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सरकार को बुजुर्गों से ज्यादा है दूध न देने वाली गायों की चिंता

मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस के मुताबिक,

हम लोगों पर उनके मां-बाप और बुजुर्गों का ख्याल रखने का दवाब डाल सकते हैं. उनको आर्थिक सहायता देने के लिए कह सकते हैं. लेकिन क्या हम किसानों को दूध न देने वाली गायों का ख्याल रखने के लिए मजबूर कर सकते हैं.

‘मेंटीनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजेन्स एक्ट 2007’ के तहत संतानों या रिश्तेदारों के लिए ये अनिवार्य है कि वो अपने माता-पिता और बुजुर्गों को मेंटीनेंस दें.

सरकार चाहती है कि दूध न दे सकने वाली गायों को सैंक्चुरी में रखकर उनका ध्यान रखा जाए. एक गाय को खिलाने में हर दिन 60 रुपए लगता है. देश में 1 करोड़ गायें ऐसी हैं जो दूध-उत्पादन का हिस्सा नहीं हैं. इस हिसाब से इस तरह की गायों को खिलाने में हर दिन कुल 60 करोड़ रुपए खर्च होते हैं.

केंद्र सरकार  ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिपोर्ट दी है. जिसमें सरकार तस्दीक की है कि हर ज़िले में कम से कम एक शेल्टर हाउस होना चाहिए. जिसमें 500 त्यागी गई गायों को रखा जाए.

अब चलो हिसाब लगाया जाए, भारत में 707 ज़िले है. हर ज़िले में 500 गायें शेल्टर हाउस में रखी जाएं तो टोटल शेल्टर हाउस में गायें हुईं, तीन लाख तिरपन हजार पांच सौ. हर गाय को खिलाने में खर्च होता है 60 रुपए. मतलब इन गायों को खिलाने में  अतिरिक्त 2 करोड़ रुपए लगेंगे.

 

हर ज़िले में 500 गायें

2012 की लाइवस्टॉक सेंसस (मवेशियों की गणना ) के मुताबिक,

देश में 12 करोड़ 29 लाख 80 हजार गायें हैं. दुधारू गायों की उम्र 14 से 15 साल होती है. 8 से 9 साल तक वो दूध देती है. मतलब 5 से 6 साल ये गायें बिना किसी उपयोग की हो जाती हैं. और इन बिना दूध वाली गायों की संख्या में 10 मिलियन और गायें हर साल जुड़ जाती हैं.

अनुपयोगी गायें V/S बुजुर्ग इंसान

2011 के आखिर में 60 साल से ऊपर लोगों की संख्या 10 करोड़ 38 लाख थी. जिसमें से 50 फीसदी बुजुर्ग दूसरों पर निर्भर हैं. सेंट्रल सेक्टर स्कीम ऑफ इंटीग्रेटेड प्रोग्राम फॉर पर्सन्स (IPOP) के मुताबिक, बुजुर्गों के लिए ओल्डेज होम, डे केयर सेंटर, मोबाइल मेडीकेयर सेंटर यूनिट बनवाने का प्रावधान है. इस स्कीम के तहत, गरीब बुजुर्गों के लिए 25 ओल्ड एज होम भी बनावाया जाना है. इसके मेंटीनेंस के लिए ग्यारह लाख चौरानबे हजार पांच सौ दिए जाएंगे. जिसका मतलब है कि हर बुजुर्ग पर 130 रुपए खर्च हो रहे हैं.

लेकिन IPOP स्कीम के तहत  2012-13 में 269 ओल्डएज होम थे, ये आंकड़ा 2013-14  में घटकर 207 हो गया. 2014-15 साल घटके-घटते में 187 ओल्डएज होम हो गए. और 2015-16 में मात्र 137 ओल्डएज होम इस स्कीम के तहत काम कर रहे हैं.

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