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कौन है ब्रजेश ठाकुर, जिसके बालिका गृह में 34 बच्चियों से रेप हुआ है?

मुजफ्फरपुर कांड में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती जा रही है, एक से बढ़कर एक रसूखदारों के नाम सामने आ रहे हैं. अब इनमें और भी कई बड़े नाम शामिल हो सकते हैं, क्योंकि बिहार सरकार की सिफारिश पर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है. सीबीआई के एसपी जेपी मिश्रा के नेतृत्व में 12 अधिकारियों की टीम मामले की जांच के लिए मुजफ्फरपुर पहुंच चुकी है. लेकिन टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की रिपोर्ट के बाद जो पहली गिरफ्तारी हुई वो थी ब्रजेश ठाकुर की. वही ब्रजेश ठाकुर, जिसके एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति की ओर से बालिका गृह चलाया जा रहा था.

29 बच्चियों के साथ हुए रेप के मामले की सीबीआई जांच करवाने के लिए विपक्ष ने बिहार विधानसभा के बाहर धरना-प्रदर्शन किया. इसके बाद सरकार ने सीबीआई से जांच करवाने की संस्तुति कर दी.
34 बच्चियों के साथ हुए रेप के मामले की सीबीआई जांच करवाने के लिए विपक्ष ने बिहार विधानसभा के बाहर धरना-प्रदर्शन किया. इसके बाद सरकार ने सीबीआई से जांच करवाने की संस्तुति कर दी. अब मामला सीबीआई के पास है.

1982 में पिता ने शुरू किया था अखबार

मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर एक गांव है पचदही. ब्रजेश यहीं का रहने वाला है. इसके पिता राधामोहन ठाकुर ने 1982 में मुजफ्फरपुर से एक हिंदी अखबार शुरू किया था. इस अखबार का नाम था प्रात: कमल. राधामोहन ठाकुर की पत्रकारों के बीच अच्छी पहुंच थी. बिहार में छोटे अखबारों को शुरू करने वाले शुरुआती नामों में से एक नाम राधामोहन ठाकुर का भी था. धीरे-धीरे राधामोहन ठाकुर ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर अपने अखबार के लिए सरकारी विज्ञापन लेने शुरू कर दिए. इन विज्ञापनों से राधामोहन ठाकुर ने खूब पैसे बनाए और फिर उसे रियल स्टेट में लगा दिया. वो रियल स्टेट का शुरुआती दौर था, तो राधामोहन ठाकुर ने इससे भी खूब पैसे बनाए. जब पिता की मौत हो गई, तो विरासत संभालने का जिम्मा आया ब्रजेश ठाकुर पर. पैसे पहले से ही थे और पिता का रसूख भी था. इसलिए ब्रजेश के हाथ में कमान आते ही उसने रियल स्टेट के कारोबार से एक कदम आगे बढ़कर राजनीति में हाथ आजमाना शुरू कर दिया.

ब्रजेश ठाकुर के पिता राधामोहन ठाकुर ने प्रात: कमल अखबार की स्थापना की थी.
ब्रजेश ठाकुर के पिता राधामोहन ठाकुर ने प्रात: कमल अखबार की स्थापना की थी.

विधानसभा चुनाव लड़ने उतरा, तो बाहुबली अशोक ने दी धमकी

1993 में जब बिहार के एक चर्चित नेता आनंद मोहन ने जनता दल से अलग होकर अपनी पार्टी बिहार पीपल्स पार्टी बनाई तो ब्रजेश ठाकुर उसमें शामिल हो गया. 1995 में बिहार में विधानसभा के चुनाव हुए, तो ब्रजेश ठाकुर मुजफ्फरपुर के कुड़हानी विधानसभा सीट से बिहार पीपल्स पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ गया. उसके सामने थे लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के दिग्गज नेता बसावन प्रसाद भागवत. वो वक्त लालू यादव का था और इस दौरान आनंद मोहन की पार्टी को बिहार में अगड़ों यानी कि सवर्णों की पार्टी के तौर पर देखा जाता था. चुनाव में अपराधियों का वर्चस्व था और जीत उसी के खाते में जाती थी, जिसके पाले में बाहुबली खड़े होते थे. इस चुनाव में ब्रजेश ठाकुर के खिलाफ एक बाहुबली का पैगाम आया कि ब्रजेश चुनाव न लड़े. उस बाहुबली का नाम था अशोक सम्राट. अशोक सम्राट के बारे में कहा जाता है कि बिहार के अपराध जगत में 90 के दशक में एके 47 की जो पहली खेप पहुंची थी, वो अशोक सम्राट के पास ही पहुंची थी, जिससे बरौनी में जीरोमाइल के पास एक ठेकेदार की हत्या की गई थी. इस हत्या के बाद से ही अशोक सम्राट का उत्तरी बिहार में सिक्का चलने लगा था.

आनंद मोहन और उनकी पत्नी लवली आनंद दोनों ही बिहार के सांसद रह चुके हैं.
आनंद मोहन (दाएं) और उनकी पत्नी लवली आनंद दोनों ही बिहार के सांसद रह चुके हैं.

इसी अशोक ने सीधे-सीधे ब्रजेश ठाकुर को चुनाव न लड़ने की धमकी दी. जब तक सम्राट अशोक की धमकी पर ब्रजेश ठाकुर नाम वापस लेता, नाम वापसी का दिन बीत गया था. इसके बाद ब्रजेश ठाकुर ने खुद को चुनाव से अलग कर लिया. जब नतीजा आया तो बसावन प्रसाद भागवत चुनाव जीत गए थे. ब्रजेश ठाकुर को मात्र 202 वोट मिले थे. 2000 के विधानसभा चुनाव में भी ब्रजेश ठाकुर एक बार फिर से कुड़हानी से ही चुनाव लड़ने उतरा. इस बार उसे अशोक सम्राट की धमकी का डर नहीं था, क्योंकि हाजीपुर पुलिस ने अशोक सम्राट को एक मुठभेड़ में मार गिराया था. ब्रजेश ने जमकर चुनाव प्रचार किया और खूब पैसे खर्च किए, लेकिन वो जीत नहीं सका. इस बार भी बसावन प्रसाद भागवत ने ब्रजेश को मात दी, लेकिन इस चुनाव में ब्रजेश दूसरे नंबर पर आ गया था. उसे 32,795 वोट मिले थे, जबकि बसावन प्रसाद को 48,343 वोट मिले थे. लगातार दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी ब्रजेश सियासत का मोह नहीं छोड़ पाया.

जब एक बाहुबली ने एके 47 से चलवाई थीं गोलियां

शाह आलम शब्बू नवरूणा कांड में सलाखों के पीछे है. कहा जाता है कि शब्बू ने 2001 में जिला पंचायत के चुनाव में ब्रजेश ठाकुर पर एके47 से गोलियां चलवाई थीं.
शाह आलम शब्बू नवरूणा कांड में सलाखों के पीछे है. कहा जाता है कि शब्बू ने 2001 में जिला पंचायत के चुनाव में ब्रजेश ठाकुर पर एके47 से गोलियां चलवाई थीं.

2001 में जब जिला परिषद के चुनाव होने थे, तो ब्रजेश इस चुनाव में भी मैदान में उतर गया. लेकिन इस बार भी ब्रजेश ठाकुर के सामने एक बाहुबली आ गया. नाम था शाह आलम शब्बू. वही शाह आलम शब्बू, जो फिलहाल नवरूणा हत्याकांड में जेल में बंद है. इस केस की जांच भी सीबीआई ही कर रही है. तो शाह आलम शब्बू ब्रजेश के सामने चुनावी मैदान में उतर गया. या यूं कहें कि ब्रजेश शाह आलम शब्बू के सामने मैदान में उतर गया. जिस दिन वोटिंग हो रही थी, उस दिन शब्बू को पता चला कि ब्रजेश ठाकुर ने अपने गांव पचदही और उसके आस-पास बूथ कैप्चरिंग करवा दी है. इसके बाद एक कार में सवार हथियारबंद लोग पचदही पहुंचे और ब्रजेश ठाकुर के घर को निशाना बनाकर फायरिंग कर दी. कहा जाता है कि ये फायरिंग एके 47 से की गई थी, लेकिन पुलिस कभी भी इस मामले की पुष्टि नहीं कर सकी. चुनाव में शाह आलम शब्बू की जीत हुई और ब्रजेश ठाकुर अंडरग्राउंड हो गया.  2005 में ब्रजेश ठाकुर फिर से चुनाव लड़ता, उससे पहले ही 2004 में बिहार पीपल्स पार्टी के मुखिया आनंद मोहन ने अपनी पार्टी का कांग्रेस के साथ विलय कर दिया. इसके बाद ब्रजेश ठाकुर के चुनाव लड़ने के रास्ते बंद हो गए.

आनंद मोहन की पार्टी से चुनाव लड़ने वाला ब्रजेश ठाकुर आनंद मोहन को उम्र कैद की सजा होने के बाद भी उसके संपर्क में बना रहा.
आनंद मोहन की पार्टी से चुनाव लड़ने वाला ब्रजेश ठाकुर आनंद मोहन को उम्र कैद की सजा होने के बाद भी उसके संपर्क में बना रहा.

बेटे-बेटी बन गए अखबारों के मालिक, खुद बन गया मान्यता प्राप्त पत्रकार

लेकिन ब्रजेश ठाकुर की आनंद मोहन से नज़दीकी बरकरार रही. इसके साथ ही राजद और जदयू के नेताओं के साथ भी ब्रजेश ठाकुर का उठना-बैठना जारी रहा. इसी बीच ब्रजेश ठाकुर ने अपने अखबार प्रात: कमल का मालिक अपने बेटे राहुल आनंद को बना दिया. कागज़ात के मुताबिक ब्रजेश खुद उस अखबार में सिर्फ पत्रकार है. स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक 2005 में जब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने, तो ब्रजेश ठाकुर ने मुजफ्फरपुर में अपने घर बेटे राहुल आनंद के जन्मदिन की पार्टी दी. इस पार्टी में शामिल होने के लिए उस वक्त के बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पहुंचे थे. ब्रजेश के सियासी रसूख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रात: कमल जैसे अखबार को भारी सरकारी विज्ञापन मिलने लगे और उसे बिहार सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त पत्रकार का तमगा भी मिल गया.

जब आनंद मोहन को गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया की हत्या में जेल हो गई, तो भी ब्रजेश ठाकुर आनंद मोहन से मिलने जेल में जाता रहा. इतना ही नहीं, जब-जब आनंद मोहन की जेल बदली हुई, ब्रजेश आनंद मोहन के साथ खड़ा दिखा. इसी बीच 2012 में ब्रजेश ठाकुर ने एक अंग्रेजी का अखबार भी शुरू कर दिया. इस अखबार का नाम है News Next, जिसकी एडिटर इन चीफ हैं ब्रजेश ठाकुर की बेटी निकिता आनंद. इसके अगले ही साल ब्रजेश ठाकुर ने अपना एनजीओ शुरू किया, जिसका नाम है सेवा संकल्प एवं विकास समिति. इस एनजीओ के बैनर तले ब्रजेश ठाकुर ने बालिका गृह की शुरुआत कर दी. इस बीच उसने ऊर्दू का भी एक अखबार लॉन्च कर दिया, जिसका नाम है हालात-ए-बिहार. अब तीनों अखबार प्रात: कमल, News Next और हालात-ए-बिहार के साथ ही बालिका गृह का भी संचालन एक ही बिल्डिंग से होने लगा, जो ब्रजेश ठाकुर के घर से सटी हुई है. तीनों ही अखबारों को बिहार सरकार की ओर से विज्ञापन मिलते हैं और अब भी तीनों ही अखबार हर रोज छपते हैं.

अखबार और बालिका गृह की बिल्डिंग एक ही है.
अखबार और बालिका गृह की बिल्डिंग एक ही है.

शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई बेटे की भी सियासी पारी

लेकिन ब्रजेश ठाकुर के अंदर का सियासी कीड़ा मरा नहीं था. उसकी खुद की सियासी पारी शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई, जिसके बाद उसने अपने बेटे राहुल आनंद को 2016 में जिला परिषद के चुनाव में कुड़नी से उतार दिया. चुनाव हुआ लेकिन राहुल आनंद भी अपने पिता की तरह ही हार गया. इसके बाद से लगातार ब्रजेश ठाकुर सेवा संकल्प एवं विकास समिति एनजीओ चलाता रहा, जिसमें बालिका गृह भी चलता था. धीरे-धीरे करके ब्रजेश ने बालिका गृह के अलावा अल्पावास गृह, वृद्धाश्रम आदर्श महिला केंद्र, स्वधार गृह और लक्षित हस्तक्षेप परियोजना जैसे कई ठेके हासिल कर लिए और बिहार सरकार से हर साल करोड़ों रुपये लेने लगा.  इसके अलावा आदर्श महिला शिल्प कला केंद्र, लिंक वर्कर स्कीम, भिक्षुक गृह और वामा शक्ति वाहिनी जैसी संस्थाएं भी सेवा संकल्प एवं विकास समिति के अंडर में चलती रहीं, जिसकी कर्ता-धर्ता ब्रजेश की सहयोगी मधु थी. अब जब सीबीआई पूरे मामले की जांच कर रही है, तो इस एनजीओ का लाइसेंस कैंसल कर दिया गया है.

अब ये बात पूरी तरह से साफ हो गई है कि ब्रजेश ठाकुर के बालिका गृह की 44 बच्चियों में से 34 बच्चियों के साथ रेप हुआ है.  इस बालिका गृह में एक बच्ची की हत्या कर शव दफनाने की भी बात सामने आई है, जिसके लिए बालिका गृह की खुदाई की गई है और वहां की मिट्टी को जांच के लिए भेजा गया है. डीजीपी केएस द्विवेदी के मुताबिक 2013 से 2015 के बीच इस बालिका गृह से चार बच्चियों के गायब होने की भी पुष्टि हो चुकी है. मामला अब सीबीआई के हाथ में है, जिसके बाद ब्रजेश ठाकुर जैसे और भी सफेदपोशों के नाम सामने आ सकते हैं.


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