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वो खिलाड़ी, जो पिच पर अंधाधुंध भागा और वर्ल्ड कप जीतने का चांस खो बैठा

चोकर्स. साउथ अफ्रीकन क्रिकेट टीम के माथे पर इस शब्द का गोदना है. बहुत गहरा. चम चम चमकता है. इसकी इतनी दहशत है उन्हें कि कई बार मुश्किल मैचों में महज़ इस टैग को याद कर के लटपटा जाते हैं. आज एक ऐसी ही घटना को याद करेंगे, जिसने इस गोदने को और गहरा करने का काम किया था.

साल था 1999. वर्ल्ड कप चल रहा था. साउथ अफ्रीका की टीम फर्राटेदार खेल रही थी. लीग स्टेज में 5 मैचों में 4 जीते थे. वो भी बड़े मार्जिन से. सुपर सिक्स दौर में भी सिर्फ एक मैच हारी थी. 17 जून 1999 को अपने पहले वर्ल्डकप सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के सामने खड़ी थी ये टीम. पूरे वर्ल्ड कप में एक खिलाड़ी साउथ अफ्रीका के लिए भयानक तरीके से शानदार खेल रहा था. चाहे बॉलिंग हो, चाहे बैटिंग. इस मैच में भी एक वक़्त ऐसा था जब साउथ अफ्रीका का हारना लगभग तय सा लग रहा था. ये प्लेयर उस स्थिति से मैच निकाल ले गया. जीत की दहलीज तक. और फिर ऐसा कुछ कर बैठा कि वर्ल्ड कप का सपना ही चूर-चूर हो गया. पल में हीरो से विलेन बन जाने वाला वो प्लेयर है लांस क्लूज़नर.

अब भी जब दुनिया के उम्दा ऑल राउंडर्स का ज़िक्र होता है, क्लूजनर का नाम ज़रूर आता है. (Image: CricTracker)
अब भी जब दुनिया के उम्दा ऑल राउंडर्स का ज़िक्र होता है, क्लूज़नर का नाम ज़रूर आता है. (Image: CricTracker)

ये मैच साउथ अफ्रीका के सीने में गड़ा वो भाला है, जो हमेशा चुभता रहता है

सारे मैच की कथा नहीं सुनाते हैं. बस इतना जान ल्यौ कि ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए बना लिए 213. जवाब में 198 रन पर अफ्रीका ने 9 विकेट खो दिए. आख़िरी जोड़ी, ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के खिलाफ़ 16 रन बना ले जाएगी इसका भरोसा किसी को भी नहीं था. लेकिन क्रीज़ पर लांस क्लूज़नर नाम का लहरी आदमी मौजूद था. इसकी वजह से ऑस्ट्रेलिया के लिए जीत दूर का सपना थी.

बात आ पहुंची आख़िरी ओवर तक. गेंदें 6 और जीत के लिए ज़रूरी रन 9. स्ट्राइक पर क्लूज़नर. गेंद डैमियन फ्लेमिंग के हाथ में. गेम आखिरी गेंद तक जाने की उम्मीद थी. लेकिन क्लूज़नर के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था. भाई ने पहली 2 गेंदों में 2 चौके जड़ दिए. स्कोर लेवल हो गया. अब 4 गेंदें थीं और रन चाहिए था 1. यहीं से अक्ल पर पत्थर पड़ने की शुरुआत हो गई.

पहले नॉन स्ट्राइकर एलन डोनाल्ड की अक्ल पर पड़े और बाद में क्लूज़नर की. ओवर की तीसरी गेंद क्लूज़नर ने मिड ऑन पर खेली और डोनाल्ड बिना सोचे समझे दौड़ पड़े. रन आउट होते-होते बचे. फिर आई चौथी गेंद…

इत्ता थ्रिलिंग क्लाइमेक्स सिर्फ हिचकॉक की फिल्मों में ही मिलता है

इक्वेशन था 3 बॉल 1 रन. क्लूज़नर ने गेंद सीधी खेली और यूं दौड़ पड़े जैसे घर में आग लग गई हो और फायर ब्रिगेड बुलाने जा रहे हैं. इधर-उधर कतई न देखा. उधर डोनाल्ड गेंद को देख रहे थे. उन्होंने नोट ही नहीं किया कि क्लूज़नर पहाड़ी से लुढ़की चट्टान की तरह दौड़े चले आ रहे हैं. नतीजतन दोनों एक ही एंड पर आ गए. जब डोनाल्ड को दिखा तो उन्होंने दौड़ लगाई. लेकिन तब तक मामला हाथ से निकल चुका था. मार्क वॉ की फेंकी गेंद फ्लेमिंग के हाथों होते हुए एडम गिलक्रिस्ट के दस्तानों में पहुंच चुकी थी. उन्होंने स्टंप उखाड़ दिया. साउथ अफ्रीका 213 रनों पर ढेर हो चुकी थी. मैच टाई हो गया.

उस आख़िरी ओवर का रोमांच देखिए:

लेकिन सुपर सिक्स राउंड में ऑस्ट्रेलिया ने साउथ अफ्रीका को हराया था. सो नियमानुसार फाइनल में ऑस्ट्रेलिया पहुंची. ज़रा सी हड़बड़ी पूरी टीम को वर्ल्ड कप से वंचित कर गई. उतना ज़्यादा कप के करीब अफ्रीका फिर कभी नहीं पहुंची. लांस क्लूज़नर, जो पूरे वर्ल्ड कप के दौरान हीरो बनकर उभरे थे, वो तत्काल ज़ीरो हो गए. बकौल क्लूज़नर ये वो टीस है, जो उनके साथ कब्र तक जाएगी.

अजहरुद्दीन ने जी भर के धोया लेकिन बदला भी तुरंत ले लिया

1996-97 का क्रिकेट सीज़न. साउथ अफ्रीका भारत दौरे पर आई थी. दूसरा टेस्ट मैच कलकत्ता में था, जिसके लिए क्लूज़नर को चुना गया. उनका पहला टेस्ट था ये. पहली ही इनिंग में उनकी बॉलिंग के बखिए उधेड़ दिए मुहम्मद अज़हरुद्दीन ने. इतनी बुरी तरह कि एक ही ओवर में 5 चौके ठोंक दिए. टेस्ट मैच के हिसाब से ये भयानक मार थी. अपने पहले मैच की पहली ही पारी में ऐसी पिटाई झेलना किसी का भी हौसला तोड़ सकता था. लेकिन…

क्लूज़नर ने अगली पारी में हिसाब चुकता कर दिया. सूद समेत. 10 में से 8 विकेट अकेले ने लिए. भारत बुरी तरह हारा.

वनडे करियर बड़ा ही चमकदार था

8 या उससे नीचे के नंबर पर बैटिंग करने वाला बैट्समन वर्ल्ड कप जैसे बड़े इवेंट में बल्ले के दम पर ‘मैन ऑफ़ दी सीरीज’ बना. ये तथ्य काफी है ये बताने के लिए कि लांस क्लूज़नर का अफ़्रीकी बैटिंग लाइन अप में क्या महत्व था. साउथ अफ्रीका ने इस वर्ल्ड कप में जो 7 मैच जीते, उनमें से 4 में क्लूज़नर ही मैन ऑफ़ दी मैच थे. बस एक ख़ास लम्हे वो पैनिक कर गए और तमाम किए धरे पर पानी फिर गया.

ख़ुशी से पगलाए ऑस्ट्रेलियाई. (Image: Dailynews)
ख़ुशी से पगलाए ऑस्ट्रेलियाई. (Image: Dailynews)

क्लूज़नर का वन डे क्रिकेट में अपने करियर के अंत पर बैटिंग एवरेज 41 था. और स्ट्राइक रेट 90 का. ये उस समय के हिसाब से बहुत अच्छा है. कईयों का तो अब भी नहीं होता इतना. टेस्ट मैचों में भी उनकी बैटिंग के आंकड़े अच्छे हैं. 33 की एवरेज से रन बनाए उन्होंने.

बॉलिंग की बात की जाए तो वन डे में 171 मैचों में 192 विकेट लिए उन्होंने. और टेस्ट में 49 मैचों में 80. ये सही मायनों में बेहतरीन ऑल राउंड प्रदर्शन है.

एक दिलचस्प बात ये भी है कि वर्ल्ड कप के इतिहास में अब तक सबसे बढ़िया स्ट्राइक रेट लांस क्लूज़नर का ही है. 121 से ज़्यादा का. ब्रेंडन मैक्युलम, डेविड वॉर्नर, एबी डिविलियर्स, शाहिद अफ्रीदी जैसे विस्फोटक बल्लेबाज़ भी लिस्ट में उनसे नीचे हैं. इसी से अंदाज़ा लगा लीजिए साहब की बैटिंग का.

क्लूज़नर की शानदार बॉलिंग का वीडियो जब उन्होंने अकेले इंडिया को निपटा दिया था:


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