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क्या है NEET का 'ऑल इंडिया कोटा', जहां मोदी सरकार ने OBC को आरक्षण देने का फैसला किया है?

बुधवार 28 जुलाई को सोशल मीडिया पर एक हैशटैग ट्रेंड होता नजर आया. #neet_obc_आरक्षण_बहाल_करो. साथ में एक डेटा भी खूब शेयर किया गया कि बीते 4 सालों में जो 11027 सीटें OBC कैटेगरी के कैंडिडेट्स को मिलनी चाहिए थीं, वो नहीं मिलीं. इस हैशटैग पर ट्वीट करने वालों का कहना है कि NEET में ऑल इंडिया कोटे के तहत OBC कैटेगरी के लोगों को रिजर्वेशन नहीं मिल रहा है. 28 जुलाई को ही केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव के नेतृत्व में ओबीसी सांसदों के एक दल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और NEET परीक्षा के ऑल इंडिया कोटे में ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण बहाल करने की मांग की.

इससे पहले केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर यही मांग की थी. आखिरकार गुरुवार 29 जुलाई को केंद्र सरकार ने NEET ऑल इंडिया कोटे के तहत OBC को 27 प्रतिशत और EWS को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया. स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया का ट्वीट देखिए.

कहां से शुरू हुआ ये मामला?

NEET यानी नैशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट. मेडिकल यानी डॉक्टरी की पढ़ाई करने के इच्छुक लोग इस एंट्रेस एग्जाम के जरिए MBBS (मेडिकल कॉलेज) और BDS (डेंटल कॉलेज) में एडमिशन पाते हैं. NEET परीक्षा में जिस हिसाब से कैंडिडेट स्कोर करते हैं उसी हिसाब से उन्हें कॉलेज अलॉट होते हैं. तो हुआ ये कि 12 जुलाई 2021 को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET की तारीख का ऐलान करते हुए नोटिफिकेशन जारी किया.

इस नोटिफिकेशन में एक लाइन ऐसी थी जिस पर कई सारे छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई. नोटिफिकेशन में साफ-साफ लिखा था कि ऑल इंडिया कोटे के अंतर्गत OBC कैटेगरी के कैंडिडेट्स को नैशनल इंस्टीट्यूट्स और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में तो 27 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, लेकिन स्टेट गवर्नमेंट की सरेंडर सीटों पर नहीं.

neet 2021 नोटिफिकेशन में ऑल इंडिया कोटे के अंतर्गत रिजर्वेशन का ब्यौरा
neet 2021 नोटिफिकेशन में ऑल इंडिया कोटे के अंतर्गत रिजर्वेशन का ब्यौरा

सरेंडर सीट, ऑल इंडिया कोटा, नैशनल इंस्टीट्यूट्स, ये सब झाम नहीं समझ में आया? तो अब आसान भाषा में समझिए.

ऑल इंडिया कोटा क्या है?
22 जून 1984 को सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. प्रदीप जैन बनाम भारत सरकार के मामले में फैसला सुनाया. डॉ. प्रदीप जैन ने मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंस या डोमिसाइल के आधार पर दिए जाने वाले रिजर्वेशन को चैलेंज किया था. इस पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने ऑल इंडिया कोटा की व्यवस्था की. ताकि राज्यों को उनकी सीमा में आने वाले मेडिकल कॉलेजों में डोमिसाइल और रेजिडेंस के आधार पर 100 फीसद सीटें रिजर्व करने से रोका जा सके. ताकि जहां अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर या अच्छे मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहां के मेधावी छात्रों को दूसरे राज्यों में पढ़ने का मौका मिल सके.

 पढ़ाई करते मेडिकल स्टूडेंट्स. (सांकेतिक तस्वीर- इंडिया टुडे)
पढ़ाई करते मेडिकल स्टूडेंट्स. (सांकेतिक तस्वीर- इंडिया टुडे)

इसके बाद सभी राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में 15 फीसद अंडरग्रेजुएट सीटें और 50 फीसद पोस्टग्रेजुएट सीटें ऑल इंडिया कोटे के लिए रिजर्व कर दी गईं. जैसे मान लीजिए कि किसी राज्य के एक मेडिकल कॉलेज में अंडरग्रेजुएट यानी MBBS की सौ सीटें हैं तो उसमें से 15 सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया केंद्र सरकार पूरा करती है. राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेज की ये सीटें केंद्र सरकार के नियंत्रण में होती हैं. ऑल इंडिया कोटे के अंतर्गत आने वाली इन सीटों पर किसी भी राज्य के स्टूडेंट एडमिशन ले सकते हैं. इन 15 फीसद सीटों को सरेंडर्ड सीट भी कहा जाता है. बाकी 85 सीटों को राज्य सरकारें अपने नियम-कानून के हिसाब से भरती हैं.

दिक्कत कहां आई?
अपने हिस्से की 85 फीसद सीटों पर राज्य सरकारें अपने-अपने नियमों के मुताबिक आरक्षण देती हैं. केंद्र सरकार भी अपने नैशनल इंस्टीट्यूट्स (जैसे- एम्स) और सेंट्रल यूनिवर्सिटी (जैसे BHU) में ओबीसी (नॉन क्रीमी-लेयर) को 27 प्रतिशत, SC को 15 प्रतिशत, ST को 7.5 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देती है. लेकिन 2007 तक ऑल इंडिया कोटा के अंतर्गत आने वाली सीटों में आरक्षण की व्यवस्था नहीं थी. 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया कोटा में भी आरक्षण लागू करने का आदेश दिया. इसके बाद 15 फीसदी आरक्षण SC कैटेगरी के लिए और 7.5 फीसदी आरक्षण ST कैटेगरी के लिए ऑल इंडिया कोटा में रिजर्व किया गया. इसमें OBC रिजर्वेशन का कोई जिक्र नहीं था. इसलिए अब तक ऐसे ही चलता रहा.

इस साल जब NEET का नोटिफिकेशन जारी हुआ तो कई सारे संगठनों ने ऑल इंडिया कोटा में OBC रिजर्वेशन न मिलने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ अदर बैकवर्ड क्लासेज एम्प्लॉई वेलफेयर एसोसिएशन नाम के संगठन ने एक डेटा शेयर करते हुए दावा किया कि पिछले चार सालों में ऑल इंडिया कोटा के तहत मेडिकल और डेंटल दोनों के यूजी-पीजी मिलाकर 40 हजार 842 सीटें राज्यों से ली गईं. अगर 27 प्रतिशत ओबीसी रिजर्वेशन के हिसाब से जोड़ा जाए तो कुल 11027 सीटें ओबीसी कैटेगरी के स्टूडेंट्स को मिलनी चाहिए थीं जो कि नहीं मिली. ये डेटा 2017 से 2020 तक का है क्योंकि 2017 में ही NEET को पूरी तरह से लागू किया गया था. इस डेटा को शेयर करते हुए कई विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दिया था हवाला
साल 2015 में सलोनी कुमारी ने ऑल इंडिया कोटा में ओबीसी रिजर्वेशन न मिलने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में उठाया. इसकी सुनवाई अब तक चल रही है. एक मामला मद्रास हाई कोर्ट तक भी पहुंचा, जिसमें फैसला सुनाते हुए जुलाई 2020 में मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक कमेटी बनाने का आदेश दिया, जो ये तय करे कि ऑल इंडिया कोटा में OBC रिजर्वेशन कैसे देना है. सरकार ने कमेटी बनाई. उसने अपनी रिपोर्ट दी. केंद्र सरकार ने रिपोर्ट सौंप दी सुप्रीम कोर्ट को. NEET परीक्षा के लिए जारी नोटिफिकेशन में सरकार ने बताया कि ऑल इंडिया कोटा में 27 फीसद रिजर्वेशन की मांग को लेकर सलोनी कुमारी का केस सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है, अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है. सत्र 2021-22 के लिए ऑल इंडिया कोटा में OBC रिजर्वेशन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के हिसाब से तय किया जाएगा.

अब क्रेडिट लेने की होड़

2021-22 के लिए NEET का जो नोटिफिकेशन आया उसमें सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के हिसाब से फैसाला लेने की बात कह रही थी. लेकिन जब ऑल इंडिया कोटे में OBC रिजर्वेशन की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ तो सरकार ने इसी सत्र से आरक्षण देने का फैसला किया. प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया है. वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों के नेता भी इसे अपनी-अपनी जीत बता रहे हैं. दोनों में क्रेडिट लेने की होड़ मची है.


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