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'द फेवरेट': क्या होता है जब एक रानी के 17 बच्चे मारे जाते हैं?

'ऑस्कर वाली फ़िल्में' सीरीज [सीज़न-2] में तीसरी फिल्म है डायरेक्टर योरगोस लेंतिमोस की The Favourite.

” तूने मेरी तरफ देखा?
तूने मेरी तरफ देखा?
मेरी तरफ देखो!!!
तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई (मेरी तरफ देखने की)
बंद करो अपनी आंखें. “

– बच्चों जैसी, अंदर से चोटिल लेकिन एक रानी के तौर पर नाकारा क्वीन ऐन गुस्से में एक दरबान को ये बोलती है जब उसकी प्रेमिका और कार्यभार संभालने वाली सैरा उसका मेकअप देखकर कहती है कि तुम बज्जू के जैसी लग रही हो, वापस जाओ, रूस से आए प्रतिनिधिमंडल से मैं मिल लूंगी. इससे नाराज़, अपने चैंबर में घुसते हुए वो एक कम उम्र के, किशोरवय दरबान को कहती है – तूने मेरी तरफ देखा? उसने नहीं देखा होता न ही अब देख रहा होता है तो आदेश देती है – मेरी तरफ देखो. जब वो आदेश पालन करके नजरें उठाता है तो कहती है – हिम्मत कैसे हुई, बंद करो अपनी आंखें. और वो बेचारा सकपकाकर बंद ही नहीं करता, आंखें मीच लेता है. बहुत लज्ज़तदार, फनी सीन.

ये 1708 का काल है. ब्रिटेन का फ्रांस से युद्ध चल रहा है. मोर्चे पर देश हार रहा है और प्रधानमंत्री राज परिसर में अपने साथियों के साथ बतखों की रेस करवा रहा है. खुश है कि उसकी बतख जीत गई. ये अंधेर नगरी इसलिए क्योंकि चौपट रानी है. क्वीन ऐन (ओलिविया कोलमैन). वो एक दुखी, बीमार इंसान है. पति है नहीं. 17 बार गर्भवती हुई. हर बार बच्चा मर गया. अब कोई क्या कल्पना कर लेगा उसकी पीड़ा. पीड़ा को कम करने के लिए उसने अपने बेडचैंबर में 17 ही खरगोश पाले हैं. ताकि खालीपन दूर हो. दूर नहीं होता. ऐसे में राज्य चलाने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं. मानस के अलावा शारीरिक व्याधियां भी उसे कई हैं. नई-नई बीमारियां होती रहती हैं. तो ऐसे में उसके राज-काज का सारा जिम्मा सैरा (रैचल वाइज़) ने ले रखा है. बहुत होशियार और चालाक है. क्वीन जब कभी राज्य चलाना भी चाहे तो वो उसे रोक देती है. जैसे कोई रिमोट कंट्रोल है उसके पास. वो ऐसा करती है क्योंकि साइकोलॉजिकली वो क्वीन ऐन को घेरे रहती है. ऐन की बीमारी, निजी दुख तो कारण है हीं, एक बड़ा कारण ये कि सैरा ने उसकी प्रेमिका का स्थान ले रखा है. प्रेमी की तरह तरसाकर भी वो अपने काम करवा लेती है. मान लो मंत्रिमंडल में कोई फेरबदल करवाना है या ऐसा ही कुछ.

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लेकिन फिल्म जितनी जल्दी शुरू होती है, उतनी ही जल्दी एंट्री होती है एबीगेल (एमा स्टोन) की. वो सैरा की दूर की बहन है जिसे वो ज्यादा नहीं जानती. एबीगेल जब 15 साल की थी तब उसका पिता ताश के खेल में एक जर्मन आदमी के आगे अपने बेटी को हार गया. एबीगेल को उसके साथ जाना पड़ा. नहीं तो बाप की मार-पिटाई होती. ख़ैर, अब वो आती है. जिंदगी में ठोकरों और शोषण की जगह रहने के अलावा उसने कुछ नहीं देखा. लेकिन आगे की जिंदगी उसे ऐसी नहीं रखनी. जब वो क्वीन ऐन की खऱाब हालत और सैरा को उसका फायदा उठाते देखती है तो वो अपना खेल शुरू करती है. वो ऐन के करीब आने के लिए जोखिम भरी कोशिशें शुरू करती है. उसे इमोशनली हिलाती है. सैरा की तरह ऐन के साथ समलैंगिक संबंध बनाती है.

सैरा को पता चलता है तो वो आगबबूला होती है. टूटती है. लेकिन अब खुला युद्ध है कि दोनों में से कौन क्वीन ऐन का फेवरेट बन पाएगा. भले ही उसके लिए कुछ करना पड़े. किसी को जहर ही क्यों न खिलाना पड़े. ये माहौल कितना विषैला होता है इसका अंदाजा एक सीन से लगाया जा सकता है जहां ऐन और सैरा में संवाद होता है. जब एबीगेल के जाल में ऐन आ चुकी होती है तब सैरा रानी को फिर अपनी मुट्ठी में लाने के लिए ब्लैकमेल करते हुए कहती है –
” मैंने उन बहुत, बहुत सारे ख़तों को देखना शुरू किया है जो तुमने मुझे लिखे थे.
‘मैं तुम्हारे प्रेम आलिंगन में आने को तड़प रही हूं. मैं, अपने शरीर पर पड़ी तुम्हारी नग्न देह से आने वाली गर्माहट के लिए तरस रही हूं.’
ये बहुत गहन ख़त हैं, बहुत कुछ प्रकट करने वाले.
एक-दो दिन पहले, न जाने मैंने उनमें से कुछेक कहां रख दिए थे.
मैं तो बहुत डर गई थी. क्या होता अगर, कहीं उस कुत्ते के बच्चे जोनाथन स्विफ्ट के हाथ वो ख़त लग जाते?
वो तो अगले दिन न्यूज़पेपर में छाप देता. तुम तो बर्बाद हो जाती.
… तुम्हे कोई अंदाजा नहीं है कि मैं अपने देश और तुम्हारे लिए क्या कर डालूंगी.
…मैं उन ख़तों का उपयोग करूंगी अगर तुम टैक्स में बढ़ोतरी की घोषणा नहीं करोगी, जैसे मैं चाहूं वैसे वैसे मंत्रिमंडल को नहीं बदलोगी और उस एबीगेल से छुटकारा नहीं पाओगी.”

इन तीनों की कहानी के भीतर से गुजरती एक महीन रेखा पावर की प्रकृति पर भी अप्रकट कमेंट्री करती चलती है. कि सत्ता या धन के सिंहासन पर बैठने का अहसास दूर से मखमली जरूर लगता है लेकिन वो असल में तेज़ाब सा जलाने वाला है. इस सत्ता को पाना, पाने वाले के लिए जहरीला ही है. क्वीन ऐन तो रानी बनी है तब से इस जहर से विलचित लाश बन ही चुकी है, सैरा और एबीगेल भी जितना इस पावर को चखती हैं, उनकी आत्मा उतनी ही नीली पड़ती जाती है.

एबीगेल (एमा स्टोन) और सैरा (रैचल वाइज़) निशानेबाजी के सेशंस के दौरान बातें करके एक-दूसरे की थाह लेते हैं. एक ऐसे ही सत्र के दौरान सैरा ने एबीगेल पर खाली गन चला दी थी.
एबीगेल (एमा स्टोन) और सैरा (रैचल वाइज़) निशानेबाजी के सेशंस के दौरान बातें करके एक-दूसरे की थाह लेते हैं. एक ऐसे ही सत्र के दौरान सैरा ने एबीगेल पर खाली गन चला दी थी.

इस फिल्म के डायरेक्टर हैं योरगोस लेंतिमोस जो एथेंस, ग्रीस से आते हैं. उनकी पिछली फिल्में ‘द किलिंग ऑफ अ सेक्रेड डियर’ (2017), ‘डॉगटूथ’ (2009) और ‘द लॉब्स्टर’ (2015) कला फिल्म महोत्सवों में बहुत पंसद की गई हैं. ‘द फेवरेट’ उनकी सबसे बड़ी और कमर्शियल फिल्म है, हालांकि उसका ट्रीटमेंट खुले तौर पर कमर्शियल नहीं है. ये फिल्म उनकी पिछली फिल्मों के मुकाबले बहुत सुग्राह्य और कम जटिल है. हालांकि एक किस्म की डार्कनेस इसमें भी है लेकिन वो दर्शकों को यूं असहज नहीं करती.

ओवरऑल ये एक मजेदार फिल्म है जिसकी तीनों लीड एक्ट्रेस प्रमुख फिल्म फेस्टिवल्स में नामांकित हुई हैं. फिल्म देखने के बाद ये कहना मुश्किल है कि तीनों में से सपोर्टिंग एक्ट्रेस कौन है और लीड एक्ट्रेस कौन. हालांकि फिल्म अवॉर्ड्स ने ओलिविया कोलमैन को लीड माना है और रैचल वाइज़, एमा स्टोन को सपोर्टिंग एक्ट्रेस. हालांकि इन दोनों का स्क्रीन टाइम ओलिविया से भी ज्यादा है. ख़ैर. तीनों की एक्टिंग को लेकर अगर किसी आम दर्शक से पूछा जाए तो उसे एमा स्टोन सबसे बेहतर लगे क्योंकि वो सबसे रंगीन, नमकीन और एनिमेटेड है. लेकिन कलात्मक आलोचना के लिहाज से रैचल उनसे बेहतर मानी जाएंगी क्योंकि उनकी अभिव्यक्ति ज्यादा साइलेंट रूप से व्यक्ति हुई है. ओलिविया यूनीक है. वे बेस्ट एक्ट्रेस बाफ्टा और गोल्डन ग्लोब्स में जीत ही चुकी थीं, अब ऑस्कर भी जीत गई हैं. उन्हें सबसे पहले 2007 में आई जोरदार ब्रिटिश कॉमेडी ‘हॉट फज़’ में नोटिस किया था. पुलिस कॉन्स्टेबल का रोल किया था. उसके बाद ‘द आयरन लेडी’ और योरगोस की ‘द लॉब्स्टर’ से लेकर टीवी सीरीज ‘ब्रॉडचर्च’ में उन्हें देखा और पसंद किया. अब ‘द क्राउन’ के तीसरे सीजन में भी उनका प्रवेश होने वाला है.

‘द फेवरेट’ के इस अवॉर्ड सीजन में छाने की कई वजहें उपरोक्त बातों में ढूंढ़ी जा सकती है लेकिन फिल्म की आर्टिस्टिक वैल्यू (जो कि कमतर नहीं है) के बजाय ये फिल्म महत्वपूर्ण इसलिए हो गई है कि मीटू, टाइम्सअप और महिला सशक्तिकरण के जोर के बीच आखिर ऐसी फिल्म बनी है जिसमें एक नहीं तीन-तीन ताकतवर और सुगढ़ महिला किरदार हैं. नैरेटिव को पूरी तरह इनके पात्र चलाते हैं. पुरुष जितने भी फिल्म में हैं वो सब कमजोर ही नजर आते हैं. ये कितना ताकतवर ब्रीफ है कि तीन ऐसी महिलाएं जिन्होंने 18वीं सदी के शुरू में रानी के बेडचैंबर से ब्रिटेन पर शासन किया. ऊपर से ये एकदम सच्ची कहानी है. ऐतिहासिक रूप से अधिकतर ऐसा हुआ था. इसके अलावा फिल्म को लिखने वाली भी महिला ही हैं – डेबरा डेविस. उन्होंने क्वीन ऐन और सैरा के शारीरिक संबंधों की कहानी अखबार की एक छोटी की खबर में पढ़ी थी और उस पर काम करने लगीं. करीब 20 साल की कोशिशों के बाद जाकर ये फिल्म बन पाई है.

ऑस्कर 2019 में ‘द फेवरेट’:
10 नामांकन मिले.

बेस्ट पिक्चर – सीसी डेम्पसी, एड गुइनी, सी मैगीडे और योरगोस लेंतिमोस
बेस्ट डायरेक्टर – योरगोस लेंतिमोस
बेस्ट एक्ट्रेस – ओलिविया कोलमैन (जीती)
सपोर्टिंग एक्ट्रेस – एमा स्टोन
सपोर्टिंग एक्ट्रेस – रैचल वाइज़
ओरिजिनल स्क्रीनप्ले – डेबरा डेविस और टोनी मैकनामरा
सिनेमैटोग्राफी – रॉबी रायन
प्रोडक्शन डिजाइन – फियोना क्रॉम्बी, एलिस फैल्टन
कॉस्ट्यूम डिजाइन – सैंडी पावेल
फिल्म एडिटिंग – योरगोस मैवरॉप्सरीडिस

सीरीज़ की अन्य फिल्मों के बारे में पढ़ें:
Green Book – ऑस्कर 2019 की सबसे मनोरंजक और पॉजिटिव कर देने वाली फिल्म
Roma – ये सिंपल सी आर्ट फिल्म क्यों 2018-19 के अवॉर्ड सीज़न में हर जगह जीतती चली गई?
A Star Is Born – इसे देखकर किस हिंदी फिल्म की याद आती है?
BlacKkKlansman – एक फिल्म को देखकर ब्लैक लोगों की लिंचिंग की गई फिर भी महान मानी जाती है!
Bohemian Rhapsody – उस रॉकस्टार की कहानी जो एड्स से मरा और लोग रात भर रोए
Black Panther – बच्चों के सुपरहीरो पर बनी ये फिल्म कट्टर आलोचकों को भी क्यों पसंद आई?
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