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हवा में फैल रहे कोरोना वायरस से कौन सा मास्क आपको बचा सकता है?

कोरोना वायरस (Corona Virus) की दूसरी लहर पूरे देश में तबाही मचा रही है. इस बीच एक नई स्टडी सामने आई है. इसमें बताया गया है कि कोरोना वायरस का संक्रमण मुख्य तौर पर हवा के जरिए फैल रहा है. ऐसा बताया जा रहा है कि सिर्फ संक्रमित व्यक्ति के छींकने-खांसने से ही नहीं,  बल्कि सांस लेने और बात करने से भी वायरस ड्रॉपलेट्स हवा में तैरने लगती हैं.  यह स्टडी जाने माने मेडिकल जर्नल लैंसेट ने पब्लिश की है. इस स्टडी के आने से पहले कोरोना वायरस संक्रमण (Corona Virus Infection) को लेकर यह धारणा थी कि यह वायरस मुख्य तौर पर संक्रमित सतहों के संपर्क में आने से फैलता है. इस स्टडी में बताया गया है कि वायरस की ड्रापलेट्स उन जगहों पर तीन घंटे तक हवा में रह सकती हैं, जहां वेंटिलेशन यानी हवा के आने-जाने की व्यवस्था तंग है. खासकर इनडोर जगहों पर. ऐसे में इन जगहों पर मौजूद लोगों में संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा है.

अब Mask किस तरह से यूज करना पड़ेगा?

इस स्टडी के आने के बाद कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए प्रोटोकॉल्स बदलने की बातें होने लगी हैं. खासकर, मास्क पहनने पर जोर बहुत ज्यादा बढ़ गया है. बताया जा रहा है कि बात अब सिर्फ एक मास्क पहनने से नहीं बनेगी. बल्कि लोगों को दो से तीन मास्क भी पहनने पड़ सकते हैं. इस नई स्टडी और मास्क के यूज के बारे में संक्रामक रोग विशेषज्ञ फहीम यूनस ने अपने ट्विवटर पर लिखा-

“लैंसेट की जो नई स्टडी आई है, उसका मतलब यह नहीं है कि पूरी की पूरी हवा संक्रमित है. इसका मतलब है कि वायरस हवा में ज्यादा देर तक रह सकता है. खासकर इनडोर सेटिंग्स में. इसकी वजह से संक्रमित होने का खतरा हो सकता है. हमारे पार्क और बीच (समुद्र तट) अभी भी सेफ जगहें हैं. लेकिन लोगों के बीच छह फीट की दूरी बनी रहनी चाहिए.”

मास्क के यूज के बारे में उन्होंने लिखा-

“N-95 या KN-95 के दो मास्क ले लीजिए. दोनों को एक दिन के अंतराल पर बदल-बदलकर प्रयोग करें. जब एक दिन पहला प्रयोग कर लें तो उसे संभालकर रख दें. हफ्तों तक आप इनका प्रयोग कर सकते हैं. कपड़े वाले मास्क प्रयोग करना बंद कर दें.”

कौन सा Mask बेहतर है?

लैंसेट की स्टडी के बाद मास्क किस तरह से लगाए जाएं, इस बारे में हमने एक एक्सपर्ट से भी बात की. उन्होंने बताया कि मास्क लगाने का जो तरीका विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है, अभी वही लागू है. उन्होंने और क्या कहा, उसके बारे में हम आपको आगे बताएंगे. लेकिन पहले जान लीजिए कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मास्क लगाने का सही तरीका क्या बताया है.

यह जानने के लिए हमने विश्व स्वास्थ्य संगठन की बेवसाइट का चक्कर लगाया. यहां हमें पता चला कि मास्क लगाने में जितनी सावधानी बरतने की जरूरत है, उतनी ही उसके स्टोरेज और डिस्पोजल में भी. विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइंस कहती हैं-

– मास्क लगाने से पहले अपने हाथ साफ कर लें. या तो उन्हें सैनिटाइज करें या साबुन से अच्छी तरह से धाएं. मास्क को किसी भी समय पर छूने और उतारने के बाद भी ऐसा करें.
– सुनिश्चित करें कि मास्क से आपका मुंह और नाक अच्छी तरह से ढंक जाएं.
– जब आप अपना मास्क उतारें, तो उसे एक साफ-सुधरे प्लास्टिक बैग में स्टोर करें.
– अगर कपड़े का मास्क यूज कर रहे हैं, तो इसे हर दिन धोएं. मेडिकल मास्क को यूज करने के बाद कूड़ेदान में कवर करके फेंक दें.
– वॉल्व वाले मास्क का प्रयोग ना करें.

ये तो थीं WHO की गाइडलाइंस. लेकिन ये गाइडलाइंस लैंसेट की स्टडी आने से पहले हैं. ऐसे में इस स्टडी से मास्क लगाने के संबंध में क्या कुछ बदलाव आना चाहिए, इस बारे में हमें हरियाणा सरकार के साथ काम कर रहे कम्युनिटी मेडिसिन में एमडी ने बताया-

“अभी केवल एक स्टडी आई है. इसमें कोई विस्तृत जानकारी भी नहीं है ज्यादा. किसी बड़ी मेडिकल एजेंसी, भारत सरकार या फिर WHO ने भी अपनी गाइडलाइंस नहीं बदली हैं. तो फिलहाल तो अभी नॉर्मल तरीके से ही मास्क लगाना है. अगर स्टडी एकदम सही है और वायरस हवा के जरिए तेजी से फैल रहा है, तो भी मास्क तो एकदम जरूरी ही है. अगर कोई पॉजिटिव है और उसने मास्क नहीं लगाया है, तो बहुत चांस हैं कि वो दूसरे स्वस्थ्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है. लेकिन अगर संक्रमित व्यक्ति मास्क लगाए हुए है और अगर वो छींकता-खांसता है, तो वायरस ड्रॉपलेट्स उसके मास्क में ट्रैप हो जाएंगी. पूरी तरह से नहीं. लेकिन बहुत कम ड्रॉपलेट्स बाहर आएंगी. अगर उस संक्रमित व्यक्ति के सामने कोई स्वस्थ व्यक्ति है और उसने भी मास्क लगाने के साथ छह फीट की दूरी बनाकर रखी है, तो उसके संक्रमण ना होने के चांस 99.9 फीसदी तक हैं. एक तो दूरी की वजह से वो बच जाएगा और दूसरा कि जो भी थोड़ी बहुत ड्रापलेट्स आएंगी, वो उसके मास्क में ट्रैप हो जाएंगी.”

जैसा कि आपने ऊपर पढ़ा कि नई स्टडी के बाद डबल और ट्रिपल मास्क लगाने की बात हो रही है. साथ ही कपड़े वाले मास्क की जगह N-95 और KN-95 मास्क लगाने पर जोर दिया जा रहा है. हमने एक्सपर्ट से पूछा कि यह कितना जरूरी है. उन्होंने बताया-

“जब ये बात आती है कि संक्रमित व्यक्ति से दूसरों को बचाना है, तो N-95 और कपड़े के मास्क में ज्यादा अंतर नहीं है. अगर पॉजिटिव व्यक्ति ने मास्क नहीं लगा रखा है और सामने वाले ने लगा रखा है तो उसे संक्रमण होने के 80 फीसदी चांस हैं. जो व्यक्ति पॉजिटिव नहीं है, वो एक N-95 मास्क लगा सकता है. कपडे़ वाले मास्क की डबल और ट्रिपल लेयर पहन सकता है. कुल मिलाकर मुंह और नाक के पास ठीक-ठाक अवरोध होना चाहिए और लोगों से छह फीट की दूरी बहुत जरूरी है.”

एक्सपर्ट ने हमें ये भी बताया कि आठ घंटे के अंतराल पर मास्क बदल लेना चाहिए.


 

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