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चीन को काउंटर करने के लिए भारत ने म्यांमार को हाहाकारी 'सिंधुवीर' दे दिया है

भारत ने म्यांमार को एक पनडुब्बी (सबमरीन) दी है, नाम है INS सिंधुवीर. इसे भारत सरकार की एक कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है. कूटनीतिक और सैन्य एक्सपर्ट्स इसकी तरह-तरह से विवेचना कर रहे हैं. आइए जानते हैं इस पनडुब्बी को और इससे जुड़ी कूटनीति को.

कब दी गई पनडुब्बी?

भारत की ओर से म्यांमार को एक किलो क्लास सबमरीन देने की खबरें मीडिया में दिसंबर 2019 में ही आ गई थीं. लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक घोषणा गुरुवार 15 अक्टूबर को की. इसे म्यांमार अपने नौसैनिकों को ट्रेनिंग के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रहा है.

INS सिंधुवीर 3000 टन की डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन है. यह रूसी मूल की है और 31 साल पुरानी है. यह भारतीय नौसेना के बेड़े में 10 किलो वर्ग की पनडुब्बियों में से एक थी. पिछले साल विशाखापत्तनम के हिंदुस्तान शिपयार्ड में इसका व्यापक रूप से आधुनिकीकरण किया गया था. इसमें कई नए उपकरण लगाए गए थे. इसे साल के शुरू में भारतीय नौसेना ने हिंदुस्तान शिपयार्ड को सौंप दिया था.

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आईएनएस सिंधुवीर को 2017 में हिंदुस्तान शिपयार्ड में अपग्रेड किया गया. (फोटो-livefistdefence.com से)

क्या हैं इस सबमरीन की खासियतें?

# यह सबमरीन लगातार 45 दिन तक समंदर के भीतर रह सकती है. इसमें 52 लोग सवार हो सकते हैं.

# ये उथले समंदर में भी आसानी से डुबकी लगाकर तैर सकती है. समंदर की गहराई में 300 मीटर नीचे तक जा सकती है.

# यह अटैक सबमरीन है, जो जहाज और दूसरी सबमरीन पर हमला कर सकती है. इसमें अलग-अलग तरह के हथियार ले जाए जा सकते हैं.

# इसमें बाहरी सतह पर एनइकोएटिक टाइल्स लगे होते हैं, जिसकी वजह से सोनार इसे मुश्किल से ही पकड़ पाते हैं.

ये किलो क्लास क्या होता है?

असल में यह नाटो ( North Atlantic Treaty Organization) द्वारा दिया गया नाम है. यह संगठन दुनिया भर की सबमरीन्स को पहचान के लिए अलग-अलग नाम देता है. रूस और चीन की सबमरीन को KILO कहा जाता है. इसी तरह दूसरे देशों के लिए Zulu, Whiskey, Quebec, Romeo, Foxtrot आदि नाम दिए गए हैं.

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सबमरीन की कैटिगरी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. इनमें से ही एक है किलो कैटिगरी.

भारत ने क्यों दी है सबमरीन?

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को एक बयान में कहा-

म्यांमार के साथ हमारे अच्छे संबंध है. भारत, म्यांमार की नौसेना को पनडुब्बी INS सिंधुवीर सौंपेगा. हम समझते हैं कि यह म्यांमार नेवी की पहली पनडुब्बी होगी. यह हमारे SAGAR (सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन) विजन का हिस्सा है, जिसका मकसद पड़ोसी देशों को सशक्त बनाना है.

क्या इसके पीछे कोई रणनीति है?

इस कदम को नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में अपना प्रभाव बढ़ा रहे चीन को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत लगातार म्यांमार के साथ सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. इससे पहले, अक्टूबर की शुरुआत में थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे और विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला दो दिन की यात्रा पर म्यांमार गए थे. यात्रा के दौरान वे म्यांमार के शीर्ष नेताओं से मिले और कई महत्वपूर्ण साझा कार्यक्रमों पर चर्चा की थी.

जानकार बताते हैं कि भारत इससे पहले म्यांमार को कई तरह के सैन्य हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दे चुका है. इनमें आइलैंडर समुद्री गश्त विमान, नेवल गन-बोट और हल्के टॉरपीडो से लेकर रडार, 105 एमएम की आर्टिलरी बंदूकें, मोर्टार, नाइट विजन उपकरण, ग्रेनेड लॉन्चर और राइफल तक शामिल हैं.

आखिर क्यों इतना जरूरी है म्यांमार?

आसियान (Association of Southeast Asian Nations) देशों के समूह में भारत के लिहाज से म्यांमार की स्थिति बहुत खास है. यह इकलौता ऐसा देश है, जिसके साथ भारत की 1,600 किलोमीटर से भी लंबी सीमा सटी है. इसमें से 750 किलोमीटर से ज्यादा लंबी समुद्री सीमा है. भारत के नॉर्थ-ईस्ट प्रदेश जैसे मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड की सीमाएं इससे मिलती हैं. इसी वजह से भारत के लिहाज से यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि वह म्यामांर से न सिर्फ अच्छे संबंध बनाकर रखे बल्कि सैन्य नजरिए से भी चाक-चौबंद रहे. इसे देखते हुए दोनों देश अब नियमित रूप से अभ्यास, साझा समुद्री गश्त और सैन्य स्तर पर विमर्श करते हैं. भारतीय नौसेना म्यांमार के नौसैनिकों को प्रशिक्षण भी देती है. दोनों देशों की थलसेनाओं ने मिलकर सीमा पर चरमपंथी समूहों के खिलाफ भी कार्रवाई की है.

क्या फ्री में दी गई है सबमरीन?

नहीं, भारत ने यह सबमरीन फ्री में तो नहीं दी है, लेकिन इसके लिए कोई रकम भी नहीं वसूली है. भारत ने यह सबमरीन म्यांमार को लाइन ऑफ क्रेडिट पर दी है. मतलब लंबे वक्त के लिए कीमत चुकाने या दूसरे तरीकों से कीमत चुकाने का मौका दिया है.


वीडियो – भारतीय नौसेना की INS अरिहंत सबमरीन अब दुश्मनों पर न्यूक्लियर मिसाइल छोड़ेगी

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