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भारत ने हमसे पाम ऑइल खरीदना बंद किया, पर हम गलत को गलत कहते रहेंगे: मलयेशिया

भारत ने मलयेशिया से पाम ऑइल (ताड़ का तेल) की खरीद बंद कर दी है. इस बात से मलयेशियाई PM महातिर मोहम्मद परेशान हैं. रॉयटर्स की ख़बर मुताबिक, उन्होंने मीडिया से कहा-

हम वाकई चिंतित हैं क्योंकि हम भारत को बहुत ज्यादा पाम ऑइल बेचते हैं. लेकिन अगर हम कुछ गलत होते हुए देखते हैं, तो हमें कहना होगा. अगर हम चीजों को गलत होने देते हैं और सिर्फ पैसे के बारे में सोचते हैं, तो मुझे लगता है कि और भी लोग बहुत सारी गलत चीजें करेंगे. भारत का कदम हमारी चिंताएं बढ़ाने वाला है, लेकिन इसका समाधान खोजने की कोशिश की जाएगी.

लेकिन भारत ने मलयेशिया से पाम ऑयल खरीदना क्यों बंद कर दिया?

पहले दुनिया का रुख अमेरिका और यूरोप की तरफ था. एशिया की ओर बढ़े, तो चीन हुआ. मगर पिछले कुछ समय से एशिया में संभावनाएं बहुत तेज़ी से बढ़ी हैं. प्राकृतिक संसाधनों से लेकर बाज़ार तक, हर मामले में. इसे कैश करने के लिए तकरीबन हर समझदार देश पूरब की ओर देख रहा है. भारत के लिए तो ये इलाका उसके आस-पड़ोस का है. ऐसे में बीते सालों के अंदर भारत ने भी ‘लुक ईस्ट’ पॉलिसी को तवज़्जो दी है. मोदी सरकार भी ‘ईस्ट एशिया पॉलिसी’ को लेकर सक्रिय दिखती है. मगर मलयेशिया के मामले में ये फोकस, गुडी-गुडी फैक्टर नहीं दिख रहा. हालिया दिनों में भारत और मलयेशिया के रिश्तों में खटास बढ़ती गई है.

Malaysia
मलयेशिया की आबादी भारतीय झारखंड राज्य के करीब-करीब है. (स्क्रीनशॉट: गूगल मैप्स)

लेटेस्ट क्या  हुआ है?
मलयेशिया के PM महातिर ने भारत के आंतरिक मामलों से जुड़े कुछ संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी की. ये ऐसे मामले हैं, जिन्हें लेकर मोदी सरकार का बड़ा सख़्त रुख रहा है. पहला, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करना. दूसरा, संशोधित सिटिज़नशिप ऐक्ट (CAA). इन दोनों मसलों पर मलयेशियाई PM ने भारत की आलोचना की. CAA पर PM महातिर के बयान के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय की सख़्त प्रतिक्रिया आई. कहा, ये पूरी तरह से हमारा आंतरिक मामला है. मंत्रालय ने हिदायती टोन में PM महातिर को इस तरह की टिप्पणियों से बचने की सलाह दी. साथ-साथ, महातिर के कमेंट्स को तथ्यात्मक रूप से गलत भी बताया. इसी बैकग्राउंड में जब भारत ने उससे पाम तेल की खरीद रोकने का फैसला लिया, तो इसे भारत के पलटवार के रूप में देखा गया.

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संशोधित नागरिकता अधिनियम से पहले क्या हुआ था?
CAA से पहले PM महातिर ने जम्मू-कश्मीर को लेकर भी भारत की कड़ी आलोचना की थी. ये आर्टिकल 370 निष्क्रिय करने के बाद की बात है. महातिर के कहे पर भारत ने यूं जवाब दिया-

जम्मू और कश्मीर ने और सभी राज्यों की तरह, इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेसेशन पर साइन किए थे. पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर हमला कर अवैध रूप से कब्जा कर लिया. मलयेशिया सरकार को दो देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को ध्यान में रखना चाहिए और ऐसे कमेंट्स से बचना चाहिए.

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ज़ाकिर नाइक का केस

जाकिर नाइक इस्‍लामिक उपदेशक है. भारत में नाइक पर आरोप है कि उसने भड़काऊ भाषण दिए हैं, आतंकी गतिविधि में शामिल होने के लिए युवाओं को भड़काया. जाकिर के खिलाफ भारत में मनी लॉन्ड्रिंग, हेट स्पीच और बांग्लादेश के एक रेस्टोरेंट में हुए ब्लास्ट मामले में जांच चल रही है. मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है. नाइक 2016 में भारत से भागकर मलयेशिया चले गए था. फिलहाल मलयेशिया में ही ठहरे हुए हैं. मोदी सरकार उन्हें भारत लाना चाहती है. मगर मलयेशिया की तरफ से वैसा सहयोग नहीं मिला.

भारत और पाम ऑइल का रिश्ता क्या?

मलयेशिया. इंडोनेशिया. मलयेशिया.

दुनिया में वेजिटेबल ऑइल का सबसे बड़ा खरीददार है भारत. लाइवमिंट की रिपोर्ट मुताबिक, भारत करीब 1.5 करोड़ टन वेजिटेबल ऑइल सालाना खरीदता है. इसमें करीब 90 लाख टन पाम ऑइल भी शामिल है. बाकी 60 लाख टन में सोयाबीन, सूरजमुखी और बाकी तेल शामिल हैं. भारत, इंडोनेशिया और मलयेशिया से पाम ऑइल खरीदता है. ट्रेड डेटा के मुताबिक़, मलयेशिया एक साल में 1.9 करोड़ टन पाम ऑइल का उत्पादन करता है. इंडोनेशिया 4.3 करोड़ टन का उत्पादन करता है.

मलयेशिया से कितना पाम ऑइल खरीदता है भारत?
44 लाख टन. की खरीद के साथ 2019 में भारत के लिए पाम ऑइल का सबसे बड़ा सप्लायर था मलयेशिया. कॉमर्स मिनिस्ट्री के डेटा के मुताबिक़-

जनवरी-नवंबर 2018: 1.2 बिलियन डॉलर
जनवरी-नवंबर 2019: 2.1 बिलियन डॉलर

यानी, एक साल में मलयेशिया से पाम ऑइल की खरीद 73 फीसद बढ़ी.

इंडोनेशिया से कितना पाम ऑइल खरीदता है भारत?

जनवरी-नवंबर 2018: 3.4 बिलियन डॉलर
जनवरी-नवंबर 2019: 2.3 बिलियन डॉलर

यानी, एक साल में इंडोनेशिया से पाम ऑइल खरीदने में 33 फीसद की कमी आई.

इंडोनेशिया से आयात करने में कमी क्यों आई?
सीधी सी बात है कि भारत को मलयेशिया से खरीदना सस्ता पड़ता है.

भारत ने क्या कहा है?
अक्टूबर 2019 में भारत की टॉप वेजिटेबल ऑइल ट्रेड बॉडी ‘सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया’ ने अपने सदस्यों से कहा कि वे सरकार की बात मानते हुए मलयेशिया से पाम ऑइल खरीदना बंद करें. भारतीय व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो 2020 में खरीद 10 टन से नीचे आ सकती है.

मलयेशियाई पाम ऑइल की खरीद बंद करने से जुड़ी ख़बरें आईं. इसके बाद विदेश मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया. इसके मुताबिक-

भारत ने मलयेशियाई पाम तेल के आयात पर कोई बैन नहीं लगाया है. बल्कि इसे भारत की व्यापारिक नीति के मुताबिक फिर से परिभाषित किया गया है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार. उन्होंने कहा कि नोटिफिकेशन किसी एक देश के लिए नहीं था. मगर ये कहते हुए उन्होंने ये भी जोड़ा-

दो देशों के आपसी व्यापार की बात करने से उनके आपसी संबंधों को देखना होगा.

मतलब, ये इशारा था कि मलयेशिया और भारत के बीच चीजें सही नहीं हैं. और, व्यापार जैसी बातों से पहले (या फिर इसके साथ-साथ) रिश्ते वाली बात भी मायने रखती है. मतलब, दोस्ताना रिश्ते होने पर अच्छे व्यापारिक संबंधों की उम्मीद ज़्यादा होती है.

मलयेशिया से खरीद बंद करने के आर्थिक नुकसान
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट कहती है, भारतीय व्यापारी 10 डॉलर (करीब 709 रुपये) प्रति टन की महंगी कीमत पर इंडोनेशिया से क्रूड पाम ऑइल खरीद रहे हैं.

भारत ने मलयेशिया से कब कितना पाम ऑइल खरीदा?
मलयेशियाई सरकारी वेबसाइट के मुताबिक़, 2019 के कुछ आख़िरी महीनों में भारत द्वारा किए गए आयात का ब्योरा कुछ ऐसा है-

अगस्त 2019- 5,50,452 टन
सितंबर 2019- 3,10,648 टन
अक्टूबर 2019- 2,19,956 टन
नवंबर 2019- 1,42,696 टन
दिसंबर 2019- 1,38,647 टन

इस बात को अब विजुअलाइजेशन से समझिए. पूरे 2019 में मलयेशिया से हुई पाम ऑइल की हमारी ख़रीद का आंकड़ा है-

इस पूरे मामले में अगस्त 2019 क्यों ख़ास है?
ऐसा नहीं कि भारत की पाम ऑइल ज़रूरतों का सबसे बड़ा सप्लायर मलयेशिया ही रहा हो. पहले ये जगह इंडोनेशिया की थी. साल 2019 में इंडोनेशिया से छिटककर मलयेशिया की ओर बढ़ा था भारत. ख़ासकर अगस्त के बाद. आप चार्ट में देख सकते हैं कि अगस्त से लेकर अब तक लगातार मलयेशिया से आयात किए जा रहे पाम ऑइल की मात्रा में किस कदर कमी आई है. इसके पीछे क्या मलयेशियाई PM के बयान कारण हैं? ऐसे सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि अगस्त में ही भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले आर्टिकल 370 में बदलाव किए थे. जिसके बाद मलयेशिया के PM का बयान आया था.

कश्मीर और आर्टिकल 370 के मसले पर मोदी सरकार का रुख काफी सख़्त रहा. भारत की कोशिश थी कि इस मामले में वो पाकिस्तान पर डिप्लोमैटिक बढ़त ले. अपनी दोस्तियों के सहारे इसे इंटरनैशनल मसला बनाने की पाकिस्तान की कोशिशों को नाकाम करे. बहुत हद तक भारत ऐसा करने में कामयाब भी हुआ. ऐसे में मलयेशिया के PM का बयान भारतीय नेतृत्व को अखरा हो, इसमें कोई हैरत नहीं होनी चाहिए. इस पूरे मामले का एक बड़ा असर ये होगा कि जिस इंडोनेशिया के महंगे पाम ऑइल का विकल्प भारत ने मलयेशिया में खोजा था, उसी इंडोनेशिया के पास उसे फिर से लौटना होगा. एक लाइन में- सस्ते तेल का विकल्प होते हुए भी भारत को महंगा तेल खरीदना होगा.

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
कॉमर्स मिनिस्ट्री में काम कर रहे एक ऑफिसर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा-

भारत में पाम ऑइल के आयात पर सरकार ने कोई बैन नहीं लगाया है. सरकार ने उसे ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कटेगरी में डाल दिया. मतलब अगर किसी को मलयेशिया से पाम ऑयल आयात करना है, तो उसे सरकार से लाइसेंस लेना होगा. भारत के आंतरिक मसले पर किसी देश को बयानबाजी करने से बचना चाहिए.

किसी और देश से महंगे में तेल खरीदने को लेकर उन्होंने कहा-

भारत ने बहुत सोच-समझकर यह कदम उठाया है. अगर कोई देश भारत को टारगेट करने की कोशिश करता है, तो भारत को ऐसे कदम उठाने होंगे. यह देश के लिए जरुरी है. हम पाम ऑइल के घरेलू उत्पादकों और सप्लायर्स को भी ध्यान में रख रहे हैं.

‘जिंदल स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स’ के श्रीराम चौलिया ने इस मामले पर BBC से बात करते हुए बताया-

भारत का बड़ा बाजार इसकी ताकत है. PM मोदी इस ताकत का इस्तेमाल उन देशों के लिए कर रहे हैं, जो देश भारत को रणनीतिक रूप से चोट पहुंचा रहे हैं. ये पहला मौका है जब भारतीय विदेश नीति में आर्थिक और राजनैतिक मकसदों, दोनों का बेहद ख्याल रखा जा रहा है.

मलयेशिया पर क्या असर पड़ने वाला है?

पाम ऑइल के उत्पादन में नंबर एक है इंडोनेशिया. दूसरा नंबर मलयेशिया का है. ‘पाम ऑइल’ मलयेशियाई अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है. इतना अहम कि ये उनकी GDP का 2.8 फीसद है. मलयेशिया के कुल निर्यात का 4.5 फीसद अकेला ये पाम ऑइल है. सरकारी और निजी, दोनों तरह की मलयेशियाई रिफाइनरियों को पाम ऑइल के लिए नए खरीदार खोजने होंगे.

मलयेशियाई अधिकारियों ने कहा कि वे पाकिस्तान, फिलिपीन्स, म्यांमार, वियतनाम, इथियोपिया, सऊदी अरब और इजिप्ट जैसे खरीदारों को और पाम ऑइल बेचने की कोशिश कर रहे हैं. मगर ये बेहतर समाधान नहीं है. इसीलिए मलयेशियाई ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने कहा है कि इस मामले को भारत के साथ सुलझाना जाना चहिए. दोनों सरकारों को चाहिए कि वो इस मुद्दे को निपटाने के लिए तमाम ज़रूरी तरीके इस्तेमाल करें. द्विपक्षीय बातचीत का सहारा लें. और इस बातचीत में निजी और राजनैतिक ईगो का घालमेल नहीं होना चाहिए.


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