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साउथ की फिल्मों के एक्शन सीन रीक्रिएट कर बवाल मचाने वाले ये बच्चे कौन हैं?

हीरो एक कमरे से बाहर निकलता है. सामने एक लड़की मिलती है. लकड़ियों का गट्ठर उठाए. हीरो के समीप आते ही चाकू निकालती है. हीरो झटक कर उसका हाथ पकड़ लेता है. धम-सी एक आवाज़ सुनाई देती है. और हमलावर लड़की उड़ती हुई चारपाई पर जाकर गिरती है. आगे गुंडों की भीड़ से घिरा हीरो एक-एक को हवाई सैर कराता है. धूल उड़ाता है. घास उड़ाता है. अपने बालों की लट उड़ाता है. लेकिन सब स्लो मोशन में. पूरे स्वैग के साथ.

ये एक फिल्म का सीन था. लेकिन बिना किसी स्टंट डबल के. बिना किसी वीएफएक्स के. और हां, इसका बजट भी करोड़ों में नहीं था. ना ही इस सीन में सूर्या, महेश बाबू या विजय जैसा कोई सुपरस्टार था. फिर भी जिसने भी ये सीन देखा, बिना अचंभित हुए नहीं रह सका. क्योंकि सीन में जो बूम-बैम वाला एक्शन मचा रहे थे, वो दरअसल बड़े नहीं बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चे थे. पिछले दिनों सोशल मीडिया पर ये वीडियो खूब घूम रहा था. फेसबुक पर दमादम शेयर किया गया. देखने वाले एक यूज़र ने लिखा,

इससे साबित होता है कि आपको अपना टैलेंट दिखाने के लिए फैन्सी इक्विपमेंट्स की जरुरत नहीं. आपका पैशन ही काफी है.

Comment
लोगों ने फेसबुक पर कमेंट्स की बाढ़ ला दी.

दूसरे यूज़र ने लिखा,

वाह! ये तो विज़ुअल ट्रीट है. जिस तरह से इन्होंने पूरे सीन को कोरियोग्राफ किया, वो कमाल है. शॉट डिविज़न और कैमरा वर्क बेहतरीन है.

Comment 1
बिना तकनीकी जानकारी के भी बच्चों ने कमाल कर दिया.

एक और यूज़र ने लिखा,

ये इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के फ्यूचर स्टंट मास्टर्स हैं.

Comment 3
लोग इन्हें ‘खोज’ बताने लगे.

शुरू में जिस वीडियो की बात हुई, उसे मलयालम एक्टर उन्नी मुकुंदन ने भी शेयर किया था. जिन्होंने बच्चों के काम को प्योर टैलेंट बताया. वीडियो में पवन कल्याण की फिल्म ‘वकील साब’ का एक सीन रिक्रिएट किया गया था. साउथ से नॉर्थ आए इस वीडियो को जिसने भी देखा, बच्चों के टैलेंट पर हैरानी जताने से पीछे नहीं हटा. लेकिन ये पहला मौका नहीं था जब इन बच्चों के हिस्से इतनी तारीफ़ें आ रही थीं. पिछले साल भी बच्चों के इस ग्रुप ने एक फेमस फिल्मी सीन रिक्रिएट किया था. जिसे देखकर सब दंग रह गए थे. फिल्मी सीन्स को अपने तरीके से रिक्रिएट करने का चलन कोई नया नहीं. खासतौर पर ऐसे दौर में जब यूट्यूब हर कोने तक पहुंच चुका है.

फिर इन बच्चों में और इनके काम में ऐसा क्या खास है कि लोग इन्हें इंडियन फिल्म इंडस्ट्री का फ्यूचर बता रहे हैं. यही जानने की कोशिश करेंगे.

Bharat Talkies


# महेश बाबू के कलेवर के सीन शूट करने वाले बच्चे कौन हैं?

नेल्लोर कुरल्लु एलके एंटरटेनमेंट. एक यूट्यूब चैनल है. आंध्र प्रदेश से. दरअसल, नेल्लोर आंध्र के एक जिले का नाम है. अब तक इस चैनल को चार करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है. छह लाख से ज्यादा तो इनके सब्स्क्राइबर्स हैं. कहना गलत नहीं होगा कि आज ये एक सक्सेसफुल चैनल है. लेकिन जैसे हर बड़ी कहानी की शुरुआत छोटी होती है, ठीक वैसा ही इस केस में भी था.

किरण और लायिक शेख. दोनों पक्के दोस्त. वेंकटेश्वरपुरम नाम के छोटे से गांव में रहते हैं. छठी या सातवीं कक्षा में होंगे कि दोनों को फिल्मों का चस्का लग गया. हालांकि, तब नहीं सोचा था कि आगे जाकर खुद से कुछ भी शूट करेंगे. किरण नौवीं कक्षा में थे कि उनके साथ बड़ी ट्रैजडी हो गई. उनके पिता का देहांत हो गया. परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं थी. मजबूरन किरण को पढ़ाई छोड़कर इधर-उधर काम करना पड़ा. कुछ ऐसा ही हाल लायिक का भी था. घर की आर्थिक दशा के चलते उन्हें भी कच्ची उम्र में बाहर काम करना पड़ा. किरण चाय की दुकान पर काम कर रहे थे. काम के बाद जो भी समय मिलता उसमें लायिक के साथ बैठते. दोनों दोस्त फिल्मों पर चर्चा करते. महेश बाबू, पवन कल्याण की फिल्मों के किसी सीन पर गप्पे मारते. खुद से कुछ शूट करने का सोचते. ऐसी ही बातचीत में फैसला लिया कि खुद से कुछ शूट कर के देखेंगे. भले ही एक्सपेरिमेंट के तौर पर हो. अगर कामयाब हुआ तो वारे-न्यारे. और अगर फेल हुआ, तो भी कौन सी मुसीबत आ पड़ेगी.

Kiran And Laayik
किरण और लायिक के दिमाग की उपज है ये चैनल. फोटो – इंस्टाग्राम (दाईं फोटो में लायिक और बाईं में किरण)

शूट को लेकर किरण और लायिक एक ही पेज पर थे. लेकिन मसला था कि आखिर शूट करें तो क्या करें. शॉर्ट फिल्म बनाने लायक इनके पास बजट नहीं था. और डांस या कॉमेडी टाइप वीडियो ये शूट करना नहीं चाहते थे. इसलिए बीच का रास्ता निकाला. कि क्यों ना पसंदीदा फिल्मों के जबरदस्त एक्शन सीन्स रिक्रिएट किए जाएं. इसके दो फायदे थे. पहला कि जिस भी सुपरस्टार की फिल्म का सीन रिक्रिएट करेंगे, मुमकिन है कि उस स्टार के फैन्स उनके वीडियो को शेयर कर दें. उसकी रीच बढ़ जाए. दूसरा उनके पास म्यूज़िक डायरेक्टर अफोर्ड करने का बजट नहीं था. इसलिए सोचा कि जो भी सीन रिक्रिएट करेंगे उसका ओरिजिनल बैकग्राउंड म्यूज़िक ही इस्तेमाल कर लेंगे. ताकि असली वाले सीन की फील भी बरकरार रहे.

2020 के लॉकडाउन में फैसला लिया अपना पहला वीडियो बनाने का. फिल्म का सीन भी फाइनल कर लिया. फिल्म थी महेश बाबू स्टारर ‘सरिलेरू नीकेवरु’. फिल्म से महेश बाबू का एक एक्शन सीन चुन लिया गया. किरण डायरेक्ट करने को तैयार थे. वहीं, लायिक फुटेज को एडिट करने का ज़िम्मा लिए बैठे थे. अपने साथ अपने दो और दोस्तों को मिला लिया. वरुण और सुबानी. वरुण को आर्ट डायरेक्टर की जिम्मेदारी दी गई. जो भी प्रॉप शूट के लिए जरुरी होता, उसे अरेंज करना उनका काम था. वहीं, सुबानी थे उनके सिनेमैटोग्राफर. सीन किरण के दिमाग में बैठा हुआ था. एक्टर्स को क्या निर्देश देने हैं, वो उनके दिमाग में घूम रहे थे. लेकिन जिनके पीछे पूरी कथा होनी थी, वो वेरिएबल इस इक्वेशन से गायब थे. यानी कि एक्टर्स. अगर किसी बड़ी उम्र के एक्टर को हायर करेंगे तो वो उन्हें महंगा पड़ेगा. किरण इस बात से वाकिफ थे. ऐसे में बोलें तो बोलें क्या, करें तो करें क्या.

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गांव का मुन्ना बना इनका महेश बाबू. फोटो – यूट्यूब

कास्टिंग को लेकर सोच ही रहे थे कि किरण के दिमाग की बत्ती जली. उन्हें याद आया अपने गांव वाला मुन्ना. जो उम्र में उनसे भी छोटा था. बस सोच लिया कि उसे ही अपना महेश बाबू बनाना है. मुन्ना के परिवार की आर्थिक स्थिति भी किरण और लायिक जैसी ही थी. छोटी उम्र में ही उसके पिता का भी देहांत हो चुका था. मुन्ना को बुलाया. अपना प्लान बताया. मुन्ना मान गया. लेकिन साथ ही उसे एक और काम भी दिया गया. अपनी उम्र के 14 बच्चों को इकट्ठा करने का काम. ये काम मुन्ना के लिए मुश्किल नहीं था. लॉकडाउन का माहौल था. सभी बच्चे अपने घरों में ही थे. इसलिए उन्हें बुलाकर लाना कुछ ज्यादा मुश्किल नहीं था.

किरण और लायिक बच्चों के साथ शूट करने जा रहे थे. उन्हें बच्चों को फिल्मी सीन रिक्रिएट करते देखने का आइडिया यूनिक लगा. या तो लोग इसे पिक करेंगे वर्ना स्क्रॉल कर आगे बढ़ जाएंगे. खैर, टीम की करीब डेढ़ दिन की मेहनत के बाद 6 मिनट 38 सेकंड का वीडियो शूट हो चुका था. एडिटिंग होकर रेडी हो चुके इस वीडियो को रिलीज़ नहीं किया गया. सही मौके की ताक देखी. जो आया 09 अगस्त, 2020 को. इससे पहले पवन कल्याण की फिल्म ‘काटमरायुडू’ का एक्शन सीन रिक्रिएट कर अपलोड कर चुके थे. पवन कल्याण वाले वीडियो को अच्छा रिस्पॉन्स मिला. लेकिन असली बम फटा 09 अगस्त को. यानी महेश बाबू के बड्डे वाले दिन. वीडियो अपलोड हुआ और कुछ ही देर में हज़ारों की वॉच रेट से आगे बढ़ने लगा. देखते ही देखते ये हज़ार लाखों में तब्दील हो गए. जनता बौरा गई. फेसबुक, व्हाट्सऐप जिसने जहां भी वीडियो देखा, किरण एंड कंपनी की तारीफ किए बिना नहीं रह सका. यहां तक कि वायरल हुआ ये वीडियो ‘सरिलेरू नीकेवरु’ के डायरेक्टर अनिल राविपुडी तक भी पहुंचा. वो भी देखकर दंग रह गए. अपने ट्विटर पर लिखा,

इन बच्चों की डेडिकेशन देखकर मैं हैरान भी हूं और सरप्राइज़्ड भी. सचमुच कमाल है. ये बच्चे नहीं बिजली का झटका हैं.

Anil Ravipudi Tweet
अनिल राविपुडी का ट्वीट.

नेल्लोर कुरल्लु एलके एंटरटेनमेंट के महेश बाबू वाले वीडियो को अब तक करीब 8.9 मिलियन लोगों ने देखा है. यानी करीब 89 लाख लोगों ने. और ये तो सिर्फ यूट्यूब पर व्यूज़ हैं. इस वीडियो के अगर फेसबुक शेयर्स और व्हाट्सऐप फॉरवर्ड गिनने मुमकिन हो पाते तो मामला करोड़ों में जाता. वो भी बड़ी आसानी से.


# जब बजट नहीं तो ऐसे सीन शूट कैसे करते हैं?

बस्टर कीटन, अल्फ्रेड हिचकॉक और चार्ली चैपलिन. बीते जमाने के महान डायरेक्टर्स. जिनकी फिल्में हर उभरते हुए डायरेक्टर के लिए देखना कम्पल्सरी होता है. इन डायरेक्टर्स ने आज से 50-60 साल पहले अपना सिनेमा खोजा. इनका सिनेमा आज भी रेलवेंट हैं. और आगे भी रहेगा. 50-60 साल पहले का वो दौर जब एक कैमरे को उठाने के लिए कई लोग लगते थे. वो दौर जब स्टंट डबल नाम का पेशा एस्टैब्लिश नहीं हुआ था. कहें तो संसाधन बड़े सीमित थे. बावजूद ऐसी बातों के, इन डायरेक्टर्स ने अपने विज़न के साथ समझौता नहीं किया. कोई भी सीन दिखने में चाहे कितना भी मुश्किल लगे, उसे परदे पर उतार कर ही दम लिया. सिनेमा की तकनीकों की बारीकियों में उतरे और अपना जवाब ढूंढ लाए. फिर जो बनाया, उसे देखकर आज पूरी दुनिया के डायरेक्टर्स सीख रहे हैं.

नेल्लोर की किरण एंड कंपनी का केस भी कुछ ऐसा ही है. बड़ा बजट नहीं है. चमकते नाम वाले किसी स्टार को नहीं ला सकते. आकर्षक फैन्सी सेट नहीं बना सकते. लेकिन क्या यही सारे पैमाने जरुरी हैं एक अच्छी फिल्म बनाने के लिए? जवाब है कतई नहीं. किरण की टीम ने तमाम ऐसी बातों को डिफाई करते हुए अपने वीडियोज़ कैसे बनाए, उसी के बारे में जानते हैं.

Mahesh Babu Video 2
सीमित संसाधनों में भी इन बच्चों ने कमाल कर दिया. फोटो – यूट्यूब

#1. ‘नेल्लोर कुरल्लु’ का कोई भी वीडियो रिलीज़ हो, उसपर एक किस्म के कमेंट आते ही हैं. कि आप लोग बच्चों को इतने रिस्क पर कैसे डाल सकते हैं. उन्हें कुछ हो गया तो. उनके हाथों में धारधार हथियार कैसे दे सकते हैं. इतने गैर-जिम्मेदार कैसे हो सकते हैं जैसी बातें. टीम बच्चों को रिस्क पर नहीं डालना चाहती थी. और कभी डाला भी नहीं. पता था कि साउथ के फेमस एक्शन सीन्स को रिक्रिएट करेंगे, जहां हथियारों का भी इस्तेमाल हुआ है. ऐसे में अपने सीन को रियलिस्टिक बनाने के लिए उन्हें भी हथियार इस्तेमाल करने थे. लेकिन बच्चों के हाथों में तलवारें, चाकू भी नहीं थमा सकते. इसलिए बीच का रास्ता निकाला.

Weapons In Videos
लकड़ी के ऐसे हथियार बनाए जो असली वालों को साइड बिठा दें. फोटो – यूट्यूब

हर वीडियो से पहले किरण अपनी टीम के आर्ट डायरेक्टर वरुण से बात करते हैं. उन्हें अगले वीडियो के लिए कितने हथियार चाहिए, उसकी लिस्ट थमा देते हैं. यहां शुरू होता है वरुण का असली काम. वो सीधा जाते हैं किसी कारपेंटर के पास. वीडियो के लिए जो तलवार, छुरी चाहिए वो बनवाने के लिए. कारपेंटर जरूरत के अनुसार हथियार बनाकर दे देता है. कारपेंटर दो घंटे का वक्त लेकर हथियार सौंप देता है. यहां कैच ये है कि वो सारे हथियार लकड़ी के होते. लेकिन उन्हें इतनी सफाई से बनाया जाता है कि असली वाले से फर्क करना बेहद मुश्किल है. लकड़ी के हथियारों को वरुण ले आते हैं. फिर उन पर स्प्रे पेंट करते हैं. पहले ब्लैक कलर से. कुछ घंटे धूप में सुखाते हैं. फिर आती है अगले कलर की बारी. काले रंग के हथियारों को सिल्वर स्प्रे पेंट से फिनिशिंग दी जाती है. एक्शन सीन्स में उठा-पटक वाले हिस्से भी होते हैं. जहां बच्चों को किसी चीज़ से टकराना होता है. या किसी सतह पर गिरना होता है. टीम ने बच्चों की सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए इसका भी जुगाड़ निकाला. वो भी बिना अपने विज़न के साथ कॉम्प्रोमाइज़ किए. जिस भी सतह पर बच्चों के गिरने का सीन होता, उसे पहले ही गद्दों से ढक दिया जाता. ताकि किसी भी बच्चे को चोट नहीं आए.

#2. कहते हैं कि एक फिल्म एडिटिंग टेबल पर आकर ही बनती है. बिल्कुल सही कहते हैं. एडिटिंग सिनेमा की वो तकनीक है जिसे आम ऑडियंस से उतनी सराहना नहीं मिल रही है, जितनी कि मिलनी चाहिए. एडिटिंग एक जासूस की तरह है. दोनों अपने असली रुप में तभी दिखाई देते हैं जब कोई गलती हुई हो. वरना प्रत्यक्ष आंखों के सामने छुपे ही रहते हैं. किरण एंड टीम के पास अपने वीडियो एडिट करने के लिए महंगे सॉफ्टवेयर नहीं. ना ही लेटेस्ट प्रोसेसर वाले कंप्युटर, लैपटॉप हैं. लायिक सारे वीडियोज़ अपने फोन पर एडिट करते हैं. कभी काईनमास्टर तो कभी किसी दूसरे ऐप पर. एक वीडियो एडिट करने में उन्हें करीब 9 घंटे लगते हैं. इस दौरान काफी बार फोन हैंग हो जाता. ऐप बीच में क्रैश हो जाता. फिर भी लायिक अपना धैर्य नहीं छोड़ते. कैसे भी कर के एंड रिज़ल्ट तक पहुंचते ही हैं. हर एक शॉट प्लेसमेंट में लायिक की एडिटिंग बेहद क्रिस्प रहती है. शॉट से शॉट जुडने का फ़्लो एकदम स्मूद रहता है. इतनी सफाई भरा काम कि आम जनता का ध्यान सिर्फ वीडियो के स्लो मोशन वाले एक्शन तक ही सीमित रह जाता है.

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फोन भले ही दर्जनों बार हैंग हो, लेकिन लायिक गिव अप नहीं करते.

#3. बच्चों को निर्देश देना, उनसे मनचाहे तरीके से काम करवाना कोई आसान काम नहीं. किसी बड़े को एक बार बता दें कि शूट करते वक्त कैमरे में नहीं देखना है तो वो समझ जाएगा. लेकिन बच्चों का क्या करें. जो उनके मन में आएगा, वही कर के मानेंगे. बच्चों को डायरेक्ट करते वक्त किरण को भी ये दिक्कत आई. लेकिन उन्होंने बच्चों पर गिव अप नहीं किया. उन्हें लगातार समझाते रहे. प्यार से, तमीज़ से. और फिर बच्चों ने भी अपना बेस्ट दिया. किरण का एक और कमाल बताते हैं. वो किसी फिल्म स्कूल में नहीं पढे. ना ही कभी किसी डायरेक्टर को असिस्ट किया. फिर भी शॉट डिविज़न जैसी तकनीक पर उनकी कमांड काबिल-ए-तारीफ है. शॉट डिविज़न यानी लिखे हुए मटेरियल को कैसे शूट करना है, उस हिसाब से उसका बंटवारा करना. जैसे हीरो ने हाथ उठाया, उसके बाद ये डिसाइड करना कि अगला कौन सा शॉट आएगा ताकि इस शॉट का प्रभाव बना रहे. अगर शॉट डिविज़न सही नहीं रहे, तो सीन एक अधपकी खिचड़ी सा लगने लगता है.

Kiran Directing
बच्चों को सीन समझाते हुए किरण.

वीडियोज़ के सिनेमैटोग्राफर सुबानी के पास कोई बड़ा फैन्सी कैमरा नहीं. वो सारे वीडियोज़ रेडमी फोन पर शूट करते हैं. बिना किसी गिम्बल या स्टेबिलाइज़र की मदद से. फोन को हैंड हेल्ड मोड यानी हाथों में कैमरा रख इतनी सफाई से शूट करते हैं कि किसी भी क्लिप में झटका महसूस नहीं होता. जिसे फिल्मी भाषा में जर्क कहा जाता है.

अमेरिकन डायरेक्टर मार्टिन स्कोरसेसे ने कहा है कि जो फ्रेम में दिखता है और जो नहीं दिखता, सिनेमा बस उसी का नाम है. ‘नेल्लोर कुरल्लु’ अपने फ्रेम से बाहर जो मेहनत करते हैं, उसका नतीजा आज पूरी दुनिया देख रही है.

# अब तक क्या कुछ बना चुके हैं?

‘नेल्लोर कुरल्लु’ का चैनल भले ही महेश बाबू वाले वीडियो के चलते लाइमलाइट में आया. लेकिन इस टीम ने सिर्फ महेश बाबू वाले सीन को ही रिक्रिएट नहीं किया. और भी ऐसे बेहतरीन एक्शन सीन्स हैं, जहां इस टीम ने अपनी छाप छोड़ी है. वो कौन-सी फिल्में थी, उन्हीं में से कुछ के बारे में बताते हैं.

#1. बिगिल

22 जून को थलपति विजय का बड्डे होता है. महेश बाबू के बड्डे पर वीडियो रिलीज़ करने के बाद टीम ने विजय के जन्मदिन पर भी वीडियो रिलीज़ किया. उनकी फिल्म ‘बिगिल’ के एक एक्शन सीन को रिक्रिएट किया. अधिकांश वीडियोज़ में चैनल का फेस रहे मुन्ना यहां एक्शन से मिसिंग थे. क्योंकि लीड में थे खुद डायरेक्टर किरण. इसी 05 जून को दिए एक इंटरव्यू में किरण ने बताया था कि वो अपना अगला वीडियो फोन की जगह कैमरा पर शूट करेंगे. ये वही वीडियो था.

Nellore Kurralllu
दाईं तरफ फिल्म का शॉट, बाईं तरफ रीक्रिएट किया गया वर्ज़न.

#2. क्रैक

09 मार्च, 2021 को टीम ने रवि तेजा स्टारर ‘क्रैक’ के सीन पर वीडियो अपलोड किया. जिसे अब तक करीब 70 लाख बार देखा जा चुका है. आठ मिनट के इस वीडियो की लीड में थे मुन्ना. फिल्म का इफेक्ट बरकरार रखने के लिए यहां शॉट्स को रिवर्स भी किया गया. साथ ही फिल्म के ओरिजिनल बैकग्राउंड म्यूज़िक के साथ-साथ फिल्म के डायलॉग्स को भी इस्तेमाल किया गया.

Nellore Kurralllu Krack
दाईं तरफ फिल्म का शॉट, बाईं तरफ रीक्रिएट किया गया वर्ज़न.

ये टीम ‘क्रैक’ पर एक वीडियो पहले भी बना चुकी है. जहां लीड में सुबानी थे. और उनका कैमरा वर्क संभाला लायिक ने. इस वीडियो की खास बात ये थी कि टीम अब तक सिर्फ बच्चों के साथ काम कर रही थी. लेकिन यहां उन्होंने बड़ी उम्र के एक्टर्स को भी जगह दी.

#3. भारत अने नेनु

2018 में आई महेश बाबू की फिल्म. फिल्म के दुर्गामहल फाइट सीन को रिक्रिएट किया गया. जिसे यूट्यूब पर अब तक करीब 50 लाख बार देखा जा चुका है. टीम के महेश बाबू यानी मुन्ना की फिर से वापसी हुई. डायरेक्ट कर रहे थे किरण. वहीं, एडिटिंग और सिनेमैटोग्राफी का ज़िम्मा संभाला लायिक और सुबानी ने. महेश बाबू पर बनाए पहले वीडियो की तरह इस वीडियो को भी खूब पसंद किया गया.

Nellore Kurralllu Mahesh Babu
दाईं तरफ फिल्म का शॉट, बाईं तरफ रीक्रिएट किया गया वर्ज़न.

हम ऐसे दौर में पहुंच चुके हैं जहां मोबाइल फोन पर फीचर फिल्म बनाई जा रहीं हैं. वो भी बड़े एक्टर्स के साथ. ऐसी फिल्में किसी एक देश या कम्युनिटी तक सीमित नहीं रह रहीं, बल्कि पूरी दुनिया के फिल्म फेस्टिवल्स की सैर कर रही हैं. टेक्नोलॉजी की बदौलत सब आसान हो गया है. हर चीज बस एक टैप या क्लिक की दूरी पर है. बावजूद ऐसे तकनीकी विकास के फिल्म बनाना अभी भी मुश्किल ही है. क्योंकि फिल्म बनाने के लिए सबसे बेसिक और सबसे जरुरी चीज़ है पैशन. सिनेमा से वो अल्हड़पन भरा लगाव. बिना इसके सारे इक्विपमेंट्स बेकार हैं. इन लड़कों के पास वो पैशन है. बाकी बात इक्विपमेंट्स की, तो वो भी देर सवेर आ हो जाएंगे. किरण अपनी खुद की लो बजट फीचर फिल्म बनाना चाहते हैं. मुमकिन है कि बनाएं भी. बड़े स्टार्स के साथ काम करें. रेड कार्पेट वाली लाइफ जिएं. क्योंकि उस मुकाम तक पहुंचने के लिए जो चीज़ सबसे जरुरी होती है, वो इनके पास पहले से है. सिनेमा को लेकर इनका पैशन.


वीडियो: महेश बाबू, विजय के एक्शन सीन रीक्रिएट कर वायरल हुए ये बच्चे कौन हैं?

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