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जोकोविच से लेकर मुरली विजय तक, कोविड वैक्सीन ना लेने वालों के 'तर्क' क्या हैं?

दुनिया के नंबर एक पुरुष टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच (Novak Djokovic) का ऑस्ट्रेलिया वीजा रद्द किया जा चुका है. वो अपने देश वापस भेजे जा चुके हैं. वीजा रद्द होने की वजह से जोकोविच ऑस्ट्रेलियाई ओपन में भी हिस्सा नहीं ले पाए. उन्हें कुछ समय के लिए डिटेंशन सेंटर में भी रहना पड़ा. ये सब इसलिए हुआ क्योंकि जोकोविच ने अपना कोविड वैक्सीनेशन स्टेटस सार्वजनिक नहीं किया है. इस पूरे घटनाक्रम के चलते उन्हें अचानक से वैक्सीन विरोधियों का पोस्टर बॉय बना दिया गया. एक बार फिर से वैक्सीन विरोधी अभियान की हवा बनाने की कोशिश हुई. ऑस्ट्रेलिया की सरकार पर दबाव बनाया गया. हालांकि, आखिर में जोकोविच का वीजा रद्द हो गया. इस संबंध में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने मीडिया को बताया,

“नोवाक जोकोविच ने नियमों का पालन नहीं किया. ऑस्ट्रेलिया आने के लिए आपको या तो कोविड टीका लगा होना चाहिए या फिर इस टीके से छूट के लिए कोई वैध मेडिकल कारण होना चाहिए. ये बहुत साधारण सी बात है. जोकोविच ने ना तो अपना कोविड वैक्सीनेशन स्टेटस बताया और ना ही उनके पास कोई वैध मेडिकल कारण था. इसलिए उन्हें वापस भेज दिया गया.”

वैक्सीन विरोधी जोकोविच

दरअसल, नोवाक जोकोविच शुरुआत से ही कोविड टीके के विरोधी रहे हैं. अप्रैल 2020 में उन्होंने कहा भी था कि वो वैक्सीन विरोधी हैं. उनके इस बयान की आलोचना हुई थी जिसके बाद उन्होंने सफाई दी थी. इसमें उन्होंने कहा था कि कोविड वैक्सीन पर वो कोई एक्सपर्ट नहीं हैं और इसे लेकर उन्होंने कोई अंतिम फैसला नहीं किया है. हालांकि, जोकोविच ने ये भी कहा कि वो ये चुनने की आजादी चाहते हैं कि उनके शरीर के लिए क्या बेहतर है. एक फेसबुक लाइव में उन्होंने कहा था कि वो नहीं चाहते कि यात्रा और टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेने के वास्ते उन्हें वैक्सीन लेने के लिए मजबूर किया जाए.

Murali Vijay ने कोविड का टीका लगवाने और बायो बबल में रहने से मना कर दिया. (फोटो: ट्विटर)
Murali Vijay ने कोविड का टीका लगवाने और बायो बबल में रहने से मना कर दिया. (फोटो: ट्विटर)

नोवाक जोकोविच की ही तरह भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी मुरली विजय ने भी कोविड वैक्सीन नहीं ली. उन्होंने क्रिकेट प्रतियोगिताओं के दौरान बायो-बबल में भी रहने से मना कर दिया. खामियाजे के तौर पर कभी भारतीय टेस्ट टीम के ओपनर रहे इस खिलाड़ी को कई प्रतियोगिताओं में शामिल नहीं किया गया. वो पिछले साल हुई प्रतिष्ठित सैय्यद अली मुश्ताक ट्रॉफी प्रतियोगिता में भी हिस्सा नहीं ले पाए. इस बारे में तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन के एक सूत्र ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया था,

“ये उनका व्यक्तिगत फैसला है. वो वैक्सीन नहीं लेना चाहते. बीसीसीआई के दिशा निर्देश कहते हैं कि टूर्नामेंट की शुरुआत से सात दिन पहले ही खिलाड़ी को बायो बबल में आना होगा और फिर समाप्ति तक रहना होगा. लेकिन विजय ऐसा भी नहीं करना चाहते. तमिलनाडु के सेलेक्टर्स ने उन्हें कंसीडर नहीं किया है.”

मर्जी के बगैर वैक्सीनेशन नहीं

इस बीच ऐसी बहुत सी खबरें आई हैं, जिनमें सामान्य सेवाओं के लिए लोगों को कोविड वैक्सीन के दोनों डोज लगे होना अनिवार्य कर दिया गया है. कई देशों में यात्राओं के लिए वैक्सीनेशन पासपोर्ट जारी किए गए हैं. फ्रांस में तो कानून बना दिया गया है कि जिन लोगों ने कोविड का टीका नहीं लगवाया है, उन्हें रेस्त्रां, स्पोर्ट्स क्लब और दूसरे सार्वजनिक स्थानों में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. ऑस्ट्रिया में कोविड वैक्सीन ना लेने वालों पर 3,600 यूरो (3 लाख रुपये से ज्यादा) का फाइन लगाने का प्रावधान किया गया है. डेनमार्क में कर्मचारियों के लिए वैक्सीन पासपोर्ट जरूरी है. इक्वाडोर में सभी नागरिकों के लिए वैक्सीनेटेड होना अनिवार्य है. इसी तरह के प्रावधान कई देशों में हैं.

France में कोविड वैक्सीन को लेकर बनाए गए कानून का विरोध करते लोग. (फोटो: AFP)
France में कोविड वैक्सीन को लेकर बनाए गए कानून का विरोध करते लोग. (फोटो: AFP)

इस बीच भारत सरकार ने कोविड वैक्सीनेशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से 13 जनवरी को दाखिल किए गए हलफनामे में बताया गया कि भारत में किसी भी व्यक्ति को उसकी मर्जी के बिना कोविड का टीका नहीं लगाया जा सकता. मंत्रालय ने ये भी बताया कि केंद्र सरकार ने ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया है, जिसके लिए नागरिकों को वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट लेकर चलना जरूरी हो. मंत्रालय ने बताया कि महामारी को देखते हुए कोविड टीका लगवाना कितना जरूरी है, इसका प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. साथ ही साथ टीके के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में भी लोगों को जानकारी दी जा रही है.

वैक्सीन ना लेने वाले क्या कहते हैं?

कोरोना वैक्सीन ना लेने के पीछे लोग कई तरह की बातें बताते हैं. व्यक्तिगत आजादी एक अलग मसला है, लेकिन वैक्सीन ना लेने के लिए जिस तरह की बातें की जाती हैं, वो ठोस तर्कों से ज्यादा बहाने लगती हैं. हालांकि, कई लोगों को वैक्सीन को लेकर आशंकाएं भी हैं. वो ये कि क्या कोविड का ये नया-नवेला टीका सुरक्षित होगा. कई अध्ययनों के मुताबिक, ये आशंका कोविड वैक्सीन ना लेने का सबसे बड़ा कारण है.

फिर दूसरी बातें भी हैं. मसलन, वैक्सीन ना लेने वाले मानते हैं कि ये कोरोना वायरस पर प्रभावी नहीं है. कुछ को इसकी जरूरत महसूस नहीं होती. उनका कहना है कि उनका शरीर वायरस को आसानी से खत्म कर देगा. कुछ का कहना है कि वो वैक्सीन इसलिए नहीं लेंगे क्योंकि उन्हें नहीं पता कि इसके अंदर क्या है.

Covid Vaccine के बारे में इस तरह की अफवाहें भी फैलाई जा रही हैं कि इससे नपुंसकता होती है और दिल का दौरा पड़ता है. (फोटो: सोशल मीडिया)
Covid Vaccine के बारे में इस तरह की अफवाहें भी फैलाई जा रही हैं कि इससे नपुंसकता होती है और दिल का दौरा पड़ता है. (फोटो: सोशल मीडिया)

वैक्सीन ना लेने वाले कुछ लोग कहते हैं कि ये उन्हें नपुंसक बना देगी. हालांकि, इस तरह की बातें पहले आए टीकों के बारे में भी खूब की गईं. कुछ का कहना है कि कोविड वैक्सीन से उनका DNA बदल जाएगा. कुछ को वैक्सीन के बाद के साइड इफेक्ट्स की चिंता है. लोग ये भी मानते हैं कि कोविड वैक्सीन लगवाने से दिल का दौरा पड़ जाता है.

इसी तरह की और भी बातें प्रचलन में हैं. मसलन, कई लोगों का मानना है कि ऐसे भले ही उन्हें कोरोना वायरस संक्रमण ना हो, लेकिन वैक्सीन लगाने से हो जाएगा. कई लोग ये कहते हैं कि कोविड वैक्सीन लगाने से उनकी सेक्स करने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ेगा. इस तरह की भी बातें है कि कोविड टीके से शरीर की प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर खराब असर पड़ेगा. या फिर वैक्सीन की वजह से कोरोना वायरस शरीर के अंदर और भी खतरनाक तरीके से म्यूटेट हो जाएगा.

साइंटिफिक आधार नहीं

टीके के प्रति हिचकिचाहट यानी वैक्सीन हेजिटेंसी प्रदर्शित करने वालों या फिर सीधे तौर पर उसका विरोध करने वालों की बातों का कोई साइंटफिक आधार नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इन बातों और मिथकों का अपनी एक वीडियो सीरीज में क्रमबद्ध तरीके से जवाब दिया है. ‘वैक्सीन मिथ्स वर्सेस साइंस’ नाम से अपलोड किए गए वीडियो में WHO से जुड़ीं डॉक्टर कैथरीन ओ ब्रायन ने अलग-अलग अध्ययनों के हवाले से कुछ जरूरी बातें बताई हैं. मसलन, कोरोना वैक्सीन से नपुंसक हो जाने की अफवाहों के बारे में डॉक्टर ब्रायन ने बताया,

“कोविड वैक्सीन किसी को नपुंसक नहीं बनाती. ये एक अफवाह है, जो कई दूसरी वैक्सीन के बारे में भी फैलाई जा चुकी है. ये बात बिल्कुल गलत है. कोई भी वैक्सीन किसी को नपुंसक नहीं बनाती.”

इसी तरह से कोविड वैक्सीन से DNA में बदलाव की बातों को भी डॉक्टर कैथरीन ओ ब्रायन ने भ्रामक बताया. उन्होंने कहा,

“हमने इस तरह की खूब अफवाहें सुनी हैं. हमारे पास कोविड को लेकर इस समय दो तरह की वैक्सीन हैं. इस तरह की बातें mRNA वैक्सीन को लेकर हो रही हैं. ये बात पूरी तरह से साफ है कि mRNA वैक्सीन ना तो DNA में जा सकती है और ना ही इसे बदल सकती है. mRNA वैक्सीन शरीर को एक प्रोटीन बनाने का निर्देश देती है.

ज्यादातर वैक्सीन खुद शरीर को एक खास तरह का प्रोटीन देती हैं या फिर उस वायरस का छोटा सा निष्क्रिय हिस्सा देती हैं, जिसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित करनी होती है. mRNA वैक्सीन एक नई अप्रोच है. जिसमें वायरस का निष्क्रिय हिस्सा देने की जगह सीधे शरीर को रोग-प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने का निर्देश दिया जाता है. इससे DNA नहीं बदलता.”


डॉक्टर कैथरीन ओ ब्रायन ने दूसरी आशंकाओं या सवालों का भी जवाब दिया है. जैसे वैक्सीन के अंदर किस तरह के पदार्थ होते हैं और क्या ये शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं. उन्होंने बताया कि वैक्सीन के अंदर जितने भी पदार्थ होते हैं, वो पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं. उनकी बहुत व्यापक स्तर पर टेस्टिंग होती है. उन्होंने आगे बताया,

“वैक्सीन के अंदर जितने भी पदार्थ होते हैं, उन्हें पहले जानवरों पर टेस्ट किया जाता है. इसके बाद ही उन्हें इंसानों को दिया जाता है.”

डॉक्टर ब्रायन के मुताबिक, वैक्सीन के अलग-अलग स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल होते हैं, जिसके बाद ही इसे बड़ी संख्या में लोगों को लगाने की मंजूरी दी जाती है. इन क्लिनिक ट्रायल में वैक्सीन के असर के साथ-साथ सुरक्षा का खास खयाल रखा जाता है.

उन्होंने ये भी बताया कि वैक्सीन को व्यावसायिक तौर पर मैन्युफैक्चर करते समय भी उसकी क्वालिटी पर खास ध्यान रखा जाता है, ताकि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ ना हो. ऐसे में वैक्सीन ना लगवाने के पीछे जो वजहें बताई जा रही हैं, उनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.


वीडियो- कोविड 19 की नई वैक्सीन में से कौन-सी ज्यादा असरदार है?

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