Submit your post

रोजाना लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

Follow Us

क्या कर्नाटक में राज्यपाल वजुभाई ने देवेगौड़ा से पुराना वाला बदला ले लिया है?

2.09 K
शेयर्स

ये साल था 1995. सितंबर की 28 तारीख. भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी दिल्ली से अहमदाबाद पहुंचे थे. कोई रैली करने नहीं बल्कि बीजेपी में हो चुकी टूट को मैनेज करने. गुजरात के मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के खिलाफ उनके ही एक चेले शंकरसिंह वाघेला ने बगावत कर दी थी. वो 47 विधायकों को लेकर मध्यप्रदेश के खजुराहो चले गए थे. इस बगावत के बाद केशुभाई तो को हटना पड़ा लेकिन वाघेला भी मुख्यमंत्री नहीं बन सके और सुरेश मेहता को नया सीएम बनाया गया.

गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री सुरेश मेहता.
गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री सुरेश मेहता.

बीजेपी में हुई इस बगावत के बाद वहां के संगठन में भी बदलाव हुआ और वजुभाई वाला को नया प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया. वही वजुभाई वाला जो आज कर्नाटक के राज्यपाल हैं और कर्नाटक विधानसभा चुनाव-2018 में उनका नाम बहुत चर्चा में हैं. क्योंकि सरकार बनने में गवर्नर का रोल बहुत मायने रखता है.

ख़ैर, तो वजुभाई वाला 1985 से राजकोट-2 विधानसभा सीट से विधायक थे. भाजपा को गुटबाजी से निकालने की जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर थी. 1995 में बीजेपी पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ गुजरात विधानसभा पहुंची थी. उसने 182 में से 121 सीटें जीती थी. ऐसे में पार्टी गुजरात की सत्ता को इतनी आसानी से हाथों से नहीं जाने देना चाहती थी.

राज्य की सत्ता पर काबिज न हो सकने के बाद वाघेला ने केंद्र की राजनीति की ओर कदम बढ़ाया. उन्होंने 1996 में गोधरा से लोकसभा चुनाव लड़ा. लेकिन वो जीत नहीं सके. केंद्र में जाने की संभावना खत्म हो गई तो वाघेला गुजरात में फिर सक्रिय हो गए.

शंकर सिंह वाघेला.
भाजपा से बागी हो गए थे शंकर सिंह वाघेला.

वाघेला ने फिर बगावत कर दी. 18 अगस्त, 1996 को 46 विधायकों को लेकर राज्यपाल कृष्ण सिंह के पास चले गए. कहा कि सरकार से अलग हो रहे हैं. बीजेपी ज्यादा तोड़-फोड़ नहीं होने देना चाहती थी. बीजेपी अध्यक्ष वजुभाई वाला ने तुरंत विधायक दल की बैठक बुलाई. इस बैठक में तय हुआ कि विधानसभा का सत्र 18 सितंबर की जगह 15 दिन पहले 3 सितंबर को बुलाया जाएगा.

लेकिन वाघेला खेमे में भी टूट हुई और 18 विधायक पार्टी की तरफ वापस आ गए. ऐसे में बहुमत साबित करने से पहले उहापोह की स्थिति बन गई. 19 सितंबर को सुरेश मेहता को बहुमत साबित करने को कहा गया.

एचडी देवेगौड़ा
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा.

प्रदेशाध्यक्ष वजुभाई वाला और मुख्यमंत्री सुरेश मेहता दोनों सरकार को बचाने की बहुत कोशिश कर रहे थे. लेकिन इसी बीच 18 सितंबर 1996 को गुजरात के राज्यपाल की एक चिट्ठी, प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के पास पहुंची. चिट्ठी में राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की गई थी. अगली सुबह देवेगौड़ा ने केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग बुलाई और राष्ट्रपति शासन की सिफारिश मंजूर कर राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा के पास दस्तखत के लिए भेज दी गई.

इधर विधानसभा की कार्यवाही शुरू हो गई. विधानसभा में भारी हंगामा हुआ. विधायकों में आपस में मारपीट तक हुई. कांग्रेस और भाजपा के कुछ विधायक वॉक आउट कर गए. लेकिन सदन की कार्यवाही स्थगित नहीं हुई. वोटिंग हुई और अविश्वास प्रस्ताव 92 के मुकाबले 0 वोट से गिर गया. सुरेश मेहता ने सदन में विश्वास मत हासिल कर लिया.

लेकिन असली खेल तो अभी बाकी था. शंकर दयाल शर्मा का राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का आदेश राजभवन में गवर्नर के पास पहुंच चुका था. उन्होंने सूबे में राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर दी.

तत्कालीन राज्यपाल केपी सिंह
तत्कालीन राज्यपाल केपी सिंह.

सुरेश मेहता, वजुभाई वाला सभी विधायकों को लेकर राजभवन पहुंचे. और विश्वास मत होने की बात कही. लेकिन तब तक राष्ट्रपति शासन की घोषणा हो चुकी थी.

वजुभाई वाला और सुरेश मेहता ने राज्यपाल से निवेदन किया लेकिन फैसला नहीं पलटा जा सका. सुरेश मेहता को पद छोड़ना पड़ा. राज्य के बीजेपी अध्यक्ष वजुभाई वाला की पार्टी बहुमत होते हुए भी देवेगौड़ा कैबिनेट की सिफारिश के आगे कुछ नहीं कर पाई.

कर्नाटक के राज्यपाल वजभाई वाला.
कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला.

1998 में बीजेपी की सरकार वापस आई. वजुभाई वाला फिर से विधायक बने. 2001 में नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री बने. लेकिन तब वो विधायक नहीं थे. नरेंद्र मोदी के लिए अपनी सीट खाली की थी वजुभाई वाला ने.

इसके बाद वजुभाई वाला 2012 तक मोदी की सरकार में वित्त मंत्री रहे. 23 जनवरी, 2012 से 1 सितंबर, 2014 तक विधानसभा के स्पीकर रहे. फिर मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें कर्नाटक का राज्यपाल बना दिया.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 के बाद 1996 की कहानी फिर से याद आ गई. क्योंकि 1996 की गुजरात की इस कहानी के दो बड़े किरदार देवेगौड़ा और वजुभाई वाला कर्नाटक की राजनीति में आज खड़े हैं.

फैसला राज्यपाल को करना है येदियुरप्पा या कुमारस्वामी.
फैसला राज्यपाल को करना है येदियुरप्पा या कुमारस्वामी.

लेकिन इस बार बॉस देवेगौड़ा नहीं वजुभाई वाला हैं. इस बार कहानी ये है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिला है. कांग्रेस-जेडीएस मिलकर देवेगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी के नेतृत्व में सरकार बनाना चाहते हैं. दोनों पार्टियां मिलकर बहुमत होने की बात कर रही हैं. इधर बीजेपी भी येदियुरप्पा के नेतृत्व में सरकार बनाने का न्यौता चाह रही है.

लेकिन गेंद अब पूरी तरह कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला के पाले में थी. निर्णय उनको करना था कि वो येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता देंगे या देवेगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी को.

देवेगौड़ा ने सुरेश मेहता को बहुमत होने के बावजूद हटा दिया था. और उस समय के बीजेपी अध्यक्ष वजुभाई वाला कुछ न कर सके थे. अब कुमारस्वामी ने 117 विधायकों के समर्थन की चिठ्ठी वजुभाई वाला को सौंप दी थी. लेकिन उन्होंने ठीक उसी तरह बहुमत को न चुनते हुए बीजेपी के येदियुरप्पा को शपथ लेने के लिए आमंत्रित कर दिया है. और तो और येदियुरप्पा ने बहुमत साबित करने के लिए अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिर्फ 48 घंटे का समय मांगा था, लेकिन राज्यपाल वजुभाई ने उनको 15 दिन का लंबा समय दे दिया है.

सोशल मीडिया पर वजुभाई और देवेगौड़ा की ये कहानी फैलने लगी है और लोग कह रहे हैं कि वजुभाई ने 22 साल पुराना बदला पूरा कर लिया है.


Also Read:

जब एक रहस्यमयी ज्योतिषी ने कुमारस्वामी से कहा – ‘तुम्हारे मुख्यमंत्री बनने का ये सबसे सही समय है’

कर्नाटक के मुख्यमंत्री: एच डी देवेगौड़ा – जिन्हें एक नाटकीय घटनाक्रम ने देश का प्रधानमंत्री बनाया

18वीं सदी का राजा टीपू सुल्तान क्यों 2018 के चुनाव में बन गया मुद्दा?

वो छह सीटें जहां कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे चार नेताओं की इज़्ज़त दांव पर लगी है

कांग्रेस के इस दलित नेता की मुख्यमंत्री बनने की हसरत फिर अधूरी रह गई!

कर्नाटक के मुख्यमंत्री: धरम सिंह – जिनको इंदिरा गांधी ने 1 लाख वोटों से जीती सीट छोड़ने को कहा

इस केस में इंदिरा गांधी जीत जातीं, तो शायद भारत पर हमेशा के लिए कांग्रेस का राज हो जाता!

Video: कर्नाटक में अभी क्या नाटक चल रहा है?

 

लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
Karnataka Election: Interesting story of Devegowda and Karnataka governer Vajubhai Vala

कौन हो तुम

कोहिनूर वापस चाहते हो, लेकिन इसके बारे में जानते कितना हो?

आओ, ज्ञान चेक करने वाला खेल खेलते हैं.

कितनी 'प्यास' है, ये गुरु दत्त पर क्विज़ खेलकर बताओ

भारतीय सिनेमा के दिग्गज फिल्ममेकर्स में गिने जाते हैं गुरु दत्त.

इंडियन एयरफोर्स को कितना जानते हैं आप, चेक कीजिए

जो अपने आप को ज्यादा देशभक्त समझते हैं, वो तो जरूर ही खेलें.

इन्हीं सवालों के जवाब देकर बिनिता बनी थीं इस साल केबीसी की पहली करोड़पति

क्विज़ खेलकर चेक करिए आप कित्ते कमा पाते!

सच्चे क्रिकेट प्रेमी देखते ही ये क्विज़ खेलने लगें

पहले मैच में रिकॉर्ड बनाने वालों के बारे में बूझो तो जानें.

कंट्रोवर्शियल पेंटर एम एफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एम.एफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद तो गूगल कर आपने खूब समझ लिया. अब जरा यहां कलाकारी दिखाइए

KBC क्विज़: इन 15 सवालों का जवाब देकर बना था पहला करोड़पति, तुम भी खेलकर देखो

अगर सारे जवाब सही दिए तो खुद को करोड़पति मान सकते हो बिंदास!

राजेश खन्ना ने किस हीरो के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीता था?

राजेश खन्ना के कितने बड़े फैन हो, ये क्विज खेलो तो पता चलेगा.

QUIZ: आएगा मजा अब सवालात का, प्रियंका चोपड़ा से मुलाकात का

प्रियंका की पहली हिंदी फिल्म कौन सी थी?

कौन है जो राहुल गांधी से जुड़े हर सवाल का जवाब जानता है?

क्विज है राहुल गांधी पर. आगे कुछ न बताएंगे. खेलो तो बताएं.