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बॉबी देओल के 'डीजे वाले कांड' की सच्चाई तो कुछ और ही निकली!

जनवरी 2021 में इंडिया और ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट सीरीज़ चल रही थी. इंडिया की आधी टीम चोटिल थी. विराट कप्तानी नहीं कर रहे थे. ऐसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की ज़मीन पर शिकस्त दी. सारा देश जश्न मना रहा था. टीम इंडिया के नाम दी गई बधाइयां वायरल हो रही थीं. लेकिन बधाइयों के मैसेज के साथ एक फोटो भी वायरल हुई थी. जिसका क्रिकेट जगत से कोई लेना-देना नहीं था. फोटो थी बॉबी देओल की. फिल्म ‘सोल्जर’ से. बॉबी ने टूटा हुआ नकली हाथ लगा रखा है. और जैकेट के अंदर से अपने असली हाथ में बंदूक थामी हुई थी. लोग फोटो के साथ लिखने लगे कि ऑस्ट्रेलिया को लगा कि वो चोटिल इंडियन टीम के साथ खेल रहे हैं. लेकिन गेम कुछ और ही निकला. खुद बॉबी देओल ने भी अपनी ये फोटो शेयर की. और लिखा कि उन्हें इंडियन टीम पर गर्व है.

Bobby Deol Meme Soldier
बॉबी की वो फोटो जो इंडिया की जीत के बाद शेयर की गई.

इंडियन टीम की जीत के कुछ महीनों बाद ही देश में कोरोना की दूसरी लहर आ गई. अब सोशल मीडिया पर हर तरफ कोरोना गाइडलाइंस और हिदायतें दिख रही थीं. ऐसे में बॉबी देओल फिर प्रकट हुए. दरअसल, किसी सोशल मीडिया यूज़र ने एक वीडियो बनाया. बॉबी की फिल्मों के अलग-अलग सीन्स को लेकर. जहां ‘और प्यार हो गया’ में बॉबी ऐश्वर्या की नाक में स्वॉब लगा रहे थे. ‘दिल्लगी’ में सनी देओल को खुद से दूर रहने को कह रहे थे, ताकि वो बीमार न हो जाएं. लोग लिखने लगे कि लॉर्ड बॉबी को 90 के दशक में ही कोरोना के बारे में पता था. ऐसे दूरदर्शी की जय हो!

बात करेंगे बॉबी देओल की लाइफ और करियर से जुड़े कुछ किस्सों की. हमने उनके मीम्स से शुरुआत क्यों की? इसका जवाब है कि आज की जनरेशन के अधिकांश लोग बॉबी देओल के काम से पूरी तरह परिचित नहीं है. ऐसा हम नहीं खुद बॉबी भी मानते हैं. करंट जनरेशन सिर्फ उन्हें उनके मीम्स से पहचानती है. पूरा पढिए ताकि जान सकें कि कैसे वो कोई मीम मटेरियल नहीं, उससे बढ़कर हैं.

Bollywood Kisse


# हॉलीवुड जाने के चक्कर में डायरेक्टर ने डेब्यू फिल्म छोड़ दी

1977 में धर्मेन्द्र और जीतेंद्र की एक फिल्म आई थी. मनमोहन देसाई के डायरेक्शन में बनी ‘धरम वीर’. वो पहला मौका था जब बॉबी ने कैमरा फेस किया. फिल्म में उन्होंने धर्मेन्द्र ने बचपन का किरदार निभाया था. उसके बाद बतौर चाइल्ड एक्टर बॉबी ने किसी फिल्म में काम नहीं किया. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो धर्मेन्द्र को चिंता थी कि कहीं बॉबी चाइल्ड आर्टिस्ट बनकर न रह जाएं. जबकि धर्मेन्द्र खुद बॉबी को अपनी एक फिल्म में लेना चाहते थे. वो भी बतौर चाइल्ड एक्टर. हुआ यूं कि 80 के दशक में धर्मेन्द्र ने एक हॉलीवुड फिल्म देखी. नाम था ‘Escapade in Japan’. 1957 में आई इस फिल्म का मुख्य नायक एक बच्चा था. धर्मेन्द्र इस फिल्म को हिंदी में बनाना चाहते थे. बच्चे के रोल में बॉबी को लेना चाहते थे. सब कुछ फाइनल हो ही रहा था कि धर्मेन्द्र ने फिल्म का आइडिया ड्रॉप कर दिया. उन्हें लगा कि कहीं इससे बॉबी चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर टाइपकास्ट न हो जाएं.

फिर आया 90 का दशक. बॉबी बड़े हो चुके थे. और बतौर लीड, अपना एक्टिंग डेब्यू करने को तैयार थे. धर्मेन्द्र चाहते थे कि बॉबी का फिल्मी सफर एक अच्छे नोट पर शुरू हो. इसलिए वो उन्हें अपने होम बैनर तले बनी किसी फिल्म के जरिए लॉन्च करना चाहते थे. ताकि वो खुद भी बॉबी पर ध्यान रख पाएं. उसी वक्त का एक और किस्सा मिलता है. जब ‘राम लखन’ बनाने वाले सुभाष घई अपनी नई फिल्म बना रहे थे. ‘सौदागर’ के नाम से. सुभाष घई अपनी इस फिल्म से बॉबी को लॉन्च करना चाहते थे. धर्मेन्द्र से बात की. लेकिन वो नहीं माने. बाद में सुभाष घई ने बॉबी वाला रोल विवेक मुश्रन को दिया.

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‘धरम वीर’ के एक शॉट में बॉबी अपने पिता धर्मेन्द्र के साथ.

उधर धर्मेन्द्र ने बॉबी को लॉन्च करने की जिम्मेदारी सौंपी शेखर कपूर के हाथ में. शेखर उस पॉइंट तक ‘मासूम’ और ‘मिस्टर इंडिया’ जैसी फिल्में बनाकर ऑडियंस और क्रिटिक्स, दोनों का विश्वास जीत चुके थे. शेखर ने फिल्म पर काम शुरू कर दिया. लीड में थे बॉबी देओल और ट्विंकल खन्ना. शूटिंग शुरू हुई. बॉबी के लिए फिल्म की शुरुआत हुई एक एक्शन सीन से. जहां वो सीढ़ियों से नीचे उतरकर अखाड़े जैसी जगह में आते हैं. बॉबी उस पल को अपने पूरे करियर के सबसे यादगार पलों में से एक मानते हैं. खैर, शूटिंग आगे भी चली. लेकिन सिर्फ 27 दिनों तक. फिल्म पूरी नहीं हुई. बल्कि रोक दी गई. बॉबी की फिल्म पर काम करने के दौरान शेखर को एक दूसरी फिल्म डायरेक्ट करने का मौका मिल गया. वो फिल्म थी ‘बैंडिट क्वीन’. अब शेखर को चुनाव करना था. या तो वो बॉबी वाली फिल्म पूरी करें. या फिर ‘बैंडिट क्वीन’ पर काम करें. शेखर ने दूसरा रास्ता पकड़ा. बॉबी की फिल्म को बीच में छोड़ गए.

आमतौर पर कोई भी प्रड्यूसर अपने डायरेक्टर के ऐसे रवैये पर बरस पड़ता. मुआवजा मांग लेता. लेकिन फिल्म के प्रड्यूसर धर्मेन्द्र ने ऐसा नहीं किया. वो जानते थे कि ‘बैंडिट क्वीन’ जैसी फिल्म से शेखर के लिए हॉलीवुड के रास्ते खुल जाएंगे. इसलिए उन्होंने बिना ऐतराज़ जताए शेखर को जाने दिया.


# पहली फिल्म ने ऐसी सज़ा दी जो, अब तक भुगत रहे हैं

1983 में धर्मेन्द्र ने अपनी प्रॉडक्शन कंपनी खोली. ‘विजेयता फिल्म्स’ के नाम से. इस बैनर तले बनने वाली पहली फिल्म थी ‘बेताब’. सनी देओल की डेब्यू फिल्म. धर्मेन्द्र ने उन्हें अपने होम प्रॉडक्शन की फिल्म के जरिए लॉन्च किया था. अब छोटे बेटे बॉबी के लॉन्च होने का वक्त था. धर्मेन्द्र ने जो काम सनी के करियर के लिए किया. सनी वही अब बॉबी के लिए करना चाहते थे. एक मेंटर बनकर बॉबी की पहली फिल्म का काम सुपरवाइज़ करना चाहते थे.

देओल फैमिली ने राजकुमार संतोषी को अप्रोच किया. संतोषी ने फिल्म पर काम शुरू कर दिया. लीड में बॉबी और ट्विंकल खन्ना की जोड़ी फिर लौटी. मगर इस बार फिल्म पूरी हुई. ‘बरसात’ के टाइटल से. संतोषी पहले फिल्म के लिए ‘जान’ और ‘बादल’ जैसे टाइटल संरक्षित करना चाहते थे. लेकिन उन्हें दोनों ही टाइटल नहीं मिल पाए. इत्तेफाकन, आगे चलकर ट्विंकल खन्ना ने ‘जान’ और बॉबी ने ‘बादल’ नाम की फिल्मों में काम किया. ‘बरसात’ की शुरुआत से लेकर अंत तक सनी फिल्म को सुपरवाइज़ कर रहे थे. जिस वजह से उन्होंने खुद एक साल तक काम नहीं किया. फिल्म के अधिकतर हिस्से मैसूर, मनाली, मुंबई और बैंगलोर में शूट किए गए थे. शूट पूरा हो चुका था. लेकिन सनी एक चीज़ से असंतुष्ट थे. वो था फिल्म में बॉबी का इंट्रो सीन. इंट्रो सीन को यादगार बनाने के लिए पूरी टीम यूरोप पहुंच गई. पहला स्पॉट था इटली का एक गांव. जहां सीन के मुताबिक बॉबी को एक असली टाइगर से लड़ना था. बॉबी को डर भी लगा. लेकिन किसी तरह उन्होंने अपना सीन शूट कर लिया.

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सनी के कहने पर बॉबी टाइगर से लड़े, घोड़े पर चढ़े.

उसके बाद टीम पहुंची यूनाइटेड किंगडम के लेक डिस्ट्रिक्ट में. सनी चाहते थे कि बॉबी के घुड़सवारी करते हुए कुछ शॉट्स लिए जाएं. बस फिर क्या था. बॉबी को घोड़े पर बिठा दिया गया. उनका घोड़ा दौड़ रहा था. अचानक से क्या हुआ पता नहीं कि घोड़ा दौड़ते-दौड़ते एक दूसरे घोड़े से जा टकराया. टक्कर भीषण थी. बॉबी ज़मीन पर आ गिरे. उनके पैर की हड्डी टूट गई. इलाज के लिए इंग्लैंड के एक हॉस्पिटल में एडमिट किया गया. जहां दो बार बॉबी का ऑपरेशन हुआ. उनके पैर में सपोर्ट के लिए रॉड फिट की गई. जिसे अभी तक निकाला नहीं गया है.

बॉबी का एक्सीडेंट ऐसे पॉइंट पर हुआ जब फिल्म पूरी हो चुकी थी. बस उनके हिस्से की डबिंग बची थी. जो उन्होंने इंग्लैंड में रहकर की. लंबे समय तक बॉबी का इलाज चला. उधर फिल्म रिलीज़ हो गई. बॉबी और ट्विंकल के काम को सराहा जा रहा था. फिल्म के गानों को पसंद किया जा रहा था. बॉबी भी उस वक्त तक इंडिया आ चुके थे. लेकिन अपनी रिकवरी के लिए मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट थे. यही वजह थी कि उस साल के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बॉबी अपने बेस्ट मेल डेब्यू का अवॉर्ड रिसीव करने नहीं जा पाए थे. आयोजकों ने हॉस्पिटल में जाकर उन्हें अवॉर्ड थमाया था.


# हिट फिल्मों का दौर

‘बरसात’ ने बॉबी के लिए पिच सेट कर दी थी. अब बस उन्हें टिककर खेलना था और अपना करियर मजबूत करना था. जो कि उन्होंने किया भी. ‘बरसात’ के बाद बॉबी की अगली फिल्म थी ‘गुप्त’. जो उनके करियर की बेस्ट फिल्मों में शुमार हुई. फिल्म एक सस्पेंस थ्रिलर थी. वो वक्त सोशल मीडिया का नहीं था कि कोई भी राह-चलता आपको स्पॉइलर दे जाए. लेकिन फिर भी ‘गुप्त’ में किलर कौन है, ये बताने पर झगड़े तक हो जाते थे. ऐसा क्रेज़ था फिल्म का. ‘गुप्त’ के बाद बॉबी के करियर की अगली हिट थी ‘सोल्जर’. बनाया था अब्बास-मस्तान की जोड़ी ने. बॉबी ने अपने करियर में आगे भी अब्बास-मस्तान के साथ कई मौकों पर काम किया. ‘सोल्जर’ की बात चले तो ‘सोल्जर सोल्जर’ गाने को कैसे भूल सकते हैं. फिल्म में प्रीति ज़िंटा का किरदार ये गाना गा रहा होता है. प्रीति ज़िंटा यानी प्रीतम सिंह. नहीं नहीं, ऐसा हम नहीं कह रहे. बल्कि, बॉबी उन्हें इसी नाम से बुलाते हैं. दरअसल, बॉबी और प्रीति बहुत पुराने दोस्त हैं. वो बॉबी ही थे जिन्होंने ‘सोल्जर’ के लिए अब्बास-मस्तान को प्रीति का नाम रिकमेंड किया था. फिल्म के इस गाने से जुड़ा एक और छोटा सा किस्सा है. गाने का वीडियो देखिएगा. उसमें बॉबी ने हाफ स्लीव टी-शर्ट पहना हुआ है. बॉबी वो टी-शर्ट नहीं पहनना चाहते थे. वजह थी कि उन्हें स्किन शो करने में शर्म आती थी. उन्हें आप 90 के दशक का एंटी सलमान खान भी कह सकते हैं. खैर, किसी तरह बॉबी की पत्नी तान्या ने उन्हें कंविंस किया और बॉबी हाफ स्लीव टी-शर्ट के लिए मान गए.

Soldier Soldier Song
उधर सलमान भाई शर्ट उतार कर ‘ओ ओ जाने जाना’ कर रहे थे, इधर बॉबी हाफ स्लीव टी-शर्ट पहनने में शर्मा रहे थे.

‘सोल्जर’ के बाद ‘बादल’, ‘बिच्छू’, ‘अजनबी’ और ‘हमराज़’ उनकी बड़ी फिल्में साबित हुई. हालांकि, उस दौर में आई उनकी फिल्में ‘करीब’ और ‘दिल्लगी’ के जरिए उनके हिस्से तारीफ़ें भी आईं. बॉबी देओल ने अपने करियर में अमिताभ बच्चन से लेकर अक्षय कुमार जैसे सुपरस्टार्स के साथ काम किया. फिर भी उनकी बड़ी और यादगार फिल्मों की लिस्ट में चंद नाम ही रहे.


# “पापा पूरे दिन घर पर क्यों रहते हैं?”

एक पॉइंट पर ‘बिच्छू’ और ‘सोल्जर’ जैसी कामयाब फिल्में देने वाले बॉबी का करियर उनके हाथ से फिसलने लगा. ‘चमकू’, ‘थैंक यू’ और ‘प्लेयर्स’ को मिले बॉक्स ऑफिस रिस्पॉन्स ने उन्हें निराश कर दिया. वो दौर गुज़र चुका था जब वो बैंकेबल एक्टर हुआ करते थे. प्रड्यूसर्स ने उन्हें अप्रोच करना बंद कर दिया. जब बॉबी खुद से कहीं बात चलाते तो उन्हें सिर्फ बहाने सुनने को मिलते. ऊपर से मीडिया ने भी घोषित कर दिया कि बॉबी देओल का करियर अब खत्म हो चुका है. नेगेटिव रिपोर्टिंग और फिल्म इंडस्ट्री के रवैये ने उन्हें आहत कर दिया. इतना कि वो धीरे-धीरे डिप्रेशन की कैद में जकड़ने लगे. शराब का सहारा लेने लगे.

बॉबी खुद से उम्मीद हार चुके थे. काम ढूंढने की कोशिश तक बंद कर दी. पूरा दिन घर पर रहते. एक दिन उनके बेटे ने अपनी मां से पूछा. कि पापा पूरे दिन घर पर क्यों रहते हैं. वो आपकी तरह काम के लिए बाहर क्यों नहीं जाते. बॉबी ने ये बात सुन ली. बेटे का इतना कहना काफी था उन्हें अपने बुरे फेज़ से बाहर लाने के लिए. मन में ठाना कि अपने अच्छे दिन वापस लाने हैं. अच्छा काम करना है इंडस्ट्री में. काम तलाशने की भूख जाग उठी. उन्होंने प्रड्यूसर्स से मिलना शुरू किया. अभी भी बात नहीं बनी. लेकिन पहले की तरह इस बार बॉबी ने हार नहीं मानी. वो लोगों से मिलते रहे. ऐसे ही एक बार सलमान खान से मिले. जिन्हें वो प्यार से मामू बुलाते हैं. पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में बॉबी बताते हैं कि सलमान ने उन्हें एक ज़रूरी एडवाइस दी. सलमान ने कहा कि जब मेरा बुरा फेज़ चल रहा था, तब मैं तुम्हारे भाई और संजय दत्त के कंधे पर चढ़कर आगे बढ़ा. तुम्हें भी किसी एक्टर के कंधे पर चढ़कर आगे बढ़ना होगा. बॉबी ने बात सुनी और सलमान से ही उनका कंधा मांग लिया. मतलब लिटरली नहीं. बॉबी ने कहा कि मुझे आपके कंधे पर चढ़कर आगे बढ़ने दीजिए. सलमान मान गए. और इस तरह बॉबी को मिला अपना बड़ा कमबैक. ‘रेस 3’ के फॉर्म में. सिनेमा के लिहाज़ से ‘रेस 3’ कोई महान फिल्म नहीं. हां, मीम्स के लिहाज़ से है. फिर भी ‘रेस 3’ को मिली बड़ी ओपनिंग ने बॉबी का करियर रिवाइव करने में काफी मदद की.

Class Of 83
बॉबी मानते हैं कि वो समय के साथ नहीं चल पाए, इसलिए रेलेवेंट नहीं रह पाए. इसलिए अपनी गलती सुधारते हुए उन्होंने ओटीटी का रुख किया.

बॉबी खुद को समय के साथ अपडेटेड रखना चाहते थे. इसलिए मेनस्ट्रीम सिनेमा के साथ-साथ ओटीटी स्पेस में भी गोता लगा दिया. नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘क्लास ऑफ 83’ उनकी पहली ओटीटी रिलीज़ बनी. जहां उनके काम के हिस्से तारीफ़ें आईं. उसके बाद वो प्रकाश राज की वेब सीरीज़ ‘आश्रम’ में दिखाई दिए. शो को और उनके किरदार को ऑडियंस की ओर से पॉज़िटिव रिस्पॉन्स मिला. बॉबी देओल अपने करियर की दूसरी पारी में पूरी तैयारी के साथ उतरे हैं. उनके आगामी प्रोजेक्ट्स में लव हॉस्टल शामिल है. जहां वो विक्रांत मेसी और सान्या मल्होत्रा के साथ स्क्रीन शेयर करेंगे. साथ ही वो संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘एनिमल’ में भी नज़र आने वाले हैं.


# इम्तियाज़ अली का वो धोखा, जिसे बॉबी आज तक नहीं भूले

2005 में इम्तियाज़ अली ने अपनी डेब्यू फिल्म बनाई. ‘सोचा ना था’. देओल परिवार के सदस्य अभय देओल को उस फिल्म से लॉन्च किया गया. बॉबी ने फिल्म देखी. उन्हें बहुत पसंद आई. फौरन इम्तियाज़ को फोन किया. कि मैं तुम्हारे साथ काम करना चाहता हूं. इम्तियाज़ उस वक्त ‘जब वी मैट’ की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे. जिसका टाइटल उस वक्त ‘गीत’ था. मसला ये था कि इम्तियाज़ को अपनी कहानी के लिए कोई फाइनैन्सर नहीं मिल रहा था. दूसरी ओर श्री अष्टविनायक स्टूडियो बॉबी के साथ काम करना चाहता था. बॉबी ने स्टूडियो के सामने एक शर्त रखी. कि स्टूडियो को बतौर डायरेक्टर इम्तियाज़ को साइन करना होगा. स्टूडियो वाले हिचकिचा गए. कहा कि वो तो बहुत महंगी फिल्म बनाएगा. साथ ही बॉबी चाहते थे कि करीना उनकी लीडिंग लेडी बनें.

करीना ने अपनी डेट्स देने से मना कर दिया. जिसके बाद प्रीति ज़िंटा को अप्रोच किया गया. प्रीति ने कहानी को हां तो कर दी. लेकिन कहा कि वो इस प्रोजेक्ट के साथ छह महीने बाद ही जुड़ सकती हैं. जहां से शुरू हुए थे, वहीं आकर रुक गए. बॉबी अपने एक इंटरव्यू में बताते हैं कि एक दिन अचानक उन्होंने न्यूज़ पढ़ी. कि अष्टविनायक ‘जब वी मैट’ नाम से एक फिल्म बनाने जा रहे हैं. जिसके लिए उन्होंने इम्तियाज़ अली को साइन किया है. साथ ही लीड रोल में शाहिद कपूर और करीना हैं. बॉबी को ये पढ़कर धक्का लगा. शाहिद वाला रोल उन्हें बिना बताए उनसे छीन लिया गया. बॉबी बताते हैं कि वो ‘हाईवे’ में भी काम करने वाले थे. लेकिन बात नहीं बनी. बॉबी और इम्तियाज़ के बीच जो हुआ उसकी वजह से बॉबी ने उनकी फिल्में देखना भी छोड़ दी. लेकिन उनके मन में इम्तियाज़ को लेकर कोई दुर्भावना नहीं. वो इम्तियाज़ से यही कहते हैं कि मैं तब तक तुम्हारी फिल्में नहीं देखूंगा जब तक तुम मेरे साथ काम नहीं करते. बॉबी मानते हैं कि वो फिल्म इम्तियाज़ के करियर की बेस्ट फिल्म साबित होगी.

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डीजे वाले बॉबी मेरा गाना बजा दो.

ओके खतम टाटा बाय बाय करने से पहले एक छोटा सा किस्सा और जान लीजिए. 2016 में न्यूज़ आई कि बॉबी दिल्ली के किसी नाइटक्लब में बतौर डीजे गए. वहां उन्होंने लगातार ‘गुप्त’ फिल्म का गाना बजाया. जिससे नाराज़ होकर लोगों ने रिफंड मांगा. उनपर खूब मीम्स बनाए. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम की हकीकत कुछ और है. दरअसल किसी शख्स ने बॉबी को कॉन्टैक्ट कर कहा कि आपको बस क्लब में आकर डीजे कनसोल के पास खड़ा होना है. गाने अपने आप बजते रहेंगे. बॉबी मान गए. लेकिन वहां पहुंचे तो किसी ने उनकी मदद नहीं की. डिजेइंग कोई आसान काम नहीं कि कोई भी कर ले. यही वजह थी कि एक ही गाना लूप पर बजता रहा. पूरे वाकये के बाद बॉबी के अपने दोस्त उन्हें ‘डीजे वाले बॉबी मेरा गाना बजा दो’ कहकर चिढ़ाते हैं.


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