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298 निर्दोष लोगों को रूस ने क्यों मार डाला?

9 मार्च, 2020. नीदरलैंड्स में 298 लोगों की हत्या का एक क्रिमिनल केस शुरू हुआ. ये सभी MH17 विमान हादसे में मारे गए थे. ये विमान 17 जुलाई, 2014 को यूक्रेन में गिरा दिया गया था. इस केस में चार लोगों पर मुकदमा चलेगा. इनमें से तीन रूसी और एक यूक्रेन का नागरिक है. मुकदमे में इनमें से कोई भी हिस्सा नहीं लेगा. न ही उनके देश इन लोगों को नीदरलैंड्स के सुपुर्द करेंगे.

इस विमान हादसे में 10 देशों के नागरिक मारे गए थे. इनमें से पांच- नीदरलैंड्स, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, मलयेशिया और यूक्रेन ने मिलकर इस हादसे की साझा तफ़्तीश की. कोशिश तो हुई थी संयुक्त राष्ट्र (UN) के समर्थन वाला ट्राइब्यूनल बनाने की. मगर रूस के विरोध की वजह से ऐसा हो नहीं सका. इसके बाद जांच से जुड़े देशों ने तय किया कि इस केस से जुड़ी अदालती कार्रवाई नीदरलैंड्स में होगी. वहां के कानूनों के मुताबिक होगी. इसी के आधार पर अब ये केस शुरू हुआ है. आज इस ख़बर में हम आपको इसी केस के बारे में विस्तार से बता रहे हैं.

क्या हुआ था MH17 के साथ?
17 जुलाई, 2014. मलेशियन एयरलाइन्स के फ्लाइट 17 ने एम्सटर्डम से उड़ान भरी. विमान को पहुंचना था मलयेशिया की राजधानी कुआलालंपुर. विमान का रूट था नीदरलैंड्स से जर्मनी, पोलैंड, पूर्वी यूक्रेन होते हुए कुआलालंपुर. दोपहर 1.20 बजे के करीब का समय था, जब विमान पूर्वी यूक्रेन के डिनियेस्क शहर से कुछ आगे बढ़ चुका था. इस समय पूर्वी यूक्रेन में यूक्रेन और रूस समर्थित विद्रोही गुट में सिविल वॉर चल रहा था. पूर्वी यूक्रेन का ये इलाका विद्रोही गुट के कब्ज़े में था. यहीं पर एकाएक आकाश में उड़ रहे MH17 की कॉकपिट के बाएं हिस्से पर एक मिसाइल आकर लगा. इसकी वजह से विमान के आगे का हिस्सा बीच हवा में टूट गया और विमान के टुकड़े हो गए. विमान में सवार 298 लोगों की लाशें एक बड़े इलाके में छितरा गईं. इनमें 80 बच्चे थे. 298 में से 193 तो अकेले नीदरलैंड्स के थे.

मलबे में क्या मिला?
लाशें बटोरने के दौरान नीदरलैंड्स और ऑस्ट्रेलिया की इमरजेंसी टीम को मलबे में कुछ खास हाथ लगा. ये खास चीज थी मिसाइल के टुकड़े. ये बहुत गंभीर साक्ष्य थे. नीदरलैंड्स के नेतृत्व में पांच देशों की संयुक्त जांच शुरू हुई. जांच के दौरान हादसे में मारे गए एक पायलट की लाश में मिसाइल से निकले शार्पनेल, यानी धातु के टुकड़े बरामद हुए. ये शार्पनेल तितली की आकृति के थे. इनकी मदद से उस वॉरहेड की पहचान हुई, जिसका इस्तेमाल हमले में किया गया. वॉरहेड एक किस्म का बम होता है. मिसाइल इसी को टारगेट पर छोड़ता है. जिस वॉरहेड की शिनाख्त हुई, वो था- 9N314M. इसका इस्तेमाल दो तरह के मिसाइल लॉन्चर में होता है. एक, 9M38. दूसरा, 9M38M1.

वॉरहेड ने कहां पहुंचाया?
MH-17 के मलबे में मिले मिसाइल के टुकड़ों की जांच हुई. पता चला, ये बुख़ नाम के एक मिसाइल का हिस्सा हैं. बुख़ नाम का सतह से हवा में वार करने वाला ये मिसाइल सिस्टम 1986 में सोवियत संघ ने बनाया था. सोवियत के विघटन के बाद बाकी हथियारों की तरह ये रूस के जखीरे में शामिल हो गया. इस खुलासे के बाद उंगलियां रूस की तरफ उठने लगीं. कहा गया कि विमान गिराने के पीछे रूस जिम्मेदार है.

पूर्वी यूक्रेन कैसे पहुंचाया गया ये मिसाइल लॉन्चर?
ये जांच बहुत विस्तार और बारीकी से की गई थी. इन्वेस्टिगेशन के लिए MH17 का नमूना तैयार किया गया था. ताकि ये समझा जा सके कि जो हुआ, कैसे हुआ. पता चला कि जिस मिसाइल से विमान गिराया गया, वो रूसी सेना की 53वीं ऐंटीएयरक्राफ्ट ब्रिगेड के पास था. ये ब्रिगेड पश्चिमी रूस के कुर्स्क में तैनात है. जुलाई 2014 में पूर्वी यूक्रेन के अंदर रूस समर्थित विरोधी गुट को काफी नुकसान हो रहा था. यूक्रेन उसपर हवाई हमले कर रहा था. विरोधी गुट की मदद कर रहे रूस ने सैन्य सहायता पहुंचाई. इसी सप्लाई का हिस्सा था ये बुख़ मिसाइल लॉन्चर. कई चश्मदीद सामने आए, जिन्होंने सड़क के रास्ते इसे रूस से पूर्वी यूक्रेन लाए जाते हुए देखा था. न्यूज एजेंसी AP ने तो MH17 गिराए जाने के पहले एक रिपोर्ट में इस मिसाइल लॉन्चर के पूर्वी यूक्रेन में तैनात किए जाने की ख़बर दी थी. इस जानकारी के साथ जांच आगे बढ़ी. साझा जांच दल ने उस मिसाइल लॉन्चर के रूस से यूक्रेन आने और वापस रूस जाने के रूट का पता लगाया.

कौन हैं चार आरोपी, जिन पर 298 लोगों की हत्या का इल्ज़ाम है?
इस केस की जांच का नेतृत्व किया नीदरलैंड्स ने. ये केस उसके इतिहास की सबसे विस्तृत, सबसे जटिल आपराधिक जांच है. पांच साल तक की गई विस्तृत जांच में जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम ने कई सारे सबूत जमा किए. इसके बाद 2019 में आकर चार संदिग्धों के खिलाफ वॉरंट जारी किए. इनमें से तीन रूसियों के नाम हैं- सेरगी डूबिन्स्की, ओलेग पूलातोव और इगोर गिरकिन. चौथा आरोपी, जो कि यूक्रेन का रहने वाला है, उसका नाम है लियोनिद खारचेनको. सेरगी रूस की FSB खुफिया सेवा में कर्नल थे. सेरगी और ओलेग रूस की GRU मिलिटरी इंटेलिजेंस एजेंसी में काम करते हैं. लिओनिद ने पूर्वी यूक्रेन में एक कॉम्बैट यूनिट का नेतृत्व किया था. इन चारों पर 298 लोगों की हत्या का आरोप है. अगर ये दोषी पाए जाते हैं, तो इन्हें उम्रकैद की सज़ा हो सकती है. हालांकि ये सज़ा उन्हें मिल पाने की उम्मीद तो नहीं है. क्योंकि रूस न तो इस जांच को वैध मानता है और न ही इस अदालत का अधिकार ही मानता है. न ही वो अपने नागरिकों को नीदरलैंड्स के हवाले करने वाला है.

Dutch Safety Board ने इस केस की जांच के आधार पर एक विडियो जारी किया था. आप इस विडियो को देखकर MH17 हादसे की थिअरी जान सकते हैं. हालांकि डच सेफ्टी बोर्ड ने कहा है कि उनकी जांच का नतीजा इस मुकदमे में बतौर सबूत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.

क्या रूस ने जांच में सहयोग किया?
रूस इस विमान को गिराए जाने से जुड़े आरोपों से इनकार करता रहा है. उसका दावा था कि ये मिसाइल पक्का यूक्रेन के कब्जे वाले हिस्से से दागी गई. जांच के दौरान नीदरलैंड्स ने रूस से कहा था कि अगर उसके पास इस मामले से जुड़ा कोई भी सबूत है, तो वो मुहैया कराए. मगर फिर बाद में बताया गया कि रूस द्वारा दिए गए साक्ष्य कई स्तर पर ग़लत और फर्ज़ी हैं.

इस मुकदमे की अहमियत क्या है?
मरने वालों में 193 नीदरलैंड्स, 43 मलयेशिया, 27 ऑस्ट्रेलिया, 12 इंडोनेशिया, 10 ब्रिटेन, चार जर्मनी, चार बेल्जियम, तीन फिलिपीन्स, एक कनाडा और एक न्यू ज़ीलैंड के नागरिक थे. जो लोग मारे गए, उनके रिश्तेदारों-दोस्तों को पता है कि शायद दोषियों को कभी सज़ा न मिले. मगर फिर भी ये मुकदमा उनके लिए बहुत मायने रखता है. क्योंकि उन्हें ये सुकून रहेगा कि न्याय की प्रक्रिया का जितना हिस्सा उनके देश के पास था, वो पूरा किया गया.


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