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मोदी सरकार के इतने मंत्रियों को बदलने की असली वजह क्या है?

जब मोदी कैबिनेट में विस्तार की चर्चा चली तो किसी को ये अंदाज़ा नहीं था कि ये कैबिनेट विस्तार से ज़्यादा कैबिनेट में भारी फेरबदल की कवायद है. ज्योतिरादित्य सिंधिया और सर्बानंद सोनोवाल जैसे नामों को लेकर टिप्पणीकार काफी आश्वस्त थे. फिर जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, वहां के चहरों को भी दिल्ली बुलाया जाएगा, ये सभी मान रहे थे. लेकिन इसका अंदाज़ा कम ही लोग लगा पाए थे कि मोदी सरकार अपने कैबिनेट मंत्रियों से इस्तीफे ले लेगी. वो भी तीन-तीन मंत्रियों के. तो आज हम मंत्रिमंडल विस्तार में नामों की चर्चा के साथ-साथ ये भी समझने की कोशिश करेंगे कि इस फेरबदल के पीछे सरकार का विचार क्या है. आपको बताएंगे कि किन मंत्रियों के इस्तीफे हुए और क्यों. फिर ये बताएंगे कि अच्छे काम या किसी दूसरे समीकरण के चलते प्रमोशन किसे किसे मिला और इसकी चर्चा करेंगे कि मंत्रिमंडल विस्तार से मोदी सरकार ने चुनावी राज्यों को क्या संदेश देने की कोशिश की है.

पहले बात उन नामों की जिनकी कैबिनेट से छुट्टी हो गई

1. पहला बड़ा नाम है डॉ हर्षवर्धन का. स्वास्थ्य मंत्री के पद से इनकी छुट्टी हो गई है. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मोदी सरकार के कोविड मैनेजमेंट पर खूब सवाल उठे. अस्पतालों में बेड की कमी, ऑक्सीजन की कमी और फिर वैक्सीन की किल्लत. हर तरह से सरकार निशाने पर रही. जब सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए जा रहे थे या विपक्षी सुझाव दे रहे थे तो डॉ हर्षवर्धन ‘शूटिंग द मैसेंजर’ वाला खेल खेल रहे थे. सुझाव देने वालों में ही कमियां निकाल रहे थे. डॉ हर्षवर्धन की वो मेहनत उनकी कुर्सी बचाने में काम नहीं आई. और मोदी सरकार ने उनसे स्वास्थ्य मंत्रालय ले लिया है. इस इस्तीफे से क्या ये भी समझा जाना चाहिए कि मोदी सरकार ने कोरोना में अपनी कमी को स्वीकार कर लिया है? टिप्पणीकार कहते हैं कि ये निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी.

वैसी दूसरी बार डॉ हर्षवर्धन से स्वास्थ्य मंत्रालय वापस लिया गया है. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में भी उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय दिया गया था. लेकिन पहले ही कैबिनेट विस्तार में हर्षवर्धन की जगह जेपी नड्डा को स्वास्थ्य मंत्रालय बनाया गया. हर्षवर्धन दिल्ली के चांदनी चौक से सांसद हैं.

2. दूसरा नाम है रविशंकर प्रसाद का. कानून मंत्री के अलावा सूचना और प्रोद्योगिकी मंत्री थे. इन्होंने भी इस्तीफा दे दिया है. पिछले कई दिनों से ट्विटर के साथ झगड़े को लेकर रविशंकर प्रसाद चर्चा में थे. और इसमें रविशंकर प्रसाद के तीखे बयान ट्विटर को लेकर आते रहे हैं. इस झगड़े के बीच ही उनका अब इस्तीफा हो गया है.

3. तीसरा बड़ा नाम है प्रकाश जावडेकर का. महाराष्ट्र से आने वाले बीजेपी के नेता. उनके पास सूचना-प्रसारण, पर्यावरण मंत्रालय और भारी उद्योग जैसे कई प्रभार थे. महाराष्ट्र से आने वाले सबसे वरिष्ठ मंत्री थे. अब महाराष्ट्र से नारायण राणे के रूप में बीजेपी का एक बड़ा नेता कैबिनेट में शामिल हुआ और शायद इसीलिए प्रकाश जावडेकर की छुट्टी कर दी गई है.

4. इस्तीफा देने वालों में चौथा बड़ा नाम है रमेश पोखरियाल निशंक का. निशंक उत्तराखंड के हरिद्वार से सांसद हैं. वो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. निशंक ने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य कारणों को बताया है. लेकिन टिप्पणीकार मान रहे हैं कि उत्तराखंड में अगले साल होने वाले चुनावों से पहले बीजेपी की नई रणनीति के तहत निशंक को मोदी मंत्रिमंडल से हटाया गया है.

5. शिक्षा मंत्रालय में राज्यमंत्री संजय धोत्रे ने भी इस्तीफा दे दिया है. धोत्रे महाराष्ट्र की अकोला लोकसभा सीट से सांसद हैं.

6. छठा नाम है संतोष गंगवार का. उन्होंने श्रम और रोज़गार राज्य मंत्री के स्वतंत्र प्रभार से इस्तीफा दे दिया है. संतोष गंगवार यूपी के बरेली से सांसद हैं. 1989 से वो लगातार बीजेपी के टिकट पर बरेली से जीतते रहे हैं, सिर्फ 2009 के चुनाव में हारे थे. अब मंत्रिमंडल से हटाकर उन्हें क्या नई भूमिका दी जाएगी, ये अभी साफ नहीं है.

7. सातवां नाम सदानंद गौड़ा है. वो रसायन और उर्वरक मंत्री मंत्री थे. गौड़ा बेंगलुरू नॉर्थ सीट से सांसद हैं.

8. अगला नाम बाबुल सुप्रियो का है. उन्होंने पर्यावरण और वन मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रभार से इस्तीफा दे दिया है. बाबुल पश्चिम बंगाल के आसनसोल से सांसद हैं. 2014 में पश्चिम बंगाल से जब बीजेपी के दो सांसद ही जीते थे तब एक नाम बाबुल सुप्रियो था. इसका उन्हें फायदा भी मिला और पहली बार में ही मंत्री पद मिल गया. दोबारा सांसद बने तो फिर मंत्रिमंडल में जगह मिली. फिर पश्चिम बंगाल में विधानसभा का चुनाव आया और सारे समीकरण बिगड़ गए. बाबुल सुप्रियो ने विधानसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए. अब बीजेपी उन्हें हटाकर किसी और नए चेहरे के ज़रिए नए समीकरण बनाने में जुटी है.

9. हटाए जाने वाले मंत्रियों में पश्चिम बंगाल से एक और नाम है देबोश्री चौधरी का है. वो महिला और बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री थीं. देबोश्री बंगाल के रायगंज से सांसद हैं.

10. हरियाणा से सांसद रतन लाल कटारिया की भी मंत्रिमंडल से छुट्टी हो गई है. हरियाणा में बीजेपी के एससी समुदाय से आने वाले नेता हैं. जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री थे.

11. प्रताप चंद्र सारंगी. इनका भी इस्तीफा हो गया है. ओडिशा के बालासोर सीट से बीजेपी के सांसद हैं. जब मंत्री बनाए गए थे तो उनकी सादगी की खूब चर्चा हुई थी. अब इनसे पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्यमंत्री के प्रभार का वापस ले लिया गया है.

12. अगला नाम महाराष्ट्र से है. रावसाहब दानवे. उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री का प्रभार इनके पास था, अब नहीं रहा. दानवे महाराष्ट्र में बीजेपी के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. जालना लोकसभा सीट से 5 बार सांसद रहे हैं. महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष भी रहे हैं.

13. आखिरी नाम है थावर चंद गहलोत का. इनका इस्तीफा पहले ही हो गया था. कल के शो में भी हमने ज़िक्र किया था. इनकी नई पोस्टिंग कर्नाटक के राज्यपाल के तौर पर हुई है.

बात उन मंत्रियों की, जिन्हें मोदी सरकार ने प्रमोशन दिया है?

1. किरेन रिजीजू
अरुणाचल प्रदेश की अरुणाचल पश्चिम सीट से तीन बार के सांसद किरेन रिजीजू पूर्वोत्तर में भाजपा के बड़े चहरों में से एक हैं. मौजूदा सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री होने के साथ साथ वो युवा मामलों और खेल मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भी थे. पिछले मोदी कैबिनेट में वो गृहराज्य मंत्री भी रह चुके हैं.

2. राज कुमार सिंह
बिहार के आरा से लगातार दूसरी बार भाजपा के सांसद आरके सिंह राजनीति में आने से पहले भारत के गृह सचिव भी रह चुके हैं. मौजूदा सरकार में वो उर्जा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे.

3. हरदीप सिंह पुरी
हरदीप सिंह पुरी उत्तर प्रदेश से भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं. मौजूदा सरकार में उनके पास दो अहम मंत्रालयों में स्वतंत्र प्रभार था – नागरिक उड्ड्यन मंत्रालय और आवास तथा शहरी मामले. कोरोना काल में विदेशों में फंसे भारतीयों को देश वापस लाने और सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में सरकार का मज़बूती से पक्ष रखने के लिए उन्हें जाना जाता है. राजनीति में आने से पहले वो भारतीय विदेश सेवा में रहे हैं.

4. मनसुख मंडाविया
गुजरात के लेउआ पटेल समाज से आने वाले मंडाविया अपने सूबे से भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं. मौजूदा सरकार में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्यमंत्री थे. इनके पुराने मंत्रालय का नाम आपको हिंदी में जटिल लगा होगा, तो अंग्रेज़ी नाम से समझिए – Ministry for Ports, Shipping and Waterways. इसके अलावा वो रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में राज्यमंत्री भी थे.

5. पुरुषोत्तम रुपाला
गुजरात के कड़वा पटेल समाज से आने वाले रुपाला गुजरात से ही भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं. अब तक ये कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्यमंत्री थे. पीएम मोदी के नज़दीक माने जाते हैं.

6. जी किशन रेड्डी
तेलंगाना के सिकंदराबाद से पहली बार के भाजपा सांसद रेड्डी दक्षिण भारत में भाजपा के युवा चहरों में से एक हैं. मौजूदा सरकार में गृहराज्य मंत्री थे.

7. अनुराग सिंह ठाकुर
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर हिमाचल की हमीरपुर सीट से भाजपा सांसद हैं. मौजूदा सरकार में वित्त मंत्रालय में राज्यमंत्री थे. साथ ही कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में भी राज्यमंत्री थे. हमने उन्हें अक्सर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ प्रेस कॉन्फ्रेस में देखा है.

उन राज्यों की बात जहां 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं

मोदी के नए मंत्रिमंडल में चुनावी राज्यों के लिए भाजपा की तैयारी की छाप दिखती है. सबसे पहला नाम है यूपी का. अगले साल के शुरू में यूपी में विधानसभा चुनाव है. यूपी से सबसे ज़्यादा 7 नए मंत्रियों को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. जब नए नामों की लिस्ट आई तो टिप्पणीकारों ने बीजेपी का जातीय समीकरण समझना शुरू कर दिया. 7 नामों में गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव एससी चेहरों को तरज़ीह मिली है. यूपी में यादव समाजवादी पार्टी का वोट बैंक माना जाता है और जाटव वोटों पर बीएसपी की पकड़ मजबूत मानी जाती है. इनको छोड़कर बाकी ओबीसी- दलित वोटों पर बीजेपी की नज़र है. और ये ही दिखता है यूपी से मंत्रियों की लिस्ट में. इसके अलावा अलग अलग इलाकों का भी प्रतिनिधित्व दिखता है. पूर्वांचल, ब्रज, बुंदेलखंड ऐसे हर इलाकों से नए चेहरों को शामिल किया गया है.

1. नए मंत्रियों में पहला नाम है कौशल किशोर का. ये मोहनलालगंज सीट से दूसरी बार सांसद हैं. पासी जाति से जाते हैं. यूपी के दलितों में जाटव के बाद पासी दूसरी बड़ी जाति है, जिसका वोट भी बीजेपी को मिलता है. यूपी के लगभग हर हिस्से में पासी जाति के वोट हैं. और अब कौशल किशोर को आगे बढ़ाकर बीजेपी अपने पासी वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करना चाहती है.

2. दूसरा नाम है एसपी बघेल. आगरा से बीजेपी के सांसद और बीजेपी का दलित चेहरा. एसपी बघेल पाल जाति से आते हैं. बृज के इलाके में यानी इटावा, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, मथुरा, आगरा, इन जिलों में पाल जाति के अच्छे खासे वोट हैं. एसपी बघेल समाजवादी से बीजेपी में आए थे. 2019 में सांसद बनने से पहले वो योगी आदित्यनाथ के कैबिनेट में मंत्री थे और अब मोदी कैबिनेट में उन्हें जगह दी गई है.

3. तीसरा नाम है बीएल वर्मा का है. पिछड़ी जातियों में शामिल लोध समुदाय से आते हैं. लोध वोट परंपरागत रूप से बीजेपी का वोटबैंक रहा है. लोध समाज से ही आने वाले कल्याण सिंह यूपी में बीजेपी से मुख्यमंत्री रहे हैं.

4. चौथा नाम है – पंकज चौधरी का. महाराजगंज सीट से सांसद हैं. कुर्मी बिरादरी से आते हैं. संतोष गंगवार भी कुर्मी हैं जिन्हें मंत्रिमंडल से हटाया गया है और पंकज चौधरी को जगह दी है. पंकज चौधरी का पूर्वांचल इलाके में अच्छा असर माना जाता है.

5. एक और नाम है भानु प्रताप वर्मा का. बुंदेलखंड इलाके के जालौन से सांसद हैं. 5 बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. कोरी समाज से आते हैं.

6. अगला नाम है अजय मिश्रा का. लखीमपुर खीरी से सांसद हैं. ब्राह्मण बिरादरी से हैं. इस इलाके से आने वाले जितिन प्रसाद पिछले दिनों कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. अब शायद बीजेपी जितिन प्रसाद वाले फैक्टर को बैलेंस करना चाहती है. कार्यकर्ताओं को संदेश देने के लिए पुराने बीजेपी नेता अजय मिश्रा को केंद्र में मंत्री बनाया है.

7. यूपी से आखिरी नाम है अनुप्रिया पटेल का. बीजेपी की सहयोगी अपना दल की नेता हैं. पिछली मोदी सरकार में भी वो मंत्री बनाई गई थीं. कुर्मी समुदाय से आती हैं. वाराणसी समेत पूर्वांचल के कई ज़िलों में कुर्मी वोटों में अपना दल की पैठ है. तो यूपी चुनाव से पहले अनुप्रिया पटेल को मंत्रिमंडल में शामिल कर बीजेपी अपना गठबंधन दुरुस्त करना चाहती है. हालांकि अनुप्रिया पटेल को मंत्रिमंडल में लेने के बाद बीजेपी की एक और सहयोगी निषाद पार्टी नाराज़ है. निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने कहा है कि अगर अनुप्रिया पटेल को मंत्री बनाया जा सकता है तो उनकी पार्टी को मंत्री पद क्यों नहीं दिया.

अब बात करते हैं गुजरात की

गुजरात में भी अगले साल के आखिर में विधानसभा चुनाव है. और इसलिए गुजरात को लेकर भी मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग दिखती है. गुजरात से दो पाटिदार और तीन ओबीसी चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिली है. गुजरात में अगले साल के चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी भी पूरा ज़ोर लगा रही है. खासकर सौराष्ट्र इलाके पटेल वोटर्स में आम आदमी पार्टी अपनी जड़े मजबूत करने में लगी है. इस फैक्टर ने जाहिर तौर पर बीजेपी की भी चिंताएं बढ़ाई होगी. और इसीलिए अब बीजेपी ने पुरुषोत्तम रुपाला और मनसुख मांडविया के रूप में पाटिदार समाज को संदेश दिया है. पुरुषोत्तम रुपाला कड़वा पटेल हैं और मनसुख मांडविया लेउवा पटेल हैं. मनसुख मांडविया का राज्यमंत्री थे, उनका प्रमोशन हुआ. दर्शना जरदोश, देवुसिंह चौहाण और महेंद्र मुंजपरा के रूप में तीन ओबीसी चेहरों को मंत्रिमंडल में लिया गया है. इन 5 नए नामों के साथ ही अब गुजरात से मोदी मंत्रिमंडल में कुल 7 मंत्री हैं.

एक और चुनावी राज्य है उत्तराखंड

उत्तराखंड से रमेश पोखरियाल निशंक मोदी सरकार में मंत्री थे, उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. और अब नैनीताल से सांसद अजय भट्ट को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. अजय भट्ट उत्तराखंड में बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. बीजेपी संगठन में काम करने का उनके पास लंबा अनुभव है.

इसके अलावा अगले साल पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भी चुनाव है. किसान आंदोलन शुरू होने के बाद पंजाब में बीजेपी की हालत सबसे खराब है. पुराना सहयोगी अकाली दल भी बीजेपी के साथ नहीं है. लेकिन पंजाब को मंत्रिमंडल में कुछ देने के लिए भी बीजेपी के पास ज्यादा विकल्प नहीं थे. बीजेपी से पंजाब के दो ही सांसद हैं जिनमें से सोम प्रकाश पहले से ही कृषि राज्य मंत्री हैं. सिख चेहरे के तौर पर हरदीप सिंह पुरी का प्रमोशन हुआ है. हांलाकि वो राज्यसभा सांसद उत्तर प्रदेश से हैं.

चुनावी राज्यों के अलावा बिहार पर भी खास नज़र रही है. बिहार में बीजेपी को अपने सहयोगी को मंत्रिमंडल में हिस्सा देना था. जेडीयू और एलजेपी केंद्र की सरकार में बीजेपी के सहयोगी हैं. एलजेपी से रामविलास पासवान मोदी सरकार में मंत्री थे लेकिन 8 अक्टूबर 2020 को उनके देहांत हो गया था. और उसके बाद से एलजेपी से किसी को मंत्री नहीं बनाया गया था. जेडीयू भी 2019 में मोदी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुई थी. इसलिए मंत्रिमंडल विस्तार में इन दोनों पार्टियों को शामिल करना था.

इसी तर्क पर जेडीयू को भी कैबिनेट में बर्थ मिली है. आरसीपी सिंह यानी राम चंद्र सिंह को मोदी कैबिनेट में जगह मिली है. वो जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. नीतीश कुमार के सबसे करीबी माने जाते हैं. अभी की जेडीयू में वो नीतीश कुमार के बाद नंबर दो माने जाते हैं. आरसीपी सिंह यूपी कैडर के आईएएस रहे हैं. और जब नीतीश कुमार रेल मंत्री थे तो आरसीपी सिंह उनके विशेष सचिव थे. नीतीश कुमार 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने तो आरसीपी सिंह को भी बिहार बुला लिया. अपना प्रधान सचिव बनाया. IAS से जल्दी रिटायर होकर वो राजनीति में आए और नीतीश कुमार के रणनीतिकार की भूमिका में रहे. जब प्रशांत किशोर जेडीयू में आए तो ऐसी खबरें आई कि आरसीपी सिंह हाशिए पर चले गए, लेकिन प्रशांत किशोर के जाने के बाद पकड़ पार्टी में फिर से मजबूत हो गई. और अब नीतीश कुमार ने अपने कोटे से उन्हें केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनवा दिया है.

अब लोक जनशक्ति पार्टी की बात करते हैं

रामविलास पासवान के बाद उनके उत्तराधिकारी के तौर पर बेटे चिराग पासवान को देखा जा रहा था. लेकिन महीनेभर पहले चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने उलटफेर कर दिया. चिराग पासवान को पार्टी अध्यक्ष के पद से हटा दिया. एलजेपी के 6 में से 5 सांसद चिराग पासवान के खिलाफ हो गए. और अब मोदी सरकार ने पशुपति पारस को एलजेपी के नेता के तौर पर एक तरह से मान्यता दे दी है, कैबिनेट में जगह देकर. पशुपति पारस ने भी आज मंत्रिपद की शपथ ली. और इस तरह से खुद को मोदी का हनुमान बताने वाले चिराग पासवान से बीजेपी ने मुंह मोड़ लिया. चिराग पासवान पशुपति पारस को मंत्री बनाए जाने का विरोध कर रहे थे. आज ट्वीट कर चिराग पासवान ने मोदी सरकार के फैसले पर ऐतराज जताया. कहा कि पार्टी से निकाले गए सांसद पशुपति पारस को लोकसभा में एलेजी का नेता माना गया है, स्पीकर के इस फैसले के खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.

एलजेपी का झगड़ा अपने जगह है, फिलहाल तो पशुपति पारस मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बन गए हैं.

अब मध्य प्रदेश की तरफ चलते हैं

मध्य प्रदेश के कोटे से कैबिनेट में एक सीट तो थावरचंद गहलोत के इस्तीफे से खाली हुई थी. उन्हें कर्नाटक का राज्यपाल बनाकर भेजा गया है. मध्य प्रदेश से नए मंत्रियों में एक नाम लगभग तय लग रहा था. ज्योतिरादित्य सिंधिया का. मध्य प्रदेश में कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ की सरकार गिराई थी. 11 मार्च 2020 को वो बीजेपी में शामिल हुए. और फिर एमपी में बीजेपी की सरकार बनवाई. अब उन्हें बीजेपी की तरफ से पुरस्कृत करने की बारी थी. पिछले साल जून वो राज्यसभा सांसद बनाए गए लेकिन तब से खाली ही थे, इंतज़ार था नए मंत्रिमंडल विस्तार का. अब मंत्रिमंडल विस्तार हुआ तो उन्हें कैबिनेट में जगह मिली. इससे पहले वो यूपीए 2 सरकार में 2012 से 14 तक बिजली मंत्रालय में राज्य मंत्री रह चुके हैं.

महाराष्ट्र से मोदी मंत्रिमंडल में बड़ा नाम है नारायण राणे. कांग्रेस में रहते नारायण राणे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. 2014 में ये बीजेपी में शामिल हुए. कोंकण इलाके से आते हैं राणे. कोंकण शिवसेना का गढ़ माना जाता है और वहां बीजेपी को एक कद्दावर चेहरे की जरूरत है. नारायण राणे मराठा समुदाय से हैं. नारायण राणे के अलावा कपिल पाटिल, भागवत कराड, भारती पवार जैसे कुछ और नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है.

इन सबके अलावा भाजपा ने सर्बानंद सोनोवाल का पुनर्वास भी किया है. वो केंद्र में मंत्री थे. लेकिन भाजपा को असम में एक स्थानीय चेहरे की ज़रूरत थी. तो उन्हें वहां भेजा गया, पार्टी जीती, तो सीएम पद भी मिला. लेकिन डीफैक्टो चीफ मिनिस्टर रहे हिमंता बिस्वसर्मा. इस बार पार्टी सूबे में फिर जीती, तो हिमंता बिस्वसर्मा ने सीएम पद पर दावा किया और इसमें वो सफल भी रहे. तो सोनोवाल को फिर दिल्ली बुलाया गया है.

तो ये थी मोदी कैबिनेट में फेरबदल को समझने की हमारी कोशिश.


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