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जनरल बिपिन रावत सेना में कौन से बड़े रिफार्म पर काम कर रहे थे?

भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत को हमने खो दिया है. एक हेलिकॉप्टर हादसे में जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका समेत 13 लोगों की मौत हो गई. 8 दिसंबर का पूरा दिन हमारे देश ने प्रार्थनाएं करते बिताया. जैसे ये जानकारी आई कि तमिलनाडु में सीडीएस जनरल रावत को ले जा रहा हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है,

सरकार से लेकर आम नागरिक, सभी मनाने लगे कि कहीं से कोई अच्छी खबर आ जाए. लेकिन जिस तरह की हलचल सरकार में पैदा हो गई थी, उसी से लग गया था कि कुछ बुरा हो गया है. आज हम जानेंगे कि वो देश के सबसे वरिष्ठ सैनिक अधिकारी के पद तक कैसे पहुंचे. वो कौनसा काम था, जिसमें वो आखिरी सांस तक लगे रहे और विरासत में उन्होंने एक कृतज्ञ राष्ट्र के पास क्या छोड़ा है. लेकिन पहले, उनके आखिरी दिन पर गौर करते हैं.

आज सुबह भारतीय वायुसेना के वीआईपी जेट ने दिल्ली से दक्षिण की तरफ उड़ान भरी. ये एक एम्ब्रेयर ईआरजे 135 विमान था. टेल नंबर – K-3602. इसमें सवार थे सीडीएस जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत. साथ में सीडीएस का स्टाफ और उनके अंगरक्षक.

ब्रिरिगेडियर एलएस लिद्दर, लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह, नायक गुरसेवक सिंह, नायक जितेंद्र कुमार, लांस नायक विवेक कुमार, लांस नायक बी साई तेजा और हवलदार सतपाल. कुल 9 लोग. K 3602 पालम से चलकर तमिलनाडु के सुलूर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा. ये कोयम्बूटर ज़िले में पड़ता है. सुलूर का नाम आपने पहले भी सुना होगा. यहां हमारे देश में बने लड़ाकू विमान एलसीए तेजस का पहला स्कॉड्रन तैनात है. लेकिन आज जनरल रावत के लिए सुलूर एक पड़ाव था. उनकी असल मंज़िल थी वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज़ स्टाफ कॉलेज. वो संस्थान, जहां सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों को उच्च पदों के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है.

भारत के साथ साथ यहां तकरीबन 60 देशों के अधिकारी प्रशिक्षण पाते हैं. यहां जनरल रावत कडेट इंटरेक्शन प्रोग्राम के लिए पहुंचने वाले थे. माने प्रशिक्षु अधिकारियों से मिलने. इस मौके पर उन्हें अधिकारियों को संबोधित भी करना था. ऐसे कार्यक्रमों में अधिकारी अक्सर सपत्नीक शामिल होते हैं. फिर मधुलिका रावत Defence Wives Welfare Association (DWWA)की अध्यक्षा भी थीं. इसीलिए वो भी साथ थीं.

सुलूर में सीडीएस की औपचारिक तरीके से आगवानी की गई. इसके बाद सीडीएस को वेलिंगटन के लिए निकलना था. यात्रा के इस पड़ाव के लिए भारतीय वायुसेना के सबसे आधुनिक हेलिकॉप्टर्स में से एक Mi-17V5 को तैनात किया गया था. ये ताकतवर और भरोसेमंद हेलिकॉप्टर नियमित रूप से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लाने ले-जाने के लिए इस्तेमाल होता है.

उड़ान से पहले भारतीय वायुसेना के इंजीनियरों ने हेलिकॉप्टर की एक विस्तृत जांच की थी. इसी के बाद हेलिकॉप्टर को उड़ान के लिए लिखित अनुमति मिली थी. और इस उड़ान की कमान वायुसेना के बेहद अनुभवी पायलट्स के हाथ में थी.

सुलूर से वेलिंगटन करीब 90 किलोमीटर पड़ता है. सीडीएस के हेलिकॉप्टर में कुल 14 लोग सवार हुए. 9 लोग जो दिल्ली से आए थे. हेलिकॉप्टर का चालक दल और स्टाफ कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारी. हेलिकॉप्टर को वेलिंगटन जिमखाना क्लब के हेलिपैड पर उतरना था. वहां डिफेंस सर्विसेज़ स्टाफ कॉलेज से जुड़े अधिकारी सीडीएस की आगवानी की तैयारी के खड़े थे.

वेलिंगटन से 3 किलोमीटर पहले कुनूर नाम का इलाका पड़ता है. पहाड़ी इलाका है. नीलगिरी की ऊंची पहाड़ियां और जंगल हैं. करीब सवा 12 बजे कूनूर में लोगों एक ज़ोर की आवाज़ सुनी. लोग जब उस तरह दौड़े तो आंगनवाड़ी केंद्र के पास हेलिकॉप्टर ज़मीन पर गिरा था. और उसमें से आग की लपटें निकल रही थी. चश्मदीदों के मुताबिक आग के बीच से कुछ लोग बाहर निकलने की कोशिश करते भी दिखे.

घंटे भर बाद यानी करीब सवा एक बजे के आसपास ये खबर मीडिया तक भी पहुंची कि सीडीएस का हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया है. जानकारी ये भी आई कि घायलों का वेलिंगटन में आर्मी बेस हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है. इसलिए जनरल रावत की सलामती के लिए दुआएं की जाने लगी. लेकिन फिर दोपहर बाद अस्पताल से बुरी खबरें आने लगी. मौत का आंकड़ा आने लगा.

शाम तक 12 लोगों की मौत की जानकारी मीडिया तक पहुंची. ये भी जानकारी आई कि दो लोगों को अभी भी बचाने की कोशिश हो रही है. जिनमें से एक 90 फीसदी तक जल चुके थे, और दूसरे के शरीर पर 45 फीसदी बर्न इंजरी बताई गई. लेकिन फिर एक और उम्मीद टूट गई और मौत का आंकड़ा 13 तक पहुंच गया. 6 बजकर 3 मिनट पर एयरफोर्स ने ट्वीट कर बताया कि जनरल रावत और उनकी पत्नी समेत 13 लोगों की क्रैश में मौत हो गई.

सिर्फ एक शख्स के ज़िंदा होने की खबर है – डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज के डायरेक्टिंग स्टाफ, ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह. इनका इलाज फिलहाल वेलिंगटन में सेना के अस्पताल में चल रहा है.

ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह को इसी साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था. 2020 में लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस में उड़ान के बीच तकनीकी दिक्कत आ गई थी. इसके बावजूद ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ने अपना एयरक्राफ्ट बचा लिया था, सुरक्षित लैंड करा लिया था.

ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह जैसे बेहद अनुभवी पायलट्स की बदौलत ही तेजस का शानदार रिकॉर्ड कायम है. आज तक एक भी फेटल क्रैश नहीं हुआ है. हम ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह की सलामती की कामना करते हैं.

अब लौटते हैं जनरल रावत पर. वो एक बार पहले भी एक हेलिकॉप्टर क्रैश में मौत को मात दे चुके थे. 3 फरवरी 2015 को नागालैंड के दीमापुर में सेना का चीता हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. इसमें बिपिन रावत समेत सेना के तीन अधिकारी सवार थे.

तब बिपिन रावत लेफ्टिनेंट जनरल (Lt Gen.) के पद पर थे और दीमापुर में तैनात 3कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग थे. उड़ान भरने के बस कुछ सेकंड बाद ही हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था. तब हेलिकॉप्टर महज 20 फुट की ऊंचाई पर ही था. इसलिए किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई थी. लेकिन अफसोस इस बार ऐसा नहीं हो चुका. क्रैश के बाद हेलिकॉप्टर के मलबे की जो तस्वीरें-वीडियो आई उन्हें देखकर लगता है कि भयानक क्रैश हुआ होगा.

हादसा क्यों हुआ, इसे लेकर अभी कोई जानकारी नहीं है. हेलिकॉप्टर वायुसेना का था. वायुसेना के पायलट उड़ा रहे थे. इसलिए वायुसेना ने ही जांच का ऐलान किया है.

तो अभी हमें पक्का तो नहीं पता कि हादसा क्यों हुआ, लेकिन 4 आशंकाएं जताई जा रही हैं.
पहला- खराब मौसम
दूसरा- इंजन में फेलियर
तीसरा – हेलिकॉप्टर में कोई और टेक्निकल ग्लिच.
चौथा – पायलट की चूक.

आशंका जताई जा रही है कि जिस जगह हेलिकॉप्टर को उतरना था वो कुम मिनट की दूरी पर ही था. इसलिए हो सकता है कि पायलट्स ने हेलिकॉप्टर की हाइट कम की हो, खराब मौसम और खराब विजिबिलिटी की वजह से हेलिकॉप्टर किसी पहाड़ी से टकरा गया हो. तो अभी हादसे की असली वजह नहीं बताई जा सकती है.

इस क्रैश पर हैरानी इसलिए भी ज्यादा हो रही है कि ना तो हेलिकॉप्टर कमज़ोर था, और ना ही पायलट. जनरल रावत के Mi-17V5 हेलिकॉप्टर को एयरफोर्स के बेहद अनुभवी पायलट उड़ा रहे थे. और इस हेलिकॉप्टर को तो दुनिया के सबसे एडवांस्ड और सबसे भरोसेमंद मिलिट्री ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर्स में गिना जाता है. Mi-17V5 एक मीडियम लिफ्ट मिलिटरी ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर है.
माने सेना के साज़ो सामान और सैनिकों को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. मिसाल के लिए किसी मिशन के लिए एक सैनिक टुकड़ी को ले जाना. उसे मिशन के दौरान सामान पहुंचाना. और फिर सभी को वापस लाना.

Mi-17V5 को कजान हेलिकॉप्टर्स नाम की एक कंपनी तैयार करती है. इसमें दो इंजन लगे होते हैं और ये अपने साथ 4 टन सामान या 36 सैनिक ले जा सकता है. केबिन के अलावा ये हेलिकॉप्टर सामान को अपने नीचे टांग कर भी ले जा सकता है. अगर केबिन में सामान न हो, तो इस हेलिकॉप्टर के नीचे 5 टन तक सामान बांधकर ले जाया जा सकता है. ये 230-250 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकता है और 675 किलोमीटर तक जा सकता है.

अगर इसमें ईंधन के लिए अतिरिक्त टैंक लगा दिए जाएं, तो ये 1180 किलोमीटर तक जा सकता है. 6000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकता है. इसे चलाने के लिए तीन लोग चाहिए होते हैं – पायलट, कोपायलट और फ्लाइट इंजीनियर. ये किसी भी मौसम में, दिन और रात में उड़ सकता है. लगभग कहीं भी लैंड कर सकता है.

ट्रांसपोर्ट ड्यूटी के लिए भारतीय वायुसेना ने Mi सीरीज़ के हेलिकॉप्टर्स का खूब इस्तेमाल किया है. एमआई-8 (MI-8) ‘प्रताप’ वायुसेना को 1970 के दशक की शुरुआत में मिला. प्रताप की कई अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका रही है. इनमें सियाचिन ग्लेशियर वाला ऑपरेशन मेघदूत भी एक है.

इसीलिए जब एमआई-8 पर आधारित एक नया, उन्नत और ज़्यादा ताकतवर हेलिकॉप्टर बना, तो वायुसेना को खूब पसंद आया. यही हेलिकॉप्टर था Mi-17 V5. प्रताप को 2019 में सेवानिवृत्त कर दिया गया था. और अब ‘प्रताप’ की जिम्मेदारी Mi-17 के पास है. 2008 में रूस से सौदा हुआ था और 2011-13 के बीच भारतीय वायुसेना को ये हेलिकॉप्टर मिलने लगे. इंडक्ट भी हो गए. 2018 में आखिरी बैच आया.

आमतौर पर हम Mi-17 V5 क्रैश होने की खबरें भी नहीं सुनते हैं. आज वाले हादसे से पहले एक बार हमने साल 2019 में Mi-17 V5 के गिरने की खबर सुनी थी. हालांकि बाद में जांच में आया था कि हेलिकॉप्टर गिरा नहीं था गिराया गया था. बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक के एक दिन बाद 27 फरवरी 2019 को जम्मू कश्मीर के बडगाम में हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ था.

उसी रात को भारत और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों के बीच डॉगफाइट हुई थी. जिसमें हमने पाकिस्तान के F-16 विमान को गिराने का दावा किया था और इस झड़प में भारत का भी लड़ाकू विमान क्रैश हो गया था जिसके पायलट थे विंग कमांडर अभिनंदन. फिर सुबह बडगाम में Mi-17 V5 क्रैश होने की खबर आई थी.

इस हादसे में हेलिकॉप्टर में सवार 6 वायु सेना के जवानों समेत कुल 7 लोगों की मौत हुई थी. बाद में इस मामले में कोर्ट ऑफ इक्वायरी शुरू की गई है. और जांच में सामने आया कि हमारे ही एयर डिफेंस सिस्टम से हेलिकॉप्टर को मार गिराया गया था. पाकिस्तान की तरफ से हवाई हमले के खतरे की वजह से हमारा एयर डिफेंस सिस्टम तब हाई अलर्ट पर था. और दुश्मन का हेलिकॉप्टर समझकर अपने Mi-17 को गिरा दिया गया था.

इसके अलावा आज से पहले कम से कम पांच बार Mi 17 v 5 क्रैश हुए हैं. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इनके आधार पर फिलहाल ये नहीं कहा जा सकता कि हेलिकॉप्टर सुरक्षित नहीं है. तो अब सभी को जांच रिपोर्ट का इंतज़ार है.

16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्मे बिपिन रावत को सेना से जुड़ाव विरासत में मिला था. दादा सेना में थे. पिता लेफ्टिनेंट जनरल रहे थे. चाचा फौज में हवलदार रहे. और फिर दिसंबर 1978 में इस विरासत का जिम्मा लिया बिपिन रावत ने. 1978 में वो इंडियन मिलिट्री एकेडमी से ग्रेजुएट हुए. और स्वॉर्ड ऑफ ऑनर भी पाया.
टॉप पर रहने वाले अफसरों को ये सम्मान मिलता है. उन्हें 5 गोरखा राइफल्स में कमीशन किया गया. पूर्वोत्तर और जम्मू कश्मीर – दोनों थिएटर्स में सेवाएं दीं, फॉर्मेशन्स कमांड कीं. आगे चलकर सेना प्रमुख बनने से पहले वे सदर्न कमांड के प्रमुख रहे. दिसंबर 2016 में सेना प्रमुख बनाए गए. 31 दिसंबर 2019 तक इस पद पर रहे. और फिर 1 जनवरी 2020 से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बने.

जनरल रावत का जाना सिर्फ एक संस्थान का नुकसान नहीं है. और इसे देश का नुकसान बता देने से उस खाली जगह का विस्तार नहीं समझ आता, जो वो अपने पीछे छोड़ रहे हैं. वो भारत के इतिहास के सबसे बड़े सैन्य सुधार का नतीजा थे. और बदले में उससे भी बड़े सैन्य सुधार को अंजाम दे रहे थे.

कारगिल युद्ध के बाद सुब्रह्मण्यम कमेटी की रिपोर्ट में साफ कहा गया कि तीनों सेनाओं में तालमेल की कमी है. और इसे दूर करने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की ज़रूरत है. लेकिन सरकारें हिम्मत नहीं कर पाईं. आखिर 2019 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने लाल किले से इस पद के सृजन का ऐलान किया. और इसी पद पर पहली तैनाती मिली जनरल बिपिन रावत को. बिपिन रावत को ज़िम्मेदारी दी गई थी कि तीनों सेनाओं में समन्यवय हो और इसके लिए ज़रूरी था थिएटराइज़ेशन.

भारत में सबसे बड़े मिलिट्री रिफॉर्म के तौर पर थिएटर कमांड्स बनाने पर जनरल बिपिन रावत का खूब ज़ोर रहा. तीनों सेनाओं की चिंताओं को दूर करना. उन्हें समझाना कि ये सुधार क्यों ज़रूरी है. और सबसे प्रमुख, एक रोडमैप तैयार करना जिसपर चलकर ये सुधार हो सके.

देश में 5 थिएटर कमांडर बननी हैं. फिलहाल हमारी तीनों सेनाओं की अलग अलग कमांड है. कुल 17 सिंगल सर्विस कमांड है. एयरफोर्स और थलसेना की 7-7 और नेवी की 3. थिएटराइजेशन के तहत तीनों सेनाओं की संयुक्त कमांड्स होंगी. एक कमांड में तीनों सेनाओं के एलिमेंट्स होंगे.

जनरल रावत का बड़ा ज़ोर था कि इस साल स्वतंत्रता दिवस पर पहली थिएटर कमांड काम शुरू कर दे. ये होती एयर डिफेंस कमांड. लेकिन ये काम कुछ तकनीकी पहलुओं के चलते पूरा नहीं हो पाया.

2. इंटिग्रेटेड बैटल ग्रुप –

थलसेना में कई सारे ब्रिगेड्स को मिलाकर इंटिग्रेटेड बैटल ग्रुप यानी IBG बनाने का प्लान भी जनरल रावत का ही था. IBG में आर्मर्ड, आर्टिलरी, मैकेनाइज्ड, एयरपावर इस तरह की सारी ब्रिगेड मिलाकर एक डिविजन के बराबर का ग्रुप बनाया जाता है. ताकि ये सेल्फ सस्टेन्ड रहे. मतलब एक मुकम्मल सेना की टुकड़ी हो. चीन और पाकिस्तान से लगती सीमा पर आईबीजी तैनात करने का प्रस्ताव जनरल रावत ने रखा था.

3. इन बड़े रिफॉर्म्स वाले सुझावों के अलावा जनरल रावत की तरफ से सरकार को कुछ और सुझाव भी दिए गए थे. जैसे

सेना के जवानों और अफसरों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का सुझाव था. प्रस्ताव में लिखा गया था कि आर्मी में कर्नल और नेवी-एयरफोर्स में कर्नल के समकक्ष रैंक के अधिकारियों की रिटायरमेंट ऐज 54 से बढ़ाकर 57 साल की जाए.

ब्रिगेडियर व इनके समकक्ष अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र 56 से बढ़ाकर 58 साल करने और मेजर जनरल व समकक्ष अधिकारियों की रिटायरमेंट ऐज 58 से बढ़ाकर 59 साल करने का सुझाव दिया गया था.

इन सुझावों को लेकर जरनल बिपिन रावत की तरफ से सरकार को जो चिट्ठी गई थी, उसमें इन प्रस्तावों की वजह भी लिखी थी. इसमें कहा गया था कि सीनियर पोजिशन पर कम वेकेंसी होने की वजह से कई अधिकारियों को लगता है कि वो ऊपर तक नहीं पहुंच पाएंगे.

इसलिए बीच में ही नौकरी छोड़कर दूसरे सेक्टर्स की तरफ चले जाते हैं. उनके जाने से हाई स्किल्ड मैन पावर का सेना को नुकसान होता है.
जनरल रावत ने दो और प्रमुख चीज़ों पर ध्यान दिया – बजट रैशनलाइज़ेशन और डाउनसाइज़िंग.

इनके अलावा भी कई रिफॉर्म्स पर जनरल रावत काम कर रहे थे. और इसलिए उनके अचानक चले जाने से काफी कुछ अधूरा रह गया.

इससे पहले भी देश ने सेनाध्यक्षों को खोया है. मिसाल के लिए 1996 में जनरल बिपिन जोशी का देहांत हो गया था. लेकिन तब उनकी जगह तुरंत उप सेनाध्यक्ष ने चार्ज ले लिया था. जनरल रावत CDS थे. उनकी जगह कौन लेगा, ये बड़ा सवाल है. और मोदी सरकार के लिए ये अब ये संकट भी है कि सीडीएस के पद को खाली नहीं छोड़ सकते. और यहां सिर्फ व्यक्ति का चुनाव ही जटिल नहीं होगा.

एक ऐसे अधिकारी की ज़रूरत है, जो जनरल रावत के सुधार कार्यक्रम को जारी रख सके. उनके जितनी ज़िम्मेदारी आज तक किसी अधिकारी को नहीं दी गई थी. संभवतः इसीलिए आज दिन भर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बैठकें करते रहे और दिन ढलने के साथ साथ देश के चार सबसे ताकतवर मंत्रियों की बैठक हुई.

कैबिनेट कमेटी ऑन सेक्योरिटी की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी, एनएसए अजीत डोभाल, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और गृहमंत्री अमित शाह शामिल हुए. देखना होगा कि सरकार इस संकट से उबरने केलिए क्या योजना बनाती है.

जनरल रावत के पार्थिव शरीर को 9 दिसंबर को दिल्ली लाया जाएगा जहां सैनिक परंपराओं के अनुरूप उन्हें अंतिम सलामी दी जाएगी. वो अपने पीछे दो बेटियां छोड़ गए हैं. और एक देश, जो उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है. दी लल्लनटॉप परिवार भी जनरल रावत को अंतिम सलाम भेजता है.

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