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पिछले डेढ़ महीने की वो घटनाएं, जिनसे यूपी पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं

उत्तर प्रदेश का बलिया ज़िला. यहां फेफना गांव में 24 अगस्त की रात एक पत्रकार की हत्या कर दी गई. नाम रतन सिंह था. पुलिस के मुताबिक, दो पक्षों के बीच पुरानी रंजिश थी, जिसके चलते दूसरे पक्ष ने रतन सिंह को मारा. छह आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, जांच चल रही है. घटना के बाद से ही यूपी पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी प्रियंका गांधी वाड्रा ने यूपी सरकार के खिलाफ ट्वीट किया. 23 और 24 अगस्त को घटित आपराधिक घटनाओं की लिस्ट पोस्ट की. आरोप लगाया कि राज्य में अपराध दोगुनी स्पीड से बढ़ रहे हैं, सरकार अपराध पर बार-बार पर्दा डालने की कोशिश करती है, लेकिन अपराध चिंघाड़ते हुए सड़कों पर तांडव करते हैं.

प्रियंका के अलावा भी बहुत से लोग यूपी सरकार और यूपी पुलिस पर सवाल खड़े कर रहे हैं. केवल ये घटना नहीं, इसके पहले की भी कई आपराधिक घटनाओं को लेकर लोग जब-तब यूपी पुलिस और सरकार को घेरते रहे हैं. यहां हम पिछले डेढ़-दो महीने में घटी ऐसी घटनाओं के बारे में आपको बताएंगे.

# कानपुर पुलिस पर हमला और आरोपी विकास दुबे का कथित एनकाउंटर

2 जुलाई 2020. इस रात कानपुर पुलिस की टीम बिकरू गई. गैंगस्टर विकास दुबे को पक़ड़ने. उसके घर के सामने पहुंचते ही पुलिसवालों पर फायरिंग हो गई, जिसमें आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए. विकास दुबे फरार हो गया. उसे खोजने का काम शुरू हुआ. 9 जुलाई 2020 को वो मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल मंदिर में पकड़ा गया. इस बीच विकास के साथ पुलिस पर हमले में साथ देने वाले कुछ लोगों को पुलिस ने अलग-अलग इलाकों से पकड़ा और कथित एनकाउंटर में वो लोग मारे गए. खैर, 9 जुलाई को विकास की गिरफ्तारी के बाद कानपुर पुलिस की टीम 10 जुलाई को उसे उज्जैन से कानपुर ला रही थी. सुबह-सुबह खबर आई कि जिस गाड़ी से उसे लाया जा रहा था, वो पलट गई. विकास ने भागने की कोशिश की. रोकने के चक्कर में वो कथित एनकाउंटर में मारा गया.

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10 जुलाई को विकास दुबे को कानपुर के भौंती क्षेत्र में कथित पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था. वो बिकरू हत्याकांड का मुख्य आरोपी था, जिसमें 8 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे. फोटो: India Today

इसके बाद यूपी पुलिस की कार्रवाई के तरीके पर सवाल खड़े हुए. विकास दुबे और उसके बाकी साथियों के कथित एनकाउंटर को लेकर पुलिस को घेरा गया. प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके कहा कि सुप्रीम कोर्ट कानपुर के पूरे कांड की जांच कराए.

इस कथित एनकाउंटर मामले की जांच एक पैनल कर रही है, जिसमें तीन सदस्य हैं. एक सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज बीएस चौहान, दूसरे यूपी के पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता और तीसरे इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस शशिकांत अग्रवाल हैं.

# गाज़ियाबाद में पत्रकार पर फायरिंग

गाज़ियाबाद में 20 जुलाई की रात पत्रकार विक्रम जोशी पर फायरिंग की गई. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. परिवार वालों ने आरोप लगाया कि विक्रम की भांजी को कुछ लड़के अक्सर परेशान करते थे. इसे लेकर उन्होंने करीब डेढ़ साल पहले पुलिस में यौन शोषण की शिकायत की थी. गाज़ियाबाद के विजयनगर थाने में, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. लड़कों ने अपनी हरकतें जारी रखीं. 16 जुलाई को विक्रम ने एक बार फिर मामले की शिकायत की थी. इस बार भी पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया. 20 जुलाई की रात विक्रम अपनी दो छोटी बेटियों के साथ बाइक से कहीं जा रहे थे, रास्ते में उन्हें कुछ लोगों ने रोक लिया. लाठी से पीटा और गोली मार दी. परिवार ने आरोप लगाया कि यौन शोषण के आरोपियों ने ही ये हमला किया है. साथ ही पुलिस की लेट-लतीफी पर भी सवाल उठाए थे.

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बाएं से दाएं: पत्रकार विक्रम जोशी. उनकी बेटी अपने घायल पिता के साथ. (फोटो- इंडिया टुडे)

पुलिस ने उस वक्त यानी विक्रम पर हमले के बाद, नौ लोगों को गिरफ्तार किया और कहा कि मामले की जांच की जा रही है. परिवार की शिकायत पर स्थानीय चौकी इंचार्ज सब इंस्पेक्टर राघवेंद्र को सस्पेंड कर दिया गया.

इस केस को लेकर भी यूपी पुलिस पर लोग जमकर गुस्सा हुए थे. यौन शोषण के मामले में एक्शन नहीं लेने को लेकर सवाल खड़े किए थे. सरेआम गोली चलाने की घटना को लेकर भी पुलिस की भयंकर आलोचना हुई थी.

# कानपुर किडनैपिंग केस

कानपुर के बर्रा इलाके में रहने वाले संजीत यादव का 22 जून को अपहरण हुआ था. 23 जुलाई को पुलिस ने पांच लड़कों को गिरफ्तार किया. उनसे पूछताछ में पता लगा कि 26 या 27 जून को ही संजीत की हत्या की जा चुकी थी.

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बाएं से दाएं: संजीत यादव. उनकी बहन रुचि, मौत की खबर सुनने के बाद घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल हुआ. (फोटो- रंजय सिंह)

संजीत के घरवालों के मुताबिक, उन्हें 29 जून को 30 लाख की फिरौती का कॉल आया था. उन्होंने पुलिस को जानकारी दी, तो एक प्लान बनाया गया. घरवालों ने आरोप लगाया कि फिरौती के 30 लाख रुपए उन्होंने पुलिस के कहने पर किडनैपर को दे दिए, लेकिन फिर भी पुलिस उनके भाई को बचा नहीं पाई. जब घरवालों को संजीत की हत्या के बारे में बताया गया, तो बहन रुचि ने कहा,

“किडनैपर ने 15 बार कॉल किया, पुलिस क्या करती रही? क्यों नहीं ट्रेस किया. क्या सोती रही पुलिस? प्रशासन सोता रहा? ये कप्तान साहब क्या करते रहे? चार दिन हुए थे, तब गई थी थाने. तब कहा था कि दारोगा आपका लड़का लाकर देगा. दे दिया लड़का? दे दिया? हमें पुलिस पर भरोसा था. खुद का बच्चा जाता है, तब पता चलेगा.”

इस मामले पर तो जमकर पुलिस पर सवाल उठे थे. एक तो संजीत को वक्त पर नहीं खोजा गया इसलिए. दूसरा फिरौती की रकम किडनैपर को दिलाने के आरोपों के मामले में. वहीं पुलिस का ये कहना था कि उन्होंने फिरौती के पैसे नहीं दिलाए थे.

ये बयान रुचि का 23-24 जुलाई को आया था. तब पुलिस ने बताया था कि आरोपियों ने संजीत की हत्या कर, उसके शव को पांडू नदी में फेंक दिया था. अब एक महीने से ज्यादा वक्त बीत गया है, लेकिन संजीत का शव नहीं मिला है. परिवार 25 अगस्त को न्याय की मांग करते हुए बर्रा के शास्त्री चौक पर धरने पर बैठा था, जिन्हें पुलिस ने बाद में हटा दिया.

इस मामले पर समाजवादी पार्टी ने पुलिस पर सवाल उठाए. कहा,

“कानपुर के संजीत यादव अपहरण कांड के बाद आज तक पीड़ित परिवार को न्याय तो छोड़िए, अपने बेटे के शव तक का इंतजार है. वहीं अपने मृत भाई को न्याय दिलाने के लिए पुलिस के पास पहुंची बहन को पुलिस बर्बर तरीके से गाड़ी में डाल कर ले गई, शर्मनाक कब मिलेगा न्याय? कब सुनेगी सरकार?”

# कासगंज में ट्रिपल मर्डर

कासगंज का होडलपुर नाम का गांव. 26 जुलाई की रात यहां तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. एक आदमी बुरी तरह घायल हुआ. सभी एक ही परिवार से थे. घटना पर पुलिस ने कहा था कि आपसी रंजिश के चलते ये हत्याएं की गई हैं. कासगंज पुलिस अधीक्षक सुशील घुले ने सात लोगों को गिरफ्तार किया था. एक पुलिस पुलिस अधिकारी ने तब कहा था,

“दोनों पक्षों के बीच में पुरानी रंजिश की बात आ रही है. पिछले साल एक मुकदमा दर्ज हुआ था. उसी के परिप्रेक्ष्य में ये घटना प्रतीत हो रही है.”

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बाएं से दाएं: घटनास्थल पर पीड़ित के शव के पास रोते उसके परिवार वाले. घटनास्थल पर पुलिस अधिकारी. (फोटो- ट्विटर- @PankajP65005661/इंडिया टुडे)

इस मामले पर भी लोगों का जमकर गुस्सा फूटा था. यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने यूपी सरकार के लिए खरी-खोटी भरा ट्वीट किया था. लिखा था,

“कासगंज ज़िले में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्याओं से प्रदेश दहल गया है. हत्यारों के फ़रार होने की ख़बर है. उत्तर प्रदेश में धारावाहिक आपराधिक घटनाओं को देखकर लगता है कि प्रदेश की बागडोर अब शायद भाजपा सरकार के हाथ से निकलकर बदमाशों के हाथों में चली गई है.”

# जब बुलंदशहर के वकील का शव सात दिन बाद मिला

धर्मेंद्र चौधरी. बुलंदशहर में रहने वाले एक वकील. 25 जुलाई के दिन वो अचानक गायब हो गए. भाई ने शिकायत दर्ज कराई. अगले दिन यानी 26 जुलाई की सुबह धर्मेंद्र की बाइक घर से छह किलोमीटर दूर खबरा गांव से बरामद हुई. जांच हुई, तो पता चला कि धर्मेंद्र अपने दोस्त विवेक से मिलने निकला था, जिसे उन्होंने 60 लाख रुपए उधार दे रखे थे. पुलिस ने विवेक के गोदाम की सीसीटीवी फुटेज खंगाली. पता चला कि 25 जुलाई को धर्मेंद्र आए तो थे, लेकिन वापस नहीं गए. 1 अगस्त को उनका शव उसी गोदाम में दफन मिला.

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

पुलिस के मुताबिक, विवेक धर्मेंद्र को पैसे वापस नहीं करना चाहता था, इसलिए उसने अपने दो सर्वेंट्स के साथ मिलकर उन्हें मार दिया और दफन कर दिया. तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया था.

ये मामला जब सामने आया, तो फिर यूपी में ‘जंगलराज’ फैल रहा है, इस तरह के आरोप लगे. प्रियंका गांधी ने लिखा,

“उप्र में जंगलराज फैलता जा रहा है. क्राइम और कोरोना कंट्रोल से बाहर है. बुलंदशहर में धर्मेन्द्र चौधरी जी का 8 दिन पहले अपहरण हुआ था, कल उनकी लाश मिली. कानपुर, गोरखपुर, बुलंदशहर. हर घटना में कानून व्यवस्था की सुस्ती है और जंगलराज के लक्षण हैं. पता नहीं सरकार कब तक सोएगी?”

आम जनता ने भी पुलिस पर लेट-लतीफी करने के आरोप लगाए. एक ने लिखा,

“जो हो रहा है, वो बहुत भयानक और हैरानी भरा है. धर्मेंद्र चौधरी, जो एक वकील थे बुलंदशहर के, वो आठ दिन पहले किडनैप हुए, फिर उन्हें मार दिया गया. पुलिस लापरवाह थी, परिणामस्वरूप वकील जीवित नहीं लौटे. फिरौती-किडनैपिंग-मर्डर. इस आपराधिक घटना ने लोगों के अंदर घबराहट पैदा कर दी है.”

# आजमगढ़ में दलित समुदाय से आने वाले प्रधान की हत्या

आजमगढ़ के बांसगांव में 14 अगस्त की शाम ग्राम प्रधान की हत्या कर दी गई. प्रधान का नाम सत्यमेव जयते उर्फ पप्पू था. 42 बरस के थे. दलित समुदाय से आते थे. पहली बार प्रधान बने थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 14 अगस्त की शाम हत्यारों ने खुद सत्यमेव जयते को घर से बुलाया था, गोली मारी, फिर खुद घर जाकर उनके मारे जाने की खबर भी बताई. गांव में बवाल मच गया. कई वाहनों में आग लगा दी गई. इस दौरान एक आठ साल का बच्चा भी एक गाड़ी की चपेट में आ गया, जिससे उसकी भी मौत हो गई. सत्यमेव जयते के घरवालों ने आरोप लगाए कि गांव के ‘ऊंची जाति’ से ताल्लुक लगने वाले लोगों ने उनकी हत्या की है.

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आजमगढ़ में प्रधान का शव. (फोटो- ट्विटर)

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने ग्राम प्रधान और बच्चे की मौत पर दुख जताया, परिवार के साथ संवेदना जाहिर की. ST/SC एक्ट के तहत मुख्यमंत्री सहायता कोष से पांच-पांच लाख रुपए पीड़ित परिवार को देने की घोषणा की. संबंधित थानाध्यक्ष और चौकी प्रभारी को निलंबित करने के आदेश दिए. अपराधियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट लगाने के निर्देश दिए.

इस घटना के बाद यूपी पुलिस और यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल उठे. बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने भी सवाल उठाए. ट्विटर पर भी लोगों ने यूपी की कानून-व्यवस्था को लेकर गुस्सा निकाला. इस घटना को कई लोगों ने ट्वीट किया. आजमगढ़ पुलिस को टैग किया. पुलिस ने एक ही जवाब सबमें चिपकाया-

“उक्त प्रकरण में IPC की धारा 302, 504, 506, 34 और SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज करके कार्रवाई की जा रही है. आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सम्भावित स्थानों पर लगातार दबिश दी जा रही है.”

# लखीमपुर रेप

लखीमपुर ज़िला. यहां एक गांव में रहने वाली 13 साल की बच्ची शौच के लिए गन्ने के खेत की तरफ गई थी. देर रात तक घर नहीं लौटी. परिवार वालों ने खोजा, वो नहीं मिली, तो पुलिस को शिकायत की. पुलिस ने खोजा, तो बच्ची का शव मिला. घरवालों ने गांव के ही संतोष यादव और संजय गौतम पर बच्ची का रेप और उसकी हत्या के आरोप लगाए. साथ ही ये भी आरोप लगाए गए कि बच्ची की आंखें फोड़ दी गईं. उसकी जीभ काट दी गई. इतना ही नहीं, उसके गले में रस्सी बांधकर उसे खेतों में घसीटा गया.

शव का पोस्टमॉर्टम हुआ. गैंगरेप की बात सामने आई, पर आंख फोड़ने और जीभ काटने जैसे आरोपों की पुष्टि नहीं हुई. पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया. एससी/ एसटी एक्ट भी लगाया. आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा.

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आजमगढ़ में प्रधान का शव. (फोटो- ट्विटर)

इस घटना के बाद विपक्षी पार्टी के नेताओं ने सरकार पर सवालों की बारिश कर दी. मायावती ने कहा कि सपा और वर्तमान की बीजेपी सरकार में फिर अंतर ही क्या रहा?

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लिखा कि बीजेपी के शासनकाल में यूपी में बच्चियों और औरतों का उत्पीड़न चरम पर है.

# आगरा हत्या

आगरा ज़िले में 19 अगस्त को एक खाली प्लॉट में एक लड़की का शव मिला. छानबीन करने पर पता चला कि लड़की एक डॉक्टर है. एसएन मेडिकल कॉलेज में जॉब करती थी. परिवार ने उसके लापता होने की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी. जब परिवार ने शव को पहचाना, तो हत्या का आरोप एक दूसरे डॉक्टर पर लगाया. डॉक्टर विवेक तिवारी पर, जो उरई जालौन के ज़िला अस्पताल के मेडिकल अधिकारी की पोस्ट पर तैनात था. पुलिस ने गिरफ्तारी की. पुलिस के मुताबिक, पूछताछ हुई, तो विवेक तिवारी ने हत्या करने की बात कुबूल की.

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आरोपी डॉक्टर विवेक तिवारी. (फोटो- इंडिया टुडे)

घरवालों ने बताया कि विवेक उनकी बेटी से शादी करना चाहता था, लेकिन वो इनकार करती रही. वहीं पुलिस के सामने विवेक ने बताया कि 18 अगस्त की रात वो महिला डॉक्टर से मिला था, दोनों के बीच बातचीत हुई और झगड़ा हो गया. गुस्से में उसने महिला डॉक्टर को मार डाला.

इस मामले के बाद भी यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल उठे. अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि भाजपा के राज में प्रदेश की नारी न तो शहरों में सुरक्षित है, न बस्ती, न गांव में.


वीडियो देखें: भदोही रेप-मर्डर केस: लड़की के दूसरे पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या निकला?

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