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सरकार ने स्वच्छता अभियान भारतीयों पर थोपकर एक महान परंपरा भंड कर दी

Piyush pandey aaj tak lallantopपीयूष पांडे टीवी पत्रकार हैं. व्यंग्यकार हैं. किताबें भी लिखी हैं, हाल ही में आई ‘धंधे मातरम्’. पीयूष जी अब आपके लिए भी लिखेंगे. पाठक उन्हें ‘लौंझड़’ नाम की इस सीरीज में आपसे पढ़ पाएंगे. अभी शहरों की लिस्ट आई स्वच्छता में किसने कहां जगह पाई. गोंडा सबसे नीचे रहा. पढ़िए लौंझड़ में क्या है इस खबर पर खास.


 

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“बड़ा झमेला है गुरु. बताओ इत्ते शहरों में एक गोंडा ही मिला इन ससुरों को. हमाए शहर को सबसे गंदा बताए दिया.”
गोंडा का अपना एक यार दारू पीकर भावुक पड़ा था. संयोग से गोंडा का ये लौंडा नगरनिगम का कर्मचारी भी है. दारुबाज किसी भी मुद्दे पर भावुकता के चार पैग लगाए हो दारु का नशा चार गुना तेजी से चढ़ता है. ये भावुकता जब अपने शहर को सबसे गंदा बताए जाने से उपजी हो तो बंदा साफ-सफाई के खिलाफ आंदोलन छेड़ सकता है. ये बात अपन को तब पता चली, जब गोंडा का लौंडा स्वच्छता सर्वे की रैंकिंग को लेकर उखड़ गया. इस उखड़ने के खेल में उसने उधार लेकर एक बोतल और मंगाई और पीने के बाद फिर वही दर्द अलापा.
“बड़ी लौंझड़ है. किसी को कुछ पता नहीं. बताओ गोंडा को सबसे गंदा बताए दिया.”
अब मैं परेशान था. आखिर, उसकी परेशानी है क्या. इससे पहले कि वो बेहोश होता मैंने उसका एक जबर इंटरव्यू किया. पढ़िए.

सवाल- तुम्हारे शहर ने स्वच्छता अभियान में दिलचस्पी नहीं दिखाई. क्यों ?
जवाब- भटा दिलचस्पी. हम इस स्वच्छता अभियान के प्रति अपनी नाखुशी, नाराजगी और निकम्मापन ऐलानिया जाहिर करते हैं. हमारा साफ मानना है कि सरकार ने स्वच्छता अभियान भारतीयों पर थोपकर एक महान परंपरा भंड कर दी.
सवाल- क्या बात कर रहे हो यार. पूरा देश स्वच्छता स्वच्छता कर रहा है. और तुम गंदगी में भारतीय परंपरा खोज रहे हैं. ये क्या तर्क है?
जवाब- अंट शंट मत बको यार. स्वच्छता अभियान भारतीयों के उस जन्मसिद्ध अधिकार का उल्लंघन है, जिसके तहत वो कहीं भी कभी भी पॉलिथिन से लेकर छिलकों तक किसी भी प्रकार का कूड़ा कहीं भी डालने के लिए आजाद थे. भारतीयों को जन्म के साथ मिली ये आज़ादी अमेरिका-ब्रिटेन के देशों को कमतर बताने के लिए काफी थी. कूड़ा फेंकने के अधिकार की वजह से हिन्दुस्तानियों के मन में यह भाव जागता था कि भले इस देश में कई कमियां हों लेकिन अमेरिका जैसा देश भी हमारे आगे पानी भरता है. वो अपने लोगों को जो सहूलियतें नहीं दे पाता, वो भारत में मिलती हैं.
सवाल- लेकिन सफाई तो रहेगी.
जवाब- काहे की सफाई. स्वच्छता अभियान सिर्फ इंसानों की आजादी ही नहीं बल्कि जानवरों की स्वतंत्रता भी बाधित करता है. अभी गाय-भैंस-कुत्ते कहीं भी तल्लीनता से न सिर्फ पसर जाते हैं बल्कि लंच-डिनर के बाद का सारा काम सार्वजनिक रुप से सड़कों पर करते हैं. उन्हें अब यह काम करने की आज़ादी नहीं होगी. यह कहां का कानून है कि अब हम पशुओं को भी जीने नहीं देना चाहते. बेचारी भैंस सड़क पर चलते चलते कहां “पब्लिक टॉयलेट” खोजने जाएगी, जबकि यह इंसान को ही मयस्सर नहीं हो रहे.
सवाल- लेकिन गंदगी तो हट रही है.
जवाब- अबे गंदगी तो जरुरी है. गंदगी से अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है.
सवाल- हैं???
जवाब- अबे हैं वैं क्या कर रहे हो. गंदगी होती है तो बीमारियां होती हैं. बीमारियां होती हैं तो बंदे डॉक्टर के पास जाते हैं. उनका घर चलता है. मेडिकल स्टोर के पास जाते हैं तो उनका घर चलता है. गंदगी होती है तो झाड़ू लगाने वालों को काम मिलता है. झाडू बिकती हैं. यानी लाखों लोगों को रोजगार मिलता है गंदगी की वजह है. यहां देश में पहले से इंप्लॉयमेंट है नहीं और सफाई रखके तुम और धंधा चौपट कराना चाहते हो. हद है.
सवाल- तो तुम दूसरों की समस्या के चलते परेशान हो ?
जवाब- ना गुरु. अपनी भी समस्या है. स्वच्छता अभियान के तहत कसम दिलाई जाती है कि न गंदगी करुंगा, न करने दूंगा. एक तो यह सीधे-सीधे जुल्म और दूसरे की स्वतंत्रता का हनन है. फिर, खुली हवा में सड़क किनारे लघुशंका का आनंद भी कुछ और है. यह अभियान उस आनंद की भी बलि ले रहा है. आम हिन्दुस्तानी इस मनमर्जी को बर्दाश्त नहीं करेंगे. और कम से कम गोंडावासी तो कतई नहीं करेंगे.
सवाल- लेकिन सफाई से देश का नाम ऊंचा होगा.
जवाब- खाक ऊंचा होगा. गदंगी राष्ट्रीय पहचान से जुड़ा मसला है. हमारे आसपास की गंदगी से हमें जीने का हौसला मिलता है. तमाम बदबुएं झेलने से इंसान की सहनशक्ति बढ़ती है. और ये ताकत मिलता है कि इसके बाद सब अच्छा ही होना है.
सवाल- लेकिन कितना अच्छा लग रहा है देश साफ-सफाई कर रहा है.
जवाब- फालतू बात है. जो बंदा अपना घर साफ नहीं कर रहा-वो सड़क साफ कर फोटू छपवा रहा है. मंत्री-संत्री भी कमबख्त झाडू लगा रहे हैं. वो क्या झाड़ू लगाने के लिए मंत्री बने हैं? क्या दिन आ गए हैं इस देश में मंत्रियों के! साला इस चक्कर में अपन ने मंत्री बनने का इरादा पोस्टपोंड कर दिया है. मंत्रियों को घोटाला शोभा देता है. ट्रांसफर पोस्टिंग शोभा देते हैं. झाड़ू…. क्या गजब नौटंकी है भाई.
सवाल- तो गुरु तुम चाहते क्या हो. स्वच्छता अभियान बंद हो जाए.
जवाब- बंद हो या चले. अपनी बला से. दारु बंद नहीं होनी चाहिए-ये अपनी मांग है. बाकी-दिलों की गंदगी को साफ करने वाला कोई अभियान चलाया गया तो अपन भी बिना दारु पीए साथ देंगे. जय हिंद.

नोट- स्वच्छता सर्वे में गोंडा को सबसे गंदा शहर बताया गया है तो व्यंग्य में उसका नाम प्रतीक के रुप में इस्तेमाल है. गोंडावासियों का दिल दुखाने का कोई इरादा नहीं :)

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