हैं. कुल जमा बात ये कि थैंक्सगिविंग में हंसी-खुशी का माहौल होता है.

इस जश्न की वजह एक मिथ्या धारणा है. जानकार बताते हैं कि अधिकतर अमेरिकी जनता में भ्रामक जानकारी फैलाई गई है. स्कूलों में जो इतिहास पढ़ाया गया, उसमें सिक्के के दूसरे पहलू को छिपा लिया गया.

थैंक्सगिविंग को लेकर प्रचलित धारणा क्या है?

1620 के साल में यूरोप से 38 गोरे पिलग्रिम्स अमेरिका आए. जब उनका जहाज तट पर लगा तो स्थानीय लोग बेहद खुश हुए. उन्होंने मेहमानों का स्वागत किया. उनके सम्मान में भोज का आयोजन किया. उन्हें नई ज़मीन पर रहने के गुर दिए. और, फिर गायब हो गए.

दावा किया जाता है कि स्थानीय लोगों ने अमेरिका को गोरे लोगों के हवाले कर दिया. ताकि वे इस ज़मीन को सभ्य, स्वतंत्र, उदार और ईसाई धर्म के प्रति वफ़ादार बना सकें. मतलब ये कि स्थानीय लोगों ने ख़ुद को यूरोप के चरणों में बिछा दिया. उसी के उपलक्ष्य में थैंक्सगिविंग की शुरुआत हुई.

ये तो हुआ एक पहलू. सिक्के के दूसरी तरफ़ क्या है?

दरअसल, 1614 में अंग्रेज़ों ने वैम्पेनोएग क़बीले के कुछ लोगों को बहकाया. उन्हें अपने साथ स्पेन ले गए. अंग्रेज़ उन्हें ग़ुलाम बनाकर बेचना चाहते थे.

जब तक वे लोग बचकर वापस लौटे, कबीले के दो-तिहाई लोग मारे जा चुके थे. कभी आबाद रहे गांव मरघट बन चुके थे. इसके पीछे एक बड़ा कारण था, स्मॉल पॉक्स और येलो फ़ीवर. ये बीमारी अंग्रेज़ अपने साथ लाए थे. इसके अलावा, अंग्रेज़ों ने ज़मीन क़ब्ज़ाने के लिए मूल निवासियों को बेरहमी से मार दिया.

अंग्रेज़ो को ठंड से बचने और उस जगह पर फसल उपजाने का आइडिया स्थानीय लोगों ने ही दिया था. जब पहली फसल हुई तो उसके उपलक्ष्य में भोज का आयोजन भी किया गया. लेकिन स्थानीय लोगों को इसमें शामिल नहीं किया गया.

मूल निवासियों की जो पीढ़ी गोरे अंग्रेज़ों के दमन से बच गई, उनके लिए ये आयोजन ‘शोकपर्व’ की तरह होता है. इस साल थैंक्सगिविंग के चार सौ साल पूरे हो गए. मूल निवासियों के लिए, ये मौका नरसंहार और संस्कृति पर हमले की दुखद याद लेकर आया है.


इंग्लैंड क्रिकेट में नस्लभेद की कहानियों ने हैरान कर दिया है

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

'द्रविड़ ने बहुत नाजुक शब्दों से मुझे धराशायी कर दिया था'

'द्रविड़ ने बहुत नाजुक शब्दों से मुझे धराशायी कर दिया था'

रामचंद्र गुहा की किताब 'क्रिकेट का कॉमनवेल्थ' के कुछ अंश.

पहले स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर की कहानी, जिनका सबसे हिट रोल उनके लिए शाप बन गया

पहले स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर की कहानी, जिनका सबसे हिट रोल उनके लिए शाप बन गया

शुद्ध और असली स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर करियर ग्राफ़ बाद में गिरता ही चला गया.

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.