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मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम रेप केस : क्या सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कोर्ट से झूठ बोल दिया?

मुंबई में मौजूद संस्था टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़. TISS. संस्था पढ़ाई कराती है. संस्था शोध कराती है. और सोशल ऑडिट भी करती है. साल 2017. TISS ने बिहार में सभी बाल संरक्षण गृहों का सोशल ऑडिट किया. बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के निर्देश पर. 15 मार्च 2018 को सोशल ऑडिट रिपोर्ट बिहार सरकार को सौंप दी गयी.

रिपोर्ट 100 पन्नों की. रिपोर्ट का पेज नंबर 51. यहां दावा किया गया कि मुजफ्फरपुर में चल रहे बालिका गृह सेवा संकल्प एवं विकास समिति में लड़कियों का यौन शोषण हो रहा है. इसे मीडिया में मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस कहा गया.

घटना के सामने आने के बाद लगभग डेढ़ साल बंद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की. रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा कि इस घटना में किसी बच्ची की हत्या नहीं हुई है. सीबीआई ने कहा कि शेल्टर होम की जिन बच्चियों की हत्या का शक जताया गया, वो सारी लड़कियां जीवित पाई गयी हैं. ये मामला जब सामने आया था, तो कुछ लोगों के कंकाल भी सामने आए थे. सीबीआई ने कहा कि वे कंकाल वयस्कों के हैं. सभी 35 लड़कियां जीवित हैं. चीफ जस्टिस शरद अरविन्द बोबड़े की बेंच ने ये स्टेटस रिपोर्ट स्वीकार कर ली.

कब क्या हुआ?

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में बच्चियों का यौन शोषण हुआ है, ये खबर सामने आने के बाद FIR दर्ज हुई. मुजफ्फरपुर के बाल संरक्षण के सहायक निदेशक दिवेश शर्मा के आवेदन पर महिला थाने में 31 मई 2018 को केस दर्ज किया गया.

बालिका गृह सेवा संकल्प एवं विकास समिति के संचालक ब्रजेश ठाकुर और विनीत के साथ ही संस्था के कर्मचारियों और अधिकारियों पर यौन शोषण, आपराधिक षड्यंत्र और पॉक्सो ऐक्ट के तहत केस दर्ज करवा दिया गया. पूरे मामले की जांच महिला थाने की थानेदार ज्योति कुमारी को सौंप दी गई.

मुजफ्फरपुर में शुरू हुई जांच. और इसके बाद धीरे-धीरे मामले के तार राज्य सरकार के अधिकारियों और नेताओं तक चले गए.

जांच शुरू हो गई. पुलिस अधिकारी महिला थानाध्यक्ष के साथ सेवा संकल्प एवं विकास समिति पहुंचे और जांच शुरू कर दी. मामले की जानकारी मुजफ्फरपुर के समाज कल्याण विभाग के निदेशक दिलीप वर्मा को भी भी दे दी गई. वहीं केस दर्ज होने से ठीक एक दिन पहले 30 मई 2018 को ही समाज कल्याण विभाग के हस्तक्षेप के बाद बालिका गृह की 87 बच्चियों में से 44 बच्चियों को दूसरी जगहों पर ट्रांसफर कर दिया गया. इनमें से 14 लड़कियों को मधुबनी, 14 को मोकामा और 16 लड़कियों को पटना जिले में ट्रांसफर कर दिया गया.

राज्य सरकार ने 2 जून को मामले की जांच के लिए SIT बना दी. बालिका गृह में छापेमारी की. बालिका गृह के संचालक ब्रजेश ठाकुर और विनीत के साथ ही वहां की आठ महिलाओं को थाने ले जाकर पूछताछ की गयी. डीएसपी मुकुल रंजन और महिला थानेदार ज्योति कुमारी साहू रोड स्थित सेवा संकल्प के ऑफिस पहुंचे. वहां से विजिटर रजिस्टर, स्टाफ रजिस्टर, एक कैसेट और कई कागजात अपने कब्जे में ले लिया.

इसी दिन बालिका गृह पर ताला भी लगा दिया गया. 3 जून को पुलिस ने बालिका गृह के संरक्षक ब्रजेश ठाकुर के साथ ही वहां काम कर रही किरण कुमारी, चंदा कुमारी, मंजू देवी, इंदु कुमारी, हेमा मसीह, मीनू देवी और नेहा को गिरफ्तार कर लिया. इस दौरान महिला आयोग ने भी इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया. आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा ने बालिका गृह का मुआयना किया. कहा कि यहां की व्यवस्था जेल से भी बदतर है.

बच्चों के बयान और बलात्कार की पुष्टि

शेल्टर होम में जांच में अभी तक कोई पुख्ता बात सामने नहीं आई थी. लग रहा था कि कुछ गड़बड़ी है. यौन शोषण की बात हो रही थी. फिर बात की गयी बच्चियों से. शेल्टर होम की बच्चियों ने बताया कि उनका न सिर्फ यौन शोषण हुआ था, बल्कि 29 बच्चियों से बलात्कार हुआ था. आरोप ये भी लगा कि एक बच्ची का बलात्कार किया गया, फिर बच्ची की हत्या कर दी गयी. लाश को दफना दिया गया.

तीन बच्चियों के गर्भवती हो जाने की भी खबर आई. बात ये भी कि लड़कियों को कई नेताओं और अफसरों तक जिस्मफरोशी के लिए सप्लाई किया जाता था.

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सात साल से लेकर 14 साल तक की बच्चियों से रेप हुआ है. मेडिकल में भी इस बात की पुष्टि हुई है. (सांकेतिक फोटो)

25 जून को कोर्ट में धारा 164 के तहत दिए गए बयान में बच्चियों ने बताया कि उन्हें सबसे पहले पॉर्न फिल्म दिखाया जाता था. उसके बाद यहां काम करने वाली मधु उन्हें नशे का इंजेक्शन देती थी. इंजेक्शन दिए जाने के बाद एक आदमी उन्हें संरक्षण गृह के बगीचे में ले जाता था, जहां उनके साथ गलत काम होता था.

उन्होंने कहा कि संरक्षण गृह में काम करने वाली महिलाएं भी बच्चियों के साथ गलत काम करती थीं. कोर्ट में दिए गए बयान के मुताबिक़, लड़कियों के लिए सबसे भयानक दिन मंगलवार का होता था. ये वो दिन होता था, जब लड़कियों को काउंसलिंग के लिए बाजार ले जाया जाता था. नाम होता था ‘काउंसलिंग’, लेकिन बच्चियों को बाहर ‘सप्लाई’ किया जाता था. आरोप है कि एक लड़की ने विरोध किया, तो उसकी पिटाई की गयी. इतनी पिटाई की लड़की की मौत हो गयी.

बयान के बाद लड़कियों की पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में मेडिकल जांच कराई गयी. जांच में पता चला कि 29 बच्चियां रेप का शिकार हैं. तीन गर्भवती हैं.

फिर सामने आए आरोपी

बच्चियों ने फोटो से आरोपियों की शिनाख्त की. सबसे पहले नाम आया ब्रजेश ठाकुर का. संरक्षण गृह चलाते थे. उसके बाद बाल कल्याण समिति के सदस्य विकास कुमार. इसके बाद बाल संरक्षण के एक और अधिकारी रवि रोशन के भी शामिल होने के बाद आई. इसके बाद पता चला कि मुजफ्फरपुर के बाल संरक्षण के सहायक निदेशक दिवेश शर्मा को मामले की पूरी जानकारी थी. और मामले में शामिल होने की भी बात आई.

Brajesh Thakur
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस का मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर.

लेकिन अभी पुलिस के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसकना बचा था. पुलिस को पता चला कि इस पूरी घटना का मास्टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर नहीं था, बल्कि मुजफ्फरपुर के समाज कल्याण विभाग के निदेशक दिलीप वर्मा ही था. वही दिलीप वर्मा, जिसे जांच शुरू करते समय सबसे पहले जानकारी दी गयी थी.

बहुत दिनों तक पुलिस दिलीप वर्मा को गिरफ्तार करने में असफल रही. आखिरकार अक्टूबर 2018 को बिहार पुलिस ने दिलीप वर्मा को उनके आवास से गिरफ्तार किया. कुछ दिनों के भीतर पुलिस ने ब्रजेश ठाकुर की सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया. और मामले में बने कुल 11 आरोपी.

तो क्या सीबीआई ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में झूठ बोला है?

ऐसा कहा जा रहा है कि अंतिम सच सामने आना अभी बाकी है, क्योंकि शेल्टर होम की लड़कियों ने खुद कहा था कि एक लड़की की पीट-पीटकर हत्या कर दी गयी. इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्टों में एक और बच्ची के मृत होने की खबर चलती रही है. यानी कुल दो बच्चियों की मौत हुई, जबकि सीबीआई ने कहा है कि किसी बच्ची की मौत नहीं हुई.

‘दैनिक भास्कर’ में छपी खबर बताती है कि 3 जून 2018 को जब सीबीआई ने सिकंदरपुर श्मशान से अस्थियां ज़ब्त की थीं, तो कहा कि शेल्टर होम की मृत बच्चियों को यहीं दफन किया गया था. ब्रजेश ठाकुर के ड्राइवर विजय तिवारी और बालिका गृह के सफाईकर्मी कृष्णा राम ने भी बच्चियों की हत्या और शव को श्मशान घाट में दफ्न करने की पुष्टि की थी.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी और बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन के साथ ब्रजेश ठाकुर (काले घेरे में)

इस मामले में जिस पत्रकार निवेदिता झा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, उन्होंने भी सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं. सीबीआई ने कहा कि सभी 35 बच्चियां जीवित हैं. लेकिन निवेदिता झा ने कहा कि उन्होंने 35 का तो ज़िक्र ही नहीं किया. उन्होंने कहा कि शेल्टर होने की बच्चियों ने अपनी कुछ साथियों की हत्या की बात का ज़िक्र किया था. वकील फौजिया शकील और शोएब आलम ने कहा है कि सीबीआई की रिपोर्ट से बड़े लोगों को बचाने का खेल हुआ है. याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेंगे.

किनको बचाने का खेल हुआ है?

बिहार सरकार पर आरोप हैं. मामला जब खुला, तो कहा गया कि इस शेल्टर होम से लड़कियों को नेताओं और अफसरों के घरों तक सप्लाई किया जाता था.

बिहार में सरकार में नीतीश कुमार. बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन. और विपक्ष में आरजेडी. मामला खुलने पर कहा गया कि नीतीश कुमार अपने नेताओं और अफसरों को बचा रहे हैं. बिहार सरकार ने पूरे मामले में पुख्ता सफाई या बयान भी जारी नहीं किया.

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं. तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया था कि बच्चियों को मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के पास भेजा जाता था. इस पूरे मामले में सत्ताधारी दलों के दिग्गज शामिल हैं, इसलिए कोई कुछ नहीं बोल रहा है.

राजद नेता तेजस्वी ने बिहार सरकार को मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस पर आड़े हाथों लिया है और सरकार के पास कोई सफाई-जवाब नहीं दिख रहे हैं.
राजद नेता तेजस्वी ने बिहार सरकार को मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस पर आड़े हाथों लिया है और सरकार के पास कोई सफाई-जवाब नहीं दिख रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने भी बिहार सरकार को लताड़ा था. अगस्त 2018 में इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन लोकुर, दीपक गुप्ता और केएम जोसेफ ने बिहार सरकार को आड़े हाथों लिया. कहा कि जिस NGO पर लड़कियों के बलात्कार, यौन शोषण और हत्या का आरोप है, राज्य सरकार उसकी फंडिंग क्यों करती रही.

बिहार के विपक्षी दल सीबीआई की इस रिपोर्ट को मानने को तैयार नही दिख रहे हैं. रालोसपा के नेता उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि बालिका गृह में कई नरकंकाल मिले, सबूत और बच्चियों की गवाही आई. उसके बावजूद सीबीआई ने मामले की लीपा-पोती कर दी. उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि पहले से ही आशंका थी कि सीबीआई नीतीश कुमार को क्लीन चिट देगी. उधर कांग्रेस ने भी सीबीआई जांच पर सवाल उठाए और कहा कि सरकार में कुछ भी संभव है.

लेकिन जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि सीबीआई ने अपने जवाब में स्पष्ट कहा है कि वहां मिले नरकंकाल किसी वयस्क के थे, न कि किसी बच्ची के. जिन 35 बच्चियों में से हत्या की बात आ रही थी वो सभी जीवित हैं. 


लल्लनटॉप वीडियो : मुजफ्फरपुर रेप केस: रेप और बच्ची की हत्या के मामले में श्मशान घाट की खुदाई

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