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मुजफ्फरपुर ही नहीं, बिहार की इन 14 जगहों पर भी बच्चे-बच्चियों से हुआ है रेप!

देर से ही सही, लेकिन मुजफ्फरपुर में बच्चियों के साथ जो हुआ, अब दुनिया के सामने आ गया है. इस बात की पुष्टि हो गई है कि 29 बच्चियों के साथ रेप हुआ है और नवंबर 2013 से दिसंबर 2015 के बीच चार बच्चियां गायब भी हुई हैं. बिहार के डीजीपी केएस द्विवेदी ने खुद इस बात की पुष्टि की है. एक बच्ची की हत्या की भी बात सामने आई है, जिसके लिए खुदाई हुई है और वहां की मिट्टी को जांच के लिए भेजा गया है. 10 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं और पुलिस अब इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है. इस मामले को अंजाम तक लाने में सबसे बड़ी भूमिका बिहार सरकार की रही है. बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के मुख्य सचिव अतुल प्रसाद के आदेश पर ही पूरे प्रदेश के 38 जिलों की 110 संस्थाओं का सोशल ऑडिट हुआ था, जिसमें पता चला था कि मुजफ्फरपुर में बच्चियों के साथ नृशंसता हुई है. इस सोशल ऑडिट को किया था मुंबई की संस्था टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की कोशिश टीम ने.

बिहार समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अतुल प्रसाद (बाएं) के आदेश पर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर मोहम्मद तारिक और उनकी कोशिश टीम ने 38 जिलों के 108 शेल्टर होम्स की जांच की थी.

कोशिश टीम की वजह से ही मुजफ्फरपुर में हुई वारदात का पता चला. लेकिन इस संस्था ने मुजफ्फरपुर ही नहीं, प्रदेश के और भी शेल्टर होम्स में हुई अनियमितताओं का खुलासा किया है. कोशिश टीम ने अपने ऑडिट के बाद बिहार सरकार को जो रिपोर्ट सौंपी थी, उसके मुताबिक प्रदेश की कुल 15 संस्थाओं में गंभीर खामियां मिली थीं. इनमें से मुजफ्फरपुर पर तो खूब बात हो चुकी है. अब बात उन 14 संस्थानों की, जहां पर कोशिश टीम ने पाया है कि वहां पर बच्चों, बच्चियों के साथ रेप से लेकर मारपीट तक की घटनाएं सामने आई हैं और उनकी जांच की ज़रूरत है.

1. निर्देश, मोतिहारी

मोतिहारी में निर्देश संस्था की ओर से चलाए जा रहे बॉयज चिल्ड्रन होम में भी बच्चों के साथ हिंसा और यौन शोषण की बात सामने आई है. वहां पर काम करे एक स्टाफ ने बच्चों के साथ मारपीट की. ये भी सामने आया कि अगर कोई एक बच्चा गलती करता है, तो चिल्ड्रन होम के सभी बच्चों के साथ मारपीट की जाती है. बच्चे क्या गलती करते हैं के सवाल पर चिल्ड्रन होम ने कहा कि बच्चे बदमाशी करते हैं, भागने की कोशिश करते हैं, आपस में लड़ाई करते हैं, बड़े बच्चों को भी छोटे बच्चों के साथ रख दिया जाता है और बड़े बच्चे छोटे बच्चों का यौन शोषण करते हैं. इनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है.

2. रूपम प्रगति समाज समिति, भागलपुर

रूपम प्रगति की ओर से भागलपुर के लिए विज्ञापन निकाला गया था. ये विज्ञापन कोशिश टीम की ऑडिट के बाद निकाला गया.

ये समिति भागलपुर में लड़कों के लिए चिल्ड्रन होम चलाती है. यहां भी कोशिश संस्था को कई खामियां मिलीं. यहां का एक ही स्टाफ बच्चों के सपोर्ट में था, जिसने बताया कि इस एनजीओ का सेक्रेटरी बच्चों का साथ देने के लिए उसे परेशान करता है.उसने बताया कि कैसे चिल्ड्रन होम के पुराने सुपरिटेंडेंट को हटा दिया गया, क्योंकि वो बच्चों के हक में बात करता था. इस संस्था में वित्तीय अनियमितता भी पाई गई है. जब चिल्ड्रन होम से शिकायत बॉक्स की चाबी मांगी गई तो पहले कहा गया कि चाबी खो गई है. उसके बाद चाबी मिली और शिकायती बॉक्स खोला गया तो उसमें कई पत्र थे, जिनमें वहां के रहने वाले बच्चों ने अपने साथ हो रही हिंसा का जिक्र किया था. इन पत्रों में चिल्ड्रन होम की रेखा के बारे में जिक्र था, जो सबसे ज्यादा हिंसा करती थीं. इसके अलावा वहां पर पढ़ाई-लिखाई का माहौल भी बेहद खराब था.

3. पनाह, मुंगेर

पनाह संस्था भी मुंगेर में लड़कों के लिए चिल्ड्रन होम चलाती है. यह चिल्ड्रन होम वहीं पर चलता है, जहां पर मुंगेर का बाल सुधार गृह है. पनाह में सुविधाएं भी उतनी ही खराब हैं, जितनी खराब बाल सुधार गृह में हैं. यहां बच्चों को सुपरिटेंडेंट के घर के काम करने के लिए मज़बूर किया जाता है. उन्हें खाना बनाने के लिए, सफाई करने के लिए कहा जाता है और जब वो मना करते हैं तो उनके साथ मारपीट होती है. यहां मौजूद एक बच्चे को बोलने और सुनने में भी तकलीफ है. माना जाता है कि वो अच्छा खाना बनाता है. जब उसने सुपरिटेंडेंट के लिए खाना बनाने से मना कर दिया, तो उसकी इतनी पिटाई की गई कि उसके गाल पर तीन इंच का कट का निशान बन गया. सात साल का एक और बच्चा बोल-सुन नहीं सकता है. उसका दावा है कि स्टाफ की पिटाई की वजह से उसका हाल ऐसा हुआ है.

4. दाऊदनगर ऑर्गनाइजेशन फॉर रूरल डेवलपमेंट (DORD), गया

DORD की तरफ से गया में लड़कों के लिए चिल्ड्रन होम चलाया जाता है. कोशिश संस्था के मुताबिक यहां पर भी बच्चों का शोषण होता है. बच्चों को हमेशा लॉक कर रखा जाता है. बच्चों ने पूछताछ के दौरान कोशिश को बताया कि चिल्ड्रन होम में मौजूद महिला स्टाफ बच्चों से कागज पर अश्लील बातें लिखवाती हैं और फिर उस कागज को किसी दूसरी महिला स्टाफ को देने के लिए दबाव बनाया जाता है. बच्चों ने अपने साथ मारपीट की भी बात कबूल की है.

5. नारी गुंजन, पटना, ज्ञान भारती, कैमूर और RVESK मधुबनी

स्पेशलाइज्ड अडॉप्शन एजेंसी में भी बच्चों के साथ अमानवीयता की बात सामने आई थी. (सांकेतिक तस्वीर)

पटना का नारी गुंजन, कैमूर का ज्ञान भारती और मधुबनी का RVESK स्पेशलाइज्ड अडॉप्शन एजेंसी चलाते हैं. इन तीनों ही जगहों पर रहने वालों के लिए हमेशा जान का खतरा है. नवजात और बच्चों की संख्या की तुलना में उनकी देखभाल करने वालों की संख्या बेहद कम है. नवजात और बड़े बच्चों के रहने के लिए यहां का माहौल बिल्कुल भी ठीक नहीं था. यहां रहने वाले बच्चे भूखे दिख रहे थे और वो खुश नहीं थे. बच्चों को गोद लेने की प्रकिया भी धीमी है. यहां काम कर रहे स्टाफ को कई महीनों से तन्ख्वाह नहीं मिली है.

6.ऑब्जर्वेशन होम, अररिया

सरकार की ओर से चलाए जा रहे अररिया के ऑब्जर्वेशन होम में बिहार पुलिस का एक गार्ड तैनात था, जिसने बच्चों के साथ हिंसा की थी. एक बच्चे ने दिखाया कि मारपीट की वजह से उसकी छाती पर गहरा घाव हो गया था. एक और बच्चे ने बताया कि उसे गहरी खरोंच आ गई थी, लेकिन इलाज के लिए उसे दवा तक नहीं दी गई. सुपरिटेंडेंट ने भी माना कि उन्हें इसकी जानकारी है. हालांकि उन्होंने ये भी माना कि गार्ड की नियुक्ति सरकार ने की है, इसलिए वो कुछ नहीं कर सकते. बच्चों ने कहा कि इस जगह का नाम सुधार गृह से बदलकर बिगाड़ गृह कर देना चाहिए.

7.IKARD, पटना

पटना में चलाए जा रहे इस शॉर्ट स्टे होम में भी हिंसा की घटनाएं हुई हैं. वो बच्चियां जो रास्ता भटककर वहां पहुंच गई हैं या फिर पहुंचाई गई हैं, उनके घरवालों से बात करने की कोशिश नहीं की जा रही है. बच्चियों को गाली देने और उनके साथ मारपीट करने की भी बात सामने आई है. एक लड़की ने तो एक साल पहले खुदकुशी भी कोशिश की थी. एक बच्ची के पास उसके पिता का फोन नंबर था, लेकिन उसे बात नहीं करने दी गई और उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया. बच्चियों ने कहा कि उन्हें न तो कपड़े दिए जाते हैं और न ही दवा. वहां का खाना भी बेहद खराब होता है.

8. साक्षी, मोतिहारी

बच्चियों की इतनी पिटाई की गई कि उनकी मानसिक स्थिति खराब हो गई. (तस्वीर सांकेतिक)

ये भी एक शॉर्ट स्टे होम है, जहां पर महिलाओं और बच्चियों के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं. इसकी वजह से महिलाएं और बच्चियां मानसिक तौर पर बीमार हो गई हैं. कई बच्चियों ने शिकायत की है कि उन्हें सैनिटरी पैड तक नहीं दिए जाते हैं. कुल मिलाकर यहां पर रहने की स्थितियां बेहद खराब हैं.

9. नॉवेल्टी वेलफेयर सोसायटी, मुंगेर

ये संस्था भी मुंगेर में शॉर्ट स्टे होम चलाती है. संस्था ने बिल्डिंग का एक हिस्सा किराए पर दे रखा है, जिससे संस्था को 10,000 रुपये महीने मिलते हैं. बच्चियों ने शिकायत की कि यहां के बाथरूम में कुंडियां नहीं हैं, जिनकी वजह से वो असुरक्षित महसूस करती हैं. जांच के दौरान कोशिश संस्था को एक रूम बंद मिला. जब उसे खोला गया तो उसमें एक महिला बंद थी, जिसकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी. स्टाफ ने कहा कि उसे इसलिए बंद किया गया था ताकि वो हिंसक न हो सके. रूम खुला तो वो एक स्टाफ को पकड़कर रोने लगी.

10. महिला चेतना विकास मंडल, मधेपुरा

इस संस्था की ओर से भी शॉर्ट स्टे होम चलाया जाता है. यहां की एक बच्ची ने दावा किया कि उसे जबरन उसकी गली में से उठाकर ले आया गया और फिर उसे कभी घर नहीं जाने दिया गया. कोशिश संस्था के मुताबिक संस्था बच्ची के बारे में और जानना चाहती थी, लेकिन जांच के दौरान खाना बनाने वाली के अलावा और कोई भी मौजूद नहीं था. खाना बनाने वाली भी कुछ बताने से डर रही थी. वहां पर कोई चारपाई या चटाई भी नहीं थी और बच्चियों को फर्श पर ही सोना पड़ता था.

11. ग्राम स्वराज सेवा संस्थान, कैमूर

ये भी एक शॉर्ट स्टे होम है, जहां से हिंसा की शिकायतें मिली हैं. सिक्युरिटी गार्ड के खिलाफ बच्चियों और महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए. ये भी सामने आया कि इस शॉर्ट स्टे होम के रोज का काम ये सिक्युरिटी गार्ड ही देखता है और जिसकी वजह से वो यहां रहने वाली औरतों और लड़कियों का शोषण करता है.

12. ओम साई फाउंडेशन, मुजफ्फरपुर

पूरे बिहार में सबसे ज्यादा खामियां मुजफ्फरपुर में ही मिली हैं. एक जगह पर 29 बच्चियों से रेप की पुष्टि हो चुकी है. दूसरी जगह पर भी गंभीर खामियांं देखने को मिली हैं, जिसकी पुष्टि खुद कोशिश संस्था ने की है. (सांकेतिक तस्वीर)

ओम साई फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे सेवा कुटीर में शारीरिक हिंसा की बात सामने आई है. वहां रहने वाले कुछ लोगों ने कहां कि उन्हें गालियां मिलती हैं. वहां रहने वालों ने बताया कि उन्हें देखने के लिए हर हफ्ते डॉक्टर आता है, जिससे उन्होंने मारपीट की शिकायत की थी. इसके अलावा इस संस्था में फर्स्ट ऐड बॉक्स नहीं था, कोई इमरजेंसी मेडिकल सुविधा नहीं थी.

13. मेटा बुद्धा ट्रस्ट, गया

इस ट्रस्ट की ओर से सेवा कुटीर का संचालन किया जाता है. यहां पर भी कई चीजें बेहद खराब स्थिति में मिलीं. यहां पर कई लोग मानसिक तौर पर बीमार दिखे. इसके अलावा कई लोगों ने शिकायत की कि उन लोगों की मानसिक संतुलन धीरे-धीरे खराब हो रहा है.

14. डॉन बॉस्को टेक सोसाइटी, पटना

इस संस्था की ओर से कौशल कुटीर का संचालन किया जाता है. ये एक वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर है, जहां पुरुष और महिलाएं दोनों ही हैं. ये महिलाएं और पुरुष वो हैं, जो सड़कों पर असहाय घूमते रहते हैं. इनके साथ भी हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं. यहां महिला और पुरुष एक साथ हैं, लेकिन किसी को किसी से बात करने की इज़ाजत नहीं है.


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