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जिस लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर कार 40 फुट नीचे धंसी, उसके ठेकेदार की कहानी गजब है

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एक्सिडेंट भले ही अगस्त 2018 में हुआ, लेकिन इसकी नींव तो एक्सप्रेस वे के बनने के वक्त ही रख दी गई थी. सड़क बनाने वाली कंपनी पीएनसी है, जिसमें एन का मतलब नवीन जैन (दाएं) है, जो आगरा के मेयर हैं.

अब तक तो ये फोटो आपकी आंखों के सामने से भी कई बार गुजर चुकी होगी. पता चल गया होगा कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे धंस गया है. चार दोस्तों की जान जाते-जाते बची है. उनकी नई नवेली गाड़ी का कबाड़ा हो गया है. और इन सबके लिए आप भी कई बार यूपी की पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार को पानी पी-पीकर कोस चुके होंगे. कोसना ही चाहिए. आखिर जिसकी सरकार थी, सबसे ज्यादा जिम्मेदारी उसी की है. लेकिन ये आधा ही सच है. पूरा सच कुछ और है, जिसे जानने के बाद आप एक बार फिर से राजनीति से कुछ दिनों के लिए यकीन खो देंगे. तो हम आपको पूरा सच बताते हैं.

जहां कार धंसी, वो आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस की सर्विस लेन थी.

तो सच्चाई ये है कि ये फोटो आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे की है. लेकिन जो हिस्सा टूटा है, वो आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के हाईवे का न होकर, उसकी सर्विस लेन है. जी. सच्चाई ये है कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे की सर्विस लेन धंस गई है. 1 अगस्त को कार सवार लोग आगरा से कन्नौज जा रहे थे. डौकी इलाके में जब इनकी कार आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे की सर्विस लेन पर पहुंची, तो अचानक से सर्विस लेन की मिट्टी धंस गई और कार खाई में गिर गई. इसके बाद से ही एक बार फिर से समाजवादी पार्टी और पिछली अखिलेश सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने लगे.

किसकी कंपनी है पीएनसी इन्फ्राटेक, जिसकी बनाई सड़क धंस गई?

पीएनसी कंपनी के डायरेक्टर प्रदीप जैन (बाएं) और चक्रेश जैन (दाएं) हैं. वो आगरा के बीजेपी मेयर नवीन जैन (बीच में) के भाई हैं.

सरकार तो सिर्फ टेंडर जारी करती है. सड़क बनवाने का काम तो किसी कंपनी का होता है. इस मामले में भी यही हुआ है. अखिलेश सरकार के जमाने में लोकसभा चुनाव के ठीक बाद जून 2014 में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस बनाने के लिए टेंडर निकाले गए थे. टेंडर उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट अथॉरिटी की तरफ से निकाले गए थे, जिसने इस एक्सप्रेस को बनाने के लिए पांच चरण निर्धारित किए थे. अगस्त 2014 में टेंडर फाइनल हो गए. इस टेंडर में आगरा से फिरोजाबाद तक के पहले चरण की 55.5 किमी की सड़क बनाने का काम जिस कंपनी के जिम्मे आया वो कंपनी है पीएनसी इन्फ्राटेक. पीएनसी इन्फ्राटेक आगरा की कंपनी है, जिसके चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रमोटर हैं प्रदीप कुमार जैन. प्रदीप कुमार जैन ने 1999 में इस कंपनी की शुरुआत की थी. प्रदीप जैन के छोटे भाई नवीन जैन भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और आगरा के मेयर हैं. वो भारतीय जनता पार्टी के सह कोषाध्यक्ष भी हैं. इसके अलावा कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर चक्रेश जैन का नाम भी शामिल है. ऐसे में पीएनसी कंपनी का नाम होता है प्रदीप नवीन चक्रेश. 2017 में जब निकाय चुनाव हुए थे, तो  नवीन जैन सबसे अमीर उम्मीदवार थे. उस वक्त उनके पास करीब 400 करोड़ रुपये की चल और 30 करोड़ की अचल संपत्ति थी.

तीन बार तोड़नी पड़ी थी सड़क

जब सड़क बन रही थी, तो यूपीडा की ओर से पीएनसी इन्फ्राटेक की बनाई सड़क को तीन बार तुड़वाकर बनाया गया था.

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे को बनाने का काम शुरू हुआ जनवरी 2015 में. प्रदीप जैन की कंपनी पीएनसी इन्फ्राटेक ने आगरा से फिरोजाबाद के बीच 55 किमी लंबी सड़क बनाई, जो आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का हिस्सा थी. इसके अलावा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे से सटी हुई सर्विस लेन बनाने की जिम्मेदारी भी पीएनसी कंपनी की ही थी. इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए पीएनसी इन्फ्राटेक को 1635.75 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. इस पूरे एक्सप्रेस को बनाने के लिए शुरुआती दौर में 30 महीने का वक्त निर्धारित किया गया था. इस हिसाब से हाईवे को अप्रैल 2017 तक पूरा हो जाना था. लेकिन समाजवादी पार्टी के एक सम्मेलन में मंच पर बैठे मुलायम सिंह यादव ने कह दिया कि इस एक्सप्रेस को 24 महीने के अंदर हल हाल में तैयार हो जाना चाहिए. मुलायम के इस आदेश के बाद एक्सप्रेस को बनाने में इतनी तेजी आई कि 24 महीने के तय वक्त से दो महीने पहले ही एक्सप्रेस वे का काम पूरा हो गया. लेकिन जब उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने इस सड़क की जांच की तो पता चला कि आगरा के डौकी के पास पांच से छह किलोमीटर के हिस्से में जो काम हुआ है, उसका स्तर बहुत खराब है. लेकिन पीएनसी कंपनी से करार हो चुका था. दूसरी किसी कंपनी से काम नहीं करवाया जा सकता था. इसलिए यूपीडा की ओर से पीएनसी इन्फ्राटेक को उस हिस्से को दोबारा बनाने के लिए कहा गया. पीएनसी इन्फ्राटेक ने दोबारा सड़क बनाई, लेकिन काम गुणवत्ता के मुताबिक नहीं हुआ. और ऐसा एक बार नहीं, तीन बार हुआ. यूपीडी के अधिकारियों ने तीन बार पांच-छह किलोमीटर लंबी सड़क तुड़वाकर फिर से बनवाई. इसके बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस को यूपीडा की ओर से हरी झंडी मिल गई. 21 नवंबर 2016 को छह फाइटर प्लेन इस एक्सप्रस वे पर उतरे और इसी के साथ आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का औपचारिक उद्घाटन कर दिया गया.

जिसने सड़क बनाई थी, मेंटेनेंस की जिम्मेदारी उसी की है

21 नवंबर 2016 को लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे का उद्घाटन हुआ था. इस दौरान एक्सप्रेस वे पर फाइटर प्लेन उतारे गए थे.

यूपीडा ने जब अक्टूबर 2014 में एक्सप्रेस वे के लिए टेंडर निकाले थे, तो उसी वक्त ये तय हो गया था कि जो कंपनी सड़क बनवाएगी, मेंटेनेंस का जिम्मा भी उसी कंपनी का होगा. कंपनी के कर्मचारियों को सड़क की नियमित निगरानी करनी है और उसकी मेंटेनेंस करनी है. जहां पर सड़क धंसी है, वो काम पीएनसी इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी के जिम्मे था. लेकिन कंपनी सड़क की मरम्मत नहीं कर सकी. इस बीच लगातार बारिश की वजह से पानी जमा होता गया और सर्विस लेन धंस गई. यूपीडा के सीईओ अवनीश अवस्थी के मुताबिक धंसी हुई सड़क बनाने की जिम्मेदारी पीएनसी कंपनी की है.

शुरू हुई टोल वसूली और काम मिला पीएनसी इन्फ्राटेक को

विधानसभा चुनाव नज़दीक देखकर अखिलेश यादव ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का उद्घाटन तो कर दिया, लेकिन इस पर कोई सुविधा नहीं थी. अगर गाड़ी पंक्चर भी हो जाती, तो बनवाने का कोई इंतजाम नहीं था. कोई सुलभ शौचालय, इमरजेंसी मेडिकल सुविधा, पुलिसिंग, एम्बुलेंस जैसी चीजें मौजूद नहीं थी. लिहाजा लोग अपने रिस्क पर इस हाईवे पर यात्रा करने लगे. इस बीच मार्च 2017 में अखिलेश यादव की सरकार चली गई और सत्ता में आ गए योगी आदित्यनाथ. सरकार बनने के करीब 9 महीने के बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर टोल की वसूली शुरू हो गई. 19 जनवरी 2018 की रात से इस एक्सप्रेस वे पर टोल लगना शुरू हो गया. और लखनऊ से आगरा के बीच टोल वसूलने का जिम्मा जिस कंपनी को दिया गया, वो कंपनी थी पीएनसी इन्फ्राटेक.

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे बनाने का भी काम मिला

पीएम मोदी ने 14 जुलाई 2018 को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की नींव रखी है.

लखनऊ से गाजीपुर तक 341 किमी लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेस वे बन रहा है. 14 जुलाई 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजमगढ़ में इसकी नींव भी रख दी है. इस एक्सप्रेस वे को बनाने के लिए यूपीडा की ओर से आठ चरण निर्धारित किए गए हैं. इसमें भी 54 किलोमीटर और 28 किलोमीटर के दो पैच बनाने की जिम्मेदारी पीएनसी इन्फ्राटेक को ही दी गई है.

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