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'ग्रीन बुक': 2019 के ऑस्कर की सबसे मनोरंजक और मन अच्छा कर जाने वाली फिल्म

'ऑस्कर वाली फ़िल्में' सीरीज [सीज़न-2] में पहली फिल्म है डायरेक्टर पीटर फैरेली की Green Book.

” हां, मैं एक महल में रहता हूं! अकेला. और रईस वाइट लोग मुझे उनके लिए पियानो बजाने देते हैं, क्योंकि इससे उनको महसूस होता है कि वे कोई सभ्य लोग हैं. लेकिन जब मैं उस स्टेज से उतरता हूं तो मैं उनके लिए फिर वही कोई अश्वेत (अस्पृश्य, उनसे नीची नस्ल का एक नीग्रो) बन जाता हूं क्योंकि यही उन लोगों की असली सभ्यता है. और इस पीड़ा को मैं अकेले ही भोगता हूं क्योंकि मैं, मेरे अपने ही लोगों के बीच स्वीकार्य नहीं हूं क्योंकि मैं उनके जैसा भी नहीं हूं! तो अगर मैं पर्याप्त रूप से ब्लैक नहीं हूं, पर्याप्त रूप से वाइट नहीं हूं, और पर्याप्त रूप से पुरुष नहीं हूं तो फिर मैं क्या हूं?! “

– डॉन शर्ली, एक प्रसिद्ध लेकिन ब्लैक पियानिस्ट. उनकी आवाज में वेदना है. आक्रोश है. अंदर छटपटाहट है. आंखों में पानी है. पुलिस की बर्बरता और वाइट अमेरिकियों द्वारा की गई छूआछूत ने उन्हें जितना अस्थिर नहीं किया उतना ड्राइवर-बाउंसर टोनी की उस बात ने कि तुम तो एक महल में रहते हो, सिंहासन पर बैठते हो, अपनी अश्वेत कम्युनिटी तक के बारे में नहीं जानते फिर खुद को ब्लैक कैसे कहते हो, तुमसे ज्यादा ब्लैक तो (इटैलियन वाइट होने के बावजूद) मैं हूं.

ये बात 1962 से शुरू होती है. टोनी वैलेलॉन्गा (वीगो मोर्टेन्सन) से. बकवास करने, मतलब होठ (lip) चलाने की कुशलता के कारण उसे बचपन से ही टोनी लिप बुलाया जाता है. वो न्यू यॉर्क शहर के सबसे योग्य बाउंसरों में गिना जाता है. यहां के क्लब कोपाकबाना में काम करता है. नवंबर-दिसंबर में क्लब मरम्मत के लिए बंद हो जाता है तो दो महीने टोनी खाली हो जाता है.

इस बीच उसे पता चलता है कि एक डॉक्टर को ड्राइवर की जरूरत है. वो इंटरव्यू देने जाता है. शहर के मशहूर कार्नेगी हॉल के ऊपर बने एक आलीशान फ्लैट में. इंटरव्यू लेने वाले सज्जन की जब कमरे में एंट्री होती है तो टोनी हैरान रह जाता है. उसने कल्पना नहीं की थी कि वो कोई ब्लैक आदमी होगा. क्योंकि ब्लैक लोगों की छवि अमेरिका में नौकरों, दरबानों और कपास के खेतों में काम करने वाले मजदूरों की ही है. लेकिन ये ब्लैक आदमी तो शीर्ष पर है. ख़ैर, टोनी खुद को संयमित रखता है. डॉ. डॉनल्ड शर्ली (मेहरशाला अली) जिन्हें डॉन शर्ली कहा जाता है, वो उसका इंटरव्यू लेते हैं. वो एक जाने-माने कॉन्सर्ट पियानिस्ट हैं.

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डॉ. शर्ली ने अपनी रिकॉर्ड कंपनी के साथ साउथ अमेरिका का एक म्यूजिक टूअर प्लान किया. साउथ अमेरिका में अश्वेतों के प्रति नस्लभेद की परंपराएं सबसे ज्यादा हैं और अंदरूनी गांवों, कस्बों यानी डीप साउथ में तो अश्वेतों को जान का खतरा भी है. शुरुआती ना-नुकुर के बाद टोनी उनका ड्राइवर और बॉडीगार्ड बनना कुबूल करता है. दोनों आठ हफ्ते की इस जर्नी पर निकलते हैं. जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, एक-दूसरे को ज्यादा बेहतरी से समझते जाते हैं. लौटते हैं तो मन एकदम निर्मल हो चुका होता है और दोनों ताउम्र के दोस्त बन चुके होते हैं.

वैसे 2018 में ‘इफ बील स्ट्रीट कुड टॉक’, ‘ब्लैक पैंथर’ और ‘ब्लैकक्लांसमैन’ जैसी ब्लैक लोगों की प्रतिनिधि फिल्में भी बनीं जिन्हें इस साल के ऑस्कर में नामांकित किया गया है, लेकिन ‘ग्रीन बुक’ शायद इन सबसे अधिक दीर्घकालिक है. ये सरल है, बहुत गुदगुदाती रहती है, हंसाती है, रुलाती है और दर्शकों को मानवीय बनाने की कोशिश करती है. और फिल्म ये सब करती है बावजूद इसके कि इसका विषय बहुत कठोर है. इसमें हम अमेरिका के उस दौर को raw तौर पर देखते हैं जहां मुल्क का राष्ट्रपति तक जिस आर्टिस्ट (डॉ. शर्ली) का सम्मान करता है उसे दो कस्बाई पुलिसवाले पकड़कर जेल में डाल देते हैं क्योंकि वो ब्लैक है और गाड़ी के पीछे कैसे बैठा है? उसका ड्राइवर वाइट कैसे है? इस इलाके में खुला घूमने की छूट उसे किसने दी? उसे पीटा भी जाता है.

जब डॉ. शर्ली, टोनी को उसकी वाइफ को लेटर लिखने में मदद करते हैं. ये लेटर इतने भावुक करने वाले और रोमैंटिक होते हैं कि घर पर दूसरी औरतें भी अपने पतियों से कहती हैं हमें भी ऐसे ख़त चाहिए.
जब डॉ. शर्ली, टोनी को उसकी वाइफ को लेटर लिखने में मदद करते हैं. ये लेटर इतने भावुक करने वाले और रोमैंटिक होते हैं कि घर पर दूसरी औरतें भी अपने पतियों से कहती हैं हमें भी ऐसे ख़त चाहिए.

क्रिसमस से पहले जिस बड़ी होटल में उनका आखिरी परफॉर्मेंस होता है वहां भव्य डिनर में उनके साथी (गोरे) कलावंत और ड्राइवर तक बैठकर खाना खाते हैं, लेकिन शर्ली जो कि स्टार परफॉर्मर है, उन्हें खाने की मनाही है क्योंकि वो ब्लैक हैं. उन्हें एक सम्मानजनक ड्रेसिंग रूम भी नहीं मिलता बल्कि एक छोटा सा स्टोररूम दिया जाता है. एक बार में वो शराब पीने जाते हैं तो वहां तीन-चार लोग पकड़कर पीटते हैं कि सूट-बूट में ये बंदर कहां से आ गया. एक बार, एक वाइट पुरुष के साथ समलैंगिक संबंध बनाते हुए पुलिसवाले उन्हें पकड़ लेते हैं, मारते-पीटते हैं और निर्वस्त्र फर्श के बैठाए रखते हैं.

ये कहानी दरअसल असली है. डॉन शर्ली जाने-माने कंपोजर और पियानिस्ट हुए हैं. फ्रेंच ओपरा ‘ऑरफीयस इन द अंडरवर्ल्ड’ पर आधारित उनका इंप्रोवाइज्ड रिकॉर्ड सुनकर आनंद लिया जा सकता है. यही वो रिकॉर्ड है जिसके बारे में एक सीन में भोला टोनी कहता है – “जब तुमने मुझे हायर किया था, तो मेरी वाइफ तुम्हारे रिकॉर्ड को लेने गई जो ऑर्फन्स (अनाथों) के बारे में था जिसके कवर पर कुछ बच्चे कैंपफायर के इर्द-गिर्द बैठे हैं.” जिसे डॉन शर्ली सही करते हुए कहते हैं कि वो ऑर्फन नहीं ऑरफीयस है, और वो बच्चे नहीं शैतान है जो नरक की कटोरे में बैठे हैं. शर्ली अपने दौर के विद्वान, संपन्न और बेहद सफल ब्लैक लोगों में से एक थे जिन्होंने तब के हिंसक डीप साउथ अमेरिका के टूअर किए ताकि नस्लभेदियों की मनस्थिति में चोट कर सकें. इस सफर में उनका साथ दिया टोनी ने.

‘ग्रीन बुक’ को डायरेक्ट किया है पीटर फैरेली ने जिनकी पहली फिल्म थी 1994 में आई कॉमेडी ‘डम्ब एंड डम्बर’ जिसमें जिम कैरी और जेफ डैनियल्स ने निरपराध और निरे मूर्ख दोस्तों के रोल किए थे. पीटर ने करीब 25 साल के करियर में ऐसी कॉमेडीज़ ही बनाने की कोशिश की है, ये फिल्म पहली है जिसके केंद्र में ठोस सामाजिक-मानवीय विषय है. फिल्म की कहानी निक वैलेलॉन्गा ने लिखी है जो टोनी के ही बेटे हैं. स्क्रिप्ट उन्होंने, पीटर और एक अन्य सज्जन ने मिलकर लिखी है. पीटर का ट्रीटमेंट उम्दा है. वो गुदगुदाते हुए, बड़े ही सरल ढंग से इतने बड़े मसले को पेश कर जाते हैं.

डॉन शर्ली का रोल करने वाले मेहरशाला अली सबसे पहले ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’ में लॉबीस्ट और वकील रेनी डेंटन के रोल से उभरे थे. फिर वो मार्वल की वेब सीरीज ‘लूक केज’ में प्रभावी दिखे. और 2017 में उन्होंने बैरी जेनकिन्स की कठोर फिल्म ‘मूनलाइट’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का ऑस्कर जीता था ही. अब ‘ग्रीन बुक’ के लिए दूसरा ऑस्कर जीते हैं. टोनी लिप का रोल करने वाले वीगो मोर्टेन्सन को हम ‘द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ फिल्म सीरीज में एरेगॉन के पात्र से जानते ही हैं.

इस फिल्म के नाम का मतलब वो ‘नीग्रो मोटरिस्ट ग्रीन बुक’ है जिसे कई दशक तक अश्वेत हमेशा साथ रखा करते थे. इसमें ऐसे मोटेल, गैस स्टेशन, खाने-पीने की जगहों और संपर्कों का ब्यौरा था जिनका उपयोग नीग्रो लोग अमेरिका में ट्रैवल करते हुए कर सकते थे क्योंकि वाइट प्रतिष्ठानों में उनका प्रवेश/उपयोग वर्जित था. 1936 में पहली बार इस बुक को प्रकाशित करने वाले ब्लैक ट्रैवल राइटर विक्टर ह्यूगो ग्रीन ने किताब के परिचय के आखिर में लिखा था –

“निकट भविष्य में एक दिन ऐसा भी आएगा जब इस गाइड को छापने की जरूरत नहीं होगी. वो तब होगा जब एक नस्ल के तौर पर हम लोगों के पास अमेरिका में समान अवसर और अधिकार होंगे. ये हमारे लिए एक महान दिन होगा जब हम इसके प्रकाशन को बंद करेंगे. तब हम जहां मन होगा जा सकेंगे और बिना किसी बेइज्जती के. लेकिन जब तक वो दिन नहीं आता हम हर साल आप लोगों की सुविधा के लिए ये जानकारी प्रकाशित करते रहेंगे.”

2019 तक आते-आते अब ग्रीन बुक की जरूरत तो अश्वेतों को नहीं रही लेकिन अपने वास्तविक स्वरूप में समानता का इंतजार उन्हें अब भी है.

नवंबर 2018 में ‘ग्रीन बुक’ के रिलीज होने से पांच दिन पहले अमेरिका के इलियनॉय में एक सिक्योरिटी गार्ड जमील रॉबरसन ने अपने बार में लोगों पर गोलियां चला रहे एक शूटर को काबू में किया. पुलिस आई और जमील को ही गोली मार दी. फिल्म रिलीज होने के छह दिन बाद एलेबामा के एक शॉपिंग मॉल में पुलिस ने अपराध के संदेह में अमेंटिक ब्रैडफर्ड जूनियर की पीठ पर तीन गोलियां मारी, बाद में पता चला कि अपराधी कोई और था. ये दोनों मारे गए युवक, ब्लैक थे.

ऑस्कर 2019 में ‘ग्रीन बुक’:
पांच नामांकन मिले. तीन जीते.

बेस्ट पिक्चर – जिम बर्क, चार्ल्स बी. वेज़लर, ब्रायन करी, पीटर फैरेली और निक वैलेलॉन्गा (जीते)
बेस्ट एक्टर – वीगो मॉर्टेन्सन
सपोर्टिंग एक्टर – मेहरशाला अली (जीते)
ओरिजिनल स्क्रीनप्ले – निक वैलेलॉन्गा, ब्रायन करी और पीटर फैरेली (जीते)
फिल्म एडिटिंग – पैट्रिक जे. डॉन वीटो

(विजेताओं की घोषणा 25 फरवरी, सोमवार को ऑस्कर समारोह में की गई. )

सीरीज़ की अन्य फिल्मों के बारे में पढ़ें:
Roma – ये सिंपल सी आर्ट फिल्म क्यों 2018-19 के अवॉर्ड सीज़न में हर जगह जीतती चली गई?
The Favourite – क्या होता है जब एक रानी के 17 बच्चे मारे जाते हैं?
A Star Is Born – इसे देखकर किस हिंदी फिल्म की याद आती है?
BlacKkKlansman – एक फिल्म को देखकर ब्लैक लोगों की लिंचिंग की गई फिर भी महान मानी जाती है!
Bohemian Rhapsody – उस रॉकस्टार की कहानी जो एड्स से मरा और लोग रात भर रोए
Black Panther – बच्चों के सुपरहीरो पर बनी ये फिल्म कट्टर आलोचकों को भी क्यों पसंद आई?
Vice – एक ख़ौफनाक पोलिटिकल फिल्म जो हर वोटर को देखनी चाहिए 

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