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अब रेमडेसिविर ने देवेंद्र फडणवीस और जूलियो रिबेरो में कैसा झगड़ा करवा दिया?

राजनेताओं और अधिकारियों के बीच विवाद का लंबा इतिहास रहा है. पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की शब्दावली में ऐसे विवादों के लिए शब्द है.  शासन और प्रशासन (ruling political class & bureaucracy) का विवाद. लेकिन जब यह विवाद सत्ता गंवा चुके एक नेता और रिटायर हो चुके एक अधिकारी के बीच शुरू हो जाए तो क्या कहा जाए? कोरोना वायरस जो न करा दे. रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत किसको किससे लड़वा दे – यह कहा नहीं जा सकता. मामले का एक सिरा रेमडेसिविर दवा की सप्लाई के नियमों और इसकी सप्लाई का राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ से भी जुड़ता है. जहां महाराष्ट्र सरकार इसे सरकारी कायदे-कानूनों के दायरे में आम मरीजों तक पहुंचाने की कोशिशों में लगी है, वहीं विपक्षी भाजपा लोगों को यह बताने की जुगत में लगी है कि जब राज्य सरकार दवा बनाने वाली कंपनी को ही तंग करेगी तो दवा कैसे आएगी.

इसी विवाद में एक चिट्ठी-पत्री की लड़ाई (लेटर वार) भी दो लोगों के बीच चल रही है. इस लेटर वार के एक सिरे पर हैं पंजाब में अलगाववाद और चरमपंथ पर लगाम लगाने वाले रिटायर्ड IPS जूलियो रिबेरो. तो दूसरे सिरे पर हैं एक बार पांच बरस तो दूसरी बार ढाई दिन के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके देवेंद्र फडणवीस. इस लेटर वार की शुरुआत हुई इंडियन एक्सप्रेस में 24 अप्रैल को छपे एक लेख से, जिसे जूलियो रिबेरो ने लिखा था.  ये ओपन लेटर था, देवेंद्र फडणवीस के नाम पर. इसमें उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री फडणवीस के कार्यकाल की सराहना करते हुए कोरोना काल में उनके व्यवहार की आलोचना की थी. इसके जवाब में फडणवीस ने भी रिबेरो के नाम एक खुला पत्र लिखा और इसमें उन्होंने सफाई देने की पूरी कोशिश की है. आखिर क्या है यह लेटर वार – आइए इसे तफ्सील से जानते हैं.

पहले बात जूलियो रिबेरो के पत्र की –

इस पत्र में रिबेरो ने फडणवीस के बारे में जो कुछ भी लिखा है, उसका मजमून कुछ इस प्रकार है.

“मैं आपके बतौर मुख्यमंत्री काम करने के तरीके का प्रशंसक रहा हूं. जिस प्रकार आपने मुंबई के पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति की प्रक्रिया को साफ-सुथरे तरीके से किया और जिस प्रकार मुंबई में पुलिस को उनके कामों के लिए फ्री-हैंड दिया, उस सबसे मैं आपसे बहुत प्रभावित हुआ था. लेकिन अब जब आप विपक्ष में हैं और कोरोना वायरस लोगों की ज़िंदगियां लील रहा है, उस परिस्थिति में आपके काम और आपके व्यवहार से मुझे बहुत निराशा हुई है. यह समय राजनीतिक मतभेदों को परे रखकर सरकार को सहयोग करने का है. आपने BKC पुलिस स्टेशन जाकर पुलिस सेवा के कनिष्ठ लोगों के साथ अप्रिय व्यवहार किया, जो आपको शोभा नहीं देता. आप मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री रह चुके हैं और इस हैसियत से आप राज्य के लाॅ एंड ऑर्डर का काम देख चुके हैं. ऐसे में आपके पुलिस थाने जाकर इतने कनिष्ठ लोगों से भिड़ना अशोभनीय व्यवहार है. 

जूलियो रिबेरो. (फ़ोटो क्रेडिट : Gettyimages)
जूलियो रिबेरो. (फ़ोटो क्रेडिट : Gettyimages)

 

इस पत्र में रिबेरो ने अपने समय का एक किस्सा भी जोड़ा

देवेन्द्र फडणवीस के नाम लिखे इस खुले पत्र में जूलियो रिबेरो ने 80 के दशक के एक वाक़ये का भी जिक्र किया जब वे खुद मुंबई पुलिस कमिश्नर थे. बकौल रिबेरो,

“जब मैं मुंबई पुलिस कमिश्नर था तब भाऊराव पाटिल नाम के एक विधायक ने एक पुलिस इंस्पेक्टर के साथ अभद्र व्यवहार कर दिया. भाऊराव पाटिल पूर्व मुख्यमंत्री ए आर अंतुले का करीबी था. जब यह मामला मेरे संज्ञान में आया तो मैंने FIR दर्ज करने का आदेश दिया. FIR दर्ज होने के बाद मामले को रफा-दफा करने के लिए राजनीतिक दबाव भी बढ़ने लगा. तत्कालीन मुख्यमंत्री वसंत दादा पाटिल ने भी मुझसे मामला खत्म करने को कहा. लेकिन मैंने उनसे साफ कर दिया कि जब तक विधायक माफी नहीं मांगेंगे तब तक मामला बंद नहीं होगा. इसके बाद विधायक मुझसे माफ़ी मांगने को तैयार हो गया. लेकिन मैंने उसे साफ कर दिया कि माफ़ी तो उस पुलिस इंस्पेक्टर से ही मांगनी होगी जिसके साथ आपने अभद्रता की है. इसपर वह तैयार नहीं हुआ और मामला चलता रहा. साल भर बाद जब मैं मुंबई पुलिस कमिश्नर पद से हट गया, उसके बाद यह मामला रफा-दफा हो गया.”

मामला क्या था जिसके लिए फडणवीस को थाने जाना पड़ा –

दरअसल मुंबई पुलिस रेमडेसिविर दवा बनाने वाली कंपनी के मैन्यूफैक्चरर को पकड़कर थाने ले गई थी. उस पर आरोप था कि उसने इस दवा की 60 हजार डोज को छिपा रखा है और उसकी कथित रूप से कालाबाजारी कर रहा है. मैन्यूफैक्चरर की गिरफ्तारी का पता चलते ही देवेंद्र फडणवीस आगबबूला हो गए और थाने पहुंच गए. वो थाने के अधिकारियों से कथित तौर पर अभद्रता से पेश आए.

रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने वाली फ़ार्मा कंपनी के अधिकारियों के पक्ष में उतरने के कारण ही देवेन्द्र फड़नवीस इस विवाद में फंसे हैं.
रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने वाली फ़ार्मा कंपनी के अधिकारियों के पक्ष में उतरने के कारण ही देवेंद्र फडणवीस इस विवाद में फंसे हैं.

इसी वाक़ये की खबर जब अपने जमाने के कड़क पुलिस अधिकारी माने जाने वाले जूलियो रिबेरो तक पहुंची तो उनसे रहा नहीं गया. उन्होंने खुला खत लिख दिया,

“व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना है कि रेमडेसिवीर के मैन्यूफैक्चरर इस संकट की घड़ी में कालाबाजारी और जमाखोरी जैसी हरकतें नहीं कर सकते. क्योंकि राज्य के फूड और ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने पहले ही यह तय कर रखा है कि इस दवा का वितरण राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार होगा. लेकिन फिर भी इस दवा को बनाने वाली कंपनी के अधिकारियों के पक्ष में थाने पहुंचकर जिस प्रकार का कृत्य फडणवीस ने किया वह निहायत ही गलत था. राजनीति अपनी जगह है. आप विपक्ष में हैं और इस नाते सत्ता पक्ष पर हालात को मद्देनजर रखते हुए आरोप लगाइए. लेकिन इस बीच में पुलिस प्रशासन के लिए अप्रिय स्थिति मत पैदा किजीए. रेमडेसिविर की बिक्री कैसे होगी – मौजूदा हालात में यह सरकार ही तय करती है और इसके लिए यदि, आपके मुताबिक, वह कोई गलत कदम उठाती है तो आप विरोध दर्ज कराइए. पर इसके लिए थाना स्तर के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों से उलझना आपको शोभा नहीं देता.”

देवेन्द्र फड़नवीस. (फ़ोटो क्रेडिट : Gettyimages)
देवेन्द्र फडणवीस. (फ़ोटो क्रेडिट : Gettyimages)

अब जवाब देने की बारी देवेंद्र फडणवीस की

जूलियो रिबेरो का यह पत्र इंडियन एक्सप्रेस अखबार में प्रकाशित होते ही देवेंद्र फडणवीस रक्षात्मक होते नजर आए. 27 अप्रैल को उनकी तरफ से भी एक खुला पत्र जारी किया गया. यह पत्र जूलियो रिबेरो को संबोधित कर लिखा गया है. इस पत्र में फडणवीस ने अपना पक्ष रखते हुए जूलियो रिबेरो को जवाब देने की कोशिश की है. उनके पत्र का लब्बोलुआब है,

“मैं आपकी (रिबेरो की) सेवाओं और कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान करता हूं. लेकिन मेरे बारे में जो बातें फैलाई जा रही है वह एक पाॅलिटिकल प्रोपैगैंडा के तहत फैलाई जा रही है. इस तरह की बातें फैलाने में महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महाविकास अघाड़ी (MVA) के लोग माहिर हैं. दरअसल कुछ दिनों पहले रेमडेसिवीर बनाने वाली दमन की कंपनी (ब्रुक फार्मा प्राइवेट लिमिटेड) से महाराष्ट्र को ज्यादा वायल की सप्लाई करने की मांग की गई थी. हम जानते हैं कि कंपनी को इस दवा के एक्सपोर्ट की इजाजत नहीं है. हमने सरकार की मंजूरी के लिए चर्चा की. लेकिन इस दरम्यान फ़ार्मा कंपनी के अधिकारियों को धमकी दी जाने लगी. फिर हमें फार्मा कंपनी के दो लोगों को BKC पुलिस थाने में हिरासत में रखे जाने का पता चला. फिर मुझे लगा कि ये तो उत्पीड़न का मामला है और तब जाकर हमने पुलिस के आला अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की. DCP और ज्वाइंट CP से बात की, वहां से कोई हल निकलता न देख हम थाने चले गए.

आगे से मैं आपकी (रिबेरो की) इस सलाह का अवश्य ध्यान रखूंगा कि बेवजह मेरी वजह से बात का बतंगड़ न बने. मुझे पुलिस थाने जाने से बचना चाहिए था लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गई कि मुझे जाना पड़ा.”

कुल मिलाकर पहली नजर में यह मामला महाराष्ट्र में रेमडेसिविर की सप्लाई का क्रेडिट लेने का दिख रहा है. क्योंकि इस कोरोना काल में इस दवा की काफी मांग है. भले ही मरीजों पर इसके प्रभाव के बारे में विशेषज्ञों के बीच मतभेद हों. लेकिन यहां तो सवाल रेमडेसिविर की सप्लाई सुनिश्चित करने की क्रेडिट को लेकर है जिसमें महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महाविकास अघाड़ी और विपक्षी भाजपा एक-दूसरे से आगे दिखने की होड़ लगा रही हैं.


विडियो : गुजरात के जिस शहर में BJP ने रेमडेसिविर बांटे, वहां कोरोना इलाज़ की ये हकीकत है.

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