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किरण रिजिजू के अंडर खेल मंत्रालय में क्या खेल चल रहा है?

किरण रिजिजू. भारत के खेल मंत्री हैं. 30 मई, 2019 को कार्यभार संभालने के बाद से ही रिजिजू काफी एक्टिव हैं. नरेंद्र मोदी सरकार के दोनों टर्म मिला लें तो रिजिजू देश के पांचवें खेल मंत्री हैं. उनसे पहले मोदी सरकार के कार्यकाल में हम सर्बानंद सोनोवाल, जितेंद्र सिंह, विजय गोयल और राज्यवर्धन सिंह राठौर को इस कुर्सी पर देख चुके हैं. लेकिन रिजिजू के कार्यकाल में ट्विटर पर जिस तेजी से काम हुआ, यह सबसे अलग है.

फिर चाहे वो धड़ाधड़ हो रहे ट्रायल्स हों या फिर कोई और योजना. रिजिजू जी का मंत्रालय जमीन पर जैसा भी कर रहा हो, ट्विटर पर तो एकदम चौचक है. लेकिन इनके कार्यकाल में ट्विटर और ट्विटर से बाहर भी कई ब्लंडर्स हुए हैं. बीते वीकेंड हुए एक ब्लंडर को देखने के बाद हमने सोचा कि क्यों ना एक बार रिवाइंड किया जाए. तो चलिए शुरू करते हैं.

# Trial On Twitter

पूरी दुनिया में खेलों की श्रेष्ठता मैदान पर सिद्ध होती है. एक सिस्टम के तहत छोटी उम्र से प्लेयर्स तैयार होते हैं. जिनका पूरा फोकस मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर होता है. लेकिन हम तो विश्वगुरु हैं. क्या कहा, नहीं हैं? OKAYYY लेकिन कभी तो थे, और फिर होने ही वाले हैं. तो ऐसे में हमारे यहां बड़े लोगों के ट्वीट्स के आधार पर खिलाड़ी तैयार किए जाते हैं.

फिर चाहे वो रामेश्वर गुर्जर हों, श्नीनिवास गौड़ा हों या फिर ज्योति कुमारी. इन सबको माननीय खेल मंत्री ने खुद ट्रायल्स के लिए आमंत्रित किया था. किसी देश का खेलमंत्री खेलों के विकास के लिए इतना तत्पर हो, ये अच्छी बात है. लेकिन तभी तक, जब वो खेलमंत्री सही दिशा में तत्पर हो. खेल मंत्री अगर चंद लोगों के ट्वीट्स से प्रभावित होकर काम करेगा तो प्रतियोगिताएं भी ट्विटर पर ही करा लें, मैदानों की जरूरत ही क्या है.


ट्रायल्स पर लौटें तो मध्य प्रदेश के यूसेन बोल्ट बताए गए गुर्जर अपने ट्रायल में बुरी तरह फेल रहे. वहीं कंबाला जॉकी श्रीनिवास गौड़ा और ज्योति कुमारी ने ट्रायल्स में आने से मना कर दिया. आप भूल गए हों तो याद कर लें, गौड़ा वही कंबाला जॉकी हैं जिन्होंने भैंसों के पीछे भागते हुए यूसेन बोल्ट का रिकॉर्ड तोड़ दिया था!

जबकि ज्योति कुमारी कोविड के चलते लगे लॉकडाउन के बाद अपने पिता को साइकिल पर बिठाकर बिहार तक ले गई थीं. ऐसा मीडिया का दावा था. इससे मैं भी प्रभावित हो गया था. लेकिन मुझमें और रिजिजू में एक बड़ा अंतर ये है कि मैं देश का खेलमंत्री नहीं हूं.

# Narender Yadav अवॉर्ड कांड

ट्विटर पर ट्रायल्स के बाद आई फ़ेक व्यक्ति को ईनाम देने की बारी. खेल मंत्रालय ने पर्वतारोही नरेंदर सिंह यादव को साल 2020 का तेनजिंग नोर्गे पुरस्कार देने का फैसला कर लिया. सब तय रहा. 27 अगस्त, 2020 को हुई नेशनल अवॉर्ड्स सेरेमनी की रिहर्सल में भी नरेंदर शामिल थे. लेकिन इसी बीच ये बात पूरी दुनिया में फैल गई.

नेशनल स्पोर्ट्स अवॉर्ड्स में घपलेबाजी! #nationalsportsawards #NarenderSinghYadav

Posted by The Lallantop on Sunday, August 30, 2020

खासतौर से नेपाल की मीडिया और एवरेस्ट से जुड़े लोगों ने इस पर घोर आपत्ति जाहिर की. उन्होंने प्रूफ देकर साबित किया कि नरेंदर कभी एवरेस्ट पर गए ही नहीं थे. इन्होंने खुद को फोटोशॉप के जरिए एवरेस्ट पर दिखा दिया और लगभग अवॉर्ड जीत ही लिया था. वो तो भला हो एवरेस्ट टुडे नाम की वेबसाइट का, जिन्होंने इस मामले को जोर-शोर से उठाया और रिजिजू जी के मंत्रालय को अपने कदम वापस खींचने पड़े.

# अरुणिमा बनीं बछेंद्री

ख़ैर, इन्हीं सबके बीच साल 2020 बीत गया. लेकिन मंत्रालय सेम ही रहा. साल 2021 की शुरुआत से ही खेल मंत्रालय से रुझान आने शुरू हो गए हैं. बीते शनिवार, 9 जनवरी को खेलमंत्री किरण रिजिजू ने ट्विटर पर तीन तस्वीरें शेयर कीं. ध्यान दीजिएगा, ट्विटर पर मंत्री के दो हैंडल हैं. एक पर्सनल और एक किरण रिजिजू ऑफिस. ये तस्वीरें पर्सनल हैंडल से आई थीं. तस्वीरों के साथ लिखा था,

‘माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला, श्रीमती बछेंद्री पाल जी से मिलकर खुशी हुई. हमने उनके नेतृत्व में एक ऑल-विमिन ट्रांस हिमालयन चढ़ाई के आयोजन पर चर्चा की.’

अब आप सोच रहे होंगे कि मुझे इससे क्या दिक्कत है. दिक्कत दरअसल ये है कि अकाउंट से ट्वीट हुई तीन तस्वीरों में से दो में रिजिजू और बछेंद्री की मीटिंग दिख रही थी. लेकिन इसी ट्वीट में अरुणिमा सिन्हा की भी एक फोटो थी. फोटो पर लिखा था,

‘1984- बछेंद्री पाल एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला बनीं.’

अब अरुणिमा सिन्हा की तस्वीर पर बछेंद्री का कैप्शन देने का क्या अर्थ है? क्या इस देश का खेलमंत्री 66 साल की बछेंद्री और 32 साल की अरुणिमा में अंतर नहीं कर पाता. बछेंद्री 1984 में एवरेस्ट फतह कर चुकी थीं और अरुणिमा 1988 में पैदा हुई हैं. इतनी अंधेरगर्दी? कम से कम जहां से फोटो टीपी (उठाई), वहीं का कैप्शन पढ़ लेते.

टाटास्टील डॉट कॉम पर लगी इस फोटो के कैप्शन में साफ लिखा है कि यह अरुणिमा सिन्हा की फोटो है. शर्म की बात ये भी है कि 9 जनवरी का ये ट्वीट 14 जनवरी तक नहीं हटा है. जबकि लोग उसी ट्वीट पर उन्हें टोक भी चुके हैं कि यह फोटो गलत है. लेकिन ना तो इस पर कोई सफाई दी गई न ही ट्वीट हटा. जैसे उन्हें कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता. सही भी है, फ़र्क क्यों ही पड़ेगा. जैसा देश, वैसा भेष. बतोलेबाज़ी से काम चल रहा है तो लोड क्यों लेना?

रिजिजू के ट्वीट का आर्काइव यहां देखा जा सकता है.


तेनज़िंग नोर्गे पुरस्कार जीतने के क़रीब पहुंच गया था नरेंदर सिंह यादव, पर जल्दी बात सामने आ गई!

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