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कठुआ : पुलिसवाले ने कत्ल से पहले कहा था, रुको मैं भी रेप कर लूं

कठुआ में 8 साल की बच्ची से गैंगरेप और हत्या के मामले में जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच ने 9 अप्रैल 2018 को 15 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. इसी चार्जशीट के आधार पर पठानकोट की एक अदालत में सात आरोपियों में से छह को दोषी करार दिया है, जबकि एक आरोपी विशाल जंगोत्रा को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. वारदात के तीन दोषियों सांजी राम, दीपक खजूरिया और प्रवेश को हत्या और बलात्कार का दोषी पाए जाने के बाद उम्रकैद की सज़ा मिली है. वहीं तीन और लोगों आनंद दत्ता, तिलक राज और सुरेंद्र को सबूत छुपाने का दोषी पाए जाने पर पांच-पांच साल की कैद की सजा मिली है. पुलिस ने जो 15 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, उसमें 8 साल की मासूम के साथ हुई हैवानियत की दास्तां थी, जिसे पढ़कर किसी का भी कलेजा कांप जाए.

पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, इसी मंदिर के अंदर रखकर बच्ची के साथ गैंगरेप किया गया (फोटो: रॉयटर्स)
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, इसी मंदिर के अंदर रखकर बच्ची के साथ गैंगरेप किया गया (फोटो: रॉयटर्स)

चार्जशीट के मुताबिक-

बच्ची के पिता ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई. उन्होंने कहा कि उनकी आठ साल की बेटी 10 जनवरी को करीब 12.30 बजे घोड़ों के बच्चों को चराने के लिए नजदीक के जंगल गई थी. दोपहर दो बजे तक उसे जानवरों के साथ देखा गया. शाम के चार बजे घोड़े तो वापस आ गए, लेकिन वो वापस नहीं लौटी. जब पिता ने शिकायत की तो पुलिस ने केस नंबर 10/2018 के तहत आईपीसी की धारा 363 के तहत केस दर्ज कर लिया.

बकरवाल समुदाय को गांव से भगाना चाहते थे आरोपी

इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे.
इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे.

ये बच्ची बकरवाल समुदाय से ताल्लुक रखती थी, जो घुमंतू समुदाय है. ये एक मुस्लिम समुदाय है, जो कठुआ में अल्पसंख्यक है. इनका कठुआ में रहने वाले हिंदू परिवारों से अवैध स्लॉटर हाउस चलाने और फसलों को बर्बाद करने को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है. हिंदू परिवारों की ओर से कई बार इनके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई जा चुकी है, लेकिन पुलिस कोई सख्त ऐक्शन कभी नहीं ले सकी. इन दो समुदायों के बीच लंबे समय से चल रही अदावत का खामियाजा उस आठ साल की बच्ची को भुगतना पड़ा. चार्जशीट के मुताबिक कुछ हिंदू लोगों ने बकरवाल समुदाय को सबक सिखाने की ठानी और इसके लिए उस आठ साल की बच्ची को निशाना बनाया गया. सबक सिखाने की पूरी कवायद का मास्टरमाइंड रिटायर्ड राजस्व अधिकारी सांजी राम था. उसने लड़की को कई बार जंगल में आते-जाते देखा था. उसने लड़की के अपहरण, रेप और हत्या की योजना बनाई, ताकि इस घटना के बाद बकरवाल समुदाय दहशत में आ जाए और वो कठुआ छोड़कर कहीं और चला जाए.

कठुआ रेप के सात आरोपियों में से छह को दोषी पाया अदालत ने. मास्टरमाइंड सांजी राम का बेटा विशाल बरी कर दिया गया. तस्वीर में सांजी राम को अरेस्ट करके ले जा रही है पुलिस (फोटो: रॉयटर्स)
कठुआ रेप के सात आरोपियों में से छह को दोषी पाया अदालत ने. मास्टरमाइंड सांजी राम का बेटा विशाल बरी कर दिया गया. तस्वीर में सांजी राम को अरेस्ट करके ले जा रही है पुलिस (फोटो: रॉयटर्स)

इसके पीछे सांजी राम की पुरानी रंजिश भी थी. सांजी राम के नाबालिग भतीजे की बकरवाल समुदाय के लोगों ने कुछ दिन पहले पिटाई भी कर दी थी. सांजी और उनका भतीजा इसका बदला भी लेना चाहता था. इसी वजह से वो इस वारदात में शामिल हो गया. पूछताछ में उसने बताया था कि वो शराब, सिगरेट और गुटखे जैसी चीजें खाता था. इसके अलावा लड़कियों से छेड़खानी के आरोप में उसे मॉडर्न पब्लिक स्कूल हीरानगर से निकाल दिया गया था. इसके बाद उसे अपने चाचा सांजी राम के घर भेज दिया गया. जंगलों में सात-आठ बार उसकी मुलाकात उस लड़की से हुई थी. हर बार वो लड़की अपने घोड़ों की तलाश में मिली थी.

मेरठ से बुलाकर करवाया था रेप, मारने से पहले पुलिसवाले ने भी रेप किया

ये दीपक खजूरिया है, स्पेशल पुलिस ऑफिसर. अदालत ने इसे भी दोषी माना है (फोटो: रॉयटर्स)
ये दीपक खजूरिया है, स्पेशल पुलिस ऑफिसर. अदालत ने इसे भी दोषी माना है (फोटो: रॉयटर्स)

इसके लिए सांजी राम ने अपने नाबालिग भतीजे से बात की और प्लान बनाया. इसके अलावा सांजी राम ने एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजूरिया को भी अपनी प्लानिंग के बारे में बताया. 10 जनवरी की शाम को दीपक खजूरिया अपने दोस्त और स्पेशल पुलिस ऑफिसर विक्रम के साथ मिलकर बिटू मेडिकल स्टोर गया. वहां से उसने बेहोश करने वाली दवा इपिट्रिल की 10 गोलियां खरीदीं. इसी दौरान सांजी राम के भतीजे को वो लड़की जंगलों में बाहरी बालिश पेड़ के पास दिख गई. उसने अपने चाचा सांजी राम को लड़की के जंगल में होने की बात कही. लड़की जब जंगल में अपने जानवरों को खोज रही थी, तो उस नाबालिग ने लड़की से कहा कि उसके जानवर जंगल में अंदर हैं. लड़के की बातें सुनकर लड़की उसके साथ जंगल में चली गई. लड़का उसे अपने पिता के जानवर बांधने वाले शेड में ले गया. वहां उसके हाथ रुमाल से बांध दिए. इसके अलावा रस्सी से भी उसने उसके हाथ बांध दिए. इसके बाद उसने लड़की के सलवार का नाड़ा खोल दिया और उससे उसके पैर बांध दिए. उसने गर्दन पकड़कर उसे जमीन पर गिरा दिया. फिर उसकी इतनी पिटाई की कि लड़की बेहोश हो गई. इस दौरान उसका दोस्त मन्नू भी उसके साथ था. लड़की जब बेहोश हो गई, तो दोनों ने उसके साथ रेप किया. वहां रेप करने के बाद दोनों लड़की को उठाकर एक मंदिर में ले आए और वहां के देवस्थान में उसे बंद कर दिया. अगले दिन यानी 11 जनवरी को नाबालिग आरोपी ने मेरठ में अपने चचेरे भाई विशाल को फोन किया. विशाल आकांक्षा कॉलेज मीरापुर में बीएससी का छात्र था. जब विशाल को फोन पर कहा गया कि उसे एक लड़की मिली है और अगर उसे हवस बुझानी है तो वो भी आ जाए. विशाल मान गया.

इस केस के दोषियों को रणबीर पीनल कोड के तहत सजा दी गई है.
इस केस के दोषियों को रणबीर पीनल कोड के तहत सजा दी गई है.

12 जनवरी को विशाल रसना पहुंच गया. इसके बाद मन्नू, विशाल, उसका नाबालिग चचेरा भाई और दीपक खजूरिया 12 जनवरी की सुबह फिर से मंदिर पहुंचे. वहां लड़की को नशे की तीन गोलियां दी गईं, जिसके बाद लड़की बेहोश हो गई. बेहोशी के बाद एक बार फिर से उस नाबालिग, मन्नू और विशाल ने उसके साथ गैंगरेप किया. ये सिलसिला 15 जनवरी तक चलता रहा. 15 जनवरी को सांजी राम भी मंदिर पहुंचा. उसने कहा कि अब बच्ची की हत्या कर उसे ठिकाने लगाना होगा. ये कहकर सांजी राम पीछे के रास्ते से निकल गया. वहीं दीपक खजूरिया वहां मौजूद था. उसने कहा कि थोड़ा रुक जाओ, मुझे भी रेप करना है. इसके बाद दीपक खजूरिया ने भी उस नाबालिग से रेप किया. इसके बाद मारने से पहले और भी आरोपियों ने नाबालिग के साथ गैंगरेप किया.

मंदिर में गैंगरेप के बाद गला घोंटा फिर पत्थर मारकर हत्या कर दी

गैंगरेप और हत्या के विरोध में पूरा कठुआ सड़क पर आ गया था.
गैंगरेप और हत्या के विरोध में पूरा कठुआ सड़क पर आ गया था.

गैंगरेप के बाद सभी ने मिलकर बच्ची का गला घोंट दिया और फिर सर पर पत्थर मारकर उसे मार दिया. इसके बाद उसे 15 जनवरी को शव निकालकर जंगल में फेंक दिया गया. जब बच्ची का शव बरामद हो गया, तो पूरे राज्य में हंगामा हो गया. जगह-जगह पर सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. बवाल इतना बढ़ गया कि पुलिस भी दबाव में आ गई. इसे देखते हुए पुलिस की ओर से बकरवाल समुदाय से कहा गया कि सांजी राम के भतीजे को गिरफ्तार कर लिया गया है. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था. सांजी राम की ओर से हेड कॉन्सटेबल तिलक राज को डेढ़ लाख रुपये दिए गए, जो घूस की पहली किश्त थी. इसके बाद तिलक राज सांजी राम के घर पहुंचा, जहां उसे डेढ़ लाख रुपये और दिए गए. ये पैसे सब-इन्स्पेक्टर आनंद दत्ता को देने के लिए थे. इसके बाद भी दबाव बढ़ता जा रहा था. इसे देखते हुए तिलक राज फिर सांजी राम के घर पहुंचा और उसने कहा कि मामला बिगड़ गया है, इसलिए किसी एक आरोपी को तो पुलिस को सौंप दिया जाए. लेकिन सांजी राम नहीं माना. उसने फिर आनंद दत्ता के लिए पैसे भिजवाए और तिलक राज तो पहले ही खुशी से पैसे ले चुका था.

पुलिस ने लिए थे पैसे, क्राइम ब्रांच ने की गिरफ्तारी

9 अप्रैल को वकीलों ने चार्जशीट दाखिल करने का विरोध किया था और जम्मू बंद बुलाया था.
9 अप्रैल को वकीलों ने चार्जशीट दाखिल करने का विरोध किया था और जम्मू बंद बुलाया था.

जब तक केस में स्थानीय पुलिस की भूमिका थी, सांजी राम पैसे देकर आरोपियों को बचाता रहा. लेकिन 22 जनवरी को केस क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया और मामला पुलिस से आगे निकल गया. इसके बाद 23 जनवरी के आदेश से क्राइम ब्रांच के एएसपी नवीद पीरजादा के नेतृत्व में इस मामले की जांच शुरू कर दी गई. और जब चार्जशीट दाखिल की गई तो पता चला कि इस आठ साल की बच्ची से कितनी हैवानियत की गई है. आठ लोगों ने एक खास समुदाय को गांव से बाहर निकालने के लिए इस आठ साल की मासूम बच्ची को निशाना बनाया, उसके साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं गईं और फिर सारे सबूत मिटाने के लिए पुलिस को पैसे दिए गए और पुलिस ने भी राजी-खुशी ये पैसे ले लिए.

अब इस मामले में अदालत का फैसला आ गया है. सात में छह को सजा सुना दी गई है. सातवें आरोपी विशाल जंगोत्रा को कोर्ट ने बरी कर दिया है. एक नाबालिग आरोपी के खिलाफ अभी मुकदमे का ट्रायल शुरू नहीं हुआ है.


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