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फ्रांस के रोमन कैथोलिक चर्च में 70 साल में 3 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने किया बच्चों का यौन शोषण

बर्नार्ड पेनां (बीच में) ने 1970 से 1991 के बीच दर्ज़नों बच्चों का यौन शोषण किया था. 1991 में पेनां ने कबूला कि वो बीमार हैं और बच्चों को देखकर उनकी कामुकता बढ़ जाती है.

मशहूर अमेरिकी लेखक आइवेन डोएग की एक पंक्ति है –

Childhood is the one story that stands by itself in every soul

बचपन इकलौती ऐसी कहानी है जो हमेशा हमारी आत्मा में कायम रहती है.

कहने का मतलब ये कि बचपन हमारे व्यक्तित्व की नींव रखता है. ये कुछ-कुछ कच्ची मिट्टी की तरह होता है. इसे आकार देने का ज़िम्मा परिवेश के ऊपर होता है. इसी परिवेश का एक अहम हिस्सा होते हैं, धार्मिक स्थल. उनमें लोगों की आस्था होती है. लोगों को हमेशा कुछ अच्छा पाने का भरोसा होता है. फ़्रांस में रोमन कैथोलिक चर्च ने लोगों की आस्था और उनके भरोसे को चकनाचूर कर दिया है. स्वतंत्र आयोग की जांच में जो कुछ पता चला है, वो दिल दहलाने वाला है. पिछले 70 सालों में कैथोलिक चर्च से जुड़े तीन हज़ार से अधिक लोगों ने बच्चों का यौन शोषण किया. इनमें से अधिकांश आरोपी पादरी हैं.

इस कांड की पूरी कहानी क्या है? जांच रिपोर्ट में और क्या-क्या सामने आया है? और, आगे क्या होगा? सब पर बात करेंगे, पहले एक बयान सुनिए.

‘मुझे लगता था कि पादरी बहुत अच्छे इंसान हैं. वो हमें कभी नुकसान नहीं पहुंचाएंगे. लेकिन एक दिन मैंने पाया कि वो मुझे ग़लत तरीके से टच कर रहे हैं. मेरे बदन पर कोई कपड़ा नहीं था. वो घटना मेरे दिमाग में छप गई. ये गैंगरीन की तरह हमारे शरीर और हमारी आत्मा को धीरे-धीरे सुन्न करती जा रही है.’

ये कहानी ओलिविये सेलिवनाक ने न्यूज़ एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से बात करते हुए सुनाई थी. जिस समय उनके साथ ये हादसा हुआ था, उस समय उनकी उम्र मात्र 13 साल थी. वो एक कैथोलिक वैकेशन कैम्प में हिस्सा लेने गए थे. वहीं पर कैम्प के डायरेक्टर ने उनका यौन शोषण किया. बड़े होने पर ओलिविये ने ‘स्पीक आउट एंड लिव अगेन’ नाम की एक संस्था बनाई. ये संस्था फ़्रांस के चर्च में यौन शोषण के शिकार हुए लोगों को मंच देती है.

ओलिविये जैसी और भी कहानियां हैं

ओलिविये की कहानी दिल दहलाने वाली है, लेकिन इकलौती नहीं है. 05 अक्टूबर को रिलीज़ हुई स्वतंत्र कमीशन की रिपोर्ट कहती है कि 1950 से अब तक फ़्रांस के कैथोलिक चर्च में कम-से-कम तीन लाख तीस हज़ार बच्चों का यौन शोषण हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, फ़्रांस के चर्च से जुड़े तीन हज़ार लोग इस कुकर्म में शामिल हैं. इनमें से दो-तिहाई पादरी हैं. यानी चर्च के सबसे बड़े अधिकारी. जिन्हें ईश्वर और इंसानों के बीच का पुल कहा जाता है. उन्हीं पादरियों ने मासूम बच्चों के साथ घिनौना अपराध किया है. अगर गणना की जाए तो एक आरोपी ने औसतन 110 बच्चों को अपनी हवस का शिकार बनाया. ये आंकड़ा वीभत्स है. जानकारों का कहना है कि ये संख्या महज एक सैंपल है. असली नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है. बहुत सारे पीड़ित बदनामी के डर से कमीशन के सामने ही नहीं आए.

रिपोर्ट से और क्या पता चला है?

पीड़ित बच्चों में 80 फीसदी लड़के हैं. सभी पीड़ित बच्चों की उम्र 07 से 15 साल के बीच है. 60 फीसदी पीड़ितों ने स्वीकारा कि बड़े होने पर पुरानी यादों ने उन्हें बार-बार हॉन्ट किया. यौन शोषण के बाद उनकी ज़िंदगी सामान्य नहीं रह गई थी. कमीशन के मुखिया जॉन-मार्क शॉ ने बताया कि चर्च के अधिकारियों ने जानकारी होने के बावजूद दोषियों को नहीं हटाया. इतना ही नहीं, इन पीडोफ़ाइल्स को फिर से बच्चों के साथ काम पर लगा दिया गया. इसका मतलब साफ़ है कि चर्च को इन घटनाओं से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था. एक तरह से ये अपराधियों को शह देने वाली बात थी.

इसका एक उदाहरण बर्नार्ड पेनां का है. पेनां ने 1970 से 1991 के बीच दर्ज़नों बच्चों का यौन शोषण किया था. 1991 में पेनां ने कबूला कि वो बीमार हैं और बच्चों को देखकर उनकी कामुकता बढ़ जाती है. चर्च को इसकी जानकारी थी. इसके बावजूद पेनां को लियोन में पादरी के पद से नहीं हटाया गया. उन्हें स्काउट कैम्प चलाने से भी नहीं रोका गया. नतीजतन, पेनां ने और बच्चों का शोषण किया.

आख़िरकार, कुछ पीड़ित हिम्मत करके आगे गए. तब जाकर जनवरी 2020 में उनके ऊपर मुकदमा शुरू हुआ. केस के पहले दिन पेनां ने जज के सामने कहा,

‘मैं चाहता हूं कि ये ट्रायल जल्द से जल्द खत्म हो. जांच के दौरान मैंने पीड़ितों का दर्द को गौर से सुना है. मैं उनके साथ हुए हादसे का दोषी हूं.’

पेनां को पांच साल की सज़ा सुनाई गई. उस समय उनकी उम्र 74 साल की थी. पेनां ने 75 बच्चों के यौन शोषण की बात स्वीकार ली.

वरिष्ठ कार्डिनल को भी सज़ा

इसी मसले में पेनां के वरिष्ठ कार्डिनल फ़िलिप बाबहां का भी नाम आया. बाबहां ने जानकारी होते हुए भी पेनां को बच्चों के पास जाने की इजाज़त दी थी. जब उनसे इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा था कि ईश्वर की दया से अधिकतर अपराधों की मियाद पूरी हो गई है. मतलब ये कि वे अपराध इतने पुराने हो गए हैं कि उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता. साफ़ था कि कार्डिनल फ़िलिप बाबहां ने संभावित अपराधों पर कोई ध्यान नहीं दिया था.

उन्हें पूरी घटना को दबाने की साज़िश रचने के लिए छह महीने की जेल हुई. हालांकि, बाद में अपील्स कोर्ट ने उनकी सज़ा को पलट दिया. जब से पेनां और बाबहां का मामला चर्चा में आया, तब से चर्च की जमकर आलोचना हो रही थी. तब फ़्रांस में रोमन कैथोलिक चर्च की टॉप संस्थाओं ने एक सिविल अधिकारी जॉन-मार्क शॉ को जांच का ज़िम्मा सौंपा. शॉ के नेतृत्व में कमीशन ने ढाई साल तक पीड़ितों और गवाहों के बयान दर्ज़ किए. उन्होंने चर्च के रेकॉर्ड, कोर्ट, पुलिस और प्रेस के आर्काइव्स का अध्ययन किया. जांच की शुरुआत में एक हॉटलाइन भी लॉन्च की गई थी. उसमें 65 सौ से अधिक लोगों ने अपने या अपने किसी करीबी के साथ हुए दर्दनाक घटनाओं की कहानियां बयां की.

40 मामले आउट ऑफ़ डेट

अब जाकर कमीशन का काम पूरा हुआ है. पांच अक्टूूबर को उन्होंने पैरिस में चर्च के टॉप अधिकारी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी. प्रेसिडेंट ऑफ़ द कॉन्फ़्रेंस ऑफ़ बिशप्स ऑफ़ फ़्रांस ने पीड़ितों से माफ़ी मांगी. उन्होंने कहा कि ये रिपोर्ट भयावह है. कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक, 22 मामलों में अभी भी मुकदमा चलाया जा सकता है. इन मामलों को जांच एजेंसियों के पास भेज दिया गया है. 40 मामले आउट ऑफ़ डेट हो चुके हैं. हालांकि इनके आरोपी अभी भी ज़िंदा हैं. उनके साथ क्या किया जाएगा, ये कैथोलिक चर्च तय करेगा.

कमीशन ने चर्च में शोषण रोकने के लिए 45 सुझाव भी दिए हैं. इसमें चर्च से जुड़े लोगों को प्रशिक्षित करने, कानून में सुधार करने और पीड़ितों को मुआवजा देने की बात भी कही गई है. चर्च इन सुझावों पर कितना अमल करता है, ये तो आने वाला समय ही बताएगा.

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