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कोरोना वायरस का ये वाला स्ट्रेन अगर इंडिया आ गया तो टेस्ट से भी पता नहीं चलेगा

कोरोना वायरस का एक और नया वैरिएंट आ गया है. मतलब वायरस ने फिर खुद में बदलाव कर लिए हैं. कोविड-19 महामारी की वजह बने कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 के मामले में ये पहली बार नहीं हुआ है. लेकिन इस बार जो स्ट्रेन आया है, उसके बारे में एक खास जानकारी सामने आई है. बताया गया है कि इस स्ट्रेन ने PCR Test को भी चकमा दिया है. यानी अगर किसी के शरीर में ये नया कोरोना स्ट्रेन घुस जाए, तो संभव है मौजूदा मानक परीक्षणों से इसे डिटेक्ट ना किया जा सके. यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि वायरस डिटेक्शन के मामले में PCR टेस्ट को ‘गोल्डन स्टैंडर्ड’ का दर्जा प्राप्त है. अगर इसी टेस्ट में वायरस बच निकलने में कामयाब हो रहा है तो चिंता होना लाजमी है.

कैसे पता चला?

फ्रांस में कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 के इस नए स्ट्रेन का पता चला है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वहां के अधिकारियों ने ब्रिटैनी प्रांत के एक इलाके लैन्नियॉन में नया वायरस वैरिएंट मिलने की चेतावनी दी है. अधिकारियों ने बताया कि यहां के हेल्थ सेंटर में 80 कोरोना केस दर्ज किए गए हैं. इनमें से कम से कम 8 में नया स्ट्रेन मिला है. इसके पहले के टेस्ट में ये सभी केस आइडेंटिफाई नहीं हो पाए थे. फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि नए स्ट्रेन का डिटेक्ट होना मुश्किल है. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि इससे सार्स-सीओवी-2 की ट्रांसमिसिबिलिटी यानी फैलने की क्षमता बढ़ गई है या इससे कोविड-19 बीमारी गंभीर हो सकती है. स्ट्रेन का नाम अभी नहीं पता चला है.

PCR टेस्ट में नहीं पकड़े जाने के चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस वैरिएंट को अपनी जांच की श्रेणी (वैरिएंट अंडर इन्वेस्टिगेशन) में शामिल कर लिया है. इस कैटिगरी में ऐसे हजारों वायरस स्ट्रेन पहले से शामिल हैं, जो प्राकृतिक रूप से अस्तित्व में आते हैं. इनमें से कुछ में ही लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बनने की संभावना दिखती है. अगर नया स्ट्रेन वाकई में खतरनाक है तो इसे डब्ल्यूएचओ की दूसरी कैटिगरी में रखा जाएगा. ‘वैरिएंट ऑफ कन्सर्न’ नाम की इस श्रेणी में कोरोना वायरस के कुछ स्ट्रेन पहले से शामिल हैं. ये कुछ समय पहले ब्राजील, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और दक्षिण अफ्रीका में पाए गए थे. इन पर आगे बात करेंगे.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती जांच में नया स्ट्रेन कोरोना वायरस के पिछले वैरिएंट्स से ज्यादा सीरियस या ट्रांसमिसिबल नहीं पाया गया है. ये राहत की बात है. लेकिन ये पता चलना अभी बाकी है कि कोविड-19 की रोकथाम के लिए लगाई जा रही वैक्सीनों के खिलाफ ये कैसी प्रतिक्रिया देगा और कोरोना संक्रमण से पहले शरीर में मौजूद एंटीबॉडीज पर इसका क्या असर होगा.

कोरोना वायरस कुछ इस तरह का दिखता है. (फोटो: Twitter | padrebrendon)
कोरोना वायरस कुछ इस तरह का दिखता है. (फोटो: Twitter | padrebrendon)

क्यों म्यूटेट होते हैं वायरस?

कोशिका में घुसकर वायरस अपनी कॉपियां बनाना शुरू कर देते हैं. ये कॉपियां उनके जेनेटिक मटेरियल की होती हैं. इन्हीं से नए वायरस पैदा होते हैं. होस्ट सेल से निकलकर ये नए वायरस दूसरी कोशिकाओं को संक्रमित करते हैं. कॉपियां बनाने के लिए वायरस पॉलिमरेस नाम के एंजाइम का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन ये जरूरी नहीं कि पॉलिमरेस परफेक्ट काम करे. कभी-कभी वे गलती कर जाते हैं. इस कारण वायरस में बदलाव यानी म्यूटेशन हो जाता है. आमतौर पर ये म्यूटेशन वायरस के लिए खतरनाक नहीं होता. और किसी-किसी केस में ये उसकी मदद कर सकता है. म्यूटेशन जब नुकसानदेह हो तो वायरस के संक्रमण फैलाने और मल्टीप्लाई होने की क्षमता को कम हो सकती है. ऐसे में नया वायरस ज्यादा समय तक सर्वाइव नहीं कर पाता.

लेकिन कभी-कभी इसका उलटा भी होता है. म्यूटेशन के कारण अस्तित्व में आए नए वायरस के पास एक एडवांटेज हो सकता है. वो वायरस की कोशिका को बांध कर रखने की क्षमता में बढ़ोतरी कर सकता है या उसमें इम्यून सिस्टम को गच्चा देने की क्षमता आ सकती है. ऐसा होने पर वायरस का म्यूटेंट या वैरिएंट आबादी में तेजी से फैल सकता है. कोरोना वायरस के जो स्ट्रेन अब तक सामने आए हैं, उनमें से कुछ के मामले में ऐसा देखने को मिल रहा है.

लगातार बदलते हैं वायरस

वायरसों का म्यूटेट होना सामान्य बात है. वे एक समय के बाद खुद में बदलाव करते रहते हैं. कभी ये नए वैरिएंट अपनेआप गायब हो जाते हैं, कभी बने रहते हैं. जानकार बताते हैं कि बार-बार म्यूटेट होने से कुछ वायरस ज्यादा संक्रामक बन सकते हैं, लेकिन बीमारी की गंभीरता के लिहाज से अधिक खतरनाक नहीं रह जाते. लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि उन्हें लेकर चिंता न की जाए. चूंकि कुछ वैरिएंट तेजी से फैल सकते हैं, इसलिए वे बीमारी के खिलाफ जारी वैक्सीनेशन मूवमेंट को लंबे समय तक चलाने के लिए मजबूर कर सकते हैं. साथ ही, पहले से गंभीर बीमारी से ग्रसित या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए खतरनाक भी हो सकते हैं. इसके अलावा, कुछ म्यूटेशन सामान्य स्वास्थ्य और युवा लोगों को भी बीमार कर सकते हैं.

ये कोरोना स्ट्रेन बने सिरदर्द

सार्स-सीओवी-2 भी अपने अस्तित्व के समय से लगातार बदल रहा है. दुनियाभर के वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकार इसमें होने वाले बदलावों पर नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने इसके कई वैरिएंट का पता लगाया है. ये सिलसिला अभी भी चल रहा है. फ्रांस में मिले नए वैरिएंट के बारे में आप जान गए हैं. यूके में भी एक बार फिर नया कोरोना स्ट्रेन सामने आया है. इसका नाम अभी तय नहीं हुआ है. फिलहाल इसे VUI-202103/01 कहा जा रहा है. ये नया स्ट्रेन खतरनाक है या नहीं, ये पता लगाने के लिए इसे भी वैरिएंट अंडर इन्वेस्टिगेशन की कैटिगरी में डाल दिया गया है.

यहां कोरोना वायरस के कुछ ऐसे स्ट्रेन की चर्चा भी कर लेते हैं, जो न सिर्फ तेजी से फैले, बल्कि दुनियाभर की सरकारों और वैज्ञानिकों के लिए सिरदर्द भी बनै.

#B117

पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में यूके में सार्स-सीओवी-2 का एक नया वैरिएंट सामने आया था. कई नाम बताए जाते हैं इसके. B117 या 20I/501YV1. लेकिन आम बोलचाल में यूके वैरिएंट कहा जाता है. ये वायरस स्ट्रेन वहां इतनी तेजी से फैला कि इससे घबराकर कई देशों की सरकारों ने यूके से आने वाली सभी उड़ानों पर अस्थायी रोक लगा दी. यूके उस समय कोरोना संकट के खिलाफ संभलती हुई स्थिति में दिख रहा था. लेकिन B117 ने वहां की सरकार, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत पर पानी फेर दिया. दिसंबर के मध्य तक इस स्ट्रेन को यूके में कोविड-19 के तेजी से बढ़ते मामलों से जोड़कर देखा जाने लगा. देखते ही देखते वायरस 90 से ज्यादा देशों में फैल गया. ऐसी संभावना जताई गई है कि B117 मौजूदा कोविड वैक्सीनों के प्रभाव को कम कर सकता है. यूके के कुछ हेल्थ एक्सपर्ट ने ये आशंका भी जताई थी कि B117 दूसरे कोरोना वैरिएंट के मुकाबले ज्यादा जानलेवा हो सकता है. बताया जाता है कि अकेले इसी वैरिएंट में कई म्यूटेशन हो चुके हैं.

#B1351

अमेरिका की प्रतिष्ठित स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन या सीडीसी के मुताबिक, B1351 वैरिएंट, B117 से ही निकला है. यूके से निकलकर B117 जब दक्षिण अफ्रीका पहुंचा तो वहां उसने नया रूप ले लिया. यूके में B117 के पाए जाने के कुछ ही दिन बाद दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने B1351 के मिलने का दावा किया था. इसका मतलब है कि अगर वायरस स्ट्रेन में ट्रांसमिट होने की क्षमता ज्यादा हो, तो उसका पता चलने तक वह पहले ही व्यापक स्तर पर फैल चुका होता है. B117 की तरह B1351 के मामले में ये देखने को मिला है. ये वायरस अब तक 40 से ज्यादा देशों में फैल चुका है. हालांकि अभी तक इसके पिछले वैरिएंट्स से ज्यादा जानलेवा होने का सबूत नहीं मिला है. लेकिन कुछ शोधों में इतना जरूर पता चला है कि B1351 के म्यूटेशन्स ने अपनी इम्यूनिटी विकसित की है. इस आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा है कि ये वायरस एंटीबॉडीज को प्रभावित कर सकता है और उन रोग प्रतिरोधकों को भी चकमा दे सकता है, जिन्हें कोविड-19 को मात देने वाले लोगों के शरीर से निकाला जाता है.

#P1

ये वैरिएंट सबसे पहले जनवरी 2021 में ब्राजील से जापान पहुंचे कुछ लोगों में पाया गया था. उसी महीने के अंत में अमेरिका में भी इस वायरस के मिलने का दावा किया गया था. इस वैरिएंट की क्षमता के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है. लेकिन कुछ विशेषताओं के चलते ये चिंता का कारण जरूर बना हुआ है. एक तो ये कि इस स्ट्रेन में कोई 17 म्यूटेशन हो चुके हैं. इनमें से कुछ म्यूटेशन B1351 से आए हैं. इससे ये अंदेशा पैदा हुआ है कि P1 इम्यूनिटी और वैक्सीन इफेक्ट पर असर डाल सकता है. इसके कुछ सबूत भी सामने आए हैं. पिछले साल जानी-मानी स्वास्थ्य विज्ञान पत्रिका दि लांसेट ने ब्राजील के मेनॉज शहर में रक्तदाताओं का सर्वे किया था. इसमें पता चला कि अक्टूबर 2020 तक शहर की 76 प्रतिशत आबादी कोरोना वायरस के नए वैरिएंट की चपेट में आ गई थी. इससे ये संकेत गया है कि जनवरी 2020 में पुराने वैरिएंट से संक्रमित हुए कई लोग बाद में P1 से भी संक्रमित हुए थे.

अन्य चर्चित वैरिएंट

B11207- अगस्त 2020 में नाइजीरिया में सामने आया. इसकी संक्रामक क्षमता को लेकर कोई विशेष जानकारी नहीं है.
B1525- दिसंबर 2020 में यूके और नाइजीरिया में इस वैरिएंट का पता चला था. सीडीसी का कहना है कि ये ज्यादा संक्रामक और खतरनाक हो सकता है.
B1137- बताया जाता है कि सबसे पहले रूस में ये वैरिएंट पाया गया था. हाल में ऑस्ट्रेलिया में इसकी मौजूदगी दर्ज की गई थी. हालांकि इसे लेकर ज्यादा चिंता नहीं जताई गई है.
B1138- अभी तक इसके केवल 16 मामलों का पता चला है.
B1429- जुलाई 2020 में अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एक शोध संस्थान के वैज्ञानिकों का पहली बार इस वैरिएंट पर ध्यान गया था. नवंबर-दिसंबर तक वहां बड़ी संख्या में ये वायरस स्ट्रेन फैला. यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में भी इसके कुछ मामले सामने आए हैं.
P3- पिछले महीने फिलिपींस में इस कोरोना वैरिएंट का पता लगाया गया था. वहां के स्वास्थ्य विभाग को इसमें कम से कम दो म्यूटेशन मिले थे.

यहां ध्यान देने वाली बात है कि ये सिर्फ उन कुछ म्यूटेशन की जानकारी है, जिनकी पहचान करने में वैज्ञानिक कामयाब रहे हैं. असल में ये किसी को नहीं पता कि सार्स-सीओवी-2 के बदलने की रफ्तार कितनी तेज है और ये कितने म्यूटेशन के साथ हमारे बीच मौजूद है.

भारत में बढ़ रहे कोरोना के मामले

अब थोड़ी बात भारत में कोरोना वायरस संकट की मौजूदा स्थिति पर भी कर लेते हैं. देश के कुछ हिस्सों में कोविड-19 संक्रमण फिर तेजी से फैलता दिख रहा है. इनमें महाराष्ट्र के इलाके सबसे आगे हैं. राज्य सरकार ने यहां फिर से लॉकडाउन लगा दिया है. पंजाब में भी कोरोना के मामले में बढ़े हैं. मध्य प्रदेश और गुजरात की स्थिति भी बिगड़ती दिख रही है. इन राज्यों में भी लॉकडाउन की वापसी हुई है.

डेली केसेज की बात करें तो बीते दिन देशभर में करीब 29 हजार नए मरीजों का पता चला है. इनमें से 17 हजार 864 संक्रमित अकेले महाराष्ट्र में सामने आए है. केरल में 1970 मरीजों की पुष्टि हुई है. पंजाब में ये आंकड़ा 1463 दर्ज किया गया, जबकि कर्नाटक में 1135 लोगों में वायरस होने का पता चला. गुजरात में 954 मामले दर्ज किए गए. तमिलनाडु, छ्त्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में 800 से ज्यादा नए संक्रमित सामने आए हैं. वहीं, राजधानी दिल्ली की बात करें तो बीते 24 घंटों में यहां फिर 400 से ज्यादा कोरोना केस दर्ज किए गए हैं. अन्य राज्यों के मुकाबले ये संख्या कम है. लेकिन फिर भी चिंताजनक है. क्योंकि कुछ दिनों पहले राजधानी में प्रतिदिन दर्ज होने वाले कोविड मामलों की संख्या 150 से भी कम थी.

देश में दूसरे कोरोना संकट की आशंका को केंद्र सरकार ने भी माना है. बुधवार 17 मार्च 2021 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसने कहा कि कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में भी संक्रमण के मामले बढ़े हैं. आंकड़ों के जरिये स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि फरवरी के अंत से नए मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने बताया कि 21 फरवरी 2021 को देश में 14 हजार से ज्यादा कोरोना मामले सामने आए थे. 4 मार्च को ये संख्या 17 हजार 400 से ज्यादा हो गई. वहीं, 16 मार्च को ये आंकड़ा 28 हजार 900 के पार चला गया. इससे भारत में कोरोना वायरस के कुल 1 करोड़ 14 लाख से ज्यादा मरीज हो गए हैं. हालांकि इनमें से 1 करोड़ 10 लाख से अधिक यानी 96 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों को बचा लिया गया है. 2 लाख 34 हजार से ज्यादा संक्रमितों का इलाज अभी भी किया जा रहा है, जबकि 1 लाख 59 हजार से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है. इस तरह भारत में कोविड-19 की मृत्यु दर 1.39 प्रतिशत मालूम पड़ती है.

वहीं, वैक्सीनेशन अभियान की बात करें तो देश में अब तक 3 करोड़ 50 लाख से भी अधिक लोगों को कोविड-19 का टीका लगाया जा चुका है. बुधवार को देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई वर्चुअल बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को और तेजी से पूरा करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि देश के करीब 70 जिलों में कोविड-19 के पॉजिटिविटी रेट में 150 प्रतिशत से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने साफ किया अगर वायरस को इसी समय नहीं रोका गया तो फिर से राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य संकट खड़ा होने की नौबत आ सकती है. बैठक में पीएम मोदी ने कहा, ‘हमें (कोविड-19 के) दूसरे पीक को तुरंत रोकना होगा और निर्णायक कदम उठाने होंगे.’

पीएम मोदी की ये चिंता लाजमी है. खबर है कि देश में कोरोना वायरस के तीन नए म्यूटेंट की पुष्टि हुई है. समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 संकट को लेकर राज्यसभा में किए गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने बताया कि यूके, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील से आए तीन नए कोरोना वैरिएंट के भारत में मिलने की रिपोर्ट है. अश्विनी चौबे ने कहा कि 4 मार्च 2021 को देश के अलग-अलग हिस्सों से कोई 242 पॉजिटिव सैंपल लिए गए थे. इन सभी नमूनों में अलग-अलग वैरिएंट मिले हैं. इनमें ये तीन स्ट्रेन भी शामिल हैं.


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