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उत्तर प्रदेश में हजारों एंबुलेंस कर्मचारी किन मांगों को लेकर 5 दिन से हड़ताल कर रहे हैं?

उत्तर प्रदेश में करीब 5 हजार एंबुलेंस के लगभग 20 हजार कर्मचारी 5 दिन से हड़ताल पर हैं. इससे राज्य में एंबुलेंस सर्विस प्रभावित हुई है. कई जगहों पर हालत ये है कि लोग ठेले और खाट पर मरीजों को लेकर आ रहे हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक लगभग 700 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है. प्रदर्शन कर रहे बाकी कर्मचारियों से वापस काम पर लौटने के लिए कहा गया है. हालांकि एंबुलेंस सेवा से जुड़े इन कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जातीं, वे काम पर नहीं लौटेंगे. कई कर्मचारियों के खिलाफ FIR भी दर्ज हुई है. समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर ये विरोध क्यों हो रहा है, कर्मचारियों की मांगें क्या हैं और सरकार का इस मामले में क्या कहना है.

क्या है विरोध की वजह?

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, ये स्ट्राइक 25 जुलाई की रात उस समय शुरू हुई जब देश में आपातकालीन प्रबंधन से जुड़ी सेवाएं देने वाले GVK EMRI का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया और सरकार ने एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस (ALS) के संचालन का जिम्मा Ziqitza Healthcare Limited को दे दिया. इससे एंबुलेंस सेवा में काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी जाने का डर है. कंपनी ने नई भर्तियां शुरू कर दी हैं. हालांकि मामला एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के कर्मचारियों से संबंधित था, लेकिन 102 ओर 108 एंबुलेंस सर्विस के कर्मचारियों ने भी विरोध शुरू कर दिया.

एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हनुमान पांडे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ALS के कर्मचारी 2012 से ड्यूटी कर रहे हैं. इसके बावजूद दूसरी कंपनी को टेंडर दे दिया गया. उन्होंने कहा,

कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है. पहले 12 हजार 700 रुपये वेतन मिलता था. अब सिर्फ 10 हजार 700 रुपये वेतन मिल रहा है. ट्रेनिंग के लिए 20 हजार का डिमांड ड्राफ्ट भी मांगा जा रहा है, जबकि हम सब ट्रेंड हैं. हमारी ट्रेनिंग पहले ही हो चुकी है. हम 2012 से ही ड्यूटी कर रहे हैं. कर्मचारी सहमे हुए हैं और हड़ताल पर चले गए हैं.

Ambulance
स्ट्राइक के दौरान एंबुलेंस कर्मी. (तस्वीर- पीटीआई)

कर्मचारियों की मांगें क्या हैं?

– हड़ताल कर रहे कर्मचारियों की मांग है

– एंबुलेंस सेवा में ठेका प्रथा बंद की जाए.

– एंबुलेंस कर्मियों की नौकरी सुरक्षित की जाए.

– 102 और 108 के कर्मचारियों को नेशनल हेल्थ मिशन में शामिल किया जाए.

– समान कार्य-समान वेतन लागू किया जाए.

– कोरोना काल में जान गंवाने वाले एंबुलेंस कर्मियों के परिजनों को 50 लाख की बीमा राशि और आर्थिक सहायता राशि तुरंत दी जाए.

– बार-बार नई कंपनी को ठेका देकर नए सिरे से भर्ती न की जाए.

इन मांगों को लेकर एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हनुमान पांडे का कहना है,

जब नेशनल रूरल हेल्थ मिशन की एंबुलेंस हैं तो फिर कर्मचारियों का चयन भी उसे ही करना चाहिए. हमारी मांगें बहुत ही साफ हैं. हमें सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों से हटाकर सीधे NHRM से जोड़ा जाए.

थोड़ा बैकग्राउंड जान लीजिए

उत्तर प्रदेश में साल 2012 में इमरजेंसी 108 सर्विस की शुरुआत की गई थी. तब से निजी कंपनी GVK EMRI इसका संचालन कर रही है. साल 2014 में प्रदेश में 102 सर्विस की शुरुआत हुई. इसके संचालन का भी जिम्मा भी इसी कंपनी को मिला. 2017 में प्रदेश में योगी सरकार ने आते ही एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस ALS सेवाओं का शुभारंभ किया. इसके भी संचालन का जिम्मा GVK EMRI को ही दिया गया.

हालांकि 2020 में निजी कंपनी ने पेमेंट इशू के कारण सर्विसेज देने में असमर्थता जताते हुए सर्विस सरेंडर करने का पत्र शासन को भेजा. पेमेंट का मामला कोर्ट भी पहुंचा, पर बाद में आपसी सहमति बनी और निजी कंपनी फिर से 108 व 102 सर्विस का संचालन करने को तैयार हुई.

इस बीच जब तक बात बनती सरकार ने एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस सेवाओं के लिए दिसंबर में टेंडर निकाल दिया. जून में जब टेंडर ओपन हुआ इसे जिकित्सा को दे दिया गया. GVK EMRI इस टेंडर प्रक्रिया में शामिल भी नहीं हुई थी. उसका तर्क है कि ALS संचालन का टेंडर जिकित्सा को मिला है. अभी इसका ऑपरेशन्स पूरी तरह हैंडओवर भी नहीं हुआ है.

विपक्ष ने निशाना साधा

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने 29 जुलाई को अपने ट्वीट के साथ अखबार में छपी एक फोटो टैग की. इसमें वाराणसी के एक व्यक्ति और उसकी पत्नी दिख रहे थे. बताया गया कि पत्नी की तबीयत खराब होने पर उसे एंबुलेंस नहीं मिली. इसलिए पति को ट्राली से ही उसे बीएचयू अस्पताल ले जाना पड़ा. लेकिन भीड़ व जलजमाव के कारण पत्नी को निजी अस्पताल में भर्ती कराने ले गया. इस वाकये पर प्रियंका वाड्रा ने लिखा,

उत्तर प्रदेश में कोरोना काल में सरकार एंबुलेंस कर्मियों पर फूल बरसाने की बात करती थी और उन्होंने जैसे ही अपने अधिकारों की आवाज उठाई, सरकार उन पर लट्ठ बरसाने की बात कर रही है. सरकार ने एस्मा लगाकर 500 से ऊपर कर्मी बर्खास्त कर दिए और जनता परेशान है. ऐसी सरकार से प्रदेश को भगवान बचाए.

इसी कटिंग को अखिलेश यादव ने भी ट्वीट किया है. हालांकि कुछ लिखा नहीं. लेकिन समाजवादी पार्टी के ट्विटर हैंडल से ये लिखा गया है,

भाजपा सरकार की हठधर्मिता के चलते लोगों की जान जा रही है. 108-102 एंबुलेंस कर्मी 3 दिन से हड़ताल पर हैं, लेकिन इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है.

Ambulance Strike
सख्ती के बाद भी हड़ताल से हटने को तैयार नहीं हैं एंबुलेंस कर्मी. (तस्वीर- पीटीआई)

सरकार क्या कह रही है?

यूपी सरकार के मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने प्रियंका गांधी को जवाब देते हुए कहा कि वे एंबुलेंसकर्मियों पर तो प्यार जता रही हैं, लेकिन आपको उन गंभीर मरीजों की तनिक भी फिक्र नहीं है, जिनकी समय से इलाज न मिलने पर जान खतरे में है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सिद्धार्थनाथ सिंह नेे कहा,

एंबुलेंस के जिन चालकों के प्रति उनका (प्रियंका गांधी) अचानक प्यार उमड़ा है, उनका सरकार से कोई लेना-देना नहीं है. वे एक कंपनी के कर्मचारी हैं. जो भी कार्रवाई की जा रही है, कंपनी की तरफ से हो रही है.

वहीं स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह का कहना है कि एंबुलेंस कर्मियों की जायज मांगें पूरी की जा रही हैं, फिर भी वे तरह-तरह की दूसरी मांगें रख रहे हैं. उन्होंने कहा कि सभी डीएम को तत्काल एंबुलेंस की चाबी जमा कराकर आरटीओ की मदद से ड्राइवर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं. कंपनी को भी सख्ती के निर्देश दिए गए हैं.

सरकार ने दावा किया कि कर्मचारियों की बर्खास्तगी में उसकी कोई भूमिका नहीं है. अतिरिक्त मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल का कहना है कि कि भले ही सरकार ने एंबुलेंस सेवाओं को फिर से शुरू करने के लिए GVK EMRI पर दबाव डाला हो, लेकिन वो कर्मचारियों को टर्मिनेट नहीं कर सकती. उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया को कंपनी ने अंजाम दिया है. नवनीत सहगल ने कहा कि सरकार ने कंपनी पर सिर्फ सेवाएं देने को लेकर दबाव बनाया था.

इस बीच, दि इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा,

प्रदर्शनकारी श्रमिकों के खिलाफ कई जिलों में FIR दर्ज की गई है, क्योंकि आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम एस्मा लागू है. अगर कोई उस आदेश के उल्लंघन में कुछ कर रहा है, तो हम कार्रवाई करेंगे.

वहीं GVK EMRI के यूपी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट टीवीएसके रेड्डी का कहना है कि लगातार प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है. उनके मुताबिक ये वे लोग हैं जो खेमेबाजी कर दूसरे एंबुलेंस कर्मियों को भी हड़ताल करने के लिए उकसा रहे हैं.

हालांकि सरकार, प्रशासन और कंपनी की तरफ से तमाम सख्त एक्शन लिए जाने के बाद भी कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी है. अब सरकार कैसे इस मामले को सुलझाती है वो देखने वाली बात होगी.


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