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कृति सैनन ने बताई फिल्मों में काम पाने की ट्रिक, प्रियंका-अनुष्का सबने यही किया

20 और 21 अगस्त को इंडिया टुडे का माइंड रॉक्स इवेंट चल रहा है. पैंडेमिक को देखते हुए ये इवेंट भी ऑनलाइन आयोजित करवाया गया है. इस इवेंट की पहली स्पीकर थीं एक्ट्रेस कृति सैनन. कृति पिछले दिनों ‘मिमी’ जैसी महिला प्रधान फिल्म में नज़र आईं. वैसे तो फिल्म को ठीक-ठाक रिस्पॉन्स मिला. मगर लोगों को फिल्म से कुछ शिकायतें भी रहीं. सिर्फ पब्लिक को ही नहीं कृति को भी ‘मिमी’ से जुड़ी कुछ दिक्कतें थीं. जिस बारे में उन्होंने इंडिया टुडे के साथ हुई बातचीत में बताई. India Today E-Mind Rocks के सारे सेशंस आप यहां क्लिक करके देख सकते हैं-

‘मिमी’ का ओटीटी पर रिलीज़ होना थोड़ा वीयर्ड था

पैंडेमिक के दौरान सिनेमाघर बंद रहने के दौरान कई फिल्में डायरेक्ट ओटीटी प्लैटफॉर्म पर रिलीज़ हुईं. ऐसी ही एक फिल्म थी ‘मिमी’. अपनी फिल्म की ओटीटी रिलीज़ पर बात करते हुए कृति ने कहा कि उनकी फिल्में थिएटर्स में उतरती हैं. ऐसे में एक फिल्म को ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लैटफॉर्म पर रिलीज़ होते देखना थोड़ा वीयर्ड था. वो भी तब, जब आपकी फिल्म बड़े परदे पर रिलीज़ के मक़सद से बनाई हो गई हो. बकौल कृति शुरुआत में इस चीज़ को लेकर उनके मन में खट्टी-मिठी फीलिंग थी. मगर रिलीज़ के बाद लोगों को जिस तरह का प्यार मिला, तो कमाल का अनुभव था. कृति कहती हैं-

”ये ऐसा वक्त है, जब हर ओर उदासी है. लोग घरों से बाहर नहीं जा पा रहे. हर कोई किसी न किसी तरह की दिक्कतों से गुज़र रहा है. ऐसे में कोई फिल्म आती है, जो लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट लेकर आती है. उन्हें उम्मीद देती है. लोग उसे फैमिली के साथ एंजॉय करते हैं. फिल्म को लेकर मुझे हर ओर से इसी तरह का रिस्पॉन्स मिला है. आज कल ओटीटी प्लैटफॉर्म्स पर जो फिल्में हैं, वो बड़ी एजी टाइप की क्राइम थ्रिलर्स हैं. उन्हें लोग फास्ट फॉरवर्ड करके देखते हैं. पूरी फैमिली अलग-अलग कमरों में बैठकर वो कॉन्टेंट देखती है. ऐसे में हमारी फिल्म एक फैमिली इवेंट की तरह आई. जैसे पूरी फैमिली किसी फिल्म को देखने के लिए सिनेमाघरों में जाती थी.”

‘मिमी’ से जुड़े सबसे बड़े सवाल पर कृति ने ये कहा

‘मिमी’ को ओवरऑल तो अच्छा रिस्पॉन्स मिला था. मगर कई लोगों को फिल्म से एक शिकायत थी. मिमी सबकुछ अपने हीरोइन बनने के सपने को पूरा करने के लिए करती है. मगर बच्चा पैदा होने के बाद वो अपने सारे सपनों को छोड़, बच्चे को पालने-पोसने में लग जाती है. मिमी के सपने का क्या? कई क्रिटिक्स ने अपनी समीक्षा में ये सवाल उठाया था.

कृति ने बताया कि वो इंजीनियर हैं. उनके लिए लॉजिक सबसे ज़रूरी चीज़ है. इसलिए जब स्क्रिप्ट में मिमी के मां बनने के बाद हीरोइन बनने के सपने को छोड़ने वाली बात पढ़ी, तो उन्हें समझ नहीं आई. उन्होंने इस बारे में फिल्म के डायरेक्टर लक्ष्मण उतेकर से बात की. कि मिमी के खुद के इतने सपने हैं, वो सबकुछ छोड़ने को क्यों तैयार हो जाती है? वो भी तब, जब वो बच्चों सो नापसंद करती है. लक्ष्मण ने उन्हें बताया मिमी अपने सपने छोड़ने के लिए इसलिए तैयार हो जाती है क्योंकि वो मां बन जाती है. और मां का प्यार दुनिया का सबसे निस्वार्थ और अन-कंडिशनल प्यार होता है.

कृति सैनन अगले कुछ दिनों पांच फिल्मों में नज़र आने वाली हैं.

1) हम दो हमारे दो- जो कि एक फैमिली फिल्म है.
2) बच्चन पांडे- जो कि एक कंप्लीट एंटरटेनर है.
3) भेड़िया- कृति के करियर की पहली हॉरर कॉमेडी
4) आदिपुरुष- बिग बजट मायथोलॉजी फिल्म
5) गणपत- फुल फ्लेज्ड एक्शन फिल्म

अपने इस लाइन अप के बारे में कृति कहती हैं कि एक एक्टर के तौर वो बड़े कमाल के स्पेस में हैं. क्योंकि वो जितनी भी फिल्में कर रही हैं, वो सभी फिल्में और उनके किरदार एक दूसरे से बिलकुल हटके हैं.

फिल्मी फैमिली से नहीं होना कृति सैनन के लिए कितनी मुश्किलें खड़ा करता है? 

इस इंटरव्यू में कृति सैनन से फिल्मी इंडस्ट्री से जुड़ा सबसे टची सवाल भी पूछा गया. एंकर अक्षिता नंदगोपाल ने पूछा कि वो किसी फिल्मी फैमिली से नहीं आतीं. तो क्या उन्हें अब भी बाहरी महसूस होता है? या क्या कभी उनके लिए ये चीज़ मुश्किल पेश करती है?

इसके जवाब में कृति ने कहा कि उन्होंने अपने लिए इंडस्ट्री में जगह बना ली है. इसलिए उन्हें बाहरी फील तो नहीं होता. साथ ही वो सारे काम कर रही हैं, जो वो हमेशा से करना चाहती थीं. बकौल कृति, शुरुआत में थोड़ी मुश्किल होती है. क्योंकि आप किसी को नहीं जानते, आपको कोई नहीं जानता. फिल्म दर फिल्म लोगों को अपने टैलेंट में भरोसा दिलाने में समय लगता है. ताकि वो आपको आपके कंफर्ट ज़ोन के बाहर वाली चीज़ें करने का मौका दें. इन चीज़ों में ज़ाहिर तौर पर समय लगता है. मगर एक बार काम करने लगते हैं, लोगों को जानने लगते हैं,  फिल्मी पार्टी में ऑकवर्ड होना कम हो जाता है, तो चीज़ें बेहतर हो जाती हैं.

मगर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सफल होने के लिए टैलेंट काफी होता है? बताया जाता है कि अगर आप इंडस्ट्री में पांव जमाने की कोशिश कर रहे हैं, तो सही लोगों की संगती में रहना ज़रूरी होता है. उनके प्रभाव से आपको काम मिलता है. इस बात से कृति कितना इत्तेफाक रखती हैं? इस बारे में बात करते हुए कृति सैनन कहती हैं कि वो इस बात से पूरी तरह इनकार नहीं करतीं. अगर आपके दोस्त हैं, आप लोगों को जानते हैं, तो ऑब्वियसली आपके लिए चीज़ें थोड़ी आसान हो जाएंगी. मगर आखिर में टैलेंट ही है, जो आपके काम आता है. अगर किसी से ये कहना पड़े कि मैं आपके साथ काम करना चाहती हूं, तो कृति को इससे कोई प्रॉब्लम नहीं है. अगर आप अच्छा काम कर रहे हैं, तो लोगों को पता चल जाता है. क्योंकि आखिरकार सबकुछ बिज़नेस है. इस बातचीत में कृति ने अपने साथी एक्टर्स राज कुमार राव, आयुष्मान खुराना, तापसी पन्नू का भी ज़िक्र किया, जो फिल्मी परिवारों से नहीं आते. बावजूद इसके वो अच्छा काम कर रहे हैं और उसमें सफल हैं. अनुष्का शर्मा और प्रियंका चोपड़ा का उदाहरण देते हुए कृति बताती हैं कि ये लोग किसी कॉन्टैक्ट के साथ इंडस्ट्री में नहीं आए थे. इन्होंने यहां के लोगों के साथ एक रिलेशनशिप डेवलप की, जिससे उन्हें मदद मिली.


वीडियो देखें: मूवी रिव्यू- मिमी

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