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सात विश्वकप के बाद जब मोहम्मद शमी ने भारतीय फैंस को दी ये लाजवाब सौगात!

साल 1987 में पहली बार किसी गेंदबाज़ ने क्रिकेट विश्वकप में हैट्रिक ली थी. वो गेंदबाज़ थे भारत के चेतन शर्मा. चेतन ने नागपुर में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ हैट्रिक लेकर इतिहास रचा था. लेकिन उनके बाद भारत के लिए सिर्फ एक गेंदबाज़ विश्वकप में हैट्रिक ले पाया. उस गेंदबाज़ का नाम है मोहम्मद शमी. शमी ने 22 जून, 2019 को अफगानिस्तान के खिलाफ करीबी मुकाबले में हैट्रिक के साथ टीम इंडिया को जीत दिलाई थी.

साल 2015 के बाद मोहम्मद शमी का क्रिकेटिंग करियर लगभग खत्म होने पर था. उन्हें चोट लगी, परिवार में दिक्कतें रहीं. लेकिन उन्होंने ये ठान लिया था कि वो हार नहीं मानेंगे और वापसी ज़रूर करेंगे.

साल 2016 में एक भी मैच नहीं, 2017 में सिर्फ तीन वनडे, साल 2018 में दो वनडे. लेकिन फिर 2019 में धमाकेदार वापसी और टीम इंडिया के लिए विश्वकप में बेमिसाल प्रदर्शन कर उन्होंने टीम इंडिया के लिए कमाल कर दिया.

विश्वकप में शमी ने टीम इंडिया के लिए नौ में सिर्फ चार मुकाबले खेले और 14 विकेट अपने नाम किए. वैसे तो ये प्रदर्शन अपने आप में कमाल है. लेकिन अफगानिस्तान के खिलाफ उनकी हैट्रिक ताउम्र याद की जाएगी.

28वां मैच, वर्ल्ड कप 2019, इंडिया vs अफगानिस्तान, साउथैम्पन

राउंड रॉबिन फॉर्मेट में खेले गए इस विश्वकप में टीम इंडिया, साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया को हराकर आगे बढ़ी. न्यूज़ीलैंड के साथ तीसरा मैच बारिश की भेंट चढ़ गया. टीम का चौथा मैच था अंडरडॉग्स अफगानिस्तान के साथ. वो ही अफगानिस्तान जिसका होमग्राउंड कभी इंडिया का नोएडा रहा है, तो कभी देहरादून. खैर, मुकाबला शुरू हुआ. विराट कोहली ने टॉस जीता और सीधे ही पहले बैटिंग चुन ली. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 350 का स्कोर पार करने वाली बैटिंग लाइनअप अफगानिस्तान के सामने 224 रनों से आगे नहीं बढ़ सकी.

इंडिया के लिए कप्तान कोहली और केदार जाधव ने फिफ्टी ज़रूर बनाई. लेकिन कोई भी बल्लेबाज़ बड़ी पारी नहीं खेल सके. अब अफगानिस्तान को विश्वकप में अपनी पहली जीत दिखने लगी थी. हालांकि वो इस बात को अच्छे से जानते थे कि उनका सामना दुनिया की सबसे मजबूत टीम से है.

फिर भी उनके पास राशिद खान, मोहम्मद नबी जैसे खिलाड़ी मौजूद थे, जिन्हें आईपीएल और इंडियन प्लेयर्स की बारीकियां पता थीं.

225 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी अफगानिस्तान की टीम को 20 के स्कोर पर शमी ने पहला झटका दे दिया. लेकिन इसके बाद कप्तान गुलबदीन नाएब और रहमत शाह ने पारी को संभाला. 64 के स्कोर पर गुलबदीन (27 रन) भी पांड्या की गेंद पर वापस चले गए. इसके बाद अफगानिस्तान के विकेट तो गिरते रहे. फिर भी रहमत शाह (36 रन), हसमतउल्लाह शाहिदी (21 रन), नज़ीबुल्लाह ज़ादरान और राशिद खान (14 रन) की छोटी-छोटी पारियों से अफगानिस्तान स्कोर के करीब पहुंचने की कोशिश में लग रहा.

अफगानिस्तान के लिए सबसे खास और ज़रूरी काम कर रहे उनके सबसे अनुभवी खिलाड़ी मोहम्मद नबी. नबी छठे नंबर पर खेलने उतरे और पूरा ज़ोर लगाते हुए 52 रनों की पारी के साथ अफगानिस्तान की मैच में वापसी करवा दी.

मोहम्मद शमी की हैट्रिक

पारी का 49वां ओवर खत्म होने पर अफगानिस्तान का स्कोर 209 रन था, जबकि उसके तीन विकेट अब भी बाकी थे. सबसे खास बात क्रीज़ पर अब भी वो बल्लेबाज़ मौजूद था, जिसके पास 10 साल का वनडे क्रिकेट का अनुभव था. यानी मोहम्मद नबी.

कप्तान कोहली ने धोनी के साथ चर्चा की और ओवर मोहम्मद शमी को सौंप दिया. शमी ने अब तक अपने नौ ओवरों के स्पेल में 36 रन दिए थे और एक विकेट भी चटकाया था. बुमराह, चहल, पांड्या सबके ओवर पहले ही खत्म हो चले थे. लेकिन अब साउथैम्पटन के मैदान पर वो होना था, जो भारतीय फैंस ने 1987 विश्वकप के बाद कभी नहीं देखा था. यानी विश्वकप क्रिकेट में भारतीय गेंदबाज़ की हैट्रिक.

शमी ने 50वें ओवर की पहली गेंद फेंकी. लोअर फुल-टॉस गेंद को नबी ने सीधा खेला और चार रन ले लिए. अब जीतने के लिए पांच गेंदों में 12 रनों की दरकार. एक पल के लिए ये लगने लगा था कहीं इस बार बड़ा उलटफेर अफगानिस्तान के हाथों ना हो जाए. नबी ने एक बार फिर से बल्ले के नीचे आई गेंद को सीधा खेला. लेकिन इस बार बाउंड्री लाइन पर बुमराह ने नबी का कैच पकड़कर मैच को लगभग खत्म कर दिया.

अफगानिस्तान के आठ विकेट गिर चुके थे, जबकि उसे जीतने के लिए चार गेंदों में 12 रनों की दरकार थी. ओवर की तीसरी गेंद. शमी ने सीधी यॉर्कर मारी और आफताब आलम क्लीन-बोल्ड. अब शमी दो गेंदों पर दो विकेट चटका चुके थे और अगली गेंद थी हैट्रिक बोल. वो हैट्रिक बोल, जिसके लिए ना जाने कितने ही भारतीय गेंदबाज़ विश्वकप खेलते-खेलते चले गए.

लेकिन अगले बल्लेबाज़ के क्रीज़ पर आने से पहले शमी, धोनी से कुछ बात करते हैं. खासकर ऐसी प्रेशर की सिचुएशन में धोनी से बढ़िया राय और कौन दे सकता था. धोनी ने शमी से सिर्फ एक बात कही,

”वर्ल्डकप में हैट्रिक मिलना काफी रेयर होता है और तुझे यॉर्कर मारनी चाहिए, ये तेरा एकमात्र चांस है.”

बस फिर क्या था, क्रीज़ पर आए मुजीब उर रहमान का लेग स्टम्प सीधा शमी के रडार पर आया और उन्होंने यॉर्कर के साथ उन्हें भी चलता कर दिया. टीम इंडिया इस मैच को 11 रनों से जीत गई. इसके साथ ही मोहम्मद शमी ने वो इतिहास रच दिया, जो पिछले सात विश्वकप में कोई भी भारतीय गेंदबाज़ कभी नहीं कर पाया था.


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