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कश्मीर ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण को किस तरह लिया?

“कश्मीर के अंदर जो कुछ भी होता है, बयानबाजी भी बहुत होती है. आक्षेप-प्रति-आक्षेप भी बहुत होते हैं. हर कोई एक-दूसरे को गाली देने में लगा रहता है. लेकिन भाइयों-बहनों, मैं साफ़ मानता हूं कि कश्मीर में जो कुछ भी घटनाएं घटती हैं. अलगाववादी, ये मुठ्ठीभर अलगाववादी जिस प्रकार के नए-नए पैंतरे रचते रहते हैं. लेकिन उस लड़ाई को जीतने के लिए मेरे दिमाग में विषय साफ़ है. न गाली से समस्या सुलझने वाली है, न गोली से समस्या सुलझने वाली है. समस्या सुलझेगी हर कश्मीरी को गले लगाने से.”

15 अगस्त, 2017 को लाल किले पर नरेंद्र मोदी
15 अगस्त, 2017 को लाल किले पर नरेंद्र मोदी

15 अगस्त को लाल किले से दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का यह टुकड़ा पूरे दिन चर्चा का विषय बना हुआ था. लगभग सभी अखबारों ने इस खबर को अपने मुख्यपृष्ट पर सबसे बड़े और गहरे शब्दों में छापा. कल के भाषण के बाद कोई भी अगले दिन के अखबारों की सुर्खी के बारे अंदाजा लगा सकता था. लेकिन कश्मीर में क्या हालात हैं, जिसके लिए अमन और विकास के वायदे किए जा रहे हैं.

कश्मीर के दो प्रमुख अंग्रेजी अखबारों ने भी प्रधानमंत्री के इस भाषण को मुख्य खबर के रूप में छापा है. इसके अलावा मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के ‘विश्वास’ को भी मोदी के भाषण के एकदम बगल वाले कॉलम में जगह दी गई है. स्वतंत्रता दिवस पर श्रीनगर के बख्शी मैदान से दिए गए अपने भाषण में महबूबा ने इस बात पर भरोसा जताया कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 35A को बरक़रार रखेगा. ये अनुच्छेद सूबे के लोगों की पहचान से जुड़ा हुआ है.

महबूबा मुफ्ती
महबूबा मुफ्ती

कश्मीर ऑब्जर्वर ने” कश्मीर नीड्स हग, नॉट बुलेट्स: पीएम” शीर्षक से मोदी के भाषण को छापा है. वहीं ग्रेटर कश्मीर ने “Bullets won’t solve Kashmir, embracing Kashmiris will: PM” शीर्षक से यह खबर छापी है.

श्रीनगर की जामा मस्जिद के मीरवाइज़ और अलगावादी नेता उमर फारूख ने अपन ट्विटर हैंडल पर नरेंद्र मोदी की पहल का स्वागत करते हुए लिखा कि नरेंद्र मोदी भी मनाते हैं कि गाली और गोली से कश्मीर का मुद्दा हल नहीं हो सकता है. अगर इंसानियत और इंसाफ इनकी जगह ले लें तो यह मामला हल हो सकता है.

वहीं सूबे में विपक्ष के नेता उमर उब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री के भाषण का स्वागत करते हुए थोड कदम उठाने की हिदायत दी. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि मोदी के कश्मीर के बारे में बोले गए शब्दों यहां के लोगों तक ठीक तरीके से पहुंचे है, लेकिन लोगों में इस बात की चिंता है कि अब तक बातें ही हुई हैं. कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया है.

abdullah

क्या गले लगाना काफी है ?

सियासी बयानबाजी अपनी जगह है, लेकिन कश्मीर ने सच में प्रधानमंत्री के भाषण को किस तरह लिया? इसका जवाब हमें कश्मीर ऑब्जर्वर के तीसरे पन्ने पर मिलता है. जिस समय प्रधानमंत्री मोदी लाल किले की प्राचीर से कश्मीरियों को गले लगाने की बात कह रहे थे, ठीक उसी समय कश्मीर यूनिवर्सिटी के ऊपर एक हेलिकॉप्टर चक्कर काट रहा था.

श्रीनगर के डाउन टाउन इलाके से निकलने वाली हर सड़क पर सीआरपीएफ के जवान मुस्तैदी से डटे हुए थे. सडकों पर कंटीले तार बिछाए गए थे. शहर की सड़कें खाली थीं. 30 हजार लोगों की मेहमाननवाजी करने की हैसियत रखने वाले बक्शी स्टेडियम तक पहुंचने वाली हर सड़क पर बैरिकेड लगाए गए थे. अलगाववादी नेता इस दिन को ‘ब्लैक डे’ के तौर पर मनाने का ऐलान कर चुके थे. श्रीनगर के अलावा पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, अनंतनाग, कुपवाड़ा, बारामूला, बडगाम और गांदरबल जिलों की सड़कों पर एक भी आदमी ऐसा नहीं था, जो देश की आजादी का जश्न मना सके.

कश्मीर ऑब्जर्वर में छपी खबर
कश्मीर ऑब्जर्वर में छपी खबर

सुबह 8 से दोपहर 1 बजे तक सूबे में इंटरनेट सेवाएं रोक दी गई थीं. बीजेपी के 200 के करीब कार्यकर्ताओं को लाल चौक पर तिरंगा फहराने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था. एक बजे जब CRPF डाउन टाउन की नाकेबंदी खत्म करके बैरक की तरफ लौट रही थी, तब वो प्रदर्शनकारियों के हमले का शिकार हो गई. नूरबाग़, कमरवाड़ी, सेकीदरफ, राजौरी कदल सहित कई इलाकों में सुरक्षा बालों पर पथराव की रवायत को दोहराया गया. पम्पोर के वायुं बाला गांव में भी तनाव का माहौल था. यहां के लोग इस बात से खफा थे कि किसी ने गांव की मस्जिद की दीवार तिरंगे रंग से पोत दी थी.

अनंतनाग में हिजबुल कमांडर इत्तू की अंतिम यात्रा
अनंतनाग में हिजबुल कमांडर इत्तू की अंतिम यात्रा

वैसे इस बार तनाव केंद्र डाउन टाउन नहीं, अनंतनाग था. 13 अगस्त को सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिद्दीन के ऑपरेशनल कमांडर यासीन इत्तू और उसके दो साथियों को मार गिराया गया था. इस मुठभेड़ में सेना के दो जवान भी शहीद हुए थे. स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस मुठभेड़ में हेफ शीरमाल गांव के सैय्यद शेख नाम का नौजवान गोली का शिकार हो गया. गोली उसके पेट में लगी थी और शाम तक उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया. इस खबर से गुस्साए कुछ नौजवानों ने सुरक्षाबलों पर पथराव कर दिया. इस दौरान 17 साल का ओवैस शफी डार पैलेट गन की चपेट में आ गया और उसने भी दम तोड़ दिया. 14 अगस्त की सुबह दोनों स्थानीय लड़कों को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया. इस मौके पर हजारों की तादाद में लोग मौजूद थे.

नरेंद्र मोदी कश्मीरियों को गले लगाने की पहल कर रहे हैं. पिछले एक साल में कश्मीर की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. कई मायनों में ये 1991 से बद्तर हो गई है. मोदी कश्मीर के मामले में अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को संभालने में पूरी तरह से नाकाम रहे हैं. ऊपर से संविधान के अनुच्छेद 35A पर लटक रही तलवार ने कश्मीर के लोगों के मन में भारत के प्रति संदेश को और गहरा किया है. संविधान का ये अनुच्छेद कश्मीर की विधानसभा को कश्मीर की स्थाई नागरिकता को परिभाषित करने का अख्तियार देता है.

मुफ्ती मोहम्मद सईद के साथ अटल बिहारी वाजपेयी
मुफ्ती मोहम्मद सईद के साथ अटल बिहारी वाजपेयी

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती का कहना है कि ये अनुच्छेद कश्मीर की पहचान से जुड़ा हुआ है. अगर इसे हटाया गया, तो कश्मीर में शांति की प्रक्रिया पूरी तरह से पटरी से उतर जाएगी. अलगाववादी लगातार ये आरोप लगाते आए हैं कि सरकार कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के नाम पर सूबे की डेमोग्राफी को बदलना चाहती है. इसी साल जनवरी में केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए आठ अलग-अलग जगहों पर 100 जमीन सुरक्षित कर ली गई है. इसके अलावा 6 हजार सरकारी नौकरियां भी कश्मीरी पंडितों के लिए आरक्षित की गई हैं.

हालांकि, ये पुनर्वास कार्यक्रम अब तक कोई ख़ास असर नहीं छोड़ पाया है, लेकिन अलगाववादी सरकार के इस कार्यक्रम को हथियार बनाकर शक की स्थिति पैदा करने में काफी हद तक कामयाब हो गए थे. ऐसे में आर्टिकल 35A पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को कश्मीर में संदेश की दृष्टि से देखा जा रहा है. अलगाववादी आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार ज्यादा से ज्यादा गैर-कश्मीरियों को बसाकर संख्याबल अपने पक्ष में करने की साजिश में लगी हुई है.

pandit

मौजूदा सूरतेहाल में प्रधानमंत्री के भाषण को सुखद संकेत तो कहा जा सकता है, लेकिन राह अभी लंबी है. कश्मीरियों को गले लगाने भर से उनका भारत पर भरोसा कायम नहीं हो जाएगा. इसे कायम करने के लिए बहुत धैर्य के साथ इस मामले में पर लगतार काम करने की जरूरत है.


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