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जब नेता बीजेपी में शामिल होने के लिए मरे जा रहे हैं, इसने किसानों के मुद्दे पर सांसदी छोड़ दी है

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बीजेपी. पूरा नाम भारतीय जनता पार्टी. केंद्र में नरेंद्र दामोदर दास मोदी के नेतृत्व में सरकार है. देश के 18 राज्यों में या तो बीजेपी है या फिर उसकी सहयोगी पार्टी सरकार में है. ऐसे में हर पार्टी के छोटे-बड़े नेता बीजेपी में शामिल होने के लिए छटपटाते दिख जाते हैं. पार्टी भी अपनी सहूलियत के हिसाब से नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करती रहती है. चुनाव के वक्त तो दल बदलुओं की बाढ़ सी आ जाती है. ऐसे में बीजेपी से कोई छोटा सा नेता भी अपने पद और पार्टी से इस्तीफा देने की नहीं सोचता है. लेकिन इस वक्त में भी एक नेता ऐसा है, जिसने बीजेपी और उसके ऑरा की परवाह न करते हुए अपनी संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. नेता का नाम है नाना पटोले, जो महाराष्ट्र की भंडारा गोदिया सीट से जीतकर पहली बार संसद पहुंचे थे.

प्रधानमंत्री मोदी ने 8 दिसंबर को बनासकांठा में किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा.
प्रधानमंत्री मोदी ने 8 दिसंबर को बनासकांठा में किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा.

8 दिसंबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के बनासकांठा में चुनाव प्रचार के दौरान किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस को कोस रहे थे, नाना पटोले ने अपनी ही पार्टी को कोसते हुए इस्तीफा दे दिया. नाना ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को भेजे इस्तीफे में 14 वजहें गिनाई हैं और सारी वजहें किसानों के मुद्दे से जुड़ी हैं. पटोले ने इस्तीफे में महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करते हुए लिखा है कि राज्य में किसानों के लिए ऋण माफी योजना लागू की गई, लेकिन वो पूरी नहीं हो पाई है. किसान अब भी आत्महत्या कर रहे हैं और सरकार इस मुद्दे पर असंवेदनशील बनी हुई है.

नाना पटोले ने जो वजहें गिनाई हैं, उसमें प्रधानमंत्री की ओर भी ध्यान दिलाया गया है. पटोले ने पत्र में लिखा है कि उन्होंने किसानों की दिक्कतें प्रधानमंत्री के सामने भी रखी थीं, लेकिन प्रधानमंत्री ने उन दिक्कतों को नजरअंदाज कर दिया.

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नाना पटोले ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को इस्तीफा भेजा है.

लोकसभा सचिवालय को इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद उन्होंने मीडिया से कहा-

‘जिस वजह से मैं बीजेपी में शामिल हुआ था, वह झूठा साबित हुआ. इस्तीफा देने के बाद अब मैं भीतर की बैचेनी से मुक्त हो गया हूं.’

किसानों के मुद्दे पर पहले भी दे चुके हैं इस्तीफा

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पटोले ने अपनी सियासत जिला परिषद सदस्य के तौर पर शुरू की थी.

पटोले ने अपना राजनीतिक करियर भंडारा जिला परिषद के सदस्य के तौर पर शुरू किया था. जब महाराष्ट्र में 1995 में विधानसभा चुनाव हुए तो उन्होंने कांग्रेस से टिकट मांगा, लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया. पटोले निर्दल लड़े और हार गए. सीट बीजेपी के खाते में गई. 1999 और 2004 का चुनाव उन्होंने लखनौर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़ा और जीत गए. 2008 में विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान धान के किसानों के मुद्दे पर पटोले का कांग्रेस नेतृत्व से विरोध हुआ और पटोले ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और पार्टी भी छोड़ दी. 2009 का चुनाव निर्दलीय लड़ा और प्रफुल्ल पटेल से हार गए. इसके बाद बीजेपी में शामिल हो गए और 2009 में विधानसभा पहुंच गए. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने टिकट दिया तो प्रफुल्ल पटेल को करीब 1.5 लाख वोटों से हरा दिया.

प्रधानमंत्री पर भी निशाना साध चुके हैं पटोले

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पटोले ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी, जिसके बाद से ही उनके इस्तीफे के कयास लगाए जा रहे थे.

पटोले पहले भी प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करते रहे हैं और कहा है कि प्रधानमंत्री को सवाल सुनना पसंद नहीं है. पिछले दिनों जब यशवंत सिन्हा ने महाराष्ट्र के अकोला में किसानों के समर्थन में धरना दिया था तो उस वक्त नाना पटोले भी वहां पहुंचे थे और उन्होंने यशवंत सिन्हा का समर्थन किया था. इसी साल 28 अक्टूबर को नाना पटोले ने शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे से भी मुलाकात की थी और किसानों के मुद्दे पर महाराष्ट्र की फड़नवीस सरकार और केंद्र की मोदी सरकार की आलोचना की थी. पटोले लोकसभा में विदर्भ को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर प्राइवेट बिल भी ला चुके हैं, जिससे पार्टी की खूब फजीहत हुई थी.

जानिए उन 14 मुद्दों को, जिन्हें आधार बनाकर पटोले ने पार्टी और सांसदी छोड़ी है.

1. पिछले एक साल में किसानों की आत्महत्या में 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सरकार ने किसानों को लागत का डेढ़ गुना पैसा देने को कहा था, लेकिन कुछ नहीं हुआ. सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू नहीं की.
2. महाराष्ट्र राज्य में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है. सरकार ने हर साल 2 करोड़ रोजगार का वादा किया था, जबकि रोजगार में 90 फीसदी की कमी आ गई है.
3. महाराष्ट्र में खानाबदोश लोग शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े हैं. सरकार ने अब तक रणके कमीशन की सिफारिशें लागू नहीं की हैं.
4. राज्य की अर्थव्यवस्था खराब है. नोटबंदी की वजह से करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए. प्राइवेट बैंकों से युवाओं को बाहर किया जा रहा है.
5. जीएसटी के बाद छोटे उद्योगों की हालत खराब है.
6. सरकार आरक्षण देने में नाकाम रही है. अब तक जाति आधारित जनगणना नहीं हुई है, जिससे कि ओबीसी की सही-सही संख्या मालूम हो सके.
7. गरीबों को खाते में न्यूनतम पैसा रखने की बाध्यता परेशान करने वाली है. एलपीजी पर जो सब्सिडी बैंक में आती है, वो भी पेनाल्टी में चली जाती है.

महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्याएं बढ़ती जा रही हैं.
महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्याएं बढ़ती जा रही हैं.

8. खाद और बीज की कमी की वजह से किसान परेशान हैं. वो मंडी में अपना उत्पाद नहीं बेच पा रहे हैं.
9. सरकारी योजनाओं का ठीक से पालन नहीं हो रहा है. प्रधानमंत्री फसल सुरक्षा बीमा योजना पूरी तरह से फेल हो गई है.
10. किसानों के पास केमिकल की जानकारी न होने से भविष्य में उनके साथ दिक्कत होने जा रही है.
11. फसलों के नुकसान पर राहत का पैसा बहुत कम मिलता है.
12. पिछले तीन साल में किसानों की आत्महत्याएं बढ़ी हैं.
13. सरकार की नीतियां कॉरपोरेट के पक्ष में हैं. ऐसा लगता है कि सरकार खेती को कॉन्ट्रैक्ट पर देने या फिर उसका निजीकरण करना चाहती है.
14. किसानों से कहा जाता है कि वो अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करवाएं, जो किसानों के लिए संभव नहीं है.


वीडियो में देखिए राजकोट में मिले कमाल के बच्चों से बातचीत

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