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आशीष मिश्रा अब भी पुलिस के सामने हाजिर नहीं हुए तो क्या होगा?

लखीमपुरखीरी केस के आरोपी आशीष मिश्रा (बाएं) पुलिस का नोटिस दाएं.

आशीष मिश्रा. केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे. लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य आरोपी. आशीष मिश्रा पर हत्या (302) के तहत केस दर्ज है. इसके अलावा उनके खिलाफ धारा 147, 148, 149 (दंगों से संबंधित), 279 (लापरवाही से गाड़ी चलाना) 338 (किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाना जिससे उसकी जान को खतरा हो) 304A (लापरवाही से मौत) और 120B (आपराधिक साजिश रचना) के तहत भी केस दर्ज किया गया है.

यूपी पुलिस ने गुरुवार 7 अक्टूबर को आशीष मिश्रा के पिता और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के घर के बाहर नोटिस चिपकाया. इसमें लिखा कि आशीष 8 अक्टूबर को सुबह 10 बजे क्राइम ब्रांच पहुंच जाएं और मामले से जुड़ी तमाम जानकारी पुलिस को दें. लेकिन आशीष मिश्रा पुलिस के सामने पेश नहीं हुए.

पुलिस की ओर से चस्पा पहला नोटिस

फिर क्या हुआ?

फिर पुलिस ने शुक्रवार 8 अक्टूबर को एक और नोटिस आशीष के घर के बाहर चस्पा किया. इस नोटिस में आशीष मिश्रा को 9 अक्टूबर को 11 बजे तक पुलिस के सामने पेश होने को कहा गया है.

लेकिन आशीष मिश्रा अगर अब भी पुलिस के सामने पेश नहीं हुए तो आगे क्या होगा? इस सवाल का जवाब तलाशेंगे, लेकिन उससे पहले ये जानना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर क्या हुआ?

कोर्ट ने फटकार लगा दी

लखीमपुर मामले की शुक्रवार, 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने पूछा कि आरोपी अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं हुए. इस पर यूपी सरकार की ओर से पेश वकील हरीश साल्वे ने कहा कि पुलिस ने मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को समन भेजा है. साल्वे की दलील पर कोर्ट ने कहा कि क्या पुलिस हत्या के हर मामले में ऐसा ही करती है. पीठ ने कहा कि ये 8 लोगों की निर्मम हत्या का मामला है. ऐसे में पुलिस आमतौर पर आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लेती है.

यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि अभियुक्त आशीष मिश्रा को नोटिस भेजा गया है वो आज आने वाला था. लेकिन उसने कल सुबह तक का टाइम मांगा है. हमने उसे कल शनिवार सुबह 11 बजे तक की मोहलत दी है. और अगर वो कल पेश नहीं होता है तो कानून अपना काम करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने भी पूछा कि आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा,

क्या अन्य मामलों में भी आप आरोपियों के साथ ऐसा ही करते हैं? नोटिस देते हैं? जब हत्या और गोली से घाव के गंभीर आरोप हों तो देश के अन्य हिस्सों में आरोपियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है. क्यों नोटिस भेजा जाता है कि प्लीज आएं और हमें बताएं क्या हुआ था?

साल्वे ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कोई गोली के घाव नहीं थे. इसलिए सीआरपीसी की धारा 160 के तहत पहले नोटिस दिया गया. कोर्ट की फटकार और यूपी सरकार के वकील के आश्वासन के बाद ही आशीष मिश्रा के घर के बाहर एक और नोटिस चिपकाया गया है.

गिरफ्तार होंगे आशीष मिश्रा?

सरकार ने कोर्ट में कहा है कि अगर शनिवार को भी आशीष मिश्रा क्राइम ब्रांच नहीं पहुंचे तो कानून अपना काम करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी होनी चाहिए थी. तो क्या कल पुलिस आशीष मिश्रा को अरेस्ट करेगी?

पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 160 के तहत ये नोटिस भेजा है. ये धारा पुलिस अधिकारी को ये अधिकार देती है कि वो किसी भी गवाह को बयान देने के लिए बुला सकता है. इसके तहत मौखिक रूप से किसी को नहीं बुलाया जा सकता है. लिखित में नोटिस देना जरूरी होता है. और भी बाते हैं. जैसे-

#किसी महिला गवाह को पूछताछ के लिए थाने नहीं बुलाया जा सकता.

#15 साल से कम उम्र और 65 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्ति को पुलिस थाने नहीं बुलाया जा सकता.

#उसी तरह विकलांग लोगों को भी नहीं बुलाया जा सकता. हालांकि पुलिस उनके घर जाकर बयान दर्ज कर सकती है.

पुलिस जांच के दौरान धारा 161 के तहत गवाहों के बयान दर्ज करती है. इसके बारे में और जानने के लिए हमने बात की कुछ वकीलों से. उनका कहना है कि सीआरपीसी की धारा 160 के तहत पुलिस पूछताछ के लिए बुला सकती है, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हो सकती. लेकिन अगर पुलिस के समन के बावजूद वो शख्स नहीं पहुंचता है तो उसके खिलाफ 174 के तहत कार्रवाई हो सकती है. इसमें 6 महीने की जेल और 1 हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है.

आशीष मिश्रा का मामला अलग है. पुलिस ने उन्हें सीआरपीसी की धारा 160 के तहत नोटिस दिया है, लेकिन हैं वो हत्या के आरोपी. ऐसे मामलों में पुलिस के सामने दी गई शिकायत पर सीधे केस दर्ज होता है और आरोपी की गिरफ्तारी हो सकती है. अगर किसी मामले में जांच अधिकारी को लगता है कि गंभीर अपराध के मामले में आरोपी से पूछताछ जरूरी है तो पुलिस सीआरपीसी की धारा-160 के तहत नोटिस जारी करती है और फिर आरोपी का बयान लेती है. अगर आरोपी इस दौरान जांच अधिकारी के सामने पेश न हो तो पुलिस चाहे तो सीधे आरोपी को गिरफ्तार भी कर सकती है.

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