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अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी, जिन्हें उनके इलाज ने ही पागल बना दिया


महाभारत सीरियल में एक सीन है जहां गांधारी कुंती से कहती हैं कि युद्ध में विजय श्री किसी की भी हो मगर कष्ट सिर्फ हम दोनों को उठाना पड़ेगा.

दुनिया के इतिहास में सियासत, धर्म और पारिवारिक कलह की ऑपरेशन टेबल पर अक्सर औरतों के निजी जीवन, सपनों, इच्छाओं की चीर-फाड़ हो जाती है. हम युद्ध के नायकों की कहानियां पढ़ते हैं, उनसे प्रेरणा लेते हैं और किताब बंद करके रख देते हैं. अब्राहम लिंकन की महानता के तमाम किस्से भी आपने पढ़े होंगे. हमारे लिए अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति की कहानी जॉन विल्कीस बूथ के हाथों चली गोली के साथ ही खत्म हो जाती हैं. इसके बाद हम लिंकन की कहानी को एक प्रेरणादायक किस्सा मानते हुए अक्सर बंद कर देते हैं.

लेकिन लिंकन की कहानी बस लिंकन की ही नहीं थी. आज लिंकन का बड्डे है. इस मौके पर पढ़िए लिंकन की ज़िंदगी से जुड़े एक ऐसे पहलू के बारे में जिसका ज़िक्र कम होता है. पढ़ें मैरी टॉड लिंकन का किस्सा. वो महिला, जिसकी कहानी उसके पति अब्राहम लिंकन के मरने के बाद खत्म नहीं हुई.

मैरी 13 दिसंबर 1818 को पैदा हुईं. 1842 में मैरी की शादी 23 की उम्र में 33 साल के लिंकन से हुई. दोनों के 4 बच्चे हुए. जिनमें से 2 कम उम्र में गुज़र गए. वो दौर लिंकन के पॉलिटिकल करियर की शुरुआत का था. लिंकन अक्सर काम में डूबे रहते और मैरी के हिस्से घर चलाने की सारी ज़िम्मेदारियां आती थीं. ये सिलसिला 1860 तक चला जब तक लिंकन राष्ट्रपति नहीं बन गए.

देश की पहली महिला बनना कितना खुश करने वाला अनुभव होगा, सोच सकते हैं. मैरी के हिस्से ये खुशी ज़्यादा दिन के लिए नहीं आई. मैरी के सारे भाई, सौतेले भाई और कई रिश्तेदार कन्फेडरेट आर्मी में थे, जबकि पति यूनियन सेनाओं के मुखिया थे. मैरी को चुनना था कि वो भाइयों की तरफ रहें या पति की तरफ. मैरी ने पति का साथ दिया. एक-एक करके उनके सारे भाई युद्ध में मारे गए. इसके बाद भी उनके ऊपर सवाल उठते रहे. मैरी की जीवनशैली पर भी कई बातें हुईं. उन्होंने वाइट हाउस की साज-सज्जा को बदला. इसको उस दौर में बड़ी फिजूलखर्ची के तौर पर देखा गया. लिंकन भी इस पर काफी नाराज़ हुए.

मैरी को लगातार माइग्रेन की शिकायत रहने लगी. मूड स्विंग आम हो गए और डिप्रेशन हो गया. गुस्सा, फिजूलखर्ची और लोगों पर चिल्ला पड़ना, इतना बहुत था मैरी को एक बिगड़ैल औरत के तौर पर पेंट कर देने के लिए. बाद में कुछ डॉक्टर्स ने कहा कि मैरी को बाई पोलर डिसऑर्डर था. कुछ ने उन्हें पर्निसियस एनिमिया का शिकार बताया. मैरी जंग के दौरान सैनिकों के लिए फल वगैरह लेकर हॉस्पिटल जाती थीं. उन्होंने लिंकन के साथ कई जंग के मैदानों का भी दौरा किया. ज़्यादातर इतिहासकारों ने इसे भी मैरी की फिजूलखर्ची का हिस्सा माना है.

1865 में युद्ध खत्म हुआ. लोगों ने सुकून की सांस ली. इसके बाद मैरी और अब्राहम लिंकन के साथ नाटक देखने फोर्ड थिएटर गईं. वहां लिंकन की हत्या हो गई. मैरी गहरे सदमे में मानसिक रूप से असंतुलित हो गईं. अपने बच्चों के साथ शिकागो रहने चली गईं.

1870 में मैरी को कांग्रेस ने 3,000 डॉलर (2016 में लगभग 40 लाख रुपए सालाना) की पेंशन बांध दी. मगर मैरी का मानसिक संतुलन खराब होता गया. सब कुछ खो देने का डर उनके अंदर किसी फोबिया की हद तक घर कर गया.
वो कई दफा हंगामा करतीं कि कोई उनको ज़हर देना चाहता है. एक बार उन्हें भरोसा हो गया कि उनका लड़का रॉबर्ट किसी बीमारी से मरने वाला है. पति की मौत के बाद से वो केवल काले कपड़े पहनती थीं, मगर ढेर सारी महंगी ड्रेस खरीदती थीं. कंगाल हो जाने के डर से 56,000 डॉलर के सरकारी बॉन्ड अपने पेटीकोट में सिलकर शहर में घूमती थीं. उन्होंने एक फोटो भी खिंचवाई जिसमें पीछे लिंकन की छाया दिखती है. लोगों ने इसे लिंकन की रूह कहा.

1880 में मैरी एक दिन गिर पड़ीं और कोमा में चली गईं. इसके कुछ दिन बाद ही 63 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई. बाद में मैरी के ऊपर कई किताबें भी लिखी गईं, जिनमें सबूत दिये गए थे कि मैरी को दवा में अक्सर बड़ी मात्रा में एल्कोहल और अफीम मिलाकर दी जाती थी जो उस दौर में महिलाओं के इलाज का एक प्रचलित तरीका था. इसका असर उनकी मानसिक दशा पर काफी पड़ा था.

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