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टाइटैनिक के बारे में सबकुछ जानने वालों, उसके बड़े भाई के बारे में जानकर आंखें मलते रह जाओगे!

साल 1997 में एक फिल्म आई- टाइटैनिक. लीड रोल में थे अपने लियोनार्डो डि केप्रियो, जो बने थे जैक. और केट विंसलेट, जो बनी थीं रोज. डायरेक्ट करने वाले थे जेम्स कैमरून. सिनेमाई इतिहास की बेहतरीन मानी जाने वाली फिल्मों में से एक. इसे मुख्यतः तीन चीजों की वजह से याद रखा गया:

1. फिल्म की लव स्टोरी और इसका गाना- माई हार्ट विल गो ऑन.

Titanic My Heart Will Go On
ये गाना सुनकर आज भी प्रेम करने वाले छुपकर आंसू पोंछ लिया करते हैं.

2. ये सीन. जहां आकर फिल्म देखने वाले एक बार पॉज कर लिया करते हैं.

Titanic Rose Painting
इस सीन में जैक रोज की तस्वीर स्केच कर रहा होता है. और वो न्यूड होती है.

3.  ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा’ से भी बहुत पहले का सवाल- क्या जैक के लिए फट्टे पर जगह नहीं थी?

Jack And Rose Drowning
कुछ सवालों के जवाब नहीं मिल पाते, चाहे लोग कितना ही ढूंढते रहें.

बोनस: हर साल रोज डे पर ये तस्वीर शेयर करने वाले लोग भी मिलेंगे आपको. लेकिन ये पीजे मारने वाले लोग हुआ करते हैं, जिनसे आम जनता थोड़ी दूरी बनाकर रखती है.

Rose Day Heheheehhe
ये मीम किसने बनाया ये हम नहीं बताएंगे, क्योंकि इसे बनाने वाला इन दुनियादारी की चीज़ों से बहुत ऊपर उठ चुका है.

फिल्म तो अपने-आप में इतिहास बनाने वाली रही. ये जानकारी भी पॉपुलर डोमेन में है कि ये एक असली घटना पर आधारित फिल्म है. टाइटैनिक नाम का एक असली जहाज डूबा था. RMS टाइटैनिक नाम का ये जहाज इंग्लैंड के साउथएम्प्टन से अमेरिका के न्यूयॉर्क के लिए निकला. 10 अप्रैल, 1912 को. लगभग 2200 लोग इस पर मौजूद थे. 14 अप्रैल, 1912 को एक आइसबर्ग से टकराकर टाइटैनिक डूब गया. लगभग डेढ़ हजार से भी ज्यादा लोगों की इसमें मौत हुई.

Titanic Route Map
टाइटैनिक का रूट. जहां बिंदु बना है वहीँ टाइटैनिक डूबा था.

हम आज इसकी बात क्यों कर रहे हैं? क्योंकि पिछले कुछ दिनों से टाइटैनिक को लेकर एक मीम वायरल हो रहा है. आप भी देखिए:

Titanic Meme
वायरल मीम.

मीम में लिखा है,

टाइटैनिक-2 साल 2022 में उसी रूट पर तैरेगा, जिस पर टाइटैनिक होकर गुजरा था.

उसके नीचे जवाब लिखा है:

इस बार तो बच जाएगा, क्योंकि सारे आइसबर्ग तो हमने पहले ही पिघला दिए हैं.

खबर पुरानी है. रह-रह कर वायरल होती है. ख़ास तौर पर इस मीम की कमेंट्री की वजह से, जो जलवायु परिवर्तन की तरफ ध्यान खींचती है.

टाइटैनिक 2 तो जब निकलेगा, तब निकलेगा. उसका सफ़र लाज़िम है कि हम भी देखेंगे. लेकिन इसी बहाने हमने सोचा, क्यों न आपको कहानी सुनाई जाए, टाइटैनिक के बड़े भाई ओलिम्पिक की. क्योंकि टाइटैनिक तो एक आइसबर्ग से टकराया, और डूब गया. मानव इतिहास की सबसे बड़ी समुद्री त्रासदियों में से एक बनकर. लेकिन उसके बड़े भाई ओलम्पिक ने ऐसे ऐसे कारनामे कर रखे थे कि लोग आज भी पढ़कर दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं.

पर मोहतरम रुकिए.

कारनामों से पहले थोड़ा ओलिम्पिक के बारे में जान लीजिए.

RMS ओलिम्पिक (1910 -1935 )

ब्रिटेन की वाइट स्टार लाइन कंपनी ने तीन समुद्री जहाज उतारे.

ओलिम्पिक. साल 1910 में.

टाइटैनिक. साल 1912 में.

ब्रिटैनिक. साल 1914 में.

टाइटैनिक लॉन्च होने के साल ही डूब गया. ब्रिटैनिक प्रथम विश्व युद्ध के दौरान एक समुद्री विस्फोटक सुरंग के संपर्क में आकर डूब गया. साल था 1916. इन तीनों में से सिर्फ ओलिम्पिक ही ऐसा जहाज रहा, जिसने साल 1935 तक अपनी सेवाएं दीं.

Rms Olympic Wiki Commons
RMS ओलिम्पिक. (तस्वीर: विकिमीडिया कॉमन्स)

अब आते हैं इसके कारनामों पर

साल 1911. एक खाड़ी से गुजरते हुए इसका सामना हुआ ब्रिटिश जंगी जहाज HMS हॉक से. दोनों जहाज आमने-सामने तैरते हुए खाड़ी से निकल रहे थे. तभी ओलिम्पिक ने दाहिनी ओर टर्न लिया. यहां ये जान लीजिए कि जब ओलिम्पिक लॉन्च हुआ था, तब ये उस समय का सबसे बड़ा जहाज था. अब घूमा, तो काफी जगह घेर ली. इसके प्रोपेलर्स ने घूमने के साथ पानी खींचा. इससे खिंचाव पैदा हुआ और ओलिम्पिक से काफी छोटा HMS हॉक संभल नहीं पाया. जब तक कोई कुछ कर पाता, हॉक का अगला हिस्सा ओलिम्पिक की दाहिनी ओर भिड़ गया. हॉक ठहरा जंगी जहाज. उसे बनाया ही इस तरह गया था कि उसका अगला हिस्सा किसी जहाज से भिड़े, तो उसे बर्बाद कर दे. ओलिम्पिक कोई जंगी जहाज तो था नहीं. हॉक से भिड़ा, तो उसकी बॉडी में दो जगह बड़े-बड़े छेद हो गए.

लेकिन किस्से में यहीं आ गया ट्विस्ट. HMS हॉक के अंजर-पंजर ढीले हो गए. डूबते-डूबते बचा. ओलिम्पिक, एक पैसेंजर जहाज, बिना किसी मदद के लौट आया. हालांकि बाद में HMS हॉक के मालिकों ने ओलिम्पिक पर केस-मुक़दमे लाद दिए थे. लेकिन इस तरह बिना किसी भयंकर नुकसान के ओलिम्पिक का लौट आना लोगों के मन में उसकी बहुत अच्छी इमेज बना गया. लोगों ने सोचा, ओलिम्पिक है, तो सेफ्टी है. #रेस्पेक्ट

चलते हैं दूसरे कारनामे पर

प्रथम विश्व युद्ध. जो 1914 से 1918 तक चला, उसके दौरान ओलिम्पिक को युद्धपोत में बदल दिया गया था. साल 1918 की मई में इंग्लैंड के आइल ऑफ सिसिली के पास से ओलिम्पिक गुज़र रहा था. तभी कैप्टन बेर्ट्रम हेज को एक जर्मन सबमरीन दिखाई दी. इसका नाम था यू बोट 103. कोई और जहाज होता, तो सबमरीन से बचकर निकल जाता. लेकिन ओलिम्पिक ने नाक की सीध में उसकी ओर तैरना शुरू कर दिया. कैप्टन ने क्रू को निर्देश दिए, स्पीड बढ़ा दो. ओलिम्पिक ने सबमरीन के ऊपरी हिस्से के ठीक पीछे टक्कर मारी. इतना बड़े जहाज से ऐसे भिड़ने के बाद सबमरीन छिटक गई. और ओलिम्पिक के प्रोपेलर्स में आकर फंस गई. उन भीमकाय प्रोपेलर्स ने सबमरीन को दो टुकड़ों में बांट दिया.

Propeller
प्रोपेल शब्द का मतलब होता है आगे बढ़ाना. प्रोपेलर ये होते हैं जो किसी जहाज को पानी में आगे तैराते हैं. (तस्वीर: विकिमीडिया कॉमन्स)

कैप्टन ने सबमरीन के बचे हुए लोगों को पिक नहीं किया. और ओलिम्पिक निकल गया वहां से. बाद में पता चला कि U-103 का प्लान था ओलिम्पिक को टॉरपीडो से उड़ा देने का. वो तो कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसकी वजह से सबमरीन टॉरपीडो चला नहीं पाई. वरना ओलिम्पिक भी टाइटैनिक और ब्रिटैनिक की तरह समुद्र की गहराइयों में होता. U-103 का मलबा साल 2008 में जाकर मिला. खुद ही देख लीजिए, क्या गजब क़यामत ढाई थी ओलिम्पिक ने.

तीसरा कारनामा- द लास्ट गुडबाय

15 मई, साल 1934. केप कॉड, मैसाचुसेट्स के पास नान्टकेट नाम की लाइटशिप खड़ी थी. लाइटशिप का काम होता था आने-जाने वाले जहाजों को रोशनी दिखाना. चूंकि केप एक ऐसा क्षेत्र होता है, जहां धरती समुद्र में आगे की तरफ निकली हुई होती है, इसलिए उस हिस्से से जहाजों को आगाह करना जरूरी होता था. लेकिन उस दिन काफी ज्यादा धुंध थी. ओलिम्पिक जहाज तैरते हुए सीधे लाइटशिप के अगले हिस्से से भिड़ गया. बिचारी लाइटशिप दो हिस्सों में बंट गई. उसके 11 में से सात क्रू मेंबर्स की मौत हो गई.

इसके अगले साल ओलिम्पिक को बेच दिया गया.

बड़े भाई का फर्ज निभाने से रह गया था ओलिम्पिक

ओलिम्पिक के सामने ही टाइटैनिक के डूबने की घटना हुई थी. उस समय ओलिम्पिक न्यूयॉर्क से लौट रहा था. उस समय जहाज के कैप्टन थे हर्बर्ट जेम्स हैडोक. उनको टाइटैनिक से डिस्ट्रेस सिग्नल मिला. तब टाइटैनिक की ज्ञात लोकेशन 930 किलोमीटर दूर बता रही थी. ओलिम्पिक ने डिसाइड किया, कि वो मदद के लिए जाएगा. जब फासला 190 किलोमीटर रह गया, तब ओलिम्पिक के पास मैसेज आया. टाइटैनिक डूब चुका है. अब आने का फायदा नहीं. RMS कार्पेथिया नाम का जहाज पहले ही वहां पहुंच चुका था.

ओलिम्पिक ने प्रस्ताव दिया कि कम से कम बचे हुए लोगों को हमें ले जाने दो. लेकिन मना कर दिया गया. पढ़ने को मिलता है कि ऐसा वाइट स्टार लाइन के मैनेजिंग डायरेक्टर जे ब्रूस इस्मे के कहने पर किया गया. क्योंकि उनकी चिंता थी कि ओलिम्पिक और टाइटैनिक एक जैसे दिखते थे. जिस जहाज को आंखों के सामने डूबते देखा हो, बिलकुल वैसे ही दिखने वाले जहाज पर दोबारा चढ़ने से लोगों को बहुत तनाव हो जाएगा. वो इससे डील नहीं कर पाएंगे.

Titanic 1912 Wiki Comm
साल 1912 में टाइटैनिक. दोनों जहाज़ों में अंतर करना मुश्किल था. टाइटैनिक ओलिम्पिक से थोड़ा सा ही बड़ा था साइज़ में. (तस्वीर: विकिमीडिया कॉमन्स)

जाको राखे साइयां, मार सके न कोय

आपने पढ़ा कि टाइटैनिक और ब्रिटैनिक, दोनों ही डूब गए थे. आपने ये भी पढ़ा कि ओलिम्पिक का बहुत ही तगड़ा एक्सीडेंट भी हुआ था HMS हॉक के साथ. लेकिन इन तीनों ही घटनाओं के समय इन तीनों जहाज़ों पर एक महिला मौजूद थी. और वो इन तीनों ही घटनाओं से बच कर निकल गई. इस महिला का नाम था वायलेट कॉन्स्टेंस जैसप. ये तीनों ही जहाज़ों पर अटेंडेंट के रोल में थीं. बचपन में टीबी हुआ था. डॉक्टर्स ने कहा था बच नहीं पाएंगी, लेकिन बच गईं. उसके बाद हॉक के साथ हुई भिड़ंत में भी सकुशल रहीं. टाइटैनिक जब डूब रहा था, तब वो भी लाइफबोट में एक बच्चे को लेकर उतरी थीं. जब ब्रिटैनिक डूबना शुरू हुआ, तब भी वो लाइफबोट में उतरीं. डूबते हुए जहाज के प्रोपेलर लाइफबोट्स को अपनी तरफ खींच रहे थे. उससे बचने के लिए वायलेट नाव से कूद गई थीं. सिर पर चोट लगी, लेकिन बच गईं. इनको ‘मिस अनसिंकेबल’ भी कहा जाता था.

Violet Jessop Wiki
वायलेट एक ट्रेंड नर्स भी थीं. इसीलिए प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जब ब्रिटैनिक को मेडिकल मदद देने वाले जहाज के रूप में चलाया गया, तो ये उस पर मौजूद थीं. (तस्वीर: विकिमीडिया कॉमन्स)

चलते-चलते

चलिए सर्कल पूरा करते हैं. आपने शुरुआत में एक मीम देखा. उसमें पढ़ा कि कैसे इस बार टाइटैनिक -2  निकला, तो किसी आइसबर्ग से नहीं टकराएगा. क्योंकि हमने सभी आइसबर्ग पिघला दिए हैं. ये भले ही मीम के तौर पर एक मजाक लग रहा हो. लेकिन असलियत में एक बहुत ही डरावनी सच्चाई है. वर्ल्ड वाइल्डलाइफ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक़, साल 2100 के पहले ही संसार के एक-तिहाई ग्लेशियर पिघल जाएंगे. बढ़ती गर्मी की वजह से ग्लेशियर्स से बर्फ टूट रही है और नए आइसबर्ग बन रहे हैं. जो और तेजी से पिघल रहे हैं. इसकी वजह से समुद्र की सतह धीरे-धीरे बढ़ रही है. अगर ये ऐसे ही जारी रहा, तो पहले टापू और उसके बाद समुद्र के पास वाले जमीनी इलाके डूबने शुरू हो जाएंगे. ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन को लेकर बड़ी बहस जारी है. लेकिन इसका कोई अंत दिखाई नहीं दे रहा.


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