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मॉरीशस के लिए ऑइल लीक इतनी बड़ी आपदा कैसे है?

बाज़ीगर का टाइटल सॉन्ग. इसकी एक लाइन है- पहली नज़र में बनी है, तू मेरे ख़्वाबों की रानी. याद रखेगी ये दुनिया, अपनी वफ़ा की कहानी. अब एक और गाना याद कीजिए. जोश फिल्म का गाना- हाय मेरा दिल. इसमें एक जगह चंद्रचूड़ सिंह और ऐश्वर्या रॉय समंदर में राफ़्ट चलाते हुए गाते हैं- कैसी तन्हाई है, मस्ती सी छाई है, ये मौसम है प्यार के क़ाबिल.

इन पंक्तियों में कॉमन क्या है? कॉमन है एक पैन शॉट. जब कैमरा हीरो-हीरोइन के पीछे का बैकग्राउंड दिखाता है. इस बैकग्राउंड में दिखता है हरे-नीले पानी वाला साफ़ समंदर. कहां पर है ये ख़ूबसूरत लोकेशन? ये जिस जगह पर है, वहां एक बड़ी विपत्ति आई है. इतना बड़ा हादसा हुआ है दशकों बाद भी नुकसान की भरपाई हो सकेगी कि नहीं, ये नहीं पता. ये क्या मामला है, विस्तार से बताते हैं आपको.

ये बात शुरू हुई 25 जुलाई को

जापान की एक कंपनी है- नागशिकी शिपिंग लिमिटेड. इसका एक जहाज़ है- मर्चेंट वैसल वाकाशिओ. इसे जापान की ही एक ट्रांसपोर्ट कंपनी ‘मितुसी OSK’ ने किराये पर लिया. ये जहाज़ ने चीन स्थित तियानजिन बंदरगाह से रवाना होकर ब्राजील जा रहा था. उस रोज़, यानी 25 जुलाई की शाम को ये जहाज़ हिंद महासागर में बसे देश मॉरिशस की दक्षिण-पश्चिमी दिशा से होकर गुज़र रहा था. यहां समंदर में मूंगे की चट्टानें हैं. इन्हीं कोरल रीफ़्स में अटक गया ये जहाज़. जहाज़ फंसा, तो आगे नहीं बढ़ पाया.

Nagashiki Shipping Co Limited
नागशिकी शिपिंग लिमिटेड.

उन दिनों समंदर का मौसम ख़राब था. समुद्र में बड़ी-बड़ी लहरें उठ रही थीं. इनके थपेड़े कोरल रीव्स में अटके वाकाशिओ पर लगातार वार कर रहे थे. इसी तरह करीब एक हफ़्ता बीत गया. थपेड़ों के कारण जहाज़ के मुख्य ढांचे में दरार पड़ गई. इस दरार के कारण वाकाशिओ के अंदर रखा सामान समंदर में लीक होने लगा. क्या सामान था वाकाशिओ में? आमतौर पर ये जहाज़ कोयला और अनाज़ जैसी चीजों की ढुलाई करता है. मगर जिस वक़्त इसमें दरार पड़ी, उस समय इसपर था करीब 200 टन डीज़ल और 4,000 टन हैवी फ्यूल ऑइल. जहाज़ में पड़ी दरार के रास्ते ये तेल समंदर में रिसने लगा. जल्द ही एक बड़े इलाके में फैल गया ये तेल. 7 अगस्त आते-आते ये ऑइल लीक मॉरीशस का राष्ट्रीय आपातकाल बन गया.

Tianjin Port
चीन स्थित तियानजिन बंदरगाह. (गूगल मैप्स)

आप पूछेंगे ऑइल लीक इतनी बड़ी आपदा कैसे है?

इसका जवाब है, ऑइल लीक की लोकेशन. मॉरीशस एक द्वीपीय देश है. इसके चारों तरफ फैला साफ-सुथरा समंदर ही इस देश की ख़ासियत है. इसके नीले लैगून्स दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत जगहों में गिने जाते हैं. इस समंदर की ख़ासियत है यहां मौजूद मरीन इको सिस्टम. यहां समंदर के पानी में सैकड़ों तरह के समुद्री जीव और पौधे पाए जाते हैं. कुछ तो ऐसे हैं, जो ख़ासतौर पर इसी इलाके में मिलते हैं. करीब 800 किस्म की मछलियां. 1,700 प्रजातियों के समुद्री जीव. मूंगे की चट्टानें. पानी में खड़े मैंग्रोव जंगल. यही समुद्री जीवन मॉरीशस को बनाता है जैव विविधता का हॉटस्पॉट. इतनी संपन्न बायो डायवर्सिटी वाले समुद्री इलाके बहुत कम ही हैं दुनिया में.

Ile Aux Aigrettes
इलीज़ी ग्रेथ (गूगल मैप्स)

इनमें से एक है इलीज़ी ग्रेथ नाम का एक ख़ूबसूरत द्वीप. करीब 25 हेक्टेयर का ये द्वीप मॉरीशस के दक्षिणपूर्वी तट पर बसा है. इस द्वीप पर बहुत सारे दुर्लभ प्रजाति के जीव और पेड़-पौधे हैं. इसमें से कई विलुप्त होने की कगार पर हैं. ये द्वीप ख़त्म, तो समझिए कि वो जीव और पौधे ख़त्म. इसी वजह से ये इलीज़ी ग्रेथ द्वीप पर्यटन से कहीं ज़्यादा साइंटिफिक रिसर्च के लिए अहमियत रखता है. इसके अलावा एक है ब्लू बे मरीन पार्क. 1997 में मॉरीशस ने इसे नैशनल पार्क घोषित किया. इसे संरक्षित इलाके का दर्जा दिया गया. इस इलाके में करीब 133 प्रजातियों के कोरल, 233 प्रजाति की मछलियां, 201 तरह के सीप और घोंघे पाए जाते हैं. वाकाशिओ से लीक हुए तेल का सबसे ज़्यादा नुकसान इसी मरीन लाइफ को पहुंचा है.

सवाल है, कैसे?

ये जो ऑइल स्पिल हुआ है, उसके नज़दीक हैं मॉरीशस के संरक्षित मरीन इकोसिस्टम इलाके. ऑइल लीक के कारण इन इलाकों में समंदर के ऊपर तेल की मोटी परत जम गई. इसके अलावा तेल के कई घुलनशील तत्वों की एक परत पानी की सतह के नीचे भी फैल गई. ये सब यहां के मरीन लाइफ़ के लिए ज़हर का काम कर रही हैं. तेल की परत के कारण समंदर के नीचे रहने वाले जीवों को ऑक्सिज़न कम मिलेगा. इसके अलावा तेल से निकला ज़हरीला हाइड्रोकार्बन कोरल रीफ़्स को भी ब्लीच कर देगा. इससे वो मर जाएंगे. समंदर में पाई जाने वाली करीब 25 फीसद मछलियां अपने वज़ूद के लिए इन्हीं कोरल रीफ़्स पर निर्भर करती हैं. जब कोरल रीफ़्स नहीं रहेंगे या क्षतिग्रस्त हो जाएंगे, तो उनपर आधारित समुद्री जीवों का क्या होगा?

Area Polluted By Oil
इस ऑइल स्पिल के कारण इस इलाके के समूचे समुद्री और तटीय जीवन के अस्तित्व पर बन आई है. (फोटो: एपी)

क्या ऑइल स्पिल का नुकसान बस पर्यावरण और समुद्री इकोसिस्टम तक ही है?

जवाब है, नहीं. हर साल दुनियाभर के 10 लाख से ज़्यादा पर्यटक मॉरीशस के समंदर को देखने आते हैं. पिछले दो दशक से सालाना करीब नौ फीसदी की दर से टूरिज़म बढ़ रहा है यहां. 2018 में मॉरीशस की कुल GDP का करीब एक चौथाई हिस्सा इसी टूरिज़म से आया. माने पर्यटकों की ये आमद मॉरीशस की जीवन रेखा है. जब मरीन लाइफ ख़त्म होगी, तो उसपर निर्भर पर्यटन भी तो प्रभावित होगा. फिशिंग जैसे उद्योग भी प्रभावित होंगे. ये ऐसा ही होगा कि आप आगरा से ताज महल, रेड फोर्ट और फतेहपुर सीकरी छीन लीजिए.

इसी वजह से मॉरीशस ने इस ऑइल लीक को नैशनल इमरजेंसी माना. सरकार तो सरकार, आम लोग भी तेल साफ करने समंदर में कूद पड़े. कहीं पंप लगाकर तेल खींचा जा रहा है. कहीं लोग बाड़ बनाकर तेल को फैलने से रोक रहे हैं. लोग समंदर में उतरकर प्लास्टिक की बोतलों में भर-भरकर तेल हटा रहे हैं. मॉरीशस के सलून्स के बाहर बाल कटवाने के लिए लोगों की भीड़ लग रही है. क्यों? क्योंकि इंसानी बाल तेल सोखने के काम आते हैं. मॉरीशस के लोग इन बालों से झाड़ू बना रहे हैं और उन झाड़ूओं से तेल हटाने की कोशिश कर रहे हैं. कपड़े और गन्ने के पत्तों की भी मदद ली जा रही है.

Mauritius Leaking Ship
जहाज़ टूटने के समय जहाज़ पर लगभग 90 टन तेल मौजूद था. (फोटो: एपी)

ये सब चल ही रहा था कि 15 अगस्त को एक और ख़बर आई. पता चला कि वाकाशिओ जहाज़ दो हिस्सों में टूट गया है. जहाज़ के टूटने का अंदेशा पहले से ही था. इसी वजह से उसपर लदे बाकी तेल को हटाने की कोशिश की जा रही थी. ताकि जहाज़ टूटने पर और तेल न गिरे समंदर में. मगर बहुत कोशिशों के बाद भी पूरा जहाज़ खाली नहीं किया जा सका. जहाज़ टूटने के समय लगभग 90 टन तेल मौजूद था इसपर.

अभी क्या स्थिति है मॉरीशस की?

सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों के मुताबिक, जहाज़ से निकला तेल 27 स्क्वैयर किलोमीटर के इलाके में फैला गया है. तेल की ये मात्रा 1,100 टन से ज़्यादा बताई जा रही है. मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ ने इस संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है. इस अपील के मद्देनज़र भारत ने भी अपने विशेषज्ञों की एक टीम भेजी है मॉरीशस. साथ में, 30 टन वजनी उपकरण भी भेजे हैं भारत ने. भारत के अलावा फ्रांस और जापान भी मॉरीशस की मदद कर रहे हैं.

Pm Pravind Jugnauth
मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ (फोटो: एएफपी)

अब सवाल है कि इस ऑइल स्पिल से हुए नुकसान का ज़िम्मेदार कौन है?

इस सवाल का जवाब तय किया गया था 2001 में. इस बरस हुआ था एक अंतरराष्ट्रीय बंकर सम्मेलन. इसमें तय किया गया कि ऑइल लीक की स्थिति में हुए नुकसान का जिम्मा होगा जहाज़ के मालिक का.

इस केस में ऑइल लीक करने वाले जहाज़ की मालिक है नागासाकी शिपिंग लिमिटेड. मॉरीशस ने इसी कंपनी से मुआवज़ा मांगा है. नागासाकी शिपिंग लिमिटेड ने कहा है कि वो मान्य क़ानूनों के मुताबिक मुआवाज़ा देने को तैयार है. कौन सा क़ानून तय करेगा मुआवज़ा? ये तय होगा 1976 के ‘कन्वेशन ऑफ लिमिटेशन ऑफ लायबिलिटी फॉर मैरीटाइम क्लेम्स’ से. इसका एक संशोधित रूप आया था 1996 में. मॉरीशस ने 1976 वाले कन्वेशन पर दस्तख़त किया हुआ है. इसमें मुआवज़े के भुगतान की अधिकतम राशि है 140 करोड़ रुपया. वहीं जापान 1996 के संशोधित क़ानून को मानता है. इसमें मुआवज़े की मैक्सिमम रकम है 500 करोड़ रुपया. इसके अलावा एक और उलझन है. नागासाकी शिपिंग ख़ुद जापानी कंपनी है. मगर जिस वाकाशिओ जहाज़ से ऑइल स्पिल हुआ, वो रजिस्टर्ड है पनामा में. अब इस केस में मुआवज़े पर कहां का क़ानून चलेगा, ये फैसला UN की संस्था इंटरनैशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन करेगी.

Convention On Limitation Of Liability For Maritime Claims 1996
‘कन्वेशन ऑफ लिमिटेशन ऑफ लायबिलिटी फॉर मैरीटाइम क्लेम्स’ का 1996 वाला संशोधित रूप.

क्या मुआवज़े की कोई भी रकम इस ऑइल स्पिल से हुए नुकसान की भरपाई कर सकेगी?

जवाब है, नहीं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये ऑइल स्पिल मरीन लाइफ के लिए क़यामत लाई है. इसके असर से उबरने में दशकों लग सकते हैं. कुछ नुकसान तो ऐसे होंगे, जिनकी कभी भरपाई नहीं हो सकेगी. इस नुकसान के ब्योरे और सटीक गणनाएं आने वाले दिनों में आएंगी. बाकी अंदाज़े के लिए आप बस इतना जान लीजिए कि अभी से ही वहां मरी हुई मछलियों का अंबार लग गया है.

पता है, इस पूरे प्रकरण में सबसे ज़्यादा निराश कौन हैं? मॉरीशस के आम लोग और पर्यावरण संरक्षक. मॉरीशस के लोग सबसे ज़्यादा तो अपनी सरकार से नाराज़ हैं. उनका कहना है कि तेल लीक होने से पहले एक हफ़्ते तक जहाज़ समंदर में खड़ा रहा. अगर इस बीच सरकार ने दूरदर्शिता दिखाई होती, तो शायद ऑइल स्पिल होता ही नहीं. सिस्टम की लेट-लतीफ़ी के कारण उपजा अविश्वास ही है कि सरकार के लाख मना करने पर भी लोग तेल हटाने में जुटे हैं. मॉरीशस की जनता बढ़-चढ़कर चंदा इकट्ठा कर रही है. हज़ारों-हज़ार लोग घंटों पानी में खड़े होकर तेल हटाने में लगे हैं. ऐसा लग रहा है कि मॉरीशस के लोगों ने अपने देश को बचाने की कमांड अपने हाथों में ले ली है.


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