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कौन है, जिसने दाऊद इब्राहिम की संपत्ति खरीदी है?

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अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम. देश का सबसे बड़ा दुश्मन. 1993 में मुंबई में हुए उस बम धमाके में उसका नाम सामने आया, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे. तब से अब तक वो किसी भी सुरक्षा एजेंसी के हाथ नहीं आ सका है. सरकारी सफलता बस इतनी सी है कि उसकी सभी संपत्तियों को सरकार ने जब्त कर लिया है और एक-एक कर उसकी नीलामी कर रही है. ऐसी ही एक नीलामी 14 नवंबर को मुंबई में भी हुई. इसमें दाऊद की जब्त की गई तीन संपत्तियों को सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट ने 11.5 करोड़ रुपये खर्च कर खरीद लिया. ट्रस्ट ने रौनक अफरोज होटल के लिए 4.53 करोड़ रुपये, डांबरवाला बिल्डिंग के लिए 3.53 करोड़ रुपये और शबनम गेस्ट हाउस को खरीदने के लिए 3.52 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

डांबरवाला बिल्डिंग (ऊपर), रौनक अफरोज (बाएं) और शबनम गेस्टहाउस को नीलाम किया गया है.
डांबरवाला बिल्डिंग (ऊपर), रौनक अफरोज (बाएं) और शबनम गेस्टहाउस को नीलाम किया गया है.

इन संपत्तियों को जिस सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट ने खरीदा है, उसका सपना मुंबई को शंघाई बनाने का है. यह ट्रस्ट खास तौर पर मुंबई के भिंडी बाजार इलाके को विकसित करने पर काम कर रहा है. ये ट्रस्ट 16.5 एकड़ में फैले इलाके में रह रहे 20,000 से ज्यादा लोगों की जिंदगी बदलने पर काम कर रहा है. भिंडी बाजार इलाके में सालों पुरानी इमारतें हैं, जिनको फिर से बनवाना है.

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2009 में महाराष्ट्र सरकार ने क्लस्टर रीडेवलपमेंट की योजना बनाई थी. 2013 तक ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में ही पड़ा रहा. 2013 में सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट ने सरकार को इस इलाके का विकास करने का प्रस्ताव दिया, जिसे सरकार ने मान लिया. अब ये ट्रस्ट 16.5 एकड़ में फैली बस्ती को 9 क्लस्टरों में बांट कर उनका विकास करने की योजना बना रहा है. इस योजना के तहत कुल 25 टावर बनाए जाने हैं, जो 15 से 60 मंजिलों के बीच होंगे. इसके अलावा इस पूरे इलाके में छोटे-बड़े करीब 1250 उद्योग-धंधे भी हैं, जिनके लिए इन टावरों में कमर्शियल स्पेस बनाया जाना है. इस ट्रस्ट ने अब तक इलाके की 85 फीसदी बिल्डिंगें खरीद ली हैं,, जिनमें से 17 बिल्डिंगों को अब तक गिराया जा चुका है और वहां काम शुरू हो चुका है. कुछ बाजार और बिल्डिंगे बनाने का काम शुरू भी हो चुका है.

बोहरा धर्मगुरु ने बनाया था ट्रस्ट

53वें बोहरा धर्मगुरु ने इस ट्रस्ट की स्थापना की थी.
52वें बोहरा धर्मगुरु डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन ने इस ट्रस्ट की स्थापना की थी.

सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, जो 2009 में बना था. इसका रजिस्टर्ड ऑफिस 47/49, रौदात ताहिरा स्ट्रीट, ग्राउंड फ्लोर, भिंडी बाजार, मुंबई है. इसे बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट ऐक्ट 1950 के तहत बनाया गया है. इसे स्थापित करने वाले थे डॉ सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन इस्लाम के शिया समुदाय के दाउदी बोहरा समुदाय के 52वें धर्मगुरु थे. गुजरात के सूरत में 1915 में जन्मे बुरहानुद्दीन 1965 में अपने पिता की मौत के बाद बोहरा धर्मगुरु बने थे. उन्होंने दुनिया भर के बोहरा लोगों को इकट्ठा करने का काम किया था. उनके सामाजिक योगदान को देखते हुए जॉर्डन सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान स्टार ऑफ़ जॉर्डन से नवाजा था. मिस्र की सरकार ने भी उन्हें ऑर्डर ऑफ़ द नाइल का खिताब दिया था. काहिरा की अल अज़हर यूनिवर्सिटी, भारत के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और पाकिस्तान के कराची विश्वविद्यालय ने डॉक्टरेट की मानद उपाधियां दी थीं.

मुंबई का सैफी अस्पताल भी इसी ट्रस्ट ने बनवाया है.
मुंबई का सैफ़ी अस्पताल भी इसी ट्रस्ट ने बनवाया है.

डॉक्टर सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन 53 सालों तक बोहरा समुदाय का प्रतिनिधित्व करते रहे थे. उन्होंने मुंबई के मरीन लाइंस में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस सैफ़ी अस्पताल बनवाया,  बोहरा छात्रों को भारत में छात्रवृत्ति देनी शुरू की, एक खास बैंक बनाया, जिसके जरिए बोहरा समाज के लोगों को कारोबार के लिए बिना ब्याज के लोन मिलता था.इसके अलावा सैयदना बुरहानुद्दीन ने मिस्र की अक़मार मस्जिद, लुलुआ मस्जिद और जूयूशी मस्जिद के साथ ही फ़ातिमी काल की कई मस्जिदों का पुनर्निर्माण करवाया.

भिंडी बाज़ार की इमारतें अब ज़र्जर हालत में हैं.
भिंडी बाज़ार की इमारतें अब ज़र्जर हालत में हैं, जिन्हें डेवलप करने का जिम्मा सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट ने लिया है.

भारत में रहते हुए उन्होंने मुंबई के भिंडी बाजार को विकसि करने का सपना देखा था. बुरहानुद्दीन का मकसद था कि भिंडी बाजार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित किया जाए. इसी के लिए उन्होंने सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट की स्थापना की थी. 2014 में उनकी मौत के बाद शहजादा अब्बास भाईसाहब फखरुद्दीन (वाइस चेयरमैन), शहदाजा डॉक्टर कैद जौहर भाईसाहब एजाजुद्दीन (चेयरमैन) और शहजादा ताहा भाईसाहब ( वाइस चेयरमैन) के सहयोग से इस ट्रस्ट को चलाने का जिम्मा डॉक्टर बुरहानुद्दीन के बेटे डॉ. साइदना मफ़दलाल सैफुद्दीन के पास आ गया. फिलहाल इस ट्रस्ट में देश-विदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों की भी हिस्सेदारी है.


वीडियो में देखें अखबार में दिखने वाली रंग-बिरंगी बिंदियों का राज

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