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जब पाकिस्तान में शतक लगाकर धोनी बोले- मैं संन्यास का ऐलान करता हूं

महेंद्र सिंह धोनी रिटायर हो गए. भारतीय क्रिकेट टीम में अब दोबारा नहीं खेलेंगे. रांची से आए धोनी ने क्रिकेट की दुनिया में बेमिसाल कहानी पेश की. 23 साल की उम्र में साल 2004 में टीम इंडिया में कदम रखा. इसके बाद कभी भी खराब फॉर्म के चलते बाहर नहीं हुए. फिर कप्तान बने. विश्व विजेता कप्तान. तीन आईसीसी ट्रॉफी जीतने वाले इकलौते कप्तान. 16 साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के करियर में धोनी ने कई लोगों पर अपनी छाप छोड़ी. इस सफर के कई किस्से-कहानियां हैं, जो धोनी के बारे में बताती हैं.

गांगुली बोले- चाबुक बल्लेबाज मिला है

धोनी जब नए-नए टीम में आए थे, तब सौरव गांगुली कप्तान थे. गांगुली ने धोनी की काबिलियत को भांप लिया था. वैसे भी दादा हीरे की पहचान करने वाले उत्कृष्ट जौहरी थे. जो पहले युवराज, सहवाग, हरभजन, जहीर जैसे युवाओं को मौका देकर स्थापित कर चुके थे. अब बारी धोनी की थी. गांगुली के साथी रहे जॉय भट्टाचार्य ने एक पॉडकास्ट में बताया,

मुझे याद है कि मैं 2004 में बांग्लादेश जाने वाली फ्लाइट में था. उसमें सौरव मुझसे कह रहा था कि हमारे पास एक नया चाबुक बल्लेबाज है. तुम्हें उसे देखना चाहिए. एमएस धोनी आगे चलकर स्टार बनेगा.

धोनी अपने पहले तीन मैच में नहीं चले लेकिन गांगुली का भरोसा उनसे डिगा नहीं. इसी भरोसे की लाज माही ने पाकिस्तान के खिलाफ विशाखापतनम वनडे में रखी. तूफानी सैंकड़ा लगाया.

धोनी नेे गांगुली की कप्तानी में डेब्यू किया था.
धोनी नेे गांगुली की कप्तानी में डेब्यू किया था.

सचिन को धोनी के शॉट में दिखा झटका

क्रिकेट के कथित भगवान सचिन तेंदुलकर को भी धोनी के खेल ने प्रभावित किया था. उन्होंने कहा,

धोनी के भारतीय टीम में शामिल होने के पहले तक मैंने उनके बारे में नहीं सुना था. मैंने उन्हें बांग्लादेश में पहली बार वनडे टूर्नामेंट में देखा था. मैं सौरव गांगुली के साथ बात कर रहा था. मैंने बताया कि इस आदमी में कुछ विशेष है. यह गेंद को हिट करने की क्षमता रखता है. उसने प्रैक्टिस मैच में दो बाउंड्री मारी थीं. मैंने दादा से कहा कि उसके हाथ में झटका है जिसे वह गेंद को मारने में इस्तेमाल करता है. वह पहली बार भारतीय टीम में आया था. लेकिन जिस तरह वह गेंद को मार रहा था, कोई भी जान सकता था कि वह स्पेशल है.

द्रविड़ की फटकार ने धोनी को बना दिया फिनिशर

गांगुली जैसा ही भरोसा धोनी के दूसरे कप्तान राहुल द्रविड़ ने दिखाया. गांगुली ने अगर मौका दिया तो द्रविड़ ने धोनी को वो बनने को कहा जो आज 15-16 साल बाद धोनी का दूसरा सरनेम हो गया है. वो है- फिनिशर धोनी. धोनी के मैच फिनिशर बनने की कहानी भी जोरदार है. वैसे तो उनका करियर लॉअर मिडिल ऑर्डर से ही शुरू हुआ. लेकिन पहचान मिली नंबर तीन पर बल्लेबाजी से. हालांकि आगे चलकर धोनी नंबर 5 से नीचे ही खेलने लगे. इसी से वे मैच फिनिशर कहलाए. वीरेंद्र सहवाग ने एक बार कहा था कि द्रविड़ की कप्तानी में धोनी को फिनिशर का रोल मिला. कुछ मैचों में धोनी इस रोल में नाकाम भी हुए. तब द्रविड़ से उन्हें फटकार भी पड़ी. लेकिन इसी फटकार ने धोनी को जगा भी दिया.

राहुल द्रविड़ के साथ एमएस धोनी.
राहुल द्रविड़ के साथ एमएस धोनी.

वो मैच जिसके बाद धोनी ने फिनिशर बनने की ठान ली

बताते हैं कि साल 2006 की चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान एक मैच ने धोनी को काफी प्रभावित किया. इस मैच के बाद धोनी फिनिशर के रोल को ही ओढ़ने, पहनने और बिछाने लगे यह मैच इंग्लैंड से जयपुर में था. मैच लो स्कोरिंग रहा. इंग्लैंड की टीम 125 रह पर सिमट गई थी. लेकिन लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की भी कमर लचक गई थी.

धोनी छठे नंबर पर आए थे और सात रन बनाकर आउट हो गए. हालांकि फिर युवराज और हरभजन सिंह ने मिलकर भारत को जिताया. धोनी को जानने वालों का कहना है कि उस मैच के बाद धोनी ने फैसला किया था कि कभी भी मैच को खत्म किए बिना वापस मत आओ. मैच का नतीजा दूसरों के भरोसे मत छोड़ो.

नंबर तीन तो मिल जाएंगे पर धोनी सा फिनिशर कहां से मिलेगा

मशहूर कमेंटेटर हर्षा भोगले बताते हैं कि उन्होंने द्रविड़ से धोनी को फिनिशर बनाने की वजह पूछी थी. भोगले ने कहा,

मैंने द्रविड़ से पूछा धोनी को फिनिशर की जिम्मेदारी क्यों दी? वह नंबर तीन पर कितना अच्छा खेलते हैं. द्रविड़ ने जवाब दिया कि नंबर तीन तो हमें खूब मिल जाएंगे. लेकिन धोनी जैसा फिनिशर नहीं मिलेगा. नंबर छह पर उसकी बल्लेबाजी बेशकीमती है. इसके बाद से फिनिशर धोनी एक लेजेंड बन गए.

जब शतक लगाकर धोनी बोले- संन्यास का ऐलान करता हूं

वीवीएस लक्ष्मण ने बताया कि धोनी काफी अनूठे खिलाड़ी हैं. वह न केवल मैदान बल्कि इसके बाहर भी हैरान करने वाली हरकतें करते हैं. इसी तरह के दो किस्से उन्होंने बताए. पहला वाकया साल 2005 का है जब भारतीय टीम पाकिस्तान के दौरे पर थी. फैसलबाद टेस्ट में धोनी ने शतक लगाया था. इससे वह काफी खुश थे. लक्ष्मण ने कहा,

मुझे याद है कि ड्रेसिंग रूम में वापस आने पर उसने दोनों हाथ ऊपर उठाए और जोर से कहा कि मैं मेरे संन्यास की घोषणा करता हूं. एमएस धोनी ने टेस्ट मैच में शतक लगा दिया है. यह काफी है. मुझे टेस्ट मैच से और कुछ नहीं चाहिए.

टीम के लिए बन गए ड्राइवर

दूसरी घटना साल 2008 की है. उस समय ऑस्ट्रेलियन टीम भारत दौरे पर थी. टेस्ट सीरीज के दौरान अनिल कुंबले ने संन्यास का ऐलान कर दिया. और धोनी कप्तान बन गए थे. नागपुर में चौथे टेस्ट के बाद टीम होटल जाने के लिए बस में बैठी थी. अचानक से धोनी ने बस ड्राइवर से पीछे जाकर बैठने को कहा. और खुद ड्राइवर सीट पर बैठ गए. फिर होटल तक बस चलाकर ले गए. हम सब अचंभित रह गए. क्योंकि भारतीय टीम का कप्तान बस चला रहा था.

अंपायरों से भी धोनी का खास कनेक्शन

धोनी का अंपायरों से भी खास रिश्ता रहा है. कभी किसी फैसले को लेकर भिड़ गए तो कभी उनके साथ मस्ती-मजाक करते देखे गए. ऐसा ही एक वाकया भारतीय अंपायर नितिन मेनन ने सुनाया. उन्होंने कहा,

मैंने साल 2017 में भारत-इंग्लैंड के बीच टी20 मैच से इंटरनेशनल अंपायरिंग में कदम रखा था. भारत वह मैच हार गया था. मैच के बाद धोनी मेरे पास आए. उन्होंने मुझे पहले मैच के लिए बधाई दी. कहा कि आपने अच्छा काम किया. उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं थी. लेकिन उन्होंने किया.

मैंने उस सीरीज के दौरान देखा कि वह बिजनेस क्लास में सफर नहीं करते थे. वह हमारी तरह की इकनॉमी क्लास में ही बैठा करते थे. साथ ही बातचीत के दौरान वे घरेलू खिलाड़ियों के बारे में पूछते थे कि कौन कैसा खेलता है?

सस्पेंशन की बात हो रही थी, धोनी कुर्सियां निहार रहे थे

धोनी के मजाकिया अंदाज के बारे में पूर्व अंपायर साइमन टॉफेल ने भी एक किस्सा बताया. यह बात 2010-11 के भारत के दक्षिण अफ्रीका दौरे की है. टॉफेल ने धोनी को भारतीय टीम की स्लो ओवर रेट के बारे में बताने को बुलाया. उन्होंने कहा,

हम आराम से बात कर रहे थे. और धोनी अंपायर के कमरे में मौजूद काले चमड़े की कुर्सियों को देख रहा था. उसने कहा कि ये कुर्सियां सही हैं. ये काफी अच्छी हैं. मैं सोच रहा था कि ऐसी दो कहां मिल सकती हैं. अगर मिल जाए तो खरीदने को तैयार हूं. इस पर मैं सोच रहा था कि मैंने ओवर रेट पर बात करने के लिए बुलाया है और तुम चमड़े की कुर्सियों की चिंता कर रहे हो.

फिर मैंने कहा कि एमएस केपटाउन में तुम्हारा ओवर रेट का कोटा पूरा हो गया. यदि डरबन में भी यही होगा तो हम सस्पेंशन के बारे में सोच रहे हैं. इस पर धोनी ने तुरंत पर अपने हाथ मसलते हुए कहा कि सस्पेंशन? अगर एक मैच से छुट्टी मिलेगी तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है. क्योंकि अभी मैं काफी क्रिकेट खेल रहा हूं. यह सुनकर मैं हैरान रह गया.

ऑटोग्राफ देते एमएस धोनी.
ऑटोग्राफ देते एमएस धोनी.

साथियों की छोटी-छोटी गलतियां भी पकड़ लेते थे

धोनी अपने खिलाड़ियों पर भी पूरी नज़र रखते थे. उनकी छोटी से छोटी गलती को भी पकड़ लेते थे. अगर कोई होशियारी दिखाता तो उसे सुना भी देते थे. ऐसी ही घटना तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के साथ हुई. यह वाकया साल 2014 का है. टीम इंडिया न्यूजीलैंड दौरे पर गई थी. एक मैच के दौरान शमी ने बाउंसर डाली, जबकि धोनी ने इसके लिए मना किया था. गेंद बल्लेबाज और धोनी दोनों के ऊपर से चौके के लिए चली गई.

धोनी ने खा जाने वाली नज़रों से शमी को देखा. शमी ने सफाई में कहा कि हाथ से गेंद फिसल गई थी, ऐसे में बाउंसर हो गई. लेकिन धोनी इससे सहमत नहीं हुए. शमी ने बताया,

माही भाई ने मुझे थोड़ी सी टाइट लैंग्वेज में बोला, देख बेटा, बहुत लोग आए मेरे सामने. बहुत लोग खेल के चले गए. झूठ मत बोल.

टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान एमएस धोनी.
टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान एमएस धोनी.

ऐसी ही एक घटना साल 2017 में विजय हजारे ट्रॉफी में हुई. झारखंड और विदर्भ क्वार्टरफाइनल में थे. धोनी यह मैच खेल रहे थे. झारखंड के फील्डर इशांक जग्गी लॉन्ग ऑफ पर फील्डिंग कर रहे थे. इसी दौरान एक्स्ट्रा खिलाड़ी शशीम राठौर ड्रिंक्स लेकर बाउंड्री लाइन में खड़े थे. दोनों बीच-बीच में बातें भी कर रहे थे. हालांकि जग्गी को डर भी था कि कहीं धोनी देख न लें. तभी एक गेंद पर वे थोड़े सुस्त रह गए और विदर्भ ने दो रन चुरा लिए. धोनी ने कुछ नहीं कहा. लेकिन कुछ देर बाद जग्गी से कहा,

बस वही रुक. एक कदम आगे आ सकता है लेकिन पीछे मत जाना.

इसके अलावा धोनी ने कुछ नहीं कहा. विदर्भ की पारी होने के बाद सभी खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम जा रहे थे. इनमें एक्स्ट्रा प्लेयर शशीम राठौर भी शामिल थे. उन्होंने राठौर के कंधे पर हाथ रखा और कहा,

मुझे तो कभी इतना पानी नहीं पिलाता तू.

धोनी को नहीं आता गुस्सा, यह झूठ है 

धोनी के लिए कहा जाता है कि उन्हें गुस्सा नहीं आता. पर यह पूरा सच नहीं है. उन्हें जानने वाले कई लोगों ने बताया कि धोनी गुस्सा होते हैं, बस वे छुपा लेते हैं. धोनी के गुस्से का एक किस्सा इरफान पठान ने सुनाया था. उन्होंने बताया,

यह साल 2006-07 की बात थी. वॉर्म अप के दौरान तय हुआ कि दाएं हाथ वाले लेफ्ट हैंडर बनकर बल्लेबाजी करेंगे. और लेफ्ट हैंड वाले राइट हैंड बैटिंग करेंगे. मैच के दौरान धोनी को आउट दिया गया. लेकिन उनको लगा कि वे आउट नहीं है. इस पर गुस्से में धोनी ने बल्ला फेंक दिया और दौड़कर ड्रेसिंग रूम चले गए. बाद में बहुत देर से प्रैक्टिस के लिए आए.

इसी तरह की घटना कुलदीप यादव के साथ हुई. मामला एशिया कप 2018 का है. अफगानिस्तान के खिलाफ मैच था. कप्तानी एमएस धोनी के पास थी. इसमें आखिरी बार धोनी ने कप्तानी की थी क्योंकि रोहित शर्मा खेले नहीं थे और विराट कोहली आराम पर थे. तो कुलदीप फील्डिंग में एक बदलाव को लेकर अड़ गए. धोनी ने फील्ड चेंज नहीं होने दी. फिर जोर से कहा,

बॉलिंग करेगा या बॉलर चेंज करें?

यह सुनकर कुलदीप यादव चुपचाप बॉल डालने चले गए.


Video: धोनी के रिटायरमेंट पर सचिन, विराट, पंड्या ने ट्वीट कर क्या लिखा?

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