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वजन कम करने स्टेडियम पहुंचा लड़का जो बन गया ओलंपिक्स चैंपियन

Tokyo2020 Olympics में लोगों को Junior World Record धारी Neeraj Chopra से बहुत उम्मीदें हैं (गेटी फाइल)

शब्द खत्म हो गए हैं. Neeraj Chopra Olympics में व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाले सिर्फ दूसरे भारतीय बन चुके हैं. नीरज ने जैवलिन थ्रो का गोल्ड मेडल जीता. यह ओलंपिक्स इतिहास में हमारा पहला एथलेटिक्स गोल्ड मेडल है. Tokyo2020 Olympics से पहले हमने संभावित मेडल विनर्स पर ‘उम्मीद’ सीरीज की थी. पढ़िए नीरज की कहानी.

उम्मीद. लोग कहते हैं कि उम्मीद पर दुनिया कायम है. और इस बात को हम भारतीयों से बेहतर कौन समझ सकता है? हमारा तो हर दिन ही उम्मीद में बीतता है. और इन उम्मीदों को बढ़ावा मिलता है हर चार साल में होने वाले ओलंपिक्स से. लगभग हर दिन क्रिकेट को चियर करने वाला हमारा भारतीय दिल ओलंपिक के वक्त पूरी तरह से स्पोर्टी हो जाता है.

हम क्रिकेट को सेकेंडरी बनाते हुए स्पोर्ट्स फर्स्ट जैसी बातें करने लगते हैं. फिर नुक्कड़ पर होने वाली चर्चा किसी कवर ड्राइव की जगह ट्रैक एंड फील्ड पर आ जाती हैं. लंबी कूद और ऊंची कूद की बातें होती हैं. किसी के स्मैश तो किसी के थ्रो से सांसें ऊपर-नीचे होने लगती हैं. हर सेकेंड बदलते जज़्बातों पर सवार ऐसे ही लोगों के लिए दी लल्लनटॉप ने शुरू की है अपनी नई सीरीज- उम्मीद.

इस सीरीज में हम बात करेंगे उन भारतीय एथलीट्स की, जो टोक्यो 2020 ओलंपिक्स में मेडल के सबसे बड़े दावेदार होंगे. और इस उम्मीद की शुरुआत होगी नीरज चोपड़ा से.

# कौन हैं नीरज चोपड़ा?

नीरज चोपड़ा को आज पूरी दुनिया जानती है. भाला फेंक यानी जैवलिन थ्रो में नीरज न सिर्फ इंडिया बल्कि पूरे एशिया में टॉप के प्लेयर हैं. वर्ल्ड रैंकिंग देखेंगे तो नीरज से ऊपर सिर्फ एक एशियन दिखेगा. लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था. नीरज ने बचपन में जो सपने देखे थे, उनमें भाला फेंकना दूर-दूर तक नहीं था. नीरज क्या उनका परिवार ही नहीं जानता था कि भाला फेंकने जैसा भी कोई खेल होता है. लेकिन कहते हैं ना, कई बार अनजान लोग ही बड़ा काम कर जाते हैं. पानीपत के रहने वाले नीरज के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

बचपन में नीरज का वजन काफी ज्यादा था. आज से लगभग 10 साल पहले की बात की. नीरज के बढ़ते वजन से परेशान घरवालों ने उन्हें जिम भेजना शुरू किया. लेकिन कुछ ही दिन बाद मामला गड़बड़ाया और किन्हीं कारणों के चलते नीरज का जिम जाना बंद हो गया. अब घरवाले परेशान. ऐसे में उन्होंने अपने लाडले को फिट रखने के लिए उसे स्टेडियम भेजने का फैसला किया. यहां नीरज वॉक करने लगे. ऐसे ही एक दिन यहां उनकी मुलाकात कुछ एथलीट्स से हुई.

और जैसा कि सब जानते हैं, ‘हरियाणा में सिपाही और एथलीट सबसे ज्यादा मिले हैं.’ और इनके साथ का प्रभाव तो पत्थर को भी बदल देता है. बस इनसे प्रेरित होकर नीरज ने भी एथलीट बनने का फैसला कर लिया. अब फैसला तो कर लिया, लेकिन खेल कौन सा खेलें? इन्होंने तो मैदान को कभी उस नज़र से देखा ही नहीं था. ऐसे में प्लान बना कि सब ट्राई करके फिर बेस्ट चुनेंगे. तमाम ट्रायल्स के बाद नंबर आया भाला फेंक का.

नीरज के लिए ये खेल अद्भुत ही था. 12-13 साल के नीरज ने इससे पहले पत्थर और डंडे तो खूब फेंके थे, लेकिन भाला फेंकना उनके लिए एकदम नई चीज थी. ये कुछ ऐसा ही था जैसे थॉर ने कैप्टन अमेरिका के हाथ में पहली बार अपना हथौड़ा दे दिया हो. और अब कैप्टन अमेरिका ने हथौड़ा उठा लिया है तो-

कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना?

अर्थात- रीछपति (जामवंत) ने कहा कि सुनो हनुमान, हे बलवान तुम चुपचाप क्यों खड़े हो?

बस, नीरज ने ये उठाया भाला और फेंका सागर पार. अरे मतलब एकदम से सागर पार ही नहीं फेंक दिया, लेकिन इतनी दूर जरूर फेंका कि वहां मौजूद सारे लोग दंग रह गए. बस, नीरज का करियर तय करने के लिए इतना काफी था. अगले ही साल नीरज ने स्टेट लेवल जूनियर चैंपियनशिप और फिर जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल्स जीत लिए.

# खास क्यों हैं नीरज?

साल 2013-14 तक भारतभूमि पर नीरज का भौकाल सेट हो चुका था. लेकिन विश्व जीतना अभी बाकी ही था. फिर आया साल 2016. जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप पोलैंड में होनी थी. नीरज वहां के लिए निकले. और उनके इस निकलने में परिवार और जानने वालों का बड़ा मासूम सा भाव था- नया अनुभव मिलेगा. लेकिन नीरज के इरादे कुछ और ही थे. अंग्रेजी में कहते हैं ना- He is built Different. बस वही वाला.

नीरज ने यहां 86.48 मीटर तक भाला फेंक दिया. और इसी के साथ बन गया नेशनल नहीं, वर्ल्ड रिकॉर्ड. नीरज से पहले जूनियर लेवल पर इतनी दूर तक कोई भाला नहीं फेंक पाया था. ये रिकॉर्ड आज भी नायब सूबेदार नीरज चोपड़ा के ही नाम है. जी हां, 2016 की वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद ही सेना ने नीरज को जूनियर कमीशंड ऑफिसर बनाते हुए नायब सूबेदार की पदवी दे दी थी.

हालांकि इस वर्ल्ड रिकॉर्ड के बाद भी नीरज 2016 रियो ओलंपिक्स में नहीं खेल पाए. दरअसल रियो के लिए क्वॉलिफाई करने की कट ऑफ डेट 11 जुलाई थी और नीरज ने यह कारनामा 23 जुलाई को किया था. जूनियर लेवल पर धमाल करने के बाद नीरज ने सीनियर लेवल पर खेलना शुरू किया. यहां उन्होंने साउथ एशियन गेम्स, एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के गोल्ड मेडल जीत लिए हैं.

अब नीरज टोक्यो 2020 ओलंपिक्स के लिए तैयार हैं. लगातार 80 मीटर से ज्यादा दूर तक भाला फेंक रहे नीरज इन ओलंपिक्स गेम्स के एथलेटिक्स कॉम्पटिशन में भारत की मेडल की सबसे बड़ी उम्मीद हैं. वर्ल्ड रैंकिंग में 16वें नंबर पर मौजूद नीरज चोट के चलते लंबे वक्त तक मैदान से दूर थे. जनवरी 2020 में वापसी करते ही उन्होंने 87.86 मीटर तक भाला फेंककर ओलंपिक्स का टिकट हासिल किया. साउथ अफ्रीका के इस इवेंट में उनका थ्रो भारतीय नेशनल रिकॉर्ड के बेहद क़रीब था. बता दें कि भारतीय नेशनल रिकॉर्ड 88.07 मीटर का है. नीरज ने यह रिकॉर्ड 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में बनाया था.

# इनसे उम्मीद क्यों?

हाल ही में तैयारी के लिए यूरोप गए नीरज ने फिनलैंड में इस साल का अपना बेस्ट दिया था. इस इवेंट में उन्होंने 86.79 मीटर तक भाला फेंका. उनका ये प्रदर्शन नीरज को इस साल के टॉप-5 भाला फेंक एथलीट्स में से एक बनाता है. इस साल जर्मनी के जोहानेस वेटा ने सबसे दूर 96.29 मीटर तक भाला फेंका है. यह भाला फेंक के इतिहास में तीसरी सबसे दूरी तक फेंका गया भाला है. वेटा लगातार 90 मीटर से ज्यादा दूरी तक भाला फेंक रहे हैं.

इनके अलावा पोलैंड के मार्चिन क्रुकोव्स्की ने 89.55 जबकि लंदन ओलंपिक्स के गोल्ड मेडलिस्ट केशोर्न वॉलकॉट ने इस साल 89.12 मीटर तक भाला फेंका है. ऐसे में प्रदर्शन देखें तो नीरज इस वक्त दुनिया के चौथे बेस्ट भाला फेंक एथलीट हैं. लेकिन ओलंपिक्स में रैंक के आधार पर मेडल थोड़े ना मिलते हैं. क्या पता, नीरज वहां कुछ बेहतरीन कर जाएं और थोड़ा सा भाग्य का साथ उन्हें ओलंपिक मेडलिस्ट बना दे.

साथ ही इस बार मेडल के प्रमुख दावेदारों में से दो नाम पहले ही ओलंपिक्स से अलग हो चुके हैं. मौजूदा ओलंपिक्स चैंपियन जर्मनी के थॉमस रोला और इस्टोनिया के मैग्नस कर्ट. इन दोनों की अनुपस्थिति और नीरज की मौजूदा फॉर्म निश्चित तौर पर मेडल की उम्मीद जगाती है. हालांकि यह उनका पहला ओलंपिक्स है तो चीजें उनके लिए आसान नहीं रहने वालीं. लेकिन एक बात तो तय है- एथलेटिक्स में नीरज हमारी सबसे बड़ी उम्मीद हैं.

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