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लहू जमा देने वाली कठोर 'मूनलाइट' इसलिए बनी ऑस्कर-2017 की बेस्ट फिल्म!

89वें एकेडमी पुरस्कार के विनर्स की घोषणा हो गई है. 'द लल्लनटॉप' ने दो महीने पहले प्रडिक्ट किया था और वे फिल्में टॉप विनर्स रहीं.

# Moonlight

“अस्सी का दशक है. अमेरिका में फ्लोरिडा शहर का एक इलाका है लिबर्टी सिटी. यहां अफ्रीकी-अमेरिकी लोग ही रहते हैं. 1930 की आर्थिक मंदी के दौरान राष्ट्रपति रोज़वेल्ट ने इस हाउसिंग प्रोजेक्ट को बनाया था. नाम भी लिबर्टी दिया लेकिन सामाजिक हालात और जीवन ऐसा है कि लिबर्टी कहीं नहीं. कहानी में हम देखते हैं कि अस्सी-नब्बे के दशक में यहां ब्लैक लोगों का जीवन कैसा था – खासकर एक आठ-नौ साल के लड़के शिरॉन का जो बहुत ग़रीब है, जिसकी मां कोकेन के नशे में बेसुध रहती है, जिसे बड़े लड़के पीटते हैं, जिसे कोई प्यार करने वाला साथी या संरक्षक चाहिए लेकिन है ही नहीं. जब वो टीनएजर हो जाता है तब भी उसे अपनी इन पहचानों के कारण बहुत कुछ झेलना पड़ता है. फिर वो अपनी समलैंगिक आइडेंटिटी को भी पाता है. कहानी में उम्र का उसका तीसरा पड़ाव दिखाया जाता है जब वो हट्‌टा-कट्‌टा कड़क नौजवान बनता है.”

इस फिल्म को डायरेक्ट किया है बैरी जेनकिन्स ने. स्क्रीनप्ले (एडेप्टेड) भी उन्होंने ही लिखा है. हमने लिखा था “उन्हें इन दोनों श्रेणियों में नामांकन मिल सकता है” और यही हुआ भी. स्क्रीनप्ले के लिए बैरी के साथ टरैल मैकरेनी को भी नामांकन मिला है. ये फिल्म बेस्टर पिक्चर का टॉप ऑस्कर जीत गई है. पहले गलती से ‘ला ला लैंड’ को बेस्ट पिक्चर घोषित कर दिया गया था लेकिन बाद में उस फिल्म के लोगों ने ही कहा कि नहीं, ‘मूनलाइट’ है बेस्ट पिक्चर. इसके अलावा बैरी और टरैल को बेस्ट एडेप्टेड स्क्रीनप्ले का ऑस्कर भी मिल गया है. ‘अराइवल’, ‘फेंसेज’, ‘हिडन फिगर्स’ और ‘लॉयन’ भी एडेप्टेड स्क्रीनप्ले की श्रेणी में नामांकित हुई थीं.

‘मूनलाइट’ की कहानी टरैल के लिखे नाटक पर आधारित है. बैरी और टरैल दोनों अश्वेत हैं. बराबर उम्र के हैं. दोनों असल में लिबर्टी सिटी के उसी इलाके में रहते थे जिसकी ये कहानी है. बैरी ने बहुत गरीबी का जीवन जिया. उनकी, टरैल की और टीनएजर शिरॉन का रोल करने वाले एश्टन सैंडर्स (स्ट्रैट आउटा कॉम्पटन, 2015) तीनों की मां भी ड्रग्स लेती थीं जिससे तीनों ने बहुत कठिन बचपन देखा.

बैरी जेनकिन्स.
बैरी जेनकिन्स.

फिल्म में ड्रग डीलर जुआन के रोल में मेहरशाला अली भी हैं. हमने बताया था कि उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नामांकन मिलना तय है और वे नॉमिनेट भी हुए. वे अब जीत भी गए हैं. सैरेमनी का सबसे पहला ऑस्कर ही इस कैटेगरी में था. मेहरशाला ने बहुत भावुक स्पीच दी. वे हमें टीवी सीरीज ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’ में रेमी और नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘लूक केज’ के पहले सीज़न में कॉटनमाउथ के किरदारों में अच्छे से याद हैं.

इस तरह फिल्म तीन ऑस्कर जीती. इस बार सबसे ज्यादा ऑस्कर जीतने के मामले में ‘मूनलाइट’ दूसरे नंबर पर रही.

मेहरशाला अली.
मेहरशाला अली.

बेस्ट पिक्चर – एडेल रोमांस्की, डेड गार्डनर, जैरेमी क्लाइनर
सपोर्टिंग एक्टर – मेहरशाला अली
एडेप्टेड स्क्रीनप्ले – बैरी जेनकिन्स, टरैल मैकरेनी

बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस की श्रेणी में ब्रिटिश एक्ट्रेस नाओमी हैरिस (मंडेला: लॉन्ग वॉक टू फ्रीडम, 2013) भी नामांकित थीं पर जीत नहीं पाईं. उन्होंने शिरॉन की ड्रग्स पीड़ित विक्षिप्त मां पॉला का रोल किया है.

शिरॉन के रोल में तीनों ही लड़के बहुत सॉलिड हैं. नौजवान शिरॉन बने ट्रवेंट रोड्स भी जबर हैं. उनको देख आंखों में चमक आ जाती है.

बेस्ट सिनेमैटोग्राफी, फिल्म एडिटिंग और म्यूजिक (ओरिजिनल स्कोर) के तीन नॉमिनेशन भी ‘मूनलाइट’ को मिले थे.

बैरी ने ये दूसरी फिल्म डायरेक्ट की है. पहली फिल्म उन्होंने आठ साल पहले बनाई थी – ‘मेडिसिन फॉर मेलनकली’. इसमें भी ब्लैक अमेरिकी पात्र केंद्र में थे. बैरी न सिर्फ अफ्रीकी अमेरिकी पात्रों की स्टीरियोटाइप्स से मुक्त कहानियां कहते हैं, वे बहुत सारे विमर्श भी रखते चलते हैं. अपने आर्ट पर उनकी मजबूत पकड़ है. वे और ‘मूनलाइट’ इस साल की हाइलाइट हैं.

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(* ये खबर जनवरी के शुरू में प्रकाशित हुई थी. पहले ऑस्कर नॉमिनेशंस और फिर 27 फरवरी को ऑस्कर के विनर्स घोषित होने के बाद इसे संपादित किया गया है. )
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