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मोदी सरकार 2.0 का एक साल, कैसा रहा अमित शाह के गृह मंत्रालय का कामकाज?

अगस्त का महीना और साल था 2019. नरेंद्र मोदी को दोबारा सत्ता में आए करीब दो महीने ही हुए थे. जम्मू-कश्मीर को लेकर अचानक गतिविधियां तेज हो गईं. वहां से टूरिस्ट को वापस बुलाया जाने लगा. सुरक्षाबलों की कई टुकड़ियां तैनात की जाने लगीं. अमरनाथ यात्रा रोक दी गई. राज्य के चुनिंदा नेताओं को नजरबंद कर दिया गया. इसके बाद हुआ सबसे बड़ा फैसला. जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया गया.

30 मई, 2020. मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा कर लिया है. 23 मई, 2019 को लोकसभा चुनाव के नतीजे आए थे. 30 मई को नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट ने शपथ ली. गृह मंत्रालय का जिम्मा मिला पहली बार केंद्रीय कैबिनेट में शामिल हुए अमित शाह को. मोदी सरकार 2.0 का एक साल कैसा बीता? गृह मंत्रालय का कामकाज कैसा रहा? कौन-से तीन बड़े फैसले लिए गए. किन मोर्चों पर ये मंत्रालय सवालों के घेरे में रहा? इस स्टोरी में इन्हीं पर बात करेंगे.

बड़े फैसले

जम्मू-कश्मीर से जुड़े आर्टिकल 370 में बदलाव

5 अगस्त, 2019. गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो संकल्प और दो बिल पेश किए. आर्टिकल 370 से जुड़े. राष्ट्रपति के आदेश का जिक्र किया. शाह ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के 370 से खंड दो और तीन हट गए हैं. राष्ट्रपति के आदेश से. इसके साथ ही कश्मीर को मिलने वाला स्पेशल स्टेट छिन गया. साथ ही अनुच्छेद 35-A असंवैधानिक हो गया.

इसके अलावा सरकार ने प्रदेश के पुनर्गठन का भी प्रस्ताव किया. जम्मू-कश्मीर को राज्य की जगह दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया गया. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख. जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी, जबकि लद्दाख में कोई विधानसभा नहीं होगी.

यह एक ऐतिहासिक फैसला था. इसके साथ ही एक देश, एक संविधान का नारा बुलंद हुआ. बीजेपी ने अपना वह चुनावी वादा पूरा किया, जो जनसंघ के जमाने से उसकी प्राथमिकता रहा है.

5 अगस्त को राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने और राज्य को मिला विशेष दर्ज़ा खत्म करने का ऐलान किया (फोटो: राज्यसभा टीवी)
5 अगस्त को राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने और राज्य को मिला विशेष दर्ज़ा खत्म करने का ऐलान किया (फोटो: राज्यसभा टीवी)

सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA)

10 जनवरी, 2020. CAA को पूरे देश मे लागू कर दिया गया. इस कानून से पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और आस-पास के देशों में धार्मिक उत्पीड़न के कारण आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. वो लोग, जिन्होंने 31 दिसंबर, 2014 की निर्णायक तारीख तक भारत में प्रवेश कर लिया था. वे सभी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. इस एक्ट में इस्लाम धर्म मानने वालों को शामिल नहीं किया गया है. इस कानून में किए गए बदलाव को लेकर देशभर में कई महीनों तक विरोध प्रदर्शन हुए. कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले, लेकिन सरकार पीछे नहीं हटी.

सीएए और एनआरसी के विरोध में देशभर में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन लंबे समय तक चले.
सीएए और एनआरसी के विरोध में देशभर में कई जगहों पर प्रदर्शन लंबे समय तक चले.

UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) में संशोधन

अगस्त, 2019. अनलॉफुल एक्टिविटीज़ प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) में संशोधन हुआ. इस कानून की दो सबसे बड़ी बातें हैं- नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA) के पास किसी भी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने और प्रॉपर्टी सीज़ करने का अधिकार मिला. कोई व्यक्ति अगर किसी आतंकी घटना में शामिल पाया जाता है या आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले संगठन से जुड़ा है, तो उसे आतंकी घोषित किया जा सकता है. वहीं, अब किसी आतंकी या आतंकी संगठन की संपत्ति सीज करने करने के लिए NIA के डीजी की अनुमति काफी होगी. अब NIA के इंस्पेक्टर रैंक के अफसर भी आतंकी मामलों की जांच कर सकेंगे.

NIA को किसी भी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने और प्रॉपर्टी सीज़ करने का अधिकार मिला. (फाइल फोटो)
NIA को किसी भी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने और प्रॉपर्टी सीज़ करने का अधिकार मिला. (फाइल फोटो)

बड़ी नाकामी

सीएए और NRC के नाम पर हिंसा

#CAA को लेकर देश के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए. दिल्ली के जामिया में कई महीनों तक विरोध प्रदर्शन चला. इस प्रदर्शन को शांत करने के लिए दिल्ली पुलिस यूनिवर्सिटी में घुसी और छात्रों पर डंडे बरसाए. इससे पुलिस और गृह मंत्रालय पर सवाल उठे. दिल्ली के शाहीन बाग में लंबे समय तक प्रदर्शन हुआ. ये तब हटा, जब कोरोना की वजह से लॉकडाउन हो गया.

NRC को लेकर जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए. NRC देश में रह रहे हर एक घुसपैठिए को बाहर करने का प्रोसेस. असम में लागू हुआ. पूरे देश में लागू करने की बात हुई, तो विरोध हुआ. गृहमंत्री अमित शाह के उस बयान का बार-बार जिक्र हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि आप क्रोनोलॉजी समझिए, पहले नागरिकता क़ानून आएगा, फिर एनआरसी. हालांकि विरोध हुआ, तो सरकार की ओर से साफ किया गया कि ऐसा कोई प्लान नहीं है. लेकिन लोगों को भरोसा दिलाने में सरकार कामयाब नहीं रही.

Amit Shah
राज्य सभा में गृहमंत्री अमित शाह (फोटो: PTI)

NPR पर कुछ राज्यों की ‘ना’

24 दिसंबर, 2019 को नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी NPR को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी. कई राज्यों ने इसका विरोध किया. कहा गया कि एनपीआर के जरिए सरकार एनआरसी का रास्ता साफ करना चाहती है. कई राज्यों ने अपने यहां इसे कराने से इनकार कर दिया. सितंबर तक इसका काम पूरा होना था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से इसमें समय लग सकता है.

दिल्ली में हिंसा

दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में हुई हिंसा में 50 से ज्यादा लोग मारे गए. हजारों लोग बेघर हो गए. इस हिंसा को समय रहते काबू नहीं कर पाने का आरोप लगा. ये हिंसा उस समय हुई, जब अमेरिका के राष्ट्रपति भारत के दौरे पर थे. बवाल बढ़ा. अमित शाह को संसद में सफाई देनी पड़ी.

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

(1)

इंडिया टुडे के सीनियर पत्रकार राजदीप सरदेसाई का कहना है,

CAA बड़ा मुद्दा बना. धारा 370 को हटाना और जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाना बड़ा फैसला था. इन दोनों मुद्दों के पीछे बड़ा चेहरा अमित शाह का आया. शाह ने इन दो बड़े फैसले को लेकर एक ऐसी छवि बना ली है कि या तो आप उनके कट्टर समर्थक बनते हैं या कट्टर विरोधी. संसद में जब ये दोनों मुद्दे उठे, तो चेहरा शाह ही बने. अब आप कह सकते हैं कि इस सरकार में नंबर दो नेता कौन है.

उनका कहना है कि अगर आप उनके समर्थक हैं, तो अच्छे मार्क्स देंगे. विरोधी हैं, तो फेलियर कहेंगे. अमित शाह पर एकराय बनना मुश्किल है.

(2)

यूपी और असम के डीजीपी रहे, पुलिस सुधार और होम मिनिस्ट्री के मसलों लगातार लिखते रहे प्रकाश सिंह का कहना है,

पिछले एक साल में गृह मंत्रालय ने बहुत से ऐसे महत्वपूर्ण फैसले किए, जिस पर पिछली सरकारें फैसला लेने में डरती थीं या संकोच करती थीं. जैसे जम्मू-कश्मीर से 370 हटाना. कश्मीर में सीमापार से आतंकी घुसपैठ पर नियंत्रण हुआ है. हालांकि ऐसी घटनाएं फिर भी हो रही हैं.

कुछ अन्य मसलों पर उन्होंने कहा,

नॉर्थ-ईस्ट में होने वाली हिंसक घटनाओं में कमी आई है. नक्सल समस्या कंटेन हो गई है, लेकिन सामाजिक और आर्थिक स्तर पर जो कदम उठाए जाने चाहिए, उस पर ध्यान नहीं जा रहा है.

इसमें कोई दो राय नहीं है कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले साल में गृह मंत्रालय ने ऐतिहासिक फैसले लेने में बड़ी भूमिका निभाई. लेकिन साथ ही NRC, CAA और दिल्ली दंगे को लेकर उस पर सवाल भी उठे.


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