Submit your post

Follow Us

इंडिया के उस खूनी की कहानी, जिसे 37 साल से पुलिस पकड़ नहीं पाई

26 मार्च को एक मलयालम फिल्म का टीज़र आया. नाम है ‘कुरूप’.कहानी है सुकुमार कुरूप की. केरल का कुख्यात क्रिमिनल. वो आदमी जिसकी कहानी केरल के लोगों के लिए दंतकथा बन गई. और वहां की पुलिस के रिकॉर्ड पर धब्बा. जिसके दाग वो आज तक धोने में जुटे हैं. 28 मई को आने वाली ये फिल्म सुकुमार कुरूप की कहानी बताएगी. लेकिन क्रिएटिव लिबर्टी के नाम पर कहानी से कितनी तोड़-मरोड़ की जाएगी, इसका अंदाज़ा हम-आप अभी नहीं लगा सकते.

इसलिए आज आपको सुकुमार की असली कहानी बताएंगे. 37 साल पहले ऐसा क्या कांड किया था उसने कि पुलिस के भगौड़ों की लिस्ट में आज भी उसका नाम टॉप पर दर्ज है. साथ ही बताएंगे फिल्म ‘कुरूप’ की कुछ खास बातें.

Bharat Talkies


# वो सुबह जिसने सारा खेल शुरू किया

केरल का जिला आलप्पुषा. जगह है मावेलीकारा. तारीख 22 जनवरी, 1984. सुबह करीब 4 बजे का वक्त है. घना कोहरा. इसी कोहरे को चीरते हुए एक आदमी मावेलीकारा पुलिस स्टेशन पहुंचा. बुरी तरह हांफते हुए. सांस पकड़, पुलिस को आगाह करता है. चावल के खेत के बीचोबीच एक काली एम्बेसडर गाड़ी धुआं-धुआं हो रही है. ड्यूटी पर मौजूद हेड कांस्टेबल उसकी बात ध्यान से सुन रहा है. लेकिन वो शख्स आगे जो कहता है, उससे कांस्टेबल के होश उड़ जाते हैं. कहता है कि गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर कोई बैठा है. जिसका शरीर बुरी तरह झुलस चुका है. सुनकर पुलिस फौरन हरकत में आती है. घटनास्थल पर पहुंचती है. वहां भीड़ पहले ही जमा हो चुकी है. लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं. कि शायद कोई एक्सीडेंट हुआ है. या गाड़ी सड़क से ट्रैक खोकर खेत में उतर आई, और उसी दौरान आग लग गई.

Car Burning1
22 जनवरी की वो सुबह जिसने आगे जाकर पुलिस रिकॉर्ड में मोस्ट वांटेड क्रिमिनल का नाम दर्ज कर दिया. फोटो – फिल्म स्टिल

इस सब के करीब एक घंटे बाद घटनास्थल पर डेप्यूटी सुपरिन्टेंडेंट ऑफ पुलिस पीएम हरीदास पहुंचे. बारीकी से निरीक्षण किया. शक होने लगा कि ये कोई एक्सीडेंट नहीं. कहानी कुछ और है. शक गहरा हुआ, जब सुराग मिलने लगे. गाड़ी के पास पड़ी माचिस की डिबिया, चप्पल की जोड़ी और रबर के दस्ताने. हवा में भी एक अलग किस्म की गंध थी. पेट्रोल की गंध. अब तक पुलिस गाड़ी से लाश को निकाल चुकी थी. बॉडी इस कदर जल चुकी थी कि उसे पहचानना मुमकिन नहीं था. पुलिस सर्जन को बुलाया गया. पोस्टमॉर्टम हुआ. हरीदास का शक सही निकला. जलने वाले शख्स की पहले ही हत्या की जा चुकी थी. मरने वाले शख्स के पेट में शराब और ईथर पाया गया. सर्जरी के दौरान मरीज को बेहोश करने के लिए ईथर दिया जाता था. वही ईथर अब इस शख्स की बॉडी से मिलता है. ये भी पुलिस को अटपटा लगा. लेकिन इन सारे सवालों का जवाब तब मिलता, जब पता चलता कि ये शख्स आखिर था कौन.


# ‘गल्फ से आए मलयाली की हत्या’

इस घटना के कुछ समय बाद ही हाय-तौबा मच गई. लोग बातें बनाने लगे कि मरने वाला शख्स पास ही के गांव चेरियानाड़ का रहने वाला सुकुमार कुरूप है. जो कुछ हफ्तों पहले ही गल्फ से लौटा है. सुकुमार के घरवाले भी पहुंचे. लाश की शिनाख्त करने. जमकर रोना-पीटना मचाया. सुकुमार की साली के पति भास्कर ने पहचान लिया कि ये डेड बॉडी सुकुमार की ही है. हालांकि, चेहरा पूरी तरह झुलस चुका था. फिर भी भास्कर ने लाश की कद-काठी देखकर पुलिस को बताया कि ये सुकुमार ही है. भास्कर के अनुसार ये गाड़ी भी सुकुमार की ही थी. हर तरफ बात फैल गई कि सुकुमार कुरूप की डेथ हो गई. अगले दिन के अखबार में छपा, ‘गल्फ से आए मलयाली की हत्या’.

Body In Car
कुरूप के घरवालों के हावभाव पर पुलिस को शक हुआ. फोटो – फिल्म स्टिल

पुलिस ने लाश के पास से जो भी बरामद हुआ वो सुकुमार की फैमिली के सुपुर्द कर दिया. लेकिन उनके हावभाव पर उन्हें शक होने लगा. उनका रोना-धोना ड्रामा सा नज़र आने लगा. इसलिए लगा दिया कुछ पुलिसवालों को उनके पीछे. सादे कपड़ों में. कि पता करो कि इस फैमिली में चल क्या रहा है. ठीक दो बिन बाद ही पुलिसवाले हाज़िर हुए. अपनी रिपोर्ट में बताया कि सुकुमार के घर पर तो उत्सव जैसा माहौल है. मीट बन रहा है. उस समय मीट सिर्फ खास खुशी के मौकों पर बनाया जाता था. अब पुलिस भांप गई कि मरने वाला शख्स सुकुमार नहीं. पुलिस की इस खोज के साथ अखबारों की हेड्लाइन भी बदली. छपा कि लाश की पहचान अभी संदिग्ध है.


# आखिर ये शख्स था कौन?

फ्लैशबैक. 21 जनवरी, 1984 की रात. चको नाम का एक फिल्म रिप्रेज़ेंटेटिव थिएटर से बाहर निकला. रात काफी हो चुकी थी. उसे बस जल्दी घर लौटना था. अपनी प्रेग्नेंट बीवी शांतम्मा के पास. रोड के किनारे खड़े होकर हर आने-जाने वाली गाड़ी को हाथ दिखा रहा था. लिफ्ट के लिए. तभी एक ब्लैक एम्बेसडर उसके पास आकर रुकी. गाड़ी में चार शख्स बैठे थे. सुकुमार, भास्कर, उसका खास ड्राइवर पोनप्पन और उसका दोस्त साहू. चको ने अलपुड़ा तक के लिए लिफ्ट मांगी. एम्बेसडर का दरवाज़ा खुला. और अगले ही मिनट चको गाड़ी में इन चारों के साथ था.

Chacko Asking For Lift
थिएटर से लौट रहा चको इनका विक्टिम बना. फोटो – NH 47 फिल्म स्टिल

चको इस बात से पूरी तरह अनजान था कि इन चारों के दिमाग में क्या चल रहा है. गाड़ी बढ़ने लगी. भास्कर ने पहल की. अपने गेस्ट की ओर ब्रैंडी का ग्लास बढ़ाया. भास्कर ने इस ग्लास में पहले से ईथर मिला रखा था. चको ने झिझककर मना कर दिया. दूसरी बार फिर ऑफर किया. लेकिन थोड़ा अकड़कर. चको ने फिर मना कर दिया. ये पोनप्पन के लिए इशारा था. उसने गाड़ी हाइवे से उतारकर सुनसान रास्ते की ओर मोड ली. दूसरी बार ना सुनने के बाद भास्कर का मिज़ाज बिगड़ा. चिल्लाकर बोला, “चुपचाप पियो इसे”. मारे डर के चको ने हाथ से ग्लास ले लिया. और एक घूंट में अपने गले में उतार लिया. कुछ ही सेकेंड में ईथर ने असर दिखाना शुरू कर दिया. चको बेहोश हो गया. मौका देखकर भास्कर और साहू ने तौलिए से उसका गला दबा दिया. इसके बाद चारों बढ़े भास्कर के घर की ओर. वहां पहुंचकर चको के कपड़े, घड़ी और अंगूठी उतारी. उसे सुकुमार के कपड़े पहनाए. उसका चेहरा बिगाड़ा. इस कदर कि अब किसी भी पहचान से परे था. चको की लाश के साथ मावेलीकारा के एक खेत में पहुंच गए. लाश को ड्राइविंग सीट पर बैठाया. ढेर सारा पेट्रोल छिड़क, गाड़ी को स्वाहा कर दिया. गाड़ी को आग लगाते वक्त भास्कर का हाथ भी झुलस गया. आगे जाकर यही झुलसा हुआ हाथ पुलिस के लिए पहला सुराग बना. जब उन्होंने भास्कर से इसके बारे में पूछा और उसने हर बार हाथ जलने के पीछे की अलग वजह बताई.

Kurup's Friends In Car
कुरूप के दोस्तों ने ज़बरदस्ती चको को शराब पिलाने की कोशिश की. फोटो – NH 47 फिल्म स्टिल

पुलिस को शुरू से ही सुकुमार के करीबियों पर शक था. उधर, चको के भाई ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. इसलिए अब उसके परिवार को लाश की शिनाख्त के लिए बुलाया गया. चको की बीवी ने अपने पति को पहचान लिया. उधर भास्कर से पूछताछ के बाद पुलिस का शक यकीन में बदलने लगा. कि निश्चित ही सुकुमार ज़िंदा है. एक-एक कर उसके सभी खास लोगों को उठाया जाने लगा. साहू की बारी आई तो उसने सब उगल दिया. पुलिस के लिए केस साफ हो गया. बस अब सुकुमार कुरूप को पकड़ने की देर थी. कुरूप को ढूंढा जाने लगा. लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं. पुलिस की तलाश जारी रही. इधर, उन्होंने भास्कर और पोनप्पन के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी. साहू को गवाह बना दिया गया. भास्कर और पोनप्पन को कोर्ट ने दोषी पाया. लेकिन इस हत्या का सबसे बड़ा आरोपी कुरूप पुलिस की पहुंच से दूर था. इतना दूर निकल गया कि 37 साल बाद भी किसी को नहीं पता कि कुरूप आखिर है कहां.


# शुरुआत से कांडी था कुरूप

केरल का गांव चेरियानाड़. उसी गांव की एक मिडल क्लास फैमिली में जन्म हुआ गोपालकृष्णा कुरूप का. बचपन से ही गोपाल उधमबाजी में एक नंबर था. किसी तरह स्कूल पूरी किया. और आगे जाकर जॉइन कर लिया इंडियन एयर फोर्स. बतौर एक एयरमैन. लेकिन यहां भी गोपाल का मन नहीं लगा. कोई ना कोई बहाना ढूंढता घर निकलने का. ऐसे ही एक मौके पर छुट्टी लेकर घर गया और कभी नहीं लौटा. उधर, एयर फोर्स ने उसे भगौड़ा घोषित कर दिया. उस पर इन्क्वायरी बैठा दी.

Air Force 1
एयर फोर्स छोड़कर भाग आया था कुरूप. फोटो – फिल्म स्टिल

गोपाल को इस जांच की खबर लग गई. यहीं से शुरुआत हुई उसके खुराफातीपन की. जांच करने आए पुलिसवाले को रिश्वत दे दी. बदले में पुलिसवाले ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, ‘गोपालकृष्णा कुरूप मर चुका है’. केस क्लोज़्ड. गोपाल जानता था कि अब इस नाम के साथ नहीं रह सकता. इसलिए नया नाम अपनाया. सुकुमार. कुछ समय बाद ही इंडिया छोड़कर दुबई निकल गया. वहां एक मरीन ऑपरेटिंग कंपनी जॉइन कर ली. अच्छी तनख्वाह थी. ज़िंदगी मज़े में कटने लगी. पैसों को लेकर सुकुमार का हाथ बहुत ढीला था. दोस्तों के शराब के खर्चे वो उठाता. बड़ी-बड़ी पार्टियां होस्ट करता. बेलगाम पैसा उड़ाता. दोस्तों के बीच ऊंची शान दिखाना उसे पसंद था. उसी दौरान गांव के पास एक प्लॉट भी ले लिया. वहां खुद का आलीशान घर बनाना चाहता था. उसी बीच एक बात उड़ने लगी. कि दुबई की कंपनियां अपनी वर्कफोर्स घटाने में लगी हैं. इसमें कुरूप की कंपनी भी शामिल थी. अब डर सताने लगा. सेविंग्स खत्म होने के कगार पर थीं. ऊपर से अब नौकरी भी नहीं रहेगी. दूसरी ओर, गांव वाले प्लॉट पर घर बनाने का काम भी शुरू हो चुका था. इस पॉइंट पर कुरूप को जरूरत थी पैसे की. ढेर सारे पैसे की.

Kurup In Dubai Partying
कुरूप को दोस्तों के बीच स्टेटस जमाने में मज़ा आता था. फोटो – NH 47 फिल्म स्टिल

उसे दो चीज़ें सूझी. पहला तो याद आया कि उसने अपने नाम पर 8 लाख रुपए का बीमा करवा रखा है. और ये 8 लाख उसकी मौत के बाद ही मिल सकते हैं. दूसरा उसने किसी ज़माने में एक इंग्लिश मैगज़ीन पढ़ी थी. जिसकी कहानी में किरदार ने अपनी मौत का झूठा नाटक रचा था. ये आइडिया उसे जम गया. इंडिया लौट आया. भास्कर, साहू और पोनप्पन के साथ मिलकर किसी मेडिकल कॉलेज से डेड बॉडी का जुगाड़ करने लगा. लेकिन कोशिश बेकार साबित हुई.

कोई और रास्ता ना निकलता देख, उसने फैसला लिया. किसी का मर्डर करने का. और प्लान ऐसा बनाया कि सबको लगे कुरूप की डेथ हुई है. इससे बीमा का पैसा भी मिल जाएगा. और किसी को उन पर शक भी नहीं होगा. बाकी तीन को बताया. वो भी मान गए. फिर आई 21 जनवरी 1984 की रात. चारों मिले. साथ खाना खाया. शराब पी. और निकल पड़े किसी आदमी की तलाश में. ताकि उसे मारकर गाड़ी को आग लगाई जा सके. उसी रात उन्हें चको मिल गया. सारी चीज़ें मानो उनके प्लान के हिसाब से चल रहीं थी. उसके बाद हुई वारदात पूरे देश के लिए सनसनी बन गई.

Sukumar Kurup
आज तक पुलिस सुकुमार कुरूप को ढूंढ रही है. फोटो – इंडिया टूडे फाइल

ये तो थी कुरूप की कहानी. उस रात की कहानी जिसकी खुली कड़ियां जोड़ने की कोशिश पुलिस अब तक कर रही है. अब बात करेंगे इस कहानी पर आने वाली फिल्म की. यानी ‘कुरूप’ की. मेकर्स ने साफ नहीं किया है कि कहानी के लिहाज़ से फिल्म में कितने चेंजेस देखने को मिलेंगे. फिल्म से जुड़ी तमाम जानकारी बचाते हुए बस कास्ट के बारे में बताया गया है. लेकिन फिल्म की कास्ट ही ऐसी है कि इंसान बिना कहानी की परवाह किए सीधा टिकट बुक करवा ले. इसी दमदार कास्ट की बात करेंगे और जानेंगे कि फिल्म में कौन-कौन हैं.

#1. दुलकर सलमान

लिस्ट में पहला नाम है दुलकर सलमान का. फिल्म के लीड एक्टर होने के साथ-साथ फिल्म के प्रड्यूसर भी. टिपिकली दुलकर रोमांटिक फिल्मों में दिखाई देते हैं. लेकिन यहां इमेज चेंज कर एक क्रिमिनल बने हैं. अगर अच्छी साउथ इंडियन फिल्में देखने के आदी रहे हैं तो दुलकर के काम से भली-भांति परिचित होंगे. हिंदी ऑडियंस दुलकर को ‘द ज़ोया फैक्टर’ और इरफान खान की फिल्म ‘कारवां’ से पहचानती है. देखने लायक होगा कि दुलकर इस किरदार में अपनी ओर से व्हाइट और ब्लैक के कितने शेड भरते हैं.

Dulquer As Kurup 1
फिल्म में दुलकर बने हैं सुकुमार कुरूप. फोटो – फिल्म स्टिल

#2. शोभिता धुलिपाला

शोभिता के किरदार को लेकर कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है. हालांकि, देखकर लग रहा है कि फिल्म में वो कुरूप की पत्नी सरासम्मा का किरदार निभा रही हैं. पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक कुरूप की ज़िंदगी में उसकी पत्नी के अलावा किसी और औरत का ज़िक्र भी नहीं मिलता. संभावना है कि शोभिता यहां सरासम्मा बनी नज़र आएंगी. कुरूप और सरासम्मा की लव स्टोरी भी टिपिकल कहानियों से अलग थी. दरअसल, सरासम्मा कुरूप के घर पर काम करने वाली नौकरानी की बेटी थी. कुरूप को उससे प्यार हो गया. घरवाले बिगड़ गए. कोई और रास्ता ना देख, कुरूप ने घरवालों के मर्ज़ी के खिलाफ जाकर सरासम्मा से शादी कर ली. बाद में जब दुबई गया, तो अपनी पत्नी को भी साथ ले गया.

Sobhita
संभावना है कि शोभिता फिल्म में कुरूप की पत्नी का किरदार निभा रही हैं. फोटो – इंस्टाग्राम

#3. इंद्रजीत सुकुमारन

हर शातिर क्रिमिनल को लगता है कि वो सेफ है. उसके पीछे कोई नहीं. लेकिन ऐसे ही श्याणे क्रिमिनल के पीछे लगा होता है एक पुलिसवाला. यहां वो पुलिसवाला बने हैं इंद्रजीत सुकुमारन. मलयालम सिनेमा के टॉप एक्टर्स में से एक. करीब 90 से ऊपर फिल्मों में काम कर चुके हैं. यहां देखने लायक होगा कि इनके किरदार को डेप्यूटी सुपरिन्टेंडेंट ऑफ पुलिस पीएम हरीदास पर आधारित किया गया है या क्रिएटिव लिबर्टी लेते हुए कुरूप के यूनिवर्स में नया किरदार रचा गया है.

Indrajit In Kurup Movie
वो पुलिस इंस्पेक्टर जो कुरूप को ढूंढने निकला है. फोटो – ट्विटर

#4. शाइन टॉम चको

टॉम फिल्म में एक अहम किरदार में नज़र आएंगे. हालांकि, ज़्यादातर एक्टर्स की तरह इनके किरदार पर भी कोई डिटेल नहीं दी गई है. लेकिन एक बात तय है. किरदार कोई भी हो, कितना भी बड़ा हो. ये अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहेंगे. हम ऐसा कह रहे हैं इनकी एक फिल्म के आधार पर. फिल्म थी 2019 में आई मलयालम फिल्म ‘इश्क’. वहां टॉम ने नेगेटिव किरदार निभाया. और इस कदर निभाया कि देखने वाला असहज हो जाए. उनके किरदार पर गुस्सा आने लगे. ‘कुरूप’ में क्या कमाल दिखाएंगे, इसका पता 28 मई को ही चलेगा.


# फिल्म आने से पहले विवाद में फंसी

जब भी किसी क्रिमिनल की लाइफ पर फिल्म बंटी है, लोग दो धड़ों में बंट जाते हैं. एक कहता है अपराधी को हीरो बनाकर दिखाया है, उसे ग्लोरिफाई किया गया है. दूसरा कहता है कि सिनेमा डायरेक्टर का मीडियम है. तो उसे अपनी बात किस ढंग से कहनी है, उसकी आज़ादी तो मिलनी ही चाहिए. हॉलीवुड क्लासिक ‘गुडफेलाज़’ से लेकर बॉलीवुड की ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई’ भी इस बहस के बीच बंटती रही हैं. ऐसा ही कुछ ‘कुरूप’ के साथ भी हुआ.’

Kurup In Dubai
चको के परिवार ने आरोप लगाया कि फिल्म कुरूप को ग्लोरिफाई कर रही है. फोटो – टीज़र

दरअसल, 28 जुलाई 2020 को फिल्म का फर्स्ट लुक टीज़र रिलीज़ हुआ. जिसपर चको के परिवार ने नाराज़गी जताई. एक्टर और प्रड्यूसर्स पर आरोप लगाए कि वो कुरूप को हीरो की तरह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. टीज़र में दुलकर का किरदार कहता है कि, मैं फैसला करूंगा कि मैं कब पकड़ा जाऊंगा. चको के परिवार ने इसपर भी आपत्ति जताई. कहा कि यहां एक खूनी को हीरो की तरह दर्शाया जा रहा है. चको के बेटे जितिन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उनकी मां शांतम्मा भी वहां मौजूद थी. जितिन ने कहा,

हर मलयाली की तरह बचपन से ही मैं भी कुरूप के नाम से डरता रहा हूं. एक खूनी जो कानून के हाथ से निकल गया. लेकिन फिल्म उसे एक एंटी-हीरो वाली इमेज दे रही है. फिल्म में मेरे पिता का क्या रोल है? मेकर्स कुरूप को ग्लोरिफाई करने में लगे हैं. 

चको के परिवार ने मेकर्स के सामने एक शर्त रखी. कि रिलीज़ से पहले फिल्म उन्हें दिखाई जाए. और जिन सीन्स पर उन्हें आपत्ति है, उन्हें फिल्म से हटाया जाए. जितिन और उनकी मां ने मेकर्स को आपत्तिजनक सीन्स हटाने के लिए लीगल नोटिस भी भेजा है. फिल्म रिलीज़ होने को अभी करीब एक महीना है और मेकर्स की तरफ से इस लीगल नोटिस पर कोई ऑफिशियल जवाब नहीं आया है.


# सिनेमा में और भी कुरूप रहे हैं

कुरूप की कहानी से जनता का मोह नया नहीं है. बहुत पुराना है. इंटरनेट पर अलग-अलग किस्म की कंस्पिरेसी थ्योरीज़ हैं. कि कुरूप कहां गया, उसका क्या हुआ जैसी बातों को लेकर. ऐसा भी नहीं है कि दुलकर की ये फिल्म पहली कोशिश है कुरूप की पॉपुलैरिटी को भुनाने की. मलयालम सिनेमा पहले भी इस अनसुलझी मर्डर मिस्ट्री को दो बार बड़े परदे पर ला चुका है.

#1. NH 47 (1984)

साल 1984. वो साल जब कुरूप भयंकर तरीके से सुर्खियों में था. इसी साल के जनवरी महीने में उसने चको की हत्या की थी. डायरेक्टर बेबी ने भी उसी साल कुरूप की कहानी को भुनाने का फैसला लिया. और बना डाली ‘NH 47’. साफ-साफ नहीं कहा गया कि ये कुरूप की कहानी थी. लेकिन प्लॉट वही था. एक आदमी जो अपनी कंपनी से बीमा का पैसा ऐंठना चाहता है. इसी के तहत प्लान बनाता है किसी और का मर्डर कर उसे अपनी जगह देने का. मगर लास्ट में पकड़ा जाता है. मेकर्स को लगा था कि कुरूप भी एक-न-एक दिन पकड़ा जाएगा. इसलिए कहानी का ऐसा एंड रखा गया. किसे मालूम था कि कुरूप हमेशा वॉन्टेड क्रिमिनल्स की लिस्ट में ही बरकरार रहेगा.

1
जिस साल चको की हत्या हुई, ठीक उसी साल ये फिल्म आ गई. फोटो – फिल्म स्टिल

#2. पिनेयम (2016)

इसे डायरेक्ट किया अवॉर्ड विनिंग डायरेक्टर अदूर गोपालकृष्णन ने. जिनकी फिल्में फिल्म स्कूल्स में पढ़ाई जाती हैं. कहानी थी पुरुषण की. एक बेरोज़गार आदमी. सारा घर खर्च बीवी उठाती है. तभी पुरुषण को एक जॉब ऑफर आता है. वो भी दुबई से. अच्छी नौकरी के साथ मोटा पैसा. पुरुषण के दिन फिर जाते हैं. हालत सुधारने लगती है. लेकिन बदलते हालात के साथ उसका लालच भी बढ़ने लगता है. यहां भी कहानी बीमा के पैसे पर आकर अटकती है. उसी को लेकर किसी का मर्डर करने का प्लान बनता है. हालांकि, असली कहानी की तरह पुरुषण के साथी पकड़े जाते हैं. और वो पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाता है.

5
क्रिटिकली अक्लेम्ड डायरेक्टर अदूर गोपालकृष्णन ने बनाई थी ये फिल्म. फोटो – ट्रेलर

सुकुमार कुरूप आजतक पकड़ा नहीं गया. संभावना है कि वो देश या दुनिया के किसी कोने में हो. संभावना ये भी है कि शायद इस समय ये आर्टिकल पढ़ रहा हो. बची हैं तो बस संभावनाएं. फिल्म 28 मई को थिएटर्स पर रिलीज़ होगी. मलयालम समेत फिल्म हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड भाषा में रिलीज़ की जाएगी.


वीडियो: जब राष्ट्रपति के बेटे ने जयललिता को देखा और फिल्म ऑफर कर दी!

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

कहानी 'मनी हाइस्ट' वाली नैरोबी की, जिन्होंने कभी इंडियन लड़की का किरदार करके धूम मचा दी थी

कहानी 'मनी हाइस्ट' वाली नैरोबी की, जिन्होंने कभी इंडियन लड़की का किरदार करके धूम मचा दी थी

जानिए क्या है नैरोबी उर्फ़ अल्बा फ्लोरेस का इंडियन कनेक्शन और कौन है उनका फेवरेट को-स्टार?

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.