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मोदी कैबिनेट ने लिए ये पांच बड़े फैसले, जानिए इनसे कैसे बदलेगी आपकी जिंदगी

मोदी सरकार ने बुधवार, 24 जून को कई बड़े फैसले किए. कैबिनेट में कई ऐसी योजनाओं को मंजूरी मिल गई है, जिनका जिक्र बार-बार होता रहा है. इनमें से कई ऐसी हैं, जिनका आपकी जिंदगी पर सीधा असर पड़ने वाला है. आइए जानते हैं, कौन-से हैं ये पांच बड़े फैसले. इन्हें समझने की कोशिश करते हैं आसान भाषा में.

1. को-ऑपरेटिव बैंक भी अब आरबीआई की निगरानी में होंगे

पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक यानी पीएमसी बैंक याद है? कुछ समय पहले लोग कैसे लाइन में लगे थे अपना पैसा इसमें से निकालने के लिए? पीएमसी बैंक के मैनेजमेंट पर आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर उसने हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर (HDIL) नाम की कंपनी को लोन दिया गया. बैंक ने यह कर्ज HDIL को ऐसे वक्त में दिया, जब यह कंपनी दिवालिया होने की प्रक्रिया से गुजर रही थी. ऐसा बैंक इसलिए कर पाया, क्योंकि वो RBI की निगरानी के क्षेत्र से बाहर था. मगर अब ऐसा नहीं होगा. अब सभी तो नहीं, लेकिन अर्बन और मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव बैंकों पर RBI नज़र रखेगा.

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास

सहकारी बैंकों के रिजर्व बैंक के दायरे में आ जाने से सबसे पहला फायदा खाताधारकों के पैसों की सुरक्षा को लेकर मिलेगा. अब अगर कोई सहकारी बैंक डूब जाता है, तो आरबीआई नियमों के मुताबिक़ हर खाते का पांच लाख रुपए तक का बीमा होगा. इसके अलावा बैंकिंग के तरीके और सुविधाओं में भी ज्यादा प्रोफेशनलिज्म आएगा.

2. अंतरिक्ष क्षेत्र अब प्राइवेट कंपनियों के लिए खुला

याद है पिछले दिनों नासा ने एक अंतरिक्ष यान स्पेस में भेजा था? वो यान नासा ने नहीं बनाया था, स्पेस एक्स ने बनाया था. यह इलॉन मस्क की कंपनी है. यानी प्राइवेट कंपनी ने अंतरिक्ष यान बनाया, नासा ने टेस्टिंग की और अंतरिक्ष में भेज दिया. अब ऐसा ही कुछ भारत में करने की तैयारी है. सरकार ने अब निजी कंपनियों के लिए भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने का ऐलान किया है. इससे स्पेस सेक्टर में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ावा देने को मंजूरी मिल गई है. इसे लंबे वक्त के प्लान की तरह देखा जा रहा है.

सरकार ने Indian National Space Promotion and Authorization Centre (IN-SPACe) का गठन किया है. यह सेंटर स्पेस सेक्टर में आने वाली प्राइवेट कंपनियों को साथ लाने का काम करेगा.

3. छोटे बिजनेसमैन को लोन पर मिलेगी ब्याज में 2% की छूट

छोटे बिजनेसमैन पीएम की स्कीम शिशु मुद्रा लोन का फायदा उठाकर 50 हजार रुपए का लोन ले सकते हैं. कैबिनेट ने ऐसे लोन लेने वालों को ब्याज में दो फीसदी की राहत देने के फैसले को मंजूरी दे दी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज के तहत ही इसका ऐलान किया था. शिशु मुद्रा लोन वाणिज्यिक बैंक, आरआरबी, स्मॉल फाइनेंस बैंक, एमएफआई और एनबीएफसी सभी दे सकती हैं.

सांकेतिक तस्वीर.
सांकेतिक तस्वीर.

कोई भी भारतीय नागरिक, जो अपना कारोबार शुरू करना चाहता है, वह मुद्रा (Mudra – Micro Units Development & Refinance Agency Ltd.) योजना या प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत लोन ले सकता है. अगर कोई अपने मौजूदा कारोबार को आगे बढ़ाना चाहता है और उसके लिए पैसे की जरूरत है, तो 10 लाख रुपये तक के लोन के लिए आवेदन किया जा सकता है. यह योजना अप्रैल 2015 में शुरू हुई थी. मुद्रा लोन तीन कैटेगिरी में दिया जाता है- शिशु लोन, किशोर लोन और तरुण लोन.

शिशु लोन की कैटेगरी में 50 हजार रुपए तक, किशोर लोन की कैटेगिरी में पांच लाख रुपए तक और तरुण लोन की कैटेगरी में 10 लाख रुपए तक का लोन दिया जाता है.

शिशु लोन के बारे में थोड़ा और जान लेते हैं.

– इस लोन की व्यवस्था मुख्य तौर पर ठेला-रेहड़ी लगाने वाले छोटे व्यापारियों को ध्यान में रख कर की गई है.

– शिशु मुद्रा योजना में किसी भी तरह का कोलेटरल भी नहीं रखना पड़ता. मतलब बिना किसी भी चीज को बंधक रखे लोन लिया जा सकता है.

– इस लोन के लिए किसी भी तरह के एक्सपीरिएंस सर्टिफिकेट की जरूरत भी नहीं होती.

– शिशु कैटेगिरी के मुद्रा लोन पर ब्याज दरें अमूमन 9-12 फीसदी सालाना होती हैं. इसे ऐसे समझें कि अगर सुरेश सब्जी का ठेला लगाने के लिए 100 रुपए लोन लेता है, तो उसे लोन वापस करते वक्त 9 से 12 रुपए तक सालाना ब्याज देना होगा. मतबल अलग-अलग बैंक के हिसाब से 109 से 112 रुपए तक भरने होंगे. चूंकि अब दो फीसदी की छूट मिल गई है, तो ऐसे में 100 रुपए की रकम पर ब्याज की मात्रा 6 से 10 रुपए सालाना ही रह जाएगी. मतलब सिर्फ 106 से 110 रुपए ही भरने होंगे.

– मुद्रा लोन के बारे में अगर आप ज्यादा जानकारी चाहते हैं तो https://www.udyamimitra.in/ पर विजिट कर सकते हैं.

4. कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मंजूरी

कैबिनेट ने यूपी के कुशीनगर हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने की मंजूरी दे दी है. कुशीनगर वही स्थान है, जहां महात्मा बुद्ध को महापरिनिर्वाण की प्राप्ति हुई थी. बौद्ध धर्म को मानने वालों के लिए एक पवित्र तीर्थ है. यहां थाईलैंड, जापान, वियतनाम, श्रीलंका जैसे देशों से बहुत से अनुयायी यहां आते हैं. इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से कुशीनगर दुनियाभर के टूरिस्ट मैप पर भी अपनी जगह मजबूत करेगा.

सांकेतिक तस्वीर-रॉयटर्स
सांकेतिक तस्वीर-रॉयटर्स

फिलहाल कुशीनगर का नजदीकी एयरपोर्ट महायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट, गोरखपुर में है. टूरिस्ट टैक्सी के जरिए गोरखपुर से कुशीनगर की 48 किलोमीटर की दूरी तकरीबन एक घंटे में पूरी करते हैं. कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट कसया नामक स्थान पर बन रहा है, जो कुशीनगर से मात्र पांच किलोमीटर दूर है. ऐसे में यात्रियों का काफी वक्त बचेगा. हर साल यहां तकरीबन 10 लाख टूरिस्ट आते हैं. चूंकि यहां पर आने वाले टूरिस्ट ज्यादातर विदेशी होते हैं, ऐसे में उन्हें फिलहाल दिल्ली-कोलकाता-मुंबई जैसे बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरकर यहां की अलग से फ्लाइट लेनी होती है. कुशीनगर एयरपोर्ट शुरू होने के बाद वो सीधे यहीं पर आ सकेंगे. इस एयरपोर्ट को 2018 में ही शुरू होना था, लेकिन तकनीकी वजहों से यह अब तक शुरू नहीं हो सका है.

5. पशुपालन, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग का काम करने वालों को आसान लोन

कैबिनेट ने 15,000 करोड़ रुपये के पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास फंड यानी Animal Husbandry Infrastructure Development Fund (AHIDF) की स्थापना के लिए अपनी मंजूरी दे दी है.

– इस फंड के जरिए सरकार मीट प्रोसेसिंग और डेयरी सेक्टर में काम करने को बढ़ावा देना चाहती है. कोई भी 10 फीसदी की मार्जिन मनी के साथ इस सेक्टर में काम शुरू कर सकता है, बाकी का 90 फीसदी पैसा बैंक से कर्ज के रूप में लिया जा सकता है.

– मार्जिन मनी वह रकम है, जो बिजनेस शुरू करने वाले को अपनी तरफ से लगानी होगी. मिसाल के तौर पर, अगर राजू को डेयरी खोलनी है. इसमें टोटल एक लाख रुपये लगेगा. लेकिन राजू के पास इतने पैसे तो हैं नहीं. ऐसे में वो 10 हज़ार रुपये से अपनी डेयरी शुरू करेगा. यही उसकी मार्जिन मनी होगी. बाकी के 90 हज़ार रुपए की रकम बैंक उसे लोन के रूप में देगी. अब इस एक लाख रुपये से राजू को दो साल तक पूरी तरह अपने बिजनेस पर फोकस करना है. राजू को कर्ज लेने के दो साल तक कोई रकम नहीं भरनी है. उसके बाद अगले छह साल में लोन की रकम चुकानी है.

इस योजना का फायदा किसे मिलेगा?

– किसान उत्पादक संगठन यानी FPO

– MSME यानी छोटी और मझोली कंपनियां

– सेक्शन 8 कंपनियां. यानी वो कंपनियां, जिनके नाम के आखिर में आपने एसोसिएशन, फाउंडेशन, सोसायटी, परिषद, क्लब, अकादमी वगैरह लिखा देखा होगा. ऐसी कंपनियां वाणिज्य, कला, विज्ञान, खेल, शिक्षा, अनुसंधान, समाज कल्याण, धर्म, दान, पर्यावरण पर काम करती हैं और नॉन प्रॉफिट होती हैं.

– इसके अलावा निजी कंपनियां और बिजनेसमैन भी इसका लाभ ले पाएंगे.


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